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अर्दोआन सरकार तुर्की के इस स्वर्णिम इतिहास को दोहराने की कोशिश में
अगर आप अभी नक़्शे पर मध्य-पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र और मध्य एशिया के इलाकों को देखे तो संभव है कि आप इन इलाकों में लगभग सभी संघर्ष वाले क्षेत्रों में तुर्की की मौजूदगी देखकर हैरान हो जाए.
कुछ साल पहले तक तुर्की का दावा था कि उसका अपने 'पड़ोसियों के साथ बिल्कुल भी किसी तरह का तनावपूर्ण रिश्ता नहीं' है. लेकिन आज की तारीख में सीरिया, लीबिया और नागोर्नो-काराबाख जैसे संघर्ष वाले क्षेत्रों में उसकी मौजूदगी दिखती है.
सीरिया और उसके अपने क्षेत्रों में वो कुर्दों के साथ संघर्ष करते हुए दिख रहा है तो वहीं वो साइप्रस को लेकर एथेंस के साथ भिड़ा हुआ है. भूमध्यसागर के इलाके में वो दूसरे देशों के साथ ऊर्जा संसाधनों को लेकर टकराव की स्थिति में है. उसी तरह से रूस, अमरीका, इसराइल, यूरोपीय संघ और नैटो के साथ भी तुर्की का तनाव बढ़ता जा रहा है.
600 सालों तक उस्मानिया सल्तनत दक्षिण पूर्व यूरोप से लेकर वर्तमान के ऑस्ट्रिया, हंगरी, बाल्कान, ग्रीस, यूक्रेन, इराक़, सीरिया, इसराइल, फ़लस्तीन और मिस्र तक फैला हुआ था.
16वीं और 17वीं सदी के बीच इसके प्रभाव में और इजाफा हुआ था. इसका प्रभाव उत्तरी अफ्रीका के अल्जीरिया से लेकर अरब तक था. 2002 से तुर्की की सत्ता पर काबिज़ रेचेप तैय्यप अर्दोआन सरकार ने अपने इस स्वर्णिम इतिहास के मद्देनज़र एक महत्वकांक्षी विदेश नीति को अख्तियार कर रखा है.
स्टोरी: मारियानो एगुरी, बीबीसी मुंडो के लिए
आवाज़: भरत शर्मा
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