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लाल बहादुर शास्त्री के जीवन के अंतिम पलों की कहानी
ये भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की आवाज़ है. जिन्होंने 1965 में पाकिस्तान से युद्ध में भारत को कुशल नेतृत्व दिया. युद्ध के तुरंत बाद रामलीला मैदान से उन्होंने पाकिस्तानी मंसूबों पर तंज़ कसा था. साल 1966 में उन्होंने पाकिस्तानी राष्ट्रपति जनरल अयूब ख़ान के साथ शांति समझौता करने के लिए ताशकंद का दौरा किया था.
भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता सोवियत संघ ने संभाली थी. 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में भारत और पाकिस्तान ने एक समझौते पर दस्तख़त किए और 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में ही शास्त्री का निधन हो गया. इस पूरे घटनाक्रम के समय वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ताशकंद में मौजूद थे. साल 2018 में नैयर का निधन हुआ.
जब शास्त्री के शव को दिल्ली लाने के लिए ताशकंद हवाईअड्डे पर ले जाया जा रहा था तो रास्ते में हर सोवियत, भारतीय और पाकिस्तानी झंडा झुका हुआ था. लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री अपने पिता को कैसे याद करते हैं?
वीडियो सौजन्य: ब्रिटिश पाथे
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