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हिंदी फिल्मों के अजातशत्रु संगीतकार रवि
रवि के लिए उनके संगीतकार पक्ष को लेकर जो सर्वाधिक महत्व की बात उभरती है, उसमें यह जानना सार्थक है कि उनका संगीत उस हद तक ही आधुनिक होने की मांग करता हैं, जिसमें उसकी पूर्ववर्ती परम्परा की अनुगूंजों का समावेश भी संतुलित ढंग से शामिल माना जाए.
वे ऐसी स्वच्छंदता के पैरोकार हैं, जहाँ पूर्वज अनुसरण और समकालीन प्रेरणा भी महत्व रखती आयी है. शायद इसीलिए उनकी फ़िल्मों के ज़्यादातर गीत अपने दौर की नुमाइंदगी में ताज़गी-भरे एहसास के साथ अपनी सरलता व परम्परा की छाया को भी प्रभावी रूप में व्यक्त करते हैं.
बीबीसी हिंदी की संग-संग गुनगुनाओगे सिरीज़ में यतींद्र मिश्र की पेशकश.