You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
धंधा पानी: अंतरिक्ष में भारत को टक्कर दे पाएगा पाकिस्तान?
सैन्य ताकत से लेकर खेल के मैदान तक एक-दूसरे को चुनौती देते आ रहे भारत और पाकिस्तान अब अंतरिक्ष में भी भारत से होड़ लेने की तैयारी में है.
15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया था कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो स्वदेशी मिशन के तहत 2022 में अपने नागरिक को अंतरिक्ष में भेजेगा.
अब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान ने भी घोषणा की है कि वह चीन की मदद से अपने नागरिक को 2022 में अंतरिक्ष में भेजेगा.
सवाल ये है कि आर्थिक तंगहाली के से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए ये सपना साकार करना मुमकिन है भी या नहीं और अंतरिक्ष में वो भारत को क्या टक्कर दे पाएगा. आज धंधा पानी में चर्चा इसी बात की.
अभी तक अमरीका और रूस के अलावा सिर्फ़ चीन ही अपने दम पर मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान पूरी कर सके हैं. चीन ने 2003 में पहली बार अपने नागरिक को अंतरिक्ष में भेजा था और ऐसा करने वाला दुनिया का तीसरा देश बना था.
भारत यूँ तो अपना अंतरिक्ष यात्री 1984 में ही अंतरिक्ष में भेज चुका है. तब राकेश शर्मा रूस की मदद से अंतरिक्ष में गए थे. लेकिन अब 2022 के लिए यही चुनौती इसरो के सामने है. दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के लिए ये काम वहाँ की अंतरिक्ष एजेंसी सुपार्को को करना है.
तो एक नज़र देख लेते हैं इस चुनौती को पूरा करने के लिए इसरो और सुपार्को कितने तैयार हैं.
इसरो का साल 2018-19 का बजट 10 हज़ार 783 करोड़ रुपये रहा. अगले चार साल में इसरो सिर्फ़ अंतरिक्ष मिशन पर ही तकरीबन 10 हज़ार करोड़ रुपये खर्च करेगा.
पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपार्को का 2018-19 का कुल बजट मात्र 470 करोड़ पाकिस्तानी रुपये है.
2017 के आंकड़ों के मुताबिक भारत की जीडीपी 2597 अरब डॉलर है और दुनिया की अर्थव्यवस्था में इसका हिस्सा 4.20 प्रतिशत है, जबकि पाकिस्तान की जीडीपी 304 अरब डॉलर जो वर्ल्ड इकोनॉमी का तकरीबन आधा फ़ीसदी है.
जीडीपी ग्रोथ और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी पाकिस्तान भारत से बहुत पीछे है. भारत की जीडीपी ग्रोथ पिछले कुछ सालों में औसतन 8 फ़ीसदी के आस-पास रही है, जबकि पाकिस्तान की 5 फ़ीसदी के लगभग.
लेकिन क्या आप जानते हैं पाकिस्तान ने भारत से बहुत पहले ही अंतरिक्ष में जाने के सपने देखना शुरू कर दिया था. पाकिस्तान स्पेस एजेंसी 1961 में अस्तित्व में आ गई थी, जबकि इसरो की स्थापना पूरे आठ साल बाद यानी 1969 में हुई.
और तो और पूरे एशिया महाद्वीप में पाकिस्तान जापान और इसराइल के बाद ऐसा तीसरा देश था और दुनिया का 10वां देश था जिसने अंतरिक्ष में सफलता पूर्वक रॉकेट छोड़ा था. पाकिस्तान ने अंतरिक्ष में अपना पहला रॉकेट, भारत के पहला रॉकेट छोड़ने से पूरे एक साल पहले भेज दिया था.
लेकिन शुरुआती जोश दिखाने के बाद 1980 और 90 के दशक में सुपार्को के बजट में कमी आनी शुरू हो गई और अंतरिक्ष रिसर्च भी पाकिस्तानी शासकों की प्राथमिकता में नहीं रहा.
वहीं मौजूदा दौर में दुनिया भर के टॉप स्पेस कार्यक्रमों में इसरो शामिल है. भारत अब न सिर्फ़ खुद के बल्कि दूसरे मुल्क़ों की सैटेलाइट भी अंतरिक्ष तक लेकर जाता है. फरवरी 2017 में भारत ने एक साथ 104 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े थे और स्पेस रिसर्च की दुनिया में अपना लोहा मनवाया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)