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'गुलाबो सिताबो' में फ़ातिमा बेग़म का किरदार अदा करने वालीं फार्रुख़ जाफ़र
"हमारे एक बात समझ नहीं आ रही है. यहां एलुमिनियम की हंडिया पड़ी थी. वहां मिर्ज़ा की चप्पलें पड़ी थीं. यहां दो बकरियां बांध रखी हैं. सा... हमारा ही बलब मिला है निकालने के लिए." गुलाबो-सिताबो फ़िल्म में बांके रस्तोगी (आयुष्मान खुराना) जब इस डायलॉग को बोलता है तो तुरंत दूसरी ओर से बालों में मेहंदी लगवाती, मंद-मंद मुस्कुराती और तंज़ कसती एक बूढ़ी औरत का डायलॉग गूंजता है, "अरे बल्ब न चोरी हुई, निगोड़ी जायदाद चोरी हो गई."
दिमाग़ पर ज़ोर डालो तो याद आता है कि यह वही बूढ़ी औरत है जो फ़लां-फ़लां फ़िल्म में थी.
शुक्रवार को वीडियो प्लेटफ़ॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई गुलाबो-सिताबो में एक ओर जहां अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना के अभिनय की तारीफ़ हो रही है.
वहीं, फ़ातिमा बेगम उर्फ़ फ़त्तो बेगम के किरदार की भी ख़ूब चर्चा है जिसको फ़र्रुख़ जाफ़र ने निभाया है.
88 साल की फ़र्रुख़ जाफ़र फ़िल्म की तरह ही आम ज़िंदगी में भी एक ज़मींदार ख़ानदान से आती हैं.
जौनपुर में पैदा वो हुईं और 16-17 साल की उम्र में निकाह के बाद लखनऊ आ गईं.
पति सैयद मोहम्मद जाफ़र स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बाद में काफ़ी समय तक पत्रकारिता की और फिर दो बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे.
वीडियो: मोहम्मद शाहिद और शुभम कौल
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