झारखंड मॉब लिंचिंग मामला: युवक को ज़िंदा जलाया, पुलिस कर रही है जांच
रवि प्रकाश
राँची से, बीबीसी हिन्दी के लिए
झारखंड के सिमडेगा ज़िले में ग्रामीणों की भीड़ ने एक युवक की बुरी तरह पिटाई की और बाद में उसे ज़िंदा जला दिया. पुलिस इसे 'मॉब लिंचिंग जैसी घटना' बता रही है. मामले की जांच शुरु कर दी गई है और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मारे गए युवक की पत्नी उनकी जान बख़्श देने का अनुरोध करती रहीं लेकिन ग्रामीणों की भीड़ ने उनकी मिन्नतें अनसुनी कर दीं.
यह घटना कोलेबिरा थाने के बेसराजारा गांव की है. मारे गए व्यक्ति का नाम संजू प्रधान है.
झारखंड पुलिस के एसडीपीओ डेविड ए डोडराय ने घटना की पुष्टि की है.
उन्होंने कहा, "यह घटना मॉब लिंचिंग की ही तरह है. हम लोग इसकी तहक़ीक़ात कर रहे हैं. उसे मारने वाले लोग दूसरे गाँव से आए थे."
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि संजू प्रधान गाँव के पेड़ों को काटकर चोरी-छिपे लकड़ी बेच देता था. ये सब वैसे पेड़ थे, जो आदिवासियों की खूँटकटी व्यवस्था के तहत आते हैं.
चश्मदीद ने क्या बताया?
एक चश्मदीद ने बीबीसी को घटना के बारे में जानकारी दी.
चश्मदीद ने बताया, " पड़ोसी गाँव बंबलकेरा के क़रीब 200 ग्रामीणों की भीड़ बेसराजारा गाँव पहुँची थी. भीड़ में शामिल लोगों ने पहले संजू प्रधान को उसके घर से बाहर निकाला और पूछताछ की. फिर उसे पीटने लगे."
उन्होंने आगे बताया, " उस दौरान वहां प्रधान की पत्नी सपना देवी भी मौजूद थीं और उन्हें छोड़ देने की मिन्नत कर रही थीं लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी."
कुछ लोगों का दावा है कि पिटाई से पहले वहाँ एक पंचायत भी हुई थी, जिसमें संजू पर लकड़ी चोरी का आरोप लगाया गया था.
भीड़ ने इसी दौरान वहाँ रखी लकड़ियों में आग लगा दी और संजू को उसमें धकेल दिया और ज़िंदा जलने से उनकी मौत हो गई.
इस बीच किसी ने कोलेबिरा पुलिस को इसकी सूचना दी. लेकिन पुलिस के पहुंचने के पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी.
पुलिस ने फ़ायर ब्रिगेड की मदद से आग बुझाकर शव को अपने कब्जे में लिया.
गाँव में इस घटना के बाद से तनाव है और वहाँ अतिरिक्त पुलिस फ़ोर्स की तैनाती की गई है.
क्या है खूँटकटी व्यवस्था
आदिवासियों की पारंपरिक खूँटकटी व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान की इजाज़त के बग़ैर गाँव में पेड़ों को काटने पर रोक है.
ग्रामीणों का दावा है कि कथित मॉब लिंचिंग के शिकार युवक द्वारा पेड़ काटने की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को भी दी गई थी. कोई कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीण वहाँ पहुँचे.
इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है. लेकिन उनकी संख्या के बारे में जानकारी नहीं मिली है.