अररिया रेप पीड़िता के संघर्ष की कहानी
भारत में यौन हिंसा को लेकर मज़बूत क़ानून हैं, लेकिन क्या क़ानून की किताब में जो लिखा है, वो ज़मीनी हक़ीक़त है?
एक रेप सर्वाइवर को क़ानून व्यवस्था, समाज और प्रशासन कितना भरोसा दिला पाते हैं कि ये न्याय की लड़ाई उसकी अकेली की लड़ाई नहीं है.
थाना, कचहरी और समाज में उसका अनुभव कैसा होता है?
बिहार के अररिया में एक रेप सर्वाइवर और उसकी दो दोस्तों को सरकारी काम काज में बाधा डालने के आरोप में जेल भेज दिया गया.
ये तब हुआ जब कचहरी में जज के सामने बयान दर्ज किया जा रहा था.
इस सनसनीख़ेज़ मामले में रेप सर्वाइवर को तो 10 दिनों के बाद बेल मिल गई, लेकिन दो लोग, जो इस लड़की की मदद कर रहे थे, जिनके घर रेप सर्वाइवर काम करती है, तन्मय और कल्याणी- वे अब भी जेल में ही हैं.
बीबीसी से बातचीत में जेल से रिहा होने के बाद पहली बार रेप सर्वाइवर ने न्याय पाने की अपनी इस लड़ाई की कहानी साझा की.
वीडियो एडिटः देवाशीष कुमार
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