You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कोरोना वायरस: फ़ेस मास्क ज़रूरत के साथ ख़तरा भी बने
कोरोना वायरस के महामारी बनने के साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही मास्क पहनने को ज़रूरी बताया था. कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए ज़्यादातर देशों में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है लेकिन अब इन मास्क की ही वजह से प्रदूषण का ख़तरा भी बढ़ गया है.
कई देशों की सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे डिस्पोज़ेबल मास्क की जगह ज़्यादा से ज़्यादा री-यूज़ेबल मास्क का इस्तेमाल करें. ब्रिटेन के लिबरल डेमोक्रेट्स का कहना है कि सिंगल यूज़ सर्जिकल मास्क के कारण भारी मात्रा में 'प्लास्टिक-वेस्ट' पैदा हो रहा है जो पर्यावरण के लिहाज़ से ख़तरनाक है और ऐसे में हमें उन विकल्पों को तलाशने की ज़रूरत है जो पर्यावरण के अनुकूल हों.
डिस्पोज़ेबल मास्क में प्लास्टिक होता है जो जल प्रदूषण को बढ़ाता है और साथ ही वन्यजीवन को भी नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार लोग मास्क को इस्तेमाल के बाद इधर-उधर फेंक देते हैं और जीव-जन्तु इसे खा लेते हैं, जोकि चिंता की बात है. ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि इस बात की पड़ताल की जा रही थी कि क्या पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) को दोबारा से इस्तेमाल किया जा सकता है.
स्टोरी: जस्टिन पार्किंसन
आवाज़: भूमिका राय
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)