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छुक छुक रेल चली है जीवन की ......
भारतीय रेल का भारतीय समाज से बहुत करीबी सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्ता रहा है.
हाल ही में अरूप चटर्जी की एक किताब प्रकाशित हुई है, ‘द परवेयर्स ऑफ़ डेस्टिनी-अ कल्चरल बायोग्राफ़ी आफ़ द इंडियन रेलवेज़’ जिसमें उन्होंने भारत के स्वाधीनता संग्राम से लेकर भारतीय साहित्य, फ़िल्मों और जनमानस पर रेलवे के प्रभाव का दिलचस्प चित्रण किया है.
विवेचना में रेहान फ़ज़ल नज़र डाल रहे हैं इस पुस्तक के कुछ दिलचस्प पहलुओं पर