अफ़ग़ानिस्तान: काबुल में महिलाएं सड़कों पर उतरीं, राष्ट्रपति भवन के सामने किया प्रदर्शन

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में शुक्रवार को कुछ महिलाओं ने राष्ट्रपति भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया है.

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद, रजनीश कुमार and अनंत प्रकाश

  1. अफ़ग़ानिस्तान: काबुल में महिलाएं सड़कों पर उतरीं, राष्ट्रपति भवन के सामने किया प्रदर्शन

    तालिबान के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं

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    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में शुक्रवार को कुछ महिलाओं ने राष्ट्रपति भवन के सामने विरोध प्रदर्शन किया है.

    कहा जा रहा है कि वे महिलाओं की सरकार में भागेदारी की मांग कर रहीं थीं.

    उनके हाथों में जो परचे थे उनपर लिखा था - एक बहादुर कैबिनेट जिसमें महिलाएं भी मौजूद हों.

    अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से दुनिया भर में तालिबान के शासन में महिलाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त की जा रही है.

    लेकिन शुक्रवार को काबुल से जो तस्वीरें आई हैं उनमें महिलाएं काबुल के राष्ट्रपति आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करती हुई दिखीं.

    एक अन्य बैनर पर लिखा - महिलाओं का अधिकार, मर्दों से बराबरी

    तालिबान के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं

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    संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान के शोषण, विशेषत: महिलाओं पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों से जुड़ी भरोसेमंद रिपोर्ट्स को रेखांकित किया है.

    इससे पहले जब तालिबान शासन में था तब महिलाओं को पूरे शरीर को ढकने वाला बुरका पहनने के निर्देश थे. इसके साथ ही दस साल से बड़ी लड़कियों के स्कूल जाने पर पाबंदी थी.

    तालिबान का कहना है कि उनका शासन इस्लामी क़ानून यानी शरिया के मुताबिक़ होगा. हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया है कि असल में इसका मतलब क्या है.

    तालिबान के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं

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    इसके साथ ही पिछले महीने चरमपंथियों ने महिलाओं को उनकी ही सुरक्षा के लिए घरों में रहने की सलाह दी थी.

    उन्होंने बताया था कि इसकी वजह कुछ नए तालिबानी सदस्यों को अब तक महिलाओं के साथ ठीक ढंग से पेश आने की ट्रेनिंग नहीं मिलना है.

    काबुल में प्रदर्शन

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  2. सालेह ने कहा - युवाओं से बारूदी सुरंग क्लियर करवा रहे हैं तालिबान लड़ाके

    अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार के उप-राष्ट्रपति

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    अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने शुक्रवार को ट्वीट करके तालिबान पर आरोप लगाया है कि वह युद्ध अपराधों को अंजाम दे रहे हैं.

    बता दें कि अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर घाटी में तालिबान के लड़ाकों और सरकार समर्थित लड़ाकों के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा है.

    पिछले कुछ समय से दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोशिशें जारी थीं लेकिन कुछ समय पहले गोलीबारी होने की ख़बरें आ रही हैं.

    तालिबान और नॉर्दर्न एलायंस के बीच संघर्ष के बारे में अपुष्ट ख़बरें चल रही हैं. इन ख़बरों के बीच अमरुल्लाह ने ट्विट किया है - हम सबका नाम रेजिसटेंस (गतिरोध) है.

    इससे पहले सालेह ने कहा था कि, “आपातकालीन अस्पतालों की शुरुआत के बाद से पिछले 23 सालों में हमने कभी तालिबान को इसका इस्तेमाल करने से नहीं रोका. तालिबान युद्ध अपराधों को अंजाम दे रहा है और वह अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का रत्ती भर सम्मान नहीं करता है. हम संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक नेताओं से आग्रह करते हैं कि वे तालिबान के इस स्पष्ट रूप से आपराधिक और आतंकी व्यवहार पर अपना ध्यान केंद्रित करे.”

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    इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि “तालिबान ने पंजशीर घाटी में मानवीय मदद पहुंचने का रास्ता बंद कर दिया है. वे यात्रियों के नस्लीय प्रोफाइल बना रहे हैं, पंजशीर के सैन्य सेवा के लायक पुरुषों को बारूदी सुरंगों पर चलवाकर माइन हटाने वाले उपकरणों की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, मोबाइल फोन, बिजली और दवाई आदि तक पहुंच बंद कर दी है और लोग सिर्फ कुछ रुपये रख सकते हैं.”

    तालिबान से संघर्ष की तैयारी करते स्थानीय नेता

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    वहीं, अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि समझौते की तमाम कोशिशों के बाद भी पंजशीर में सैन्य अभियान शुरू हो गया है.

    उन्होंने ट्वीट करके लिखा है, “दुर्भाग्य से, सुधार की तमाम कोशिशों के बावजूद पंजशीर में सैन्य अभियान और संघर्ष शुरू हो गया है. ये काफ़ी चिंता का विषय है. और मुझे नहीं लगता है कि इसका नतीजा इस देश और यहां की जनता के हित में होगा.

    मैं दोनों पक्षों से कह रहा हूं कि युद्ध एक समाधान नहीं है बल्कि इससे अफ़ग़ानिस्तान ही आहत होता है, जख़्म ताजा होते हैं और कष्ट बढ़ता है. मुझे उम्मीद है कि दोनों पक्ष इस मौजूदा मसले को बातचीत के ज़रिए सुलझा लेंगे ताकि हमारी पीड़ित जनता अमन और खुशियों के साथ रह सके.”

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  3. हेड कांस्टेबल रतन लाल के मर्डर केस में पांच को ज़मानत, अदालत - 'असहमति जताना मौलिक अधिकार'

    दिल्ली हाइकोर्ट

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    दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को दंगों के दौरान मारे गए दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की हत्या के मामले में पांच अभियुक्तों आरिफ, शाहबाद, फुरकान, सुवलीन और तबस्सुम को जमानत दी है.

    कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना और अपनी असहमति व्यक्त करना एक मौलिक अधिकार है.

    इस अधिकार का प्रयोग करने वालों की क़ैद को जायज़ ठहराने के लिए इस अधिकार के प्रयोग मात्र को एक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

    जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा है, “भारतीय दंड संहिता की धारा 149 को, विशेषत: जब उसे धारा 302 के साथ पढ़ा जाए, सामान्य आरोपों और अस्पष्ट सबूतों के आधार पर लागू नहीं किया जा सकता. जब भीड़ से जुड़ा मामला हो तब अदालतों को जमानत देने या ख़ारिज करते समय इस नतीज़े पर पहुंचने में कोताही बरतनी चाहिए कि ग़ैर-कानूनी सभा के सभी सदस्य एक ग़ैर-क़ानूनी साझे उद्देश्य को हासिल करने का साझा इरादा रखते हैं.”

    इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि यह उसका संवैधानिक कर्तव्य है कि राज्य की शक्ति की अधिकता की स्थिति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मनमाने ढंग से न छीना जाए.

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  4. ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़ग़ानिस्तान की महिला जजों को क्यों तलाश रहे हैं तालिबान के छोड़े गए क़ैदी

    अफ़ग़ानिस्तान में विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं

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    अफ़ग़ानिस्तान की लगभग 250 महिला न्यायाधीशों को इस समय उन पुरुषों से अपनी जान का डर सता रहा है जिन्हें कभी इन्होंने सलाखों के पीछे भेजा था.

    क्योंकि तालिबान ने इन लोगों को आज़ाद कर दिया है ताकि वे इनके पीछे जा सकें.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, इन जजों और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रहे लोगों ने बताया है कि पिछले कुछ हफ़्तों में कुछ महिला जज बाहर निकल सकी हैं. लेकिन कई महिला न्यायाधीश अभी भी अफ़ग़ानिस्तान में फंसी हुई हैं.

    अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही सत्ता में आने वाले चरमपंथियों ने 20 साल पहले अपने शासन के दौरान महिलाओं द्वारा अधिकांश काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

    हालांकि, इस बार उन्होंने कहा है कि महिला अधिकारों की रक्षा की जाएगी लेकिन अब तक उन्होंने इस बारे में जानकारी नहीं दी है.

    अफ़ग़ानिस्तान में विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं

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    महिला जज को गोली मारी

    अफ़ग़ानिस्तान की न्यायपालिका में काम करने वाली महिलाएं पहले से ही निशाने पर रही हैं. इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट की दो महिला न्यायाधीशों को गोली मार दी गई थी.

    काबुल से भागकर यूरोप पहुंचने वाली एक शीर्ष महिला जज ने पहचान गुप्त रखने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया है कि अब जबकि तालिबान ने पूरे देश की जेलों में बंद कैदियों को रिहा कर दिया है तो इससे “महिलाओं की जान ख़तरे में पड़ गयी है.”

    उन्होंने कहा कि काबुल में “चार – पांच तालिबान सदस्य मेरे घर पर आए थे और उन्होंने पूछा कि ये महिला जज कहां हैं...ये वो लोग थे जिन्हें मैंने सलाखों के पीछे भेजा था.”

    पिछले दिनों यह महिला न्यायाधीश कुछ अन्य महिला जजों के साथ इंटरनेशनल एसोसिशएसन ऑफ़ विमन जजेज़ से जुड़े विदेशी सहकर्मियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मदद से काबुल छोड़ने में सफल हुई हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान में विरोध प्रदर्शन करती महिलाएं

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    डर और आतंक भरे संदेश

    इसके बाद से यह अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद सहकर्मियों के साथ जुड़ी हुई हैं.

    वे कहती हैं, “उनके संदेश डर और आतंक से भरे होते हैं. वे कहते हैं कि अगर उन्हें वहां से निकाला नहीं गया तो उनकी ज़िंदगियों पर सीधा ख़तरा मंडरा रहा है.”

    अफ़ग़ान मानवाधिकार कार्यकर्ता होरिया मोसोदिक़ बताती हैं कि इन जजों के अलावा यहां हज़ारों ऐसी महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो कि तालिबान के सीधे निशाने पर हो सकती हैं.

    वे कहती हैं कि रिहा किए गए कैदी महिला जजों, पुलिसकर्मियों और वकीलों को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं.

    वे कह रहे हैं कि “हम आपके पीछे आएंगे”

    तालिबान के झंडे बेचता हुआ एक व्यक्ति

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    डर का माहौल

    ब्रिटेन के न्याय मंत्री रॉबर्ट बकलैंड ने पिछले हफ़्ते बताया है कि ब्रिटेन ने 9 महिला जजों को बाहर निकाला है और अन्य लोग, जो कि जोख़िम भरी स्थितियों में हैं, उन्हें सुरक्षित रास्ता देने का प्रयास कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा, “इनमें से बहुत सारे न्यायाधीश क़ानून के पालन के लिए ज़िम्मेदार थे. और तालिबान के उदय के साथ अपने लिए बढ़ते ख़तरों को लेकर उनका डरना जायज है."

    मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पश्चिमी देशों ने काबुल में तालिबान के प्रवेश के बाद महिला जजों और मानवाधिकार संरक्षकों को बाहर निकालना अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया.

    बेलफास्ट में रहने वालीं एटलस विमन नेटवर्क ऑफ़ इंटरनेशनल लॉयर की सदस्य एवं मानवाधिकार वकील साराह के कहती हैं, “सरकारों को उन लोगों को निकालने में बिल्कुल रुचि नहीं थी जो उनके नागरिक नहीं थे.”

    साराह स्वयंसेवियों के एक समूह ‘डिजिटल डनकर्क’ की सदस्य हैं. इस समूह का नाम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी के कब्जे वाले फ्रांस से ब्रितानी सैनिकों के लिए चलाए गए बचाव अभियान पर रखा है.

    इंटरनेशनल एसोसिशएसन ऑफ़ विमन जजेज़ में छह विदेशी जजों की एक टीम जानकारी के समन्वय, सरकारों से तालमेल बिठाने और बचाव अभियान की व्यवस्था करने में लगी है.

    अफ़ग़ान जजों को दस साल तक ट्रेनिंग देने वाली अमेरिकी महिला जज पेट्रिसिया व्हेलन ने रॉयटर्स को बताया है, “इस समय हमारे ऊपर जो ज़िम्मेदारी है, उसे उठाना लगभग असंभव है क्योंकि उन चुनिंदा लोगों में शामिल हैं जो इस समूह के लिए ज़िम्मेदारी उठा रहा है.

    मैं इसे लेकर बेहद नाराज़ हूं, हम में से किसी को भी इस स्थिति में नहीं होना चाहिए.”

  5. अफ़ग़ानिस्तान में सबक मिलने के बावजूद नहीं सुधर रहे पश्चिम के देश: पुतिन

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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    इमेज कैप्शन, ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में भाषण देते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में सबक मिलने के बावजूद पश्चिमी देश दूसरे देशों पर अपनी चीज़ें थोपने की नीति का पालन कर रहे हैं.

    रूसी समाचार एजेंसी ताश के अनुसार पुतिन ने पश्चिम देशों पर अपने मूल्यों को थोपने का आरोप लगाते हुए कहा, “क्या ये पश्चिम के प्रभुत्व का अंत है? आख़िर मसला क्या है? मसला ये है कि ये सबक़ मौजूद हैं और इन्हें सही तरीक़े से समझकर नीति में बदलाव लाया जाना चाहिए.''

    ''वे अफ़ग़ानिस्तान के बारे में कहते हैं कि हम वहाँ गए और हमने वहां कई ग़लतियां कीं. लेकिन वे लगातार दूसरे देशों के मामले में यही ग़लतियां करते आ रहे हैं. इन प्रतिबंधों का क्या अर्थ है? ये उसी नीति के तहत हो रहा है, जिसके तहत वे दूसरे देशों पर अपने मानक थोपते हैं.”

    रूसी राष्ट्रपति ने कहा है कि ये सिर्फ़ उनके देश की चिंता नहीं है, बल्कि एशिया-प्रशांत के देश भी इस मामले को लेकर चिंतित हैं.

    उन्होंने कहा, “ये बात लातिन अमेरिका समेत दुनिया के अन्य स्थानों पर भी लागू होती है. अगर कुछ व्यापक निष्कर्ष निकाले जाएं तो हम विश्व राजनीति में कुछ वैश्विक परिवर्तन देख सकते हैं. ये प्रभुत्व का अंत है या नहीं, ये सबसे पहले इस बात पर निर्भर करता है कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर मौजूद देशों की आर्थिक क्षमता कितनी है.”

    इसके बाद पुतिन ने ज़ोर दिया कि इस समय मुख्य काम अपने देशों के विकास में सर्वोत्तम नतीजे हासिल करने के लिए सहयोगियों के साथ काम करते हुए प्रयासों को बढ़ाना है, इसके बाद रूस की आवाज़ और महत्व बढ़ेगा, जिससे रूसी जनता और उसके साझेदारों को भी फ़ायदा होगा.

  6. पाकिस्तान ने बताया- तालिबान से कैसे होंगे रिश्ते

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ ब्रितानी विदेश मंत्री डोमिनिक राब

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    पाकिस्तान के दौरे पर गए ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने कहा है कि ब्रिटेन ये सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि अफ़ग़ानिस्तान भविष्य में आतंकवादियों का ठिकाना न बने.

    उन्होंने कहा, “ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान में मदद की राशि इस साल बढ़ाकर 28.6 करोड़ पाउंड कर दी थी. स्थिर और शांतिपूर्ण अफ़ग़ानिस्तान ब्रिटेन और पाकिस्तान दोनों के हित में हैं.''

    डॉमिनिक राब ने ये बातें इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहीं.

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    पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने भी इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि पाकिस्तान तालिबान के साथ सहअस्तित्व और यथार्थवादी नीति पर आगे बढ़ेगा.

    क़ुरैशी ने कहा, ''हम पड़ोसी हैं. हमें सहअस्तित्व के साथ रहना है. भौगोलिक स्थिति हमें जोड़ती है. पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से रोज़ाना 20 से 25 हज़ार लोग आते जाते हैं. क्या हमें इन्हें रोक देंगे?''

    क़ुरैशी ने कहा, ''क्या हम इन्हें रोक सकते हैं, नहीं हम नहीं रोक सकते? क्या हम इनके लिए नियम तय कर सकते हैं, हाँ, ये संभव है. क्या इसमें जोख़िम हैं? हाँ, कई ऐसे संगठन हैं जो आपके, हमारे और किसी के प्रति दोस्ताना रवैया नहीं रखते हैं, ऐसे में हमें अपने आपकी उनसे रक्षा करनी है.''

    ''अफ़ग़ानिस्तान का अधिकांश व्यापार पाकिस्तान से होकर गुज़रता है तो क्या पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान के लिए अपनी सीमा बंद कर सकता है? क्या पाकिस्तान इसके परिणाम स्वरूप किसी मानवीय त्रासदी में अपना योगदान देगा?"

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ ब्रितानी विदेश मंत्री डोमिनिक राब

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    इसके बाद क़ुरैशी ने पाकिस्तान की स्थिति को बयां करते हुए कहा, "अगर हमें उनके साथ व्यापार करना है तो हम किसके साथ बात करें? ये हमारी मजबूरी है कि हमे उससे बात करनी होगी, जिसके भी हाथ में सत्ता की चाबी होगी.''

    ''इन चुनौतियों को स्वीकार करते हुए, पाकिस्तान ने कहा है कि अफ़ग़ान लोगों को अपने भविष्य के बारे में फैसला करना है. हम एक ऐसी सरकार के साथ जुड़ेंगे जिसे अफ़ग़ानिस्तान के लोगों का समर्थन प्राप्त होगा.''

    हम अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की मदद करना चाहते हैं और हमारा ध्यान इसी पर है क्योंकि हमें लगता है कि वे दशकों से पीड़ित हैं और 40 साल बाद शांति के लिए एक असल मौक़ा आया है.”

    शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि तालिबान नेताओं में "शांति और स्थिरता" की वकालत करने वाला कोई भी व्यक्ति एक "मित्र" था और "हम इसी वास्तविकता के साथ आगे बढ़ेंगे".

    क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान अगले कुछ दिनों में "आंख और कान खुले रखकर" घटनाओं पर नज़र रख रहा था.

    इसके बाद पाक विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के रुख़ को दोहराया कि अफ़ग़ानिस्तान में उसका "कोई पसंदीदा नहीं था".

    उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में विभिन्न जातीय समूह शामिल हैं.

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  7. क्या मुल्ला बरादर को तालिबान देगा अफ़ग़ानिस्तान की कमान?

    तालिबानी नेता मुल्ला बरादर

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    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान नेता जल्द ही अफ़ग़ान सरकार के गठन की घोषणा कर सकते हैं. नई सरकार के मुखिया तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला बरादर हो सकते हैं.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, तालिबान से जुड़े सूत्रों ने ये जानकारी दी है.

    वहीं, काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर घाटी में तालिबान के लड़ाकों और अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार के समर्थकों के बीच एक हिंसक संघर्ष जारी है.

    कहा जा रहा है कि इस समय अफ़ग़ानिस्तान की नई सरकार की तात्कालिक प्राथमिकता ये होनी चाहिए थी कि वह सूखे और 2.4 लाख अफ़ग़ान नागरिकों की जान लेने वाले संघर्ष की मार झेल रही अफ़ग़ान अर्थव्यवस्था की तबाही को रोक सके.

    बरादर को मिल सकती है टॉप पोस्ट

    रॉयटर्कस को कम से कम तीन सूत्रों ने बताया है कि इस सरकार में मुल्ला बरादर (तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख नेता), मुल्ला मोहम्मद याक़ूब (तालिबान के सह-संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे) और शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकज़ई उच्च पद संभाल सकते हैं.

    तालिबान के नेता

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    तालिबान के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है, “सभी शीर्ष नेता काबुल में पहुँच चुके हैं और नई सरकार के गठन की घोषणा से जुड़ी तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं.”

    एक अन्य तालिबानी सूत्र ने बताया है कि तालिबान के सुप्रीम धार्मिक नेता हेबतुल्लाह अखुंदज़ादा धार्मिक मामलों और शरिया क़ानून के मुताबिक़ प्रशासन चलाए जाने पर ध्यान देंगे.

    पंजशीर में संघर्ष जारी

    बीते 15 अगस्त को काबुल समेत पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद तालिबान को काबुल के उत्तर में स्थित पंजशीर घाटी में विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है.

    तालिबान लड़ाकों और सरकार समर्थित लड़ाकों के बीच जारी हिंसक संघर्ष में कुछ लोगों के मारे जाने की ख़बरें आ रही हैं.

    पंजशीर घाटी में पूर्व मुजाहिदीन कमांडर अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के नेतृत्व में हज़ारों लड़ाके और अफ़ग़ान सेना के बचे-खुचे सैनिक जमा हो गए हैं.

    दोनों पक्षों में समझौता होने की स्थितियां लगभग ख़त्म होती दिख रही हैं. दोनों ही पक्ष इसके लिए एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

    तालिबानी लड़ाके

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    सरकार में सिर्फ़ तालिबान नेता

    हालांकि, तालिबान ने एक आम सहमति वाली सरकार का गठन करने की इच्छा जाहिर की है.

    लेकिन तालिबान के एक सूत्र ने बताया है कि इस समय जिस अंतरिम सरकार का गठन हो रहा है, उसमें सिर्फ तालिबान नेता शामिल होंगे.

    एक सूत्र के मुताबिक़, इसमें 23 मंत्रालय और 12 मुसलमान विद्वानों की एक शुरा होगी.

    एक सूत्र ये भी बताया है कि छह से आठ महीनों में एक लोया जिरगा यानी महासभा का गठन करने की योजना बनाई जा रही है, जिसमें अफ़ग़ान समाज के प्रतिनिधि और शीर्ष नेता शामिल होंगे. ये सभा भविष्य की सरकार के ढांचे और अफ़ग़ानिस्तान के नए संविधान पर चर्चा करेगी.

    सभी सूत्रों ने बताया है कि अंतरिम सरकार के कैबिनेट की घोषणा जल्द हो सकती है. हालांकि, घोषणा के सटीक समय को लेकर सूत्रों के बीच जानकारी में अंतर दिखा.

    कुछ सूत्रों के मुताबिक़, शुक्रवार शाम नई सरकार के गठन का एलान हो सकता है. वहीं, कुछ सूत्रों का कहना है कि सरकार के गठन का एलान अगले हफ़्ते तक हो सकता है.

    तालिबानी नेता

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    मानवीय त्रासदी

    अफ़ग़ानिस्तान के लिए ये काफ़ी अहम होगा कि तालिबान की नई सरकार अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं और निवेशकों की नज़रों में कितनी वैधता हासिल करती है.

    क्योंकि मानवीय सहायता पहुँचाने वाले संगठनों ने अफ़ग़ानिस्तान में एक बड़ा संकट आने की चेतावनी जारी की है.

    इन संगठनों ने बताया है कि सालों तक विदेशी सहायता से मिलने वाली लाखों डॉलर की राशि पर निर्भर रहने वाली अफ़ग़ान अर्थव्यवस्था अपने पतन के क़रीब है.

    अफ़ग़ानिस्तान से निकलने की कोशिश करते लोग

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    इन एजेंसियों ने ये भी कहा है कि तालिबान के सत्ता हथियाने से पहले ही अफ़ग़ानिस्तान में कई लोग व्यापक सूखे की वजह से अपने परिवारों का पेट भरने में दिक़्क़त महसूस कर रहे हैं और अब लाखों लोग भुखमरी का शिकार हो सकते हैं.

    वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की निदेशक मेरी एलन मेकग्रोआर्टी ने काबुल में रॉयटर्स को बताया है कि “15 अगस्त से हमने संकट को तेज़ी से बढ़ते और व्यापक होते देखा है. ये देश आर्थिक पतन की ओर बढ़ रहा है.”

    इसी समय अमेरिकी सरकार ने अमेरिका में जमा अफ़ग़ानिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार, सोने एवं अन्य निवेशित पूंजी को फ्रीज़ कर दिया है.

    हालांकि, इस बीच एक ख़ुशख़बरी आई है कि वेस्टर्न यूनियन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि वह मानवीय मदद के कार्यों को जारी रखने की दिशा में अपनी सेवाएं दोबारा शुरू करने जा रही है.

    अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने की कोशिश करते आम लोग

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    पहचान का संकट

    तालिबान ने इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में 1996 से 2001 तक सरकार चलाई थी. इस दौरान तालिबान ने शरिया क़ानून लागू किया था.

    लेकिन इस बार तालिबान ख़ुद को एक उदारवादी संगठन के रूप में पेश करने की कोशिश की है. तालिबान ने कहा है कि वह मानवीय अधिकारों की रक्षा करेगा और पुराने दुश्मनों के ख़िलाफ़ बदले से भरी कार्रवाई नहीं करेगा.

    हालांकि, अमेरिका, यूरोपीय संघ समेत अन्य पक्ष इन आश्वासनों को संदेह भरी नज़रों से देख रहे हैं. इन्होंने कहा है कि सरकार को औपचारिक रूप से स्वीकार किए जाने और उसके बाद आर्थिक मदद को जारी किया जाना तालिबान के कदमों पर टिका है.

    तालिबान ने विदेशी नागरिकों एवं काबुल एयरपोर्ट पर कई दिन तक चले एयरलिफ़्ट ऑपरेशन के बाद भी पीछे छूट गए अफ़ग़ान नागरिकों को सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया है. लेकिन एयरपोर्ट बंद होने के बाद से कई अफ़ग़ान नागरिक ज़मीन के रास्ते बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं.

    इसके साथ ही हज़ारों अफ़ग़ान नागरिक अलग - अलग देशों में बनाए गए ट्रांज़िट हबों में इंतज़ार कर रहे हैं.

  8. नसीरुद्दीन शाह का तालिबान और मुसलमानों पर बयान क्यों बना विवाद का कारण?

  9. जेडीयू विधायक ट्रेन में अंडरवियर पहन घूमने पर क्या बोले

    गोपाल मंडल

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    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के विधायक गोपाल मंडल तेजस राजधानी एक्सप्रेस के एसी वन कोच में केवल अंडरवियर में घूमते दिखे थे.

    इसे लेकर यात्रियों ने आपत्ति जताई तो उन पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है. यह वाक़या गुरुवार को पटना से दिल्ली आ रही तेजस एक्सप्रेस का है.

    कहा जा रहा है कि अन्य यात्रियों ने आपत्ति जताई तो गोपाल मंडल लड़ने पर उतारू हो गए. बीच-बचाव करने के लिए आरपीएफ़ को आना पड़ा. ईस्ट-सेंट्रल रेलवे के मुख्य पीआरओ राजेश कुमार ने इस घटना की पुष्टि की है.

    पूरे मामले पर अब गोपाल मंडल ने अपना बचाव करते हुए समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''वास्तविक में मैं अंडरवियर में था. मेरा पहले से ही पेट ख़राब था. मैं जो बोलता हूँ सच बोलता हूँ, झूठ नहीं बोलता हूँ. मुझे तत्काल वॉशरूम जाने की ज़रूरत पड़ी.'' मंडल भागलपुर ज़िले में गोपालपुर से विधायक हैं.

    लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने कहा है कि ऐसी घटनाओं से बिहार की छवि ख़राब होती है. चिराग ने कहा है, ''मैं पूरे वाक़ये से अवगत नहीं हूं लेकिन लेकिन इन तस्वीरों से बिहार की छवि ख़राब होती है. मैं उम्मीद करता हूँ कि मुख्यमंत्री अपने विधायकों को पब्लिक में रहने का तरीक़ा सिखाएंगे.

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  10. तालिबान पर हमारा प्रभाव लेकिन कंट्रोल नहीं: पाकिस्तान

    तालिबान

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    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शुक्रवार को चीन की तारीफ़ करते हुए कहा कि विकासशील देशों के लिए ग़रीबी हटाने के मामले में चीन ‘रोल मॉडल’ बन गया है. इमरान ख़ान ने कहा कि चीन की तेज़ प्रगति से पिछले चार दशकों में 80 करोड़ लोगों को ग़रीबी के जाल से बाहर निकाला गया है.

    शुक्रवार को इमरान ख़ान ने चीन की तारीफ़ की और इससे पहले तालिबान ने भी चीन की तारीफ़ की थी. तालिबान ने कहा है कि चीन ने अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण में मदद का भरोसा दिया है.

    उधर पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि अफ़ग़ान तालिबान पर पाकिस्तान का प्रभाव है लेकिन कंट्रोल नहीं है. फ़वाद चौधरी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात इतने ख़राब नहीं हैं कि लोग देश छोड़कर भागें.

    उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के शरणार्थी अब भी पाकिस्तान में नहीं आए हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में स्थिरता चाहता है. चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान काबुल एयरपोर्ट को फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है.

    पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के प्रस्ताव की उपेक्षा की थी और अब उन्हें सत्ता से बेदख़ल होना पड़ा.

    फ़वाद चौधरी ने कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान में सरकार बनाना वहाँ के लोगों का काम है लेकिन पड़ोसी देश भी अफ़ग़ानिस्तान की स्थिरता में मदद करेंगे. जब सोवियत संघ ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ा था तो हमने बाक़ी समस्याओं का सामना किया था. अब अमेरिकी सैनिकों ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ा है तो फिर से पाकिस्तान पर ज़िम्मेदारी आ गई है.''

    फ़वाद चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान में अभी अफ़ग़ानिस्तान के 35 लाख शरणार्थी हैं और उनके देश के लिए यह बड़ा आर्थिक बोझ है. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अफ़ग़ान एयरलाइंस ने कहा है कि शुक्रवार घरेलू उड़ाने बहाल हो जाएंगी.

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  11. चीन हमारा सबसे अहम पार्टनर है: तालिबान

    तालिबान के प्रवक्ता ज़बिउल्लाह मुजाहिद

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    तालिबान के प्रवक्ता ज़बिउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान का आर्थिक भविष्य चीन के हाथों में है क्योंकि उसने युद्धग्रस्त देश के पुनर्निर्माण में मदद के लिए कहा है.

    इतालवी प्रकाशन ला रिपब्लिका में गुरुवार को छपे एक इंटरव्यू में मुजाहिद ने कहा, ''चीन हमारा सबसे अहम साझेदार है. हमारे लिए वो मौक़ा पैदा करने जा रहा है. चीन अफ़ग़ानिस्तान में निवेश और निर्माण के लिए तैयार है.''

    31 अगस्त तक अफ़ग़ानिस्तान से सभी विदेशी सैनिक निकल चुके हैं और तालिबान ने सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अफ़ग़ानिस्तान अभी आर्थिक और खाद्य संकट से जूझ रहा है.

    मुजाहिद ने कहा कि चीन के न्यू सिल्क रोड से अफ़ग़ानिस्तान को फ़ायदा होगा. उन्होंने कहा, ''न्यू सिल्क रोड या वन बेल्ट-वन रोड से चीन अफ़्रीका, एशिया और यूरोप को जोड़ेगा. इसके तहत नेटवर्क पोर्ट्स, रेलवे, रोड और इंडस्ट्रियल पार्क बनेंगे.''

    अफ़ग़ानिस्तान में तांबे का पर्याप्त भंडार है और अफ़ग़ानिस्तान इन खदानों को चीन के हवाले कर सकता है. मुजाहिद ने कहा कि चीन उनके यहाँ की माइंस को आधुनिक बनाएगा.

    तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि लड़कियों को यूनिवर्सिटी में पढ़ने की अनुमति होगी, नर्स के तौर पर काम भी करेंगी पुलिस में भी होंगी लेकिन कोई मंत्रालय नहीं मिलेगा.

    तालिबान ने कहा है कि रूस से उसका राजनीतिक और आर्थिक संबंध है. मुजाहिद ने कहा कि रूस ने शांति समझौते में मध्यस्थता की है और उसकी बड़ी भूमिका रही है.

    अफ़ग़ानिस्तान

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  12. किम जोंग-उन उत्तर कोरिया मेें क्यों नहीं आने दे रहे कोविड वैक्सीन

    किम जोंग-उन

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    इमेज कैप्शन, उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन

    उत्तर कोरिया को संयुक्त राष्ट्र के कोवैक्स प्रोग्राम के तहत 30 लाख कोविड वैक्सीन देने का प्रस्ताव था.

    यह कोई पहली बार नहीं है जब उत्तर कोरिया ने वैक्सीन लेने से इनकार किया है. जुलाई में भी उत्तर कोरिया ने एस्ट्राज़ेनेका की 20 लाख कोविड वैक्सीन डोज़ लेने से इनकार कर दिया था. उत्तर कोरिया को लगता है कि वैक्सीन का साइड इफेक्ट होगा.

    हालांकि उत्तर कोरिया कोविड केस को नहीं दर्ज कर रहा है. उत्तर कोरिया ने कोविड से बचने के लिए सीमा बंद रखी है. सीमा बंद होने के कारण चीन से आयात भी प्रभावित हुआ है.

    किम जोंग उन ने कहा कि इस संकट के बावजूद कोविड पाबंदियों में कोई ढील नहीं की जाएगी. इस हफ़्ते की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि उत्तर कोरिया ने 30 लाख कोविड वैक्सीन के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था.

    उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन ने अपने अधिकारियों से कहा है कि वे खाद्य आपूर्ति की समस्या को सुलझाएं और जलवायु परिवर्तन के ख़तरों को रेखांकित करें.

    पिछले साल टाइफून का फसलों पर बहुत बुरा असर पड़ा था. इसके अलावा हफ़्तों के सूखा फिर मॉनसून की भारी बारिश के कारण इस साल भी फसलें बर्बाद हुईं.

    किम जोंग-उन ने कहा है कि असामान्य मौसम के कारण ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने अधिकारियों से बारिश और सूखे से निपटने के लिए कहा है.

    किम जोंग-उन ने गुरुवार को पार्टी पोलित ब्यूरो की बैठक में ये बातें कही हैं. किम ने कहा कि हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन का ख़तरा ज़्यादा बढ़ गया है. उत्तर कोरियाई शासक ने इससे निपटने के लिए तत्काल क़दम उठाने पर ज़ोर दिया.

    किम जोंग-उन ने ये भी कहा कि देश में बाढ़ से निपटने के लिए आधारभूत ढाँचा विकसित करने की ज़रूरत है. किम ने कहा कि पेड़ लगाने से नदी के कटाव को रोका जा सकता है. उन्होंने तटबंधों को मज़बूत करने की भी बात कही है.

  13. न्यूज़ीलैंड: छह लोगों को चाकू मारने वाला हमलावर मारा गया

    न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न

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    इमेज कैप्शन, न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न

    ऑकलैंड के एक सुपरमार्केट में छह लोगों को चाकू मार ज़ख़्मी करने वाले एक 'हिंसक अतिवादी' को न्यूज़ीलैंड पुलिस ने मार दिया है.

    न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने इसे 'आतंकवादी हमला' कहा है. हमलावर श्रीलंकाई नागरिक है. सरकार का कहना है कि हमलावर पहले से ही निगरानी में था.

    बताया जा रहा है कि हमलावर इस्लामिक स्टेट आतंकवादी समूह से प्रेरित था. प्रधानमंत्री अर्डर्न ने कहा है कि उसे सुरक्षाबलों ने 60 सेकंड के भीतर मार दिया.

    शुक्रवार दोपहर बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री ने कहा, ''आज जो कुछ भी हुआ वो निंदनीय था. यह घिनौना और ग़लत था. हमलावर की पहचान गोपनीयता के कारण नहीं बताई जा रही है. वो अक्टूबर 2011 में न्यूज़ीलैंड आया था और 2016 आते-आते सुरक्षा के लिए ख़तरा बन गया.''

    पुलिस इस व्यक्ति की निगरानी लगातार कर रही थी. बताया जा रहा है कि ऐसा उसकी विचारधारा के कारण था. लेकिन अब सवाल ये भी उठ रहे हैं कि छह लोगों को ज़ख़्मी करने से पहले क्यों नहीं कार्रवाई की गई.

    पुलिस कमिश्नर एंड्रूय कोस्टर ने कहा, ''सच ये है कि आप अगर किसी व्यक्ति पर 24/7 निगरानी रख रहे हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि हमेशा उसके बगल में रहना संभव है. जितनी जल्दी हो सकता था, सुरक्षाकर्मियों ने कार्रवाई की और एक बड़ी हिंसा को टालने में कामयाबी मिली.''

    एक चश्मदीद ने न्यूज़ आउटलेट्स स्टफ़ एनज़ेड से कहा कि काफ़ी उन्मादी माहौल था. चश्मदीद के अनुसार, ''लोग भाग रहे थे. चीख रहे थे और डरे हुए थे. मैंने एक बुज़ुर्ग व्यक्ति को चाकू से ज़ख़्मी होने के बाद ज़मीन पर लेटा हुआ देखा.''

    स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार छह लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिनमें से एक की हालत बेहद गंभीर है और दो की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है.

    न्यूज़ीलैंड

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  14. ब्रेकिंग न्यूज़, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा देंगे इस्तीफ़ा

    जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा

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    जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा है कि वो फिर से पार्टी नेतृत्व का चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने संकेत दिया है कि इस महीने प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ देंगे.

    एक साल पहले ही शिंज़ो अबे के इस्तीफ़े के बाद सुगा प्रधानमंत्री बने थे. सुगा ने यह घोषणा अपनी लोकप्रियता में आई भारी कमी के बाद की है.

    जापान अब भी कोविड के कारण आपातकालीन स्थिति में है. कोविड की लहर थमती नहीं दिख रही है. जापान में अभी 15 लाख से ज़्यादा लोगो कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और टीकाकरण की रफ़्तार भी धीमी है.

    महामारी की चपेट में होने के बावजूद ओलंपिक खेलों के आयोजन से भी पीएम सुगा की लोकप्रियता में गिरावट आई है.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार सुगा की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के महासचिव ने कहा, ''आज कार्यकारिणी की बैठक में सुगा ने कहा कि वे अभी कोरोना वायरस के संक्रमण पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं और पार्टी नेतृत्व का चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं. सच कहिए तो मैं ख़ुद हैरान हूँ. यह बहुत ही दुखद है. उन्होंने बहुत अच्छा किया है लेकिन गंभीरता से सोचने के बाद यह फ़ैसला लिया है.''

    सत्ताधारी एलडीपी 29 सितंबर को पार्टी प्रमुख के लिए चुनाव कराने जा रही है. जो पार्टी प्रमुख बनता है उसी के पास देश की कमान आने की सबसे ज़्यादा संभावना होती है. संसद में एलडीपी ही बहुमत में है.

    जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा

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  15. अवनि लेखारा ने टोक्यो पैरालंपिक्स में दूसरा पदक जीता

    अवनि लेखारा

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    शूटिंग में पहला पैरालंपिक स्वर्ण पदक दिलाने वाली अवनि लेखारा ने एक बार फिर पैरालंपिक पदक जीत लिया है.

    उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक्स के महिलाओं के 50 मीटर राइफ़ल 3 पोज़िशंस के एसएच1 फ़ाइनल में कांस्य पदक जीता है.

    इसी के साथ ही भारत के टोक्यो पैरालंपिक्स में 12 पदक हो चुके हैं.

  16. पाकिस्तान के लिए पैरालंपिक्स में पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले हैदर अली कौन हैं?

    हैदर अली पहलेे रजत और कांस्य पदक जीत चुके थे

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    टोक्यो में जारी पैरालंपिक्स में पाकिस्तान के हैदर अली ने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता है.

    पैरालंपिक्स में ये पाकिस्तान का पहला स्वर्ण पदक है. हैदर अली इससे पहले पैरालंपिक्स में रजत और कांस्य पदक जीत चुके हैं.

    हैदर अली ने पुरुषों के स्टैंडिंग डिस्कस थ्रो में 55.26 मीटर की थ्रो फेंकी और पहला स्थान हासिल किया है. याद रहे कि पारंपरिक ओलंपिक की तरह ही पैरालंपिक्स में सीटेड डिस्कस थ्रो (यानी बैठकर थ्रो) का मुक़ाबला भी होता है.

    हैदर अली इससे पहले भी पैरालंपिक्स में पाकिस्तान के लिए दो पदक जीत चुके हैं. उन्होंने 2008 में रजत जबकि 2016 में कांस्य पदक हासिल किया था.

    2016 के पैरालंपिक्स के उद्घाटन समारोह में हैदर अली ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था.

    हैदर अली कौन हैं?

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    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

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    36 वर्षीय हैदर अली का संबंध गुजरांवाला से हैं और वो इस समय स्पोर्ट्स कोटे से पाकिस्तान के जल एवं विद्युत विकास प्राधिकरण से जुड़े हुए हैं.

    हैदर अली ने कुछ साल पहले बीबीसी से बात करते हुए बताया था कि जन्म से ही उनकी दाईं टांग बाईं टांग से दो इंच पतली और एक इंच छोटी है लेकिन उन्होंने कभी भी इस बारे में उदासी महसूस नहीं की बल्कि उन्हें ख़ुशी है कि वो इस क़ाबिल बने हैं कि दुनियाभर में पाकिस्तान का नाम रोशन कर सकें.

    हैदर अली ने बताया कि वो अन्य एथलीट की तरह ट्रेनिंग करते हैं और इस सिलसिले में अपने कोच अकबर अली मुग़ल का ख़ासतौर पर ज़िक्र करते हैं जो उन्हें कड़ी ट्रेनिंग कराते रहे हैं.

  17. 'मैं तालिबान से नफ़रत करती हूँ, वो कभी नहीं जीत पाएँगे'

    अदीबा क़य्यूमी

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    अफ़ग़ानिस्तान के केंद्रीय प्रांत परवान से आने वाली 21 साल की अदीबा क़य्यूमी, तालिबान को चुनौती दे रही है कि वे कभी नहीं जीत पाएँगे.

    बीबीसी से बातचीत में वे ग़ुस्से से कहती हैं, ''मैं सबसे ज़्यादा नफ़रत तालिबान से करती हूँ और मैं आप (तालिबान) से हार नहीं मानने वाली हूँ. तालिबान ने अफ़ग़ान औरतों और उनके सपनों के बीच दीवार खड़ी कर दी है और लेकिन हम ये दीवार अपनी आवाज़ के ज़रिए तोड़ कर रहेंगे.''

    15 अगस्त को तालिबान ने काबुल को अपने नियंत्रण में ले लिया था. उसके बाद से एयरपोर्ट पर लोगों के भागने का मंजर, दिल दहला देने वाली तस्वीरें और कहानियाँ लगातार सामने आ रही हैं.

    अदीबा क़य्यूमी कहती हैं कि जब उन्हें इस ख़बर के बारे में पता चला तो उनका पूरा परिवार रोने लगा और उन्होंने अपनी बहन को फ़ोन किया, जो अफ़ग़ानिस्तान में ही है.

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  18. पीएफ़ खाते पर टैक्स को लेकर आपको कितनी चिंता करनी चाहिए?

    नोट

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    आपकी भविष्य निधि या प्रॉविडेंट फ़ंड पर टैक्स लगने का सिलसिला शुरू हो गया है.

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले बजट में एलान किया था कि प्रॉविडेंट फ़ंड खाते में सालाना ढाई लाख रुपए से ऊपर की रकम जमा हुई तो उसके ब्याज पर अब टैक्स लगेगा.

    हालांकि बाद में इस पर सफ़ाई आई और बताया गया कि सरकारी कर्मचारियों के लिए और जिन कर्मचारियों के खाते में उनके इंप्लॉयर की तरफ़ से कोई पैसा जमा नहीं किया जाता उन्हें सालाना पांच लाख रुपए तक की रकम पर टैक्स से छूट मिलेगी.

    जिस दिन से यह एलान हुआ तभी से इस पर तरह तरह के सवाल उठ रहे थे.

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  19. पंजशीर की लड़ाई में तालिबान आगे या विरोधी लड़ाके?

    पंजशीर

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    अफ़ग़ानिस्तान की पंजशीर घाटी में तालिबान और विरोधी लड़ाकों के बीच भारी संघर्ष की ख़बरें सामने आ रही हैं.

    तालिबान का कहना है कि उसने कुछ क्षेत्रों को क़ब्ज़े में ले लिया है और नेशनल रेसिस्टेंस फ़्रंट को ‘भारी’ नुक़सान पहुंचाया है.

    हालांकि, फ़्रंट का कहना है कि उसने घाटी में दाख़िल होने वाले सभी रास्तों पर नियंत्रण रखा हुआ है और तालिबान को 100 के क़रीब लड़ाकों का नुक़सान हुआ है.

    पंजशीर इकलौता प्रांत है जो अभी तक इस्लामी समूह के क़ब्ज़े में नहीं है और ऐसा माना जा रहा है कि हज़ारों विरोधी लड़ाके वहां पर इकट्ठा हैं.

    इस विरोधी बल में पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह, अफ़ग़ान सुरक्षा बल के पूर्व सदस्य और स्थानीय मिलिशिया शामिल हैं. इनका नेतृत्व वहां के कबीलाई नेता अहमद मसूद कर रहे हैं.

    मसूद के पिता अहमद शाह मसूद ने 1980 में रूस से और 1990 में तालिबान से पंजशीर को बचाए रखा था.

    तालिबान ने क्या कहा

    तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद

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    इमेज कैप्शन, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद

    रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि लड़ाके पंजशीर घाटी में दाख़िल हुए थे क्योंकि बातचीत नाकाम रही थी.

    बीबीसी फ़ारसी ने विरोधी दल के प्रवक्ता फ़हीम दश्ती के हवाले से कहा है कि बातचीत इसलिए नाकाम रही क्योंकि दोनों पक्षों का अलग मत था.

    उन्होंने कहा कि वे तालिबान से दो मोर्चों पर लड़ रहे हैं और 350 तालिबान लड़ाके मारे जा चुके हैं और कई पकड़ लिए गए हैं.

    हालांकि, दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि कर पाना बहुत मुश्किल है.

  20. ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना संक्रमण के 45,352 नए मामले, 366 मौतें

    स्कूल

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    भारत में शुक्रवार को बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के 45,352 नए मामलों का पता चला है जबकि इसी समय के दौरान 366 लोगों की मौत हुई है.

    इस बार कोरोना के मामलों में इतना उछाल केरल के कारण ही है. केरल में बीते 24 घंटों में 32,097 मामले सामने आए हैं जबकि 188 लोगों की मौत हुई है.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसमें यह भी बताया है कि एक दिन में 34,791 लोग इस बीमारी से ठीक भी हुए हैं और देश में अब रिकवरी रेट 97.45%हो चुका है.

    वहीं देश में अब तक 67 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की ख़ुराक भी दी जा चुकी हैं.