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लेफ़्टिनेंट विजयंत थापर का ‘आख़िरी ख़त’
1999 में ‘तोलोलिंग’ चोटी पर जीत से ही कारगिल युद्ध का रुख़ पलटना शुरू हुआ था. इस ऑपरेशन में लेफ़्टिनेंट विजयंत थापर ने भी भाग लिया था.
बाद में उन्हें ‘नौल’ या ‘थ्री पिंपल्स’ चोटियों को फ़तह करने की ज़िम्मेदारी भी दी गई, जहाँ लड़ते हुए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी. कारगिल सीरीज़ की चौथी और अंतिम कड़ी में रेहान फ़ज़ल नज़र डाल रहे हैं लेफ़्टिनेंट विजयंत थापर की कहानी पर
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