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बॉलीवुड में कम क्यों हैं महिला गीतकार?
बॉलीवुड या हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री पर अक्सर यह आरोप लगता आया है कि यह पुरुष प्रधान है.
हीरो को हीरोइन से ज़्यादा पैसे मिलते हैं, मेकअप दादा हो सकता है दीदी नहीं, महिला फ़िल्म निर्देशक गिन चुन के कुछ ही हैं और अगर बात करें महिला गीतकारों की तो यह उंगलियों पर गिनी जा सकती हैं.
50 के दशक में सरोज मोहिनी नैय्यर, माया गोविंद, जद्दनबाई वहीं 90 के दशक में रानी मलिक और आजकल अन्विता दत्त, कौसर मुनीर और सोना मोहापात्रा या रश्मि-विराग (जोड़ी) जैसे नाम ही सामने आते हैं, तो क्या महिला गीतकारों के लिए बॉलीवुड खुला हुआ नहीं है?
जानिए क्या कहती हैं गीतकार कौसर मुनीर