You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
भारतीय राजनीति का एक चमकता हुआ सितारा
पिछले क़रीब 10 साल से बीमार चल रहे पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस का 29 जनवरी 2019 को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया.
भारतीय राजनीति का एक चमकता हुआ सितारा जिसने मुंबई के फुटपाथ से भारत के रक्षा मंत्रालय की कुर्सी तक का सफ़र किया.
लेकिन इस सफ़र में कई विरोधाभास भी दिखे. 1960 और 1970 के दशक में देश का शायद सबसे प्रखर समाजवादी और ट्रेड यूनियन नेता 1990 के दशक में न केवल भारतीय जनता पार्टी का सबसे भरोसेमंद सहयोगी बनता है, बल्कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए का संयोजक भी बन जाता है.
कभी कोका-कोला का विरोध करने वाला ये राजनेता सरकार में शामिल होने के बाद कॉरपोरेट घराने का समर्थक बन जाता है. कभी परमाणु हथियारों का विरोध करने वाला व्यक्ति, रक्षा मंत्री रहते हुए पोकरण-2 का गवाह बनता है.
गुजरात दंगों और ग्राहम स्टेन्स की हत्या मामले में बीजेपी को क्लिन चिट देने वाला शख़्स अपनी ही सरकार के गृह मंत्रालय के फ़ैसले के ख़िलाफ़ एक कश्मीरी पत्रकार की मदद करता है. जॉर्ज फ़र्नांडिस के व्यक्तित्व को उजागर करती संदीप सोनी की ये ख़ास रिपोर्ट.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)