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रुक़ैया सख़ावत के लिए लड़कियाँ बोलती हैं, 'वो न होतीं तो हम न होते'
बीबीसी हिंदी 10 ऐसी महिलाओं की कहानी ला रहा है, जिन्होंने लोकतंत्र की नींव मज़बूत की. उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को अपनी आवाज़ दी. वे समाज सुधारक थीं और कई महत्वपूर्ण पदों पर पहुँचने वाली वे पहली महिला बनीं.
रुक़ैया सख़ावत हुसैन एक नारीवादी विचारक, कथाकार, उपन्यासकार और कवि थीं. उन्होंने कई रचनाएँ लिखीं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है सुल्तानाज़ ड्रीम्स. उनके एक लेख 'स्त्री जातिर अबोनति' ने उस ज़माने में काफ़ी हलचल पैदा कर दी थी.
रुक़ैया हुसैन ने मुसलमान महिलाओं के लिए कई संगठन भी खोले. उन्होंने बंगाल में मुसलमान लड़कियों की पढ़ाई के लिए मुहिम चलाई और लोगों के विरोध के बावजूद स्कूल खोले. सख़ावत मेमोरियल गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल आज भी कोलकाता में चल रहा है. आज भी वहाँ मुसलमान लड़कियाँ ये कहती हैं कि 'अगर वो न होतीं तो हम भी न होते.'
बीबीसी हिंदी 10 ऐसी महिलाओं की कहानी ला रहा है जिन्होंने लोकतंत्र की नींव मज़बूत की. उसकी पहली कड़ी में देखिए तमिलनाडु से आने वाली डॉ मुथुलक्ष्मी रेड्डी की कहानी.
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