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कमलादेवी चट्टोपाध्याय: जिन्होंने औरतों की राजनीतिक राह खोली
कमलादेवी चट्टोपाध्याय भारत में प्रांतीय विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली महिला बनीं और महात्मा गांधी को नमक सत्याग्रह में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए मनाया.
उन्होंने आयरलैंड की महिलावादी नेता मार्ग्रेट कजन्स के प्रोत्साहन से चुनाव लड़ा लेकिन वो बहुत कम मतों से हार गईं. हालांकि इस क़दम से महिलाओं के लिए राजनीतिक की राह खुल गई.
उन्होंने आज़ादी के बाद भारतीय दस्तकारी परंपराएं स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई. कमलादेवी ने यह काम सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज़ एंपोरियम और क्राफ़्टस काउंसिल ऑफ इंडिया का गठन करके किया.
भारतीय नाट्य परंपरा और दूसरे परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स को बढ़ाने के लिए कमलादेवी ने इंडियन नेशनल थिएटर की स्थापना की. यही संस्थान आगे चलकर भारत का प्रसिद्ध नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा बना.
कमलादेवी की कोशिशों से संगीत नाटक अकादमी की स्थापना हुई, जो भारतीय गायन एवं नृत्य परंपराओं को आगे बढ़ाने वाला अग्रणी संस्थान है.
कमलादेवी को भारत के उच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. इसके अलावा कमलादेवी को रेमन मैगसेसे पुरस्कार भी मिल चुका है.
बीबीसी हिंदी दस ऐसी महिलाओं की कहानी ला रहा है जिन्होंने लोकतंत्र की नींव मज़बूत की इसकी छठीं कड़ी में देखिए अन्ना चांडी कहानी.
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