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नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंग्रेज़ों की आंखों में धूल झोंककर कैसे भागे थे?
1940 में जब हिटलर के बमवर्षक लंदन पर बम गिरा रहे थे, ब्रिटिश सरकार ने अपने सबसे बड़े दुश्मन सुभाष चंद्र बोस को कलकत्ता की प्रेसिडेंसी जेल में कैद कर रखा था.
अंग्रेज़ सरकार ने बोस को 2 जुलाई, 1940 को देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया था. 29 नवंबर, 1940 को सुभाष चंद्र बोस ने जेल में अपनी गिरफ़्तारी के विरोध में भूख हड़ताल शुरू कर दी थी.
एक सप्ताह बाद 5 दिसंबर को गवर्नर जॉन हरबर्ट ने एक एंबुलेंस में बोस को उनके घर भिजवा दिया ताकि अंग्रेज़ सरकार पर ये आरोप न लगे कि उनकी जेल में बोस की मौत हुई है.
बंगाल की सरकार ने उनके घर के बाहर कठोर पहरा बिठा दिया और अपने कुछ जासूस भी छोड़ दिए ताकि घर के अंदर क्या हो रहा है, यह पता चल सके?
बावजूद इसके, 1941 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पहले पेशावर (जो अब पाकिस्तान में है), फिर अफ़ग़ानिस्तान और फिर यूरोप भागने में सफल हो गए थे. नेताजी की 124वीं वर्षगांठ पर रेहान फ़ज़ल ब्योरा दे रहे हैं इस घटना का विवेचना में.
वीडियो: काशिफ़ सिद्दीक़ी
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