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कहानी दारा शुकोह के दर्दनाक अंत की
मुग़ल इतिहास में हिंदू और मुसलमानों को नज़दीक लाने की जितनी पुरज़ोर कोशिश दारा शुकोह ने की थी उतनी शायद अकबर के अलावा किसी और ने नहीं.
शाहजहाँ के सबसे बड़े बेटे होने के बावजूद उन्हें राजगद्दी से महरूम होना पड़ा, बल्कि उनका इतना क्रूर अंत हुआ, जिसकी मिसाल आज तक नहीं मिलती.
हाल ही में अवीक चंदा की एक किताब प्रकाशित हुई है, 'दारा शुकोह - द मैन हू वुड बी किंग' जिसमें उनके उदय से अस्त होने की कहानी को बहुत रोचक ढंग से बयान किया गया है.
आज की विवेचना में रेहान फ़ज़ल याद कर रहे हैं मुग़ल सल्तनात के इस अभागे शहज़ादे को.
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