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कोरोना वायरस के लिए चमगादड़ों को दोष देना कितना सही?
जिम्बाब्वे के इस हिस्से में लोग चमगादड़ को पंखों वाला ड्रैगन, उड़ने वाला चूहा या फिर बुराई के प्रतीक के तौर पर देखते हैं. दुनिया के किसी भी दूसरे हिस्से की तरह यहाँ पर भी इस उड़ने वाले स्तनपायी जीव को लेकर कई तरह की भ्रांतियाँ हैं. लेकिन इकोलॉजिस्ट डॉक्टर मैथ्यू के लिए वे एक खूबसूरत और अद्भुत जीव है.
डॉक्टर मैथ्यू का कहना है, "वे आकर्षक हैं. लोग उस चीज से डरते हैं जिसके बारे में जानते नहीं हैं."
वो फ्रेंच रिसर्च इंस्टीट्यूट सीराड में वायरस के ऊपर शोध करते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिम्बाब्वे में अपनी सहकर्मियों के साथ काम करते हुए वह चमगादड़ों के गुफा में जाते हैं और वहाँ से सैम्पल इकट्ठा करते हैं.
लैब में वैज्ञानिक उस सैम्पल को लाकर चमगादड़ से जुड़े वायरसों का अध्ययन करते हैं. वैज्ञानिकों ने अब तक एक ही परिवार के कई अलग-अलग कोरोना वायरस की खोज की है. मसलन सार्स और कोविड-19 जैसे वायरस.
यह शोध दुनिया भर में चलने वाली उस खोज का हिस्सा है जो चमगादड़ से फैलने वाले वायरस के आनुवांशिक बनावट और उनकी विविधता को पता लगाने के लिए हो रही है. ताकि ऐहतियात के तौर पर समय रहते उस पर तत्काल कोई कदम उठाया जा सके.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ जिम्बाब्वे की डॉक्टर एलिज़ाबेथ गोरी कहती हैं, "स्थानीय आबादी अक्सर इन चमगादड़ों के रहने वाली जगह पर जाती रहती हैं. वो वहाँ से गुआनो (एक तरह की खाद) इकट्ठा कर ले आती है और उसका अपने खेतों में उपज बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करती है. इसलिए भी जरूरी हो जाता है यह जानना कि आख़िर किस तरह के विषाणु चमगादड़ से इंसानों में आ सकते हैं."
स्टोरी: हेलेन ब्रिग्स
आवाज़: गुरप्रीत सैनी
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