दिल्ली हिंसाः मोहम्मद ज़ुबैर की आपबीती
झक सफ़ेद कुर्ते-पजामे पर बिखरे ख़ून के छींटे. ज़मीन पर सिर के बल गिरा एक निहत्था युवक, जो अपने दोनों हाथों से सिर बचाने की कोशिश कर रहा है.
सिर से बहते ख़ून में दोनों हथेलियां रंग गई हैं. वो चारों ओर से दंगाइयों से घिरा हुआ है. दंगाई डंडे, लाठियों और लोहे की रॉड से पीट रहे हैं.
37 वर्षीय मोहम्मद ज़ुबैर की यह तस्वीर दिल्ली दंगों की त्रासदी का चेहरा बन गई है.
वो चेहरा, जिसके ज़ख़्म अनंत काल तक रिसते रहेंगे. वो चेहरा, जिसके जख़्म शायद कभी नहीं सूखेंगे.
वीडियोः देबलिन रॉय

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