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पोस्टर वुमनः बिना बिजली, कैसे आया इस घर में आया हजारों का बिल
वो महिलाएं जो मोदी सरकार की योजनाओं की शुरुआत का ज़रिया बनीं, वो महिलाएं जिनकी तस्वीर सरकारी योजनाओं का पोस्टर बन गई. हम लेकर आए हैं, उन चेहरों की कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी. बीबीसी हिंदी की ख़ास पड़ताल 'पोस्टर वुमन' में.
इस सिरीज़ की पहली कहानी है- आगरा की रहने वाली मीना देवी की. मीना देवी, प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली लाभार्थी हैं.
प्रधानमंत्री आवास योजना मोदी सरकार की उन योजनाओं में से है जिसके तहत सरकार ग़रीब परिवारों की महिलाओं को मकान बनाने के लिए पैसे देती हैं. ऐसे ग़रीब जिनके पास अपनी ज़मीन तो है लेकिन मकान बनाने के लिए पैसे नहीं है. बीबीसी ने आगरा के पास पोइया गाँव में मीना देवी से मुलाक़ात की जिन्हें इस योजना के तहत पहला मकान मिला.
मीना देवी के घर पर चार बच्चे, 10 बकरियां और 1 भैंस हैं. ये सब रहते हैं 25 वर्ग मीटर के एक कमरे में. उसी कमरे के साथ में लगी एक रसोई है, जिसमें गैस चूल्हा भी है, उसी के साथ लगा हुआ है एक स्नान घर और एक बरामदा.
घर के ठीक बाहर एक शौचालय भी बना है. लेकिन जब बीबीसी की टीम उनके घर पहुंची तो पाया की स्नान घर में बकरियां बंधी थी और गैस चूल्हे की जगह मिट्टी के चूल्हे पर खाना बन रहा था. शौच के लिए परिवार के सदस्य अब भी खेतों में ही जाते हैं.
मीना देवी की माली हालत अच्छी नहीं है. नए घर में मीना देवी को बिजली-पानी की भी समस्या है. पीने के पानी के अलग से पैसे देने पड़ते हैं.
इन सबके बीच सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि उनके घर पर लगा बिजली का मीटर अभी तक चालू नहीं हुआ है, फिर भी उनके घर में मार्च के महीने में 35 हज़ार रुपए का बिजली बिल आ गया है.
मीना, बच्चों का पेट पालने के लिए सरकारी स्कूल में साफ़-सफ़ाई का काम करतीं हैं और आलू के खेत में बच्चों के साथ मजदूरी. ऐसे में मीना देवी की सबसे बड़ी समस्या ये है कि 35 हज़ार का बिजली बिल चुकाए तो आखिर कैसे?
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया की सरकारी दावों और हक़ीक़त के बीच फासला है. फासला ये कि प्रधानमंत्री आवास योजना में लोगों को मकान तो मिला है, लेकिन बिजली, पानी, शौचालय और रसोई गैस जैसी बुनियादी ज़रूरतों के होने और उनके इस्तेमाल में अभी भी कई दिक्कतें हैं.
रिपोर्टर- सरोज सिंह
कैमरा- पीयूष नागपाल
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