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भोलू पहलवानों को भारत क्यों नहीं आने दिया था?
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची के एक भीड़ भाड़ वाले क्षेत्र, पाकिस्तान चौक में स्थित मशहूर अखाड़ा 'दारुल सेहत' के पास से गुज़रने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए अखाड़े को देखे बिना गुज़रना असंभव था.
बल्कि अक्सर ऐसा होता था कि शाम के समय बड़ी संख्या में लोग वहां इकट्ठा होते थे और युवा पहलवानों को कसरत करते हुए देखते थे.
इन युवाओं में आकर्षण का केंद्र वो शक्तिशाली पहलवान होते थे, जिनका संबंध प्रसिद्ध भोलू पहलवान परिवार से था. दारुल सेहत को सब 'भोलू का अखाड़ा' के नाम से जानते थे.
इस अखाड़े में, इस परिवार के सभी पहलवान हर दिन एक दूसरे के साथ कुश्ती करते दिखाई पड़ते थे.
इस अखाड़े की भूमि पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाक़त अली ख़ान ने भोलू पहलवान के परिवार को दान दी थी.
भोलू का ये अखाड़ा अभी भी मौजूद है. जहां युवा बॉडी बिल्डिंग और तरह-तरह की वर्ज़िश करने आते हैं, और सुबह सवेरे कुछ कुश्तियां भी होती हैं.
देखिए पाकिस्तान के मशहूर भोलू पहलवानों के परिवार की कहानी.
स्टोरीः अब्दुल रशीद शकूर, बीबीसी उर्दू
आवाज़ः नवीन नेगी
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