भारतीय सेना और सरकार के रिश्ते कब-कब मुश्किल दौर से गुज़रे
अभी भी ये सवाल अक्सर पूछा जाता है कि एक विकासशील देश कैसे एक ऐसी सेना का निर्माण करे जिससे लोकतंत्र को कोई ख़तरा न हो? क्या असैनिक सरकार सेना पर नियंत्रण रखते हुए उसकी प्रभावशीलता को उच्चतम सीमा तक पहुंचा सकती है?
इसको भारतीय लोकतंत्र की एक सफलता माना जाएगा कि दस लाख से भी अधिक बड़ी सेना होने, कई युद्धों में भाग लेने और कई आंतरिक मोर्चों पर इस्तेमाल किए जाने के बावजूद सेना ने ज़ाहिरी तौर पर कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा दिखाने से परहेज़ किया है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि सरकार और सेना के संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण रहे हैं.
विवेचना में रेहान फ़ज़ल बता रहे हैं सरकार और सेना के बीच विवादों का कहानी.
वीडियो: काशिफ़ सिद्दीक़ी
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