बिहार की दुलारी देवी जिन्हें मिथिला पेंटिंग के लिए मिला पद्मश्री

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बिहार की दुलारी देवी को मिथिला पेंटिंग में पद्मश्री मिला है.मछुआरा समुदाय से आने वाली दुलारी को मिला ये सम्मान महत्वपूर्ण है.

दुलारी बिहार के मधुबनी के रांटी गांव की है. उन्हें प्यार से गांव वाले 'दुला' कहते हैं. रांटी से पद्मश्री पाने वाली दुलारी तीसरी महिला हैं. इससे पहले गांव की महासुंदरी देवी और गोदावरी दत्ता को पद्मश्री मिल चुका है. बिहार से मिथिला कला मे ये सातवां पद्म पुरस्कार है.

12 साल की उम्र में दुलारी की जगदेव मुखिया से शादी हुई लेकिन 6 महीने की अपनी बेटी की मौत और ससुराल वालों के तानों से परेशान दुलारी दो साल मे ही रांटी वापस लौट आयी. उन्होंने मिथिला कलाकार महासुंदरी देवी के यहां 6 रुपये में घरेलू कामगार के तौर पर काम करना शुरू किया.

जिसके बाद वो महासुंदरी देवी की देवरानी कर्पूरी देवी के संपर्क में आयी, जिन्होंने उन्हें मिथिला कला सिखाई.

दुलारी की खासियत है कि वो धार्मिक आख्यानों से इतर मिथिला कला में अपने आस पास के जीवन को चित्रित करती हैं. मिथिला पेंटिंग बिहार के मधुबनी, दरभंगा सहित कई जिलों के अलावा नेपाल के कुछ इलाकों की लोक कला है.

वीडियो: सीटू तिवारी, बीबीसी के लिए

एडिटिंग: मनीष जालुई

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