उत्तर प्रदेश: बीजेपी ने बनाई चुनाव समिति, अजय मिश्र टेनी का नाम नहीं
बीजेपी ने बुधवार को जो सूची जारी की है. उसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कुल 24 नेताओं के नाम हैं.
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नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक का मामला: अमित शाह बोले- तय होगी जवाबदेही, चन्नी ने कहा-कराएंगे जांच
उत्तर प्रदेश: बीजेपी ने बनाई चुनाव समिति, अजय मिश्र टेनी का नाम नहीं, अनंत झणाणे लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए

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भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश के लिए घोषित 'चुनाव समिति' में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र 'टेनी' का नाम नहीं है.
अजय मिश्र टेनी बीजेपी के सांसद हैं. वो लखीमपुर खीरी की नुमाइंदगी करते हैं. अक्टूबर में उनके संसदीय क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे किसानों गाड़ी चढ़ाने की घटना सामने आई थी. इसमें किसानों की मौत भी हुई थी.
इस मामले में अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र मुख्य अभियुक्त हैं. इस मामले में कुल 14 अभियुक्त हैं जिनके ख़िलाफ़ चार्ज शीट दाखिल कर दी गई है.
कुछ दिन पहले एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें केंद्रीय मंत्री मिश्र पत्रकारों को धमकी देते हुए दिख रहे थे.
विपक्ष काफ़ी समय से अजय मिश्र टेनी के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़े की मांग कर रहा है. लेकिन बीजेपी ने ऐसी मांगों को भाव नहीं दिया है. राजनीतिक जानकारों की राय है कि ब्राह्मणों के बीच पैठ के चलते बीजेपी उन्हें सरकार से हटाना नहीं चाहती.

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कौन-कौन हैं चुनाव समिति में
बीजेपी ने बुधवार को जो सूची जारी की है. उसमें कुल 24 लोगों के नाम हैं. समित के 19 सदस्य हैं. एक पदेन और चतार विशेष आमंत्रितों को भी जगह दी गई है.
समिति में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा शामिल हैं.
इनके अलावा, प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल और प्रदेश संगठन सह-महामंत्री कर्मवीर सिंह के नाम शामिल हैं. इसमें बेबी रानी मौर्य के नाम भी शामिल हैं.
केंद्रीय मंत्रियों में साध्वी निरंजन ज्योति, संजीव बलियान, एसपी सिंह बघेल के अलावा सांसदों में रेखा वर्मा, अरुण सिंह, विनोद सोनकर जैसे नाम भी इस सूची में शामिल हैं.
नेपाल के पीएम देउबा रविवार को आएंगे भारत, गुजरात समिट में होंगे शामिल

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नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा रविवार को चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचेगे. देउबा कैबिनेट के एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि पीएम देउबा गुजरात ग्लोबल समिट के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे. उसके बाद राजधानी दिल्ली में दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय वार्ता होगी.
मंत्री के अनुसार, नेपाल के कैबिनेट ने उनकी यात्रा को मंजूरी दे दी है. हालांकि इसका आधिकारिक एलान होना अभी बाक़ी है.
पिछले साल नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री देउबा की भारत की यह पहली यात्रा होगी. देउबा जब पिछले महीने ग्लासगो जलवायु सम्मेलन में शामिल होने गए थे, तब उन्हें भारतीय प्रधानमंत्री ने भारत के दौरे पर आने का न्यौता दिया था.
ओमिक्रॉन वेरिएंट से हुई देश में पहली मौत: लव अग्रवाल

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ओमिक्रॉन वेरिएंट से पहली मौत की पुष्टि की है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि राजस्थान के उदयपुर में ओमिक्रॉन संक्रमित एक वृद्ध की मौत हुई है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल के अनुसार, जिनकी मौत हुई वो मरीज़ डायबिटीज़ और दूसरी घातक बीमारियों से जूझ रहे थे.
मालूम हो कि देश में ओमिक्रॉन का सबसे पहला मामला 12 दिसंबर को केरल में सामने आया था. इससे पहले 24 नवंबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया था कि दक्षिण अफ्रीका में कोरोना का नया वेरिएंट सामने आया है, जिसे ओमिक्रॉन नाम दिया गया है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दुनिया में अब तक ओमिक्रॉन से कुल 108 लोगों की मौत हुई है. मंत्रालय ने ओमिक्रॉन के तेज़ी से फैलाव को चिंता का कारण बताया है.

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पिछले आठ दिनों में 6 गुना हुए मामले
मंत्रालय के अनुसार, पिछले 8 दिनों में कोरोना के नए मामलों में 6 गुना से अधिक की तेज़ी से वृद्धि दर्ज़ की गई है. बुधवार को सामने आए आंकड़ों में बताया गया कि देश में 58 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं.
इससे पहले कई जानकार और सरकारी सूत्र बता चुके हैं कि देश में तीसरी लहर के पीछे ओमिक्रॉन वेरिएंट ही हो सकता है.
आईसीएमआर प्रमुख बलराम भार्गव ने कहा कि शहरों में फैलने वाला सबसे प्रमुख वेरिएंट ओमिक्रॉन ही है. देश में अब तक सबसे ज़्यादा ओमिक्रॉन के मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं. उसके बाद दिल्ली दूसरे नंबर पर रहा है.
कोरोना संक्रमण: दिल्ली में 10 हज़ार से ज़्यादा नए केस, पॉज़िटिविटी रेट करीब 12 फ़ीसदी

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दिल्ली में कोरोना संक्रमण की रफ़्तार बेकाबू है. बीते 24 घंटों में 10 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान 8 लोगों की मौत भी हुई है.
दिल्ली सरकार की ओर से बुधवार को जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, राज्य में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के कुल 10,665 मामले दर्ज़ किए गए हैं.
इससे पहले मंगलवार को राजधानी दिल्ली में संक्रमण के कुल 5,481 मामले सामने आए थे. सोमवार को संक्रमण के 4,099 तो रविवार को 3,194 मामले दर्ज़ किए गए थे.
इस तरह पिछले 24 घंटों में दिल्ली में मामलों की संख्या दोगुनी हो गई है. तीन दिनों के भीतर संक्रमण की संख्या तिगुनी हो चुकी है.
पिछले 24 घंटों में दिल्ली में 72 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने किसी भी तरह के कोविड टेस्ट कराए. इनमें से क़रीब 17,600 लोगों ने रैपिड एंटीजन टेस्ट कराए.
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक चिंता की बात ये है कि अब दिल्ली में पॉज़िटिविटी दर बढ़कर 11.88 फ़ीसदी हो गई है, जबकि मंगलवार को यह दर 8.37 फ़ीसदी थी. सोमवार को संक्रमण दर क़रीब 6.5 फ़ीसदी थी, जबकि रविवार को 4.6 फ़ीसदी.
मालूम हो कि 5 फ़ीसदी से ज़्यादा की पॉज़िटिविटी दर को ख़तरनाक माना जाता है.
सक्रिय मरीज़ों की संख्या 23,300 हुई
हेल्थ बुलेटिन के अनुसार,दिल्ली में सक्रिय मरीज़ों की संख्या अब बढ़कर 23,307 हो गई है. हालांकि राहत की बात है कि इनमें से केवल 782 लोगों को अस्पताल में दाख़िल होने की ज़रूरत पड़ी. यह कुल रोगियों के 3 फ़ीसदी से थोड़ा ही ज़्यादा है.
पिछले 24 घंटों में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज़ों में से केवल 140 को ही आक्सीजन की ज़रूरत पड़ी है.
24 घंटों में क़रीब दो लाख को वैक्सीन
पिछले 24 घंटों में 1.98 लाख लोगों ने कोरोना की वैक्सीन ली है. इनमें से 1.08 लाख को पहली तो 90 हज़ार को दूसरी ख़ुराक लगी है.
भारत कश्मीर की शांति को ख़तरे में डाल रहा है: पाकिस्तान

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इमेज कैप्शन, मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार पाकिस्तान की सेना ने आरोप लगाया है कि भारत की सेना झूठे प्रचार और फ़र्ज़ी ख़बरों का सहारा ले रही है.
पाकिस्तानी सेना ने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ऐसा करके 'कश्मीर में अपने अत्याचार से ध्यान हटाना चाहती है.'
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता और सेना की मीडिया और जनसंपर्क इकाई 'इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस' (ISPR) के महानिदेशक मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने रावलपिंडी में साल 2022 की अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये आरोप लगाया.
मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने ''2021 में राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की बाहरी और घरेलू सुरक्षा हालात'' को लेकर पत्रकारों को जानकारी दी.
उन्होंने कहा कि भारत से लगती पूर्वी सीमा यानी नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर संघर्ष विराम स्थानीय लोगों के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद रहा है.
लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि फ़र्ज़ी ख़बरों और झूठे प्रचारों से भारत कश्मीर की शांति को ख़तरे में डाल रहा है.
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'5 जनवरी कश्मीर के लिए अहम'
मेजर जनरल बाबर इफ़्तिख़ार ने कहा कि 5 जनवरी की तारीख़ कश्मीर के लिए काफ़ी अहम है.
उन्होंने कहा, "आज के ही दिन 1949 में संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीरी लोगों को 'आत्मनिर्णय का अधिकार' देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक वो वादा अधूरा ही है."
बाबर इफ़्तिख़ार ने आरोप लगाया, ''भारतीय सेना के क़ब्ज़े वाली कश्मीर घाटी में कई फ़र्ज़ी मुठभेड़ की गईं और उसका इल्ज़ाम पाकिस्तान पर मढ़ दिया गया.''
उन्होंने आरोप लगाया, "हाल में वहां के केरेन सेक्टर की नीलम घाटी में एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ हुई. उसमें भारतीय सेना ने एक बेक़सूर कश्मीरी नागरिक की हत्या कर दी और उसका आरोप पाकिस्तान पर लगा दिया. भारतीय मीडिया ने उसे कथित चरमपंथी शब्बीर बताते हुए उसकी तस्वीरें फैलाई, जो न केवल ज़िंदा है बल्कि शारदा में अपने घर पर मौजूद है."
पाकिस्तान उस चीनी विमान का क्यों करेगा शक्ति प्रदर्शन जो उसने ख़रीदा भी नहीं?
पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक, पंजाब सरकार से गृह मंत्रालय ने मांगा जवाब
पीएम मोदी जब बजाने लगे ढोल
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से
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पीएम की सुरक्षा चूक मामले में सीएम चन्नी फ़ोन नहीं उठाने के आरोप पर बोले

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केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पंजाब के फ़िरोज़पुर में सुरक्षा चूक के कारण रैली में नहीं जा सके.
बुधवार शाम पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पूरे मामले पर प्रेस के सामने आए. चन्नी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, ''सड़क जाम होने के कारण प्रधानमंत्री के वापस लौटने पर मुझे खेद है. कुछ लोग वहां अचानक से विरोध-प्रदर्शन करने चले गए थे. इसमें कोई साज़िश जैसी बात है तो पूरे मामले की जाँच कराएंगे. मैं तो प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए तैयार था.’’
चन्नी ने कहा, ‘’प्रधानमंत्री की सुरक्षा को लेकर कोई ख़तरा नहीं था. पंजाब सरकार का इसमें कोई रोल नहीं था. रास्ते में कोई आकर बैठा तो अचानक से आकर बैठा. इसको सुरक्षा से जोड़ना राजनीति हो सकती है. अगर एक साल से किसान दिल्ली में बैठ सकते हैं तो क्या हमारी सुरक्षा को लेकर ख़तरा था? ‘’
चन्नी ने कहा कि पीएम को सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि आगे प्रदर्शनकारी बैठे हैं और पीएम ने वापस जाने का फ़ैसला कर लिया.
पंजाब के सीएम ने कहा, ''इसमें कोई सुरक्षा का मामला नहीं है. उनको आंदोलनकारियों ने रोका और वे चले गए. मैं अब यही कहूंगा कि आगे से अच्छे से इंतज़ाम करूंगा. मैं गृह मंत्री से एक बार मिलने गया था. उनसे हाथ जोड़कर कहा था कि कोई मुख्यमंत्री बने इससे कोई मतलब नहीं है लेकिन एक कृपा करना कि पंजाब में आपसी सद्भावना ना टूटे. इसके बावजूद भी राजनीति होती है तो इसका कोई मतलब नहीं है. गृह मंत्री का फ़ोन आया था. उन्होंने कहा कि वहां कुछ ग़लत हो गया और प्रधानमंत्री वापस आ रहे हैं. मैंने कहा था कि मेरी तरफ़ से कोई ग़लती नहीं हुई है.''
गृह मंत्रालय ने कहा है, ''हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से क़रीब 30 किलोमीटर दूर जब प्रधानमंत्री मोदी का काफिला एक फ्लाइओवर पर पहुँचा तो पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर रखी है. प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर 15 से 20 मिनट तक फँसे रहे. यह पीएम मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक थी.''
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पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष की यह टिप्पणी

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काग्रेस पार्टी के युवा मोर्चा यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय श्रीनिवास बीवी का एक ट्वीट काफ़ी चर्चा में है. श्रीनिवास ने ट्वीट किया है, ''मोदी जी हाउ इज द जोश? #Punjab. इससे पहले श्रीनिवास ने एक ट्वीट किया था, ''आख़िरकार पंजाब में रैली नही कर पाए मोदी. किसान विरोधी मोदी के ज़ोरदार स्वगात के लिए ख़ाली कुर्सियां कर रही थीं इंतजार. पंजाब पहुँचने के बावजूद किसानों के विरोध के चलते रद्द करनी पड़ी रैली.''
श्रीनिवास के इस ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''इस घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस के युवा नेतृत्व ने जोश का, उत्सव का इज़हार किया है. किस बात का उत्सव है उन्हें? किस बात का जोश है? देश के प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ साज़िश के लिए?''
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कांग्रेस नेता पीएम की सुरक्षा चूक मामले में अपनी ही पार्टी पर बरसे

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पंजाब कांग्रेस के नेता सुनील जाखड़ ने बुधवार को पंजाब में अपनी ही पार्टी की सरकार को निशाने पर लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब के फ़िरोज़पुर में आज रैली थी लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा में भारी चूक के कारण रैली में प्रधानमंत्री नहीं जा सके. इस मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में वार-पलटवार चल रहे हैं. लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता इस मामले में अपनी पार्टी की आलोचना कर रहे हैं.
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने ट्वीट कर कहा, ''आज जो कुछ भी हुआ, वो स्वीकार्य नहीं है. यह पंजाबियत के ख़िलाफ़ है. फ़िरोज़पुर में भारत के प्रधानमंत्री एक राजनीतिक रैली को संबोधित करने वाले थे और इसके लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित होना चाहिए था. लोकतंत्र इसी तरह से काम करता है.''
सुनील जाखड़ का यह रुख़ पार्टी के आधिकारिक बयान से अलग है. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि प्रधानमंत्री फ़िरोज़पुर में भीड़ नहीं जुटने के कारण रैलीको संबोधित करने नहीं गए.
केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पंजाब के फ़िरोज़पुर में सुरक्षा चूक के कारण रैली में नहीं जा सके.
गृह मंत्रालय ने कहा है, ''हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से क़रीब 30 किलोमीटर दूर जब प्रधानमंत्री मोदी का काफिला एक फ्लाइओवर पर पहुँचा तो पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर रखी है. प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर 15 से 20 मिनट तक फँसे रहे. यह पीएम मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक थी.''
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प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक मामले में स्मृति ईरानी बोलीं- कांग्रेस के ख़ूनी इरादे नाकाम रहे

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पंजाब के फ़िरोजपुर में पीएम मोदी आज रैली करने वाले थे लेकिन गृह मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा में चूक के कारण प्रधानमंत्री रैली में नहीं पहुँच पाए और वापस आना पड़ा. बीजेपी का कहना है कि यह प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ साज़िश थी.
पूरे मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर पंजाब की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी भी थे. स्मृति ईरानी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''बैर मोदी से है लेकिन देश के प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ साज़िश का समर्थन देश नहीं देगा. भारत के इतिहास में आज पंजाब की पुण्य भूमि पर कांग्रेस के ख़ूनी इरादे नाकाम रहे. जो लोग कांग्रेस में प्रधानमंत्री जी से घृणा करते हैं, वो आज उनकी सुरक्षा को नाकाम करने के लिए प्रयासरत थे.''
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ''आज एक ऐसी घटना हुई है, जो भारत के इतिहास में अभूतपूर्व है. आतंकवाद के दौर में और आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में भी इस प्रकार की सुरक्षा की चूक नहीं हुई, जैसी आज प्रधानमंत्री जी की सुरक्षा के साथ हुई.''
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स्मृति ईरानी ने कहा, ''क्या जानबूझकर प्रधानमंत्री जी के सुरक्षा दस्ते को झूठ बोला गया? जिन लोगों ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा को भंग किया, उन लोगों को प्रधानमंत्री की गाड़ी के पास तक किसने और कैसे पहुँचाया?''
पीएम की सुरक्षा में वहाँ चूक हुई, जहाँ से 10 किलोमीर दूर पाकिस्तान है: अमरिंदर सिंह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पंजाब के फ़िरोज़पुर में रैली करने वाले थे लेकिन गृह मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा में चूक के कारण और पंजाब की कांग्रेस सरकार के असहयोग के चलते पीएम रैली में नहीं जा सके.
इस रैली में कैप्टन अमरिंदर सिंह भी पहुँचे थे. पीएम मोदी के नहीं पहुँचने की स्थिति में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ही रैली को संबोधित किया.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पीएम मोदी की सुरक्षा को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर निशाना साधा है.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''यह पंजाब की क़ानून-व्यवस्था की पूरी तरह से नाकामी है. ख़ासकर मुख्यमंत्री और पंजाब के गृह मंत्री की नाकामी है. जब आप देश के प्रधानमंत्री को सुरक्षित रास्ता नहीं दे सकते हैं, वो भी वहां, जहाँ से महज़ 10 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान की सीमा लगती है. सत्ता में बने रहने का आपका कोई अधिकार नहीं है.आपको सत्ता छोड़ देनी चाहिए.''
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पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक नहीं, ख़ाली कुर्सियां देख रैली में नहीं गए: कांग्रेस

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प्रधानमंत्री के दौरे में सुरक्षा चूक पर बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर जो आरोप लगाए थे, उसका जवाब कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दिया है. सूरजेवाला ने अपने जवाब में लिखा है, ''डियर नड्डा जी, आपा ना खोएं. इसमें कई और चीज़ें भी हैं. कृपया उनका भी ध्यान रखें-
1) प्रधानमंत्री की रैली की सुरक्षा में 10 हज़ार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती थी.
2) एसपीजी और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर सभी सुरक्षा इंतज़ाम किए गए थे.
3) यहां तक कि हरियाणा-राजस्थान के बीजेपी कार्यकर्ताओं की सभी बसों के लिए भी रूट बनाया गया.
4) प्रधानमंत्री ने सड़क मार्ग से हुसैनीवाला जाने का फ़ैसला किया. यह पीएम के काफ़िले का पूर्वनिर्धारित रूट नहीं था.
5)किसान मज़दूर संघर्ष कमिटी प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री के दौरे के ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन कर रही है. KMSC से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दो दौर की वार्ता कर चुके हैं.
सुरजेवाला ने कहा, ''प्रिय नड्डा जी, रैली रद्द होने का कारण ख़ाली कुर्सियाँ रहीं. यक़ीन न हो तो, देख लीजिए. और हाँ, बेतुकी बयानबाज़ी नहीं, किसान विरोधी मानसिकता का सच स्वीकार कीजिए और आत्ममंथन कीजिए. पंजाब के लोगों ने रैली से दूरी बनाकर अहंकारी सत्ता को आईना दिखा दिया है.''
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पीएम मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक, 15 से 20 मिनट तक फ्लाइओवर पर फंसे रहे: केंद्र

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केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को पंजाब के फ़िरोज़पुर में सुरक्षा चूक के कारण रैली में नहीं जा सके.
गृह मंत्रालय ने कहा है, ''हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से क़रीब 30 किलोमीटर दूर जब प्रधानमंत्री मोदी का काफिला एक फ्लाइओवर पर पहुँचा तो पता चला कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर रखी है. प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर 15 से 20 मिनट तक फँसे रहे. यह पीएम मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक थी.''
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस बड़ी सुरक्षा चूक के कारण पीएम मोदी के काफिला ने बठिंडा एयपोर्ट वापस जाने का फ़ैसला किया. गृह मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले को गंभीरता से लिए गया है और पंजाब की सरकार से रिपोर्ट मांगी गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बीजेपी प्रमुख जेपी नड्डा ने पंजाब की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह चुनाव में हार के डर से पीएम मोदी के कार्यक्रमों में रोड़ा डालने की हर कोशिश कर रही है.
नड्डा ने कहा कि पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी ने एसपीजी को आश्वस्त किया था कि प्रधानमंत्री के काफिले के रास्ते में कोई दिक्क़त नहीं होगी. लेकिन प्रदर्शनकारियों को पीएम मोदी के काफिले के रास्ते में आने दिया गया और यह बड़ी सुरक्षा चूक है.
जेपी नड्डा ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस मामले को लेकर फ़ोन पर बात तक नहीं की. नड्डा ने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस को निर्देश था कि वह लोगों को पीएम मोदी की रैली में जाने से रोके.
पीआईबी ने पूरे मामले पर गृह मंत्रालय का बयान जारी किया है. पीआईबी के बयान में लिखा गया है, ''आज सुबह प्रधानमंत्री मोदी बठिंडा लैंड किए और यहां से वो हेलिकॉप्टर से हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक जाने वाले थे. बारिश और कम दृश्यता के कारण प्रधानमंत्री ने 20 मिनट तक मौसम साफ़ होने का इंतज़ार किया. जब मौसम साफ़ नहीं हुआ तो फ़ैसला किया गया कि वो सड़क मार्ग से ही शहीद स्मारक पहुँचेंगे. डीजीपी पंजाब पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रबंध की पुष्टि होने पर पीएम मोदी का काफ़िला रवाना हुआ.''
''हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर पहले पीएम का काफ़िला एक फ़्लाईओवर पर पहुँचा तो पाया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर रखी है. प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर 15 से 20 मिनट तक फँसे रहे. यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बड़ी चूक थी.''
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ''पीएम मोदी का काफ़िला रोकने की घटना सुरक्षा में हुई गंभीर चूक है. प्रधानमंत्री को फ़िरोज़पुर रैली में शामिल होने से किसानों द्वारा रोके जाने की घटना पर केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी के कई नेताओं ने कड़ी आलोचना की है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कहा, ''यह शर्म की बात है कि पंजाब की बेहतरी के लिए कई विकास योजनाओं को लॉन्च करने के लिए जा रहे पीएम मोदी के काफ़िले को प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में रोक दिया. यह उनकी सुरक्षा में हुई गंभीर चूक है. यह तथ्य है कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को और भी ख़राब बना दिया.''
भारत के विपक्ष पर भड़का चीनी अख़बार ग्लोबल टाइम्स

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भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनातनी में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाला अंग्रेज़ी दैनिक अख़बार ग्लोबल टाइम्स काफ़ी सक्रिय रहता है.
कई बार उसके लेख, तस्वीरें, वीडियो और टिप्पणियों से भारत के सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो जाती है.
भारत में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आती हैं. नए साल के पहले दिन एक जनवरी को ग्लोबल टाइम्स ने एक वीडियो ट्वीट किया था.
इस वीडियो को ग्लोबल टाइम्स ने गलवान घाटी का बताया था. वीडियो में चीनी सैनिक मंदारिन में कह रहे थे-हम एक इंच भी ज़मीन नहीं छोड़ेंगे.
इसके बाद ग्लोबल टाइम्स ने गलवान में चीनी सैनिकों की राष्ट्रध्वज लिए हुए एक फोटो भी ट्वीट किया था.
इस पर भारत में विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए थे. इन विवाद के बीच मंगलवार को भारत की समाचार एजेंसी एएनआई ने गलवान में तिरंगा लिए भारतीय सैनिकों की तस्वीर को ट्वीट किया. इस फोटो को मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने भारतीय सेना के पराक्रम के तौर पर पेश करते हुए पोस्ट करना शुरू कर दिया था.
बुधवार को अब ग्लोबल टाइम्स ने पूरे मामले पर एक संपादकीय प्रकाशित किया है. अपने संपादकीय में ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ‘’नए साल के पहले दिन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन और भारत के सैनिकों ने 10 ठिकानों पर एक दूसरे को मिठाई दी थी.’’
‘’20 महीने पहले दोनों देशों के बीच सरहद पर शुरू हुए गतिरोध के बाद नए साल पर दोनों देशों के सैनिकों ने एक दूसरे को शुभकामनाएं दी थीं. मीडिया में इसे चीन और भारत के बीच स्थिर संबंध के तौर पर देखा गया. दोनों देशों के सैनिकों की इस पहल से भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की आगामी बैठक के लिए अच्छा माहौल बना था.''
छोड़िए X पोस्टX सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''सरहद पर भारत और चीन के सैनिक बड़े त्योहारों के मौक़े पर पुरानी परंपरा के तहत एक दूसरे को मिठाई देते रहे हैं. पिछले दो सालों सीमा पर गतिरोध के कारण यह बंद था. जब 2022 की शुरुआत में दोनों देशों के सैनिकों ने एक दूसरे को मिठाई देकर शुभकामनाएं दीं तो कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पसंद किया. एक चीनी नागरिक ने लिखा कि गोली से बढ़िया है कि एक दूसरे को मिठाई दें. लेकिन दुर्भाग्य से भारत में विपक्षी पार्टियां इसे भी मुद्दा बना दिया. भारत के विपक्ष ने इसे मोदी सरकार के चीन के सामने झुकने की तरह देखा.''
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''यहां तक कि मिठाई को भी बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है. इसे भारत और चीन के बीच स्थिर होते रिश्ते के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा था लेकिन समय-समय पर इसे भी बाधित किया जाता रहा है. भारत की घरेलू राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है और विपक्ष केवल विरोध के लिए विरोध करता है.’’
‘’लेकिन ये मोदी सरकार की विदेश नीति को प्रभावित करने में सक्षम नहीं हुए हैं. विपक्ष भारत में चीन विरोधी खेमा तैयार करने में कामयाब रहा है. अगर भारत की घरेलू राजनीति का अमेरिकीकरण हो जाएगा, कुछ राजनेता अपने फ़ायदे के लिए भारत-चीन संबंधों पर कीचड़ उछालते रहेंगे या फिर चीन विरोधी खेमा भी बना लेते हैं, तो इससे भारत की महाशक्ति बनने की तमन्ना अधूरी ही रह जाएगी. मोदी ने 2025 तक पाँच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है, जो दिखाता है कि भारत की प्राथमिकता विकास है न कि युद्ध.''

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कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में सारे बड़े कार्यक्रम रद्द किए

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देश में तेज़ी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपनी सभी राजनैतिक रैलियां रद्द कर दी हैं.
कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कांग्रेस ने कोरोना की लहर को देखते हुए,पार्टी की राज्य में होने वाली सभी बड़ी जनसभाएं रद्द कर दी हैं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा के बाद ये फ़ैसला लिया है.
मंगलवार को बरेली में कांग्रेस की रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं और लड़किया बिना मास्क पहने जुटी थीं, इस रैली में इतनी भीड़ जुटी थी कि भगदड़ जैसी परिस्थितियां पैदा हो गई थीं.
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली से सटे गौतम बुद्ध नगर में कोरोना के कई मामले सामने आने के बाद गुरुवार को यहां होने वाले अपने आयोजन को रद्द कर दिया है.
हालांकि बीजेपी की तरफ़ से राज्य में होने वाले चुनावी रैलियों के लेकर कोई फ़ैसला अब तक नहीं किया गया है.
मंगलवार को बरेली में कांग्रेस के 'लड़की हूँ,बालक शक्ति हूं' चुनाव अभियान के तहत आयोजित मैराथन में सैकड़ों महिलाएं और लड़कियां बिना मास्क पहने शामिल हुई थीं.
जनसैलाब इतना उमड़ा कि पूरी सड़क भर गई और,जैसे ही मैराथन शुरू हुआ कुछ महिलाएं नीचे गिर गईं. इससे भीड़ में धक्का-मुक्की शुरू हो गई. इस कार्यक्रम का आयोजन कांग्रेस नेता और बरेली की पूर्व मेयर सुप्रिया एरॉन ने किया था.
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यूपी में विधानसभा चुनाव में दो महीने से भी कम समय में बचा है.लेकिन देश में अब कोरोना के 50 हज़ार केस आ रहे हैं और ऐसे में कोरोना की नई लहर को लेकर चिताएं बढ़ गई हैं.खासकर ओमिक्रॉन को लेकर डर बढ़ता जा रहा है क्योंकि इस वेरिएंट के संक्रमण की दर काफ़ी ज़्यादा है.
बीते महीने उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग से कहा था कि,जान है तो जहान है. इसीलिए कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनावों को टालने पर विचार करना चाहिए.
कांग्रेस के प्रवक्ता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा है कि उम्मीद है कि अन्य पार्टियां भी कांग्रेस के फ़ैसले का अनुसरण करेंगी.
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इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव ने ये अपील करते हुए कहा था कि, "लोगों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए.''
''राजनीतिक दलों को टीवी और न्यूज पेपर के ज़रिए अपना चुनावी कैंपेन चलाने के लिए कहना चाहिए. चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों की बैठकों और रैलियों को लेकर सख़्त क़दम उठाने चाहिए,चुनाव को आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए. क्योंकि जान है तो जहान है."
इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा था कि चुनाव की तारीख़ों की घोषणा और आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद हमारी ज़िम्मेदारी शुरू होती है. तब तक,ये ज़िम्मेदारी राज्य सरकार के पास है कि वे राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सिफारिशों के अनुसार कार्य करें."
