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'हमारे किसी भाई को तकलीफ़ ना हो'
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी समारोह के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों में यहां के एक इमाम के बेटे की मौत हो गई. लेकिन इमाम ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग ना देने और शांति बनाए रखने की अपील की.
बुधवार को आसनसोल ज़िला अस्पताल में वहां की नूरानी मस्जिद के इमाम इम्तदुल्लाह रशीद के सबसे छोटे बेटे हाफ़िज सब्कातुल्ला का शव मिला था. उनके सिर और गले पर चोट के निशान थे.
बेटे के शव को दफ़नाने के वक्त उन्होंने अपील की कि उनके बेटे की मौत को सांप्रदायिक रंग ना दिया जाए और इलाके में शांति बनाए रखी जाए.
इमाम कहते हैं, "इस्लाम का पैगाम अमन का पैगाम है. ये कहता है कि खुद तकलीफ उठा लो लेकिन दूसरे को तकलीफ ना होने दो. हमारे आसनसोल में हम लोग अमन चैन से रहना चाहते हैं और मैं इस्लाम का पैगाम देना चाहता हूं."
"मुझे इसे सहने की जो ताक़त मिली है वो अल्लाह की दी हुई ताक़त है. उसने हमें ताक़त दी है कि हम अपना दुख सह सकें. अपने मुल्क में शांति रहे, दंगा-फसाद ना हो और हमारे किसी भाई को तकलीफ़ ना हो."
(इमाम इम्तदुल्लाह रशीद से बात की बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली ने)