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क्या है बलात्कार के मुकदमे लड़ रही औरतों की कहानी?
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फरनगर-शामली ज़िलों में साल 2014 के आम चुनाव से करीब नौ महीने पहले दंगे भड़के. 60 लोग मारे गए और हज़ारों को घर छोड़ भागना पड़ा.
उसी दहशत भरे माहौल में सात मुसलमान महिलाएं सामने आईं और दंगों के दौरान उनके साथ हुए सामूहिक बलात्कार की शिकायत पुलिस में की.
'निर्भया' के सामूहिक बलात्कार के बाद क़ानून कड़ा किया गया था और 'दंगों के दौरान किए गए बलात्कार' के मामलों के लिए एक नई धारा (376 (2g)) लाई गई थी.
ये पहले मामले थे जिनकी सुनवाई इसके तहत होनी थी. बेघर, बेरोज़गार और ख़ौफ़ज़दा होने के बावजूद ये महिलाएं और उनके पति मज़बूती से इंसाफ़ की लड़ाई लड़ने को तैयार थे.
साढ़े तीन साल बीत गए. पर सज़ा तो दूर, सात में से कुछ महिलाओं के मामले में मुक़दमा तक शुरू नहीं हुआ है.
उनसे मिलकर लौटीं बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य की विशेष रिपोर्ट.