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कोरोना वायरस के बीच चीन का सिरदर्द ताइवान ने कैसे बढ़ा दिया है?
ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के मौक़े पर 20 मई को चीन को स्पष्ट संदेश दे दिया है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक ताइवान, चीन के नियम-क़ायदे कभी क़बूल नहीं करेगा और चीन को इस हक़ीक़त के साथ शांति से जीने का तरीक़ा खोजना होगा. वैसे तो ये मौक़ा कोरोना वायरस की लड़ाई में ताइवान की जीत के जश्न का भी था. जनवरी में हुए चुनाव में राष्ट्रपति साई इंग-वेन को ताइवान के मतदाताओं ने दूसरा मौक़ा दिया था. ताइवान को अलग-थलग करने की चीन की मुहिम की राष्ट्रपति साई इंग-वेन कट्टर आलोचक रही हैं. साई इंग-वेन ताइवान को एक संप्रभु देश के तौर पर देखती हैं और उनका मानना है कि ताइवान... 'वन चाइना' का हिस्सा नहीं है. चीन उनके इस रवैये को लेकर नाराज़ रहता है. साल 2016 में वो जब से सत्ता में आई हैं, चीन ताइवान से बातचीत करने से इनकार करता रहा है. इतना ही नहीं चीन ने इस द्वीप पर आर्थिक, सैनिक और कूटनीतिक दबाव भी बढ़ा दिया है. चीन का मानना है कि ताइवान उसका क्षेत्र है. चीन का कहना है कि ज़रूरत पड़ने पर ताक़त के ज़ोर उस पर क़ब्ज़ा किया जा सकता है. हॉन्ग कॉन्ग की ही तरह ताइवान में 'एक देश, दो व्यवस्थाओं' वाले मॉडल को लागू करने की बात की जाती रही है जिसमें चीन का राज स्वीकार करने पर ताइवान को कुछ मुद्दों पर आज़ादी रखने का हक़ होगा.
वीडियो: सर्वप्रिया सांगवान और दीपक जसरोटिया
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