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क्या वायु प्रदूषण से कैंसर हो सकता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़, दुनिया भर में हर साल 9 लाख से ज़्यादा लोग वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों के कैंसर से मरते हैं.
बीबीसी ने फेफड़ों के कैंसर की जांच करने वाले डॉ. अरविंद कुमार से बात करके ये समझने की कोशिश की.
वे कहते हैं, “प्रदूषित हवा में वही रसायन होते हैं जो कि एक सिगरेट में होते हैं. अब ये सभी को पता है कि सिगरेट पीने से कैंसर होता है. ऐसे में अगर कोई बच्चा आज के समय में दिल्ली में जन्म लेता है और वह लगातार इसी तरह की हवा में साँस लेता है तो वह 25 साल की उम्र तक 25 साल का स्मोकर हो जाता है. ऐसे में अगर किसी को 25 से 30 की उम्र में फेफड़ों का कैंसर हो रहा है तो इसमें अचंभे की बात नहीं होनी चाहिए.”
डॉ. अरविंद कुमार दिल्ली समेत भारत के अलग-अलग शहरों में धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों में कैंसर पाए जाने का ट्रेंड भी देख रहे हैं.
वह बताते हैं, “हम इस समय जिस हवा में साँस ले रहे हैं, जिसमें पीएम 2.5 का स्तर 300, 350 और पांच सौ तक जा रहा है. और वायु प्रदूषण का ये स्तर सिर्फ़ दिल्ली नहीं बल्कि उत्तर भारत के अलग-अलग शहरों में भी देखने को मिल रहा है. ऐसे में मैं ये कह सकता हूं कि अगर हवा में पीएम 2.5 का स्तर कम नहीं हुआ तो आने वाले सालों में साँस लेने से जुड़ी बीमारियों में भारी बढ़त देखने को मिलेगी.”
“हाल ही में हमने अपने मरीज़ों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया था जिसके आधार पर हम ये कह सकते हैं कि आज से 20-30 साल पहले तक फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे 100 लोगों में से 80 फ़ीसदी लोग धूम्रपान करने वाले होते थे. लेकिन अब ये आंकड़ा 50-50 फ़ीसदी तक पहुंच गया है.”
दिल्ली सरकार से लेकर अलग-अलग सीमावर्ती राज्यों की सरकारें उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को दूर करने की कोशिशें लगातार कर रही हैं.
लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद वायु प्रदूषण का ये राक्षस हर साल और विकराल रूप लेकर सामने खड़ा हो रहा है.
ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अगर समय रहते इस समस्या का कोई ठोस हल नहीं निकाला गया तो आने वाले समय में उत्तर भारत में रहने वाले लोगों के लिए प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन सकता है.
वीडियो रिपोर्ट - अनंत प्रकाश
वीडियो एडिटर - साहिबा ख़ान
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