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रूस को फुटबॉल विश्व कप की मेज़बानी से कितना फ़ायदा
फुटबॉल विश्व कप 2018 में रूस में दुनिया भर की 32 टीमें खेल रही हैं.
खेल अब केवल खेल नहीं होता है बल्कि इसका अर्थव्यवस्था से सीधा ताल्लुक होता है. तभी दुनिया के हर देश की ख़्वाहिश होती है कि फ़ीफ़ा विश्व कप की मेज़बानी उसे मिले.
खिलाड़ी को फ़ायदा होता है, टीम को फ़ायदा होता है, आयोजकों को फ़ायदा होता है और साथ ही मेज़बान देश की अर्थव्यवस्था को भी.
इस बार मेज़बान रूस है और उसका एक मक़सद खेल के बहाने देश में निवेश बढ़ाना भी है. आयोजकों को उम्मीद है कि फ़ुटबॉल महाकुंभ के दौरान रूस में दुनिया भर से तक़रीबन 6 लाख लोग पहुँचेंगे.
रूस ने मेज़बानी पर क़रीब 1100 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं और उम्मीद कर रहा है कि उसे कुल मिलाकर 3000 करोड़ डॉलर की कमाई होगी.
मैकेन्जी कंसल्टेंसी की एक रिपोर्ट भी बताती है कि विश्व कप की मेज़बानी से रूस के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी को को 1500 करोड़ डॉलर का फ़ायदा हो सकता है.
रूस से पहले जिन देशों ने मेज़बानी की है उनसे भी अंदाज़ा लगा सकते हैं. साल 2002 के संयुक्त मेज़बान जापान और दक्षिण कोरिया को करीब 900 करोड़ डॉलर का फ़ायदा हुआ तो 2006 के मेज़बान जर्मनी के हिस्से 1200 करोड़ डॉलर और 2010 के मेज़बान दक्षिण अफ़्रीका के हिस्से आए 500 करोड़ डॉलर.
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