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माल्या, नीरव जैसे कई लोग हज़ारों करोड़ लेकर चंपत
नए साल के पहले हफ्ते में एक भ्रष्टाचार निरोधक कोर्ट ने अहम फ़ैसला देते हुए शराब कारोबारी विजय माल्या को देश का पहला आर्थिक भगोड़ा घोषित कर दिया.
इस कानून में जांच एजेंसियों को एफईओए के तहत दर्ज अपराधी की सारी संपत्तियां जब्त करने का अधिकार है. यानी अब जाँच एजेसिंयां अब विजय माल्या से जुड़ी संपत्तियां कुर्क कर सकती हैं.
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) नया कानून है और काफी सख्त भी. इस कानून के दायरे में जांच एजेंसियां विजय माल्या की सभी प्रॉपर्टी जब्त कर सकती हैं. ये प्रॉपर्टी चाहे अपराध क्षेत्र के अंदर हों या बाहर, उससे फर्क नहीं पड़ता. इस कानून के मुताबिक जो व्यक्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक अपराध करने के बाद देश छोड़ गया हो और जांच के लिए कोर्ट में हाजिर न हो रहा हो, जिसके खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी हो चुका हो लेकिन विदेश भागने के कारण वह हाजिर न हो रहा हो, उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी ठहराया जा सकता है.
आज धंधा पानी में बात ऐसी ही आर्थिक भगोड़ों की जो हज़ारों करोड़ का चूना लगाकर चंपत हो गए.
सरकार ने पिछले साल जुलाई में संसद में ऐसे ही 28 आर्थिक भगोड़ों की जानकारी दी थी, जिनमें छह महिलाएं भी शामिल हैं. सरकार का मानना था ये सभी भारत से भाग गए हैं और विभिन्न देशों में रह रहे हैं.
इस सूची में सबसे ऊपर हैं विजय माल्या- उन पर कई बैंकों का कुल मिलाकर 7500 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस के लिए ये कर्ज़ लिया था, जो उन्होंने कभी नहीं लौटाया.
इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक में फर्ज़ीवाड़े के मुख्य अभियुक्त मेहुल चौकसी और उनके भांजे नीरव मोदी का नंबर है.
गीतांजलि जेम्स के प्रमोटर मेहुल चौकसी पर 7,080 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप है, जबकि हीरा कारोबारी नीरव मोदी पर धोखाधड़ी कर बैंक के 6,498 करोड़ रुपये हड़पने का आरोप है.
एक और कारोबारी विनसन डायमंड्स के प्रमोटर्स जतिन मेहता पर धोखाधड़ी कर बैंकों का 4,625 करोड़ हड़पने का आरोप है. जतिन कथित तौर पर भारत से फरार होकर सेंट किट्स पहुँच गए और अब वहाँ के नागरिक हैं.
स्टरलिंग बायोटेक लिमिटेड के प्रमोटर्स चेतन जयंतीलाल संदेसरा, नितिन जयंतीलाल संदेसरा और दीप्तिबेन चेतनकुमार संदेसरा ने बैंकों को कथित तौर पर 5,383 करोड़ की चपत लगाई और विदेश भाग गए.
कोलकाता की श्रीगणेश ज्वैलरी के मालिक नीलेश पारेख, उमेश पारेख और कमलेश पारेख भी इस सूची में हैं और उन पर बैंकों का 2,672 करोड़ रुपये बकाया बताया जाता है.
गुजरात की कंपनी एबीसी कॉटस्पिन के मालिक आशीष जोबनपुत्रा और प्रीति आशीष जोबनपुत्रा पर एसबीआई और बैंक ऑफ़ बड़ौदा को 804 करोड़ का चूना लगाने के आरोप हैं.
सूर्या फार्मास्यूटिकल के प्रमोटर्स राजीव गोयल और अल्का गोयल पर पाँच बैंकों के कंसोर्शियम का लगभग 621 करोड़ रुपये कर्ज़ बकाया है और वो भी भारत से फरार हैं.
आर्थिक अपराध में शामिल अन्य चर्चित नामों में इंडियन प्रीमियर लीग के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी, नीरव मोदी के भाई नीशल मोदी, रितेश जैन शामिल हैं.