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पोस्टर वुमनः पीएम मोदी ने सफाईकर्मियों के पैर धोए, पर सम्मान मिला क्या?
वो महिलाएं जो मोदी सरकार की योजनाओं की शुरुआत का ज़रिया बनीं, वो महिलाएं जिनकी तस्वीर सरकारी योजनाओं का पोस्टर बन गई. हम लेकर आए हैं, उन चेहरों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी. बीबीसी हिंदी की ख़ास पड़ताल 'पोस्टर वुमन' में.
इस सिरीज़ की दूसरी कहानी है उन महिलाओं की है जिनके पैर प्रधानमंत्री मोदी ने कुंभ में धोए थे.
24 फरवरी 2019 को कुंभ मेले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच सफ़ाईकर्मियों के पांव धोए थे. उनमें दो महिलाएं भी थीं. एक चौबी और दूसरी ज्योति. उनकी तस्वीरें देशभर की टीवी स्क्रीनों पर दिखाई गईं. पर उसके बाद सब उन्हें भूल गए. जब मीडिया का शोर थम गया तब बीबीसी ने उत्तर प्रदेश के बांदा की रहने वाली इन महिलाओं से मुलाक़ात की और ये पता लगाया कि आख़िर 24 फ़रवरी के बाद उनकी ज़िंदगी में क्या बदलाव आए?
चौबी उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले के मझिला गांव में रहती हैं. उनके परिवार में पांच सदस्य हैं. पति पत्नी और तीन बच्चे. चौबी केवल मेले में ही सफाई का काम करती हैं. कुंभ से लौटने के बाद चौबी अब घर पर रहतीं हैं और बांस की टोकरियां बनाती हैं. लेकिन मेले की कमाई और बांस की टोकरियां बना कर भी चौबी का पूरा साल गरीबी में ही कटता है.
चौबी के घर पर एक कमरा है, कमरे की ऊंचाई ज़्यादा है, तो उसी में टूटी फूटी सीढ़ियों के सहारे उसी मकान को दो मंज़िला बना दिया है. ऊपर की मंजिल में एक बक्सा है जिसमें कुंभ में प्रधानमंत्री ने सम्मान में जो साड़ी दी वो सहेज़ कर बक्से में रखी है. ऊपर के कमरे में ठीक से सिर ऊंचा कर खड़े नहीं हो सकते, लेकिन चौबी साड़ी दिखाते हुए अपनी खुशी छुपा नहीं पाती और प्रधानमंत्री आवास में घर न मिलने का दुख बरबस उसके चेहरे पर आ जाता है.
लेकिन सबसे बड़ी बात ये कि प्रधानमंत्री ने जहां चौबी के पैर धो कर उनके खिलाफ हो रहे भेदभाव को दूर करने की कोशिश की है, वहीं चौबी के परिवार को गांव में अब भी ये भेद-भाव झेलना पड़ता है. नल पर पानी भरने में भी उनको ये समस्या आती है.
चौबी से मिलती-जुलती कहानी ज्योति की भी है. ज्योति पहली बार ही कुंभ में सफाई करने गईं थीं. वैसे वो घर पर रहतीं हैं और खेतों में काम करती हैं. चौबी की तरह ही, ज्योति की ज़िंदगी में कुछ नहीं बदला. इंदिरा आवास योजना में घर पहले ही बन गया था. ज्योति के घर पर गैस तो है लेकिन शौचालय नहीं. नहाने के लिए ज्योति को पड़ोस में बने तालाब में जाना पड़ता है.
दोनों परिवारों की मांग अब सरकारी नौकरी की है.
पीएम से सम्मान मिलने के बाद चौबी और ज्योति दोनों के अंदर, बेहतर जिंदगी की आस ज़रूर जागी है, पर दोनों का मानना है कि बदला कुछ नहीं.
रिपोर्टर- सरोज सिंह
कैमरा- पीयूष नागपाल
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