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देश को धोखा देकर अमरीका भागने वाले रॉ जासूस की कहानी
बात अप्रैल, 2004 की है. रॉ के दफ़्तर के मुख्यद्वार पर ऑफ़िस समाप्त होने के बाद घर जाने वालों की लंबी लाइन लगी हुई थी. जब इसका कारण पूछा गया तो पता चला कि हर कर्मचारी के ब्रीफ़केस की तलाशी ली जा रही है.
रॉ के 35 वर्ष के इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. रक्षा संस्थानों और सेना मुख्यालय में गाहे-बगाहे एक दो महीने के अंतराल पर इस तरह की तलाशी ज़रूर ली जाती थी.
विवेचना में रेहान फ़ज़ल नज़र डाल रहे हैं रॉ के डबल एजेंट रबिंदर सिंह की ज़िंदगी पर.
वीडियो: काशिफ़ सिद्दीक़ी
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