काबुल: एयरपोर्ट के बाहर धमाके में कम से कम 60 की मौत, 140 ज़ख़्मी

काबुल एयरपोर्ट के पास हुए धमाके में कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है और कम से कम 140 लोग ज़ख़्मी हुए हैं. कथित इस्लामिक स्टेट ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

लाइव कवरेज

कीर्ति दुबे, अनंत प्रकाश and विभुराज

  1. काबुल धमाके में 60 लोगों मौत 140 घायल, दुनिया भर में खलबली

    एयरपोर्ट गेट पर हुए धमाके के बाद उड़ता धुआं

    इमेज स्रोत, EPA/AKHTER GULFAM

    इमेज कैप्शन, एयरपोर्ट गेट पर हुए धमाके के बाद उड़ता धुआं

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर गुरुवार शाम हुए धमाकों में 60 लोगों की मौत हो गई है और 140 लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

    इस हमले में पहला धमाका एयरपोर्ट के एबी गेट पर हुआ जहां पर कई अफ़ग़ान शरणार्थी मौजूद थे.

    इसके साथ ही दूसरा धमाका एबी गेट से कुछ दूरी पर स्थित बैरन होटल पर या उसके नज़दीक हुआ है.

    वहीं, पेंटागन ने बताया है कि इस धमाके में अमेरिकी लोगों की भी मौत हुई है.

    काबुल एयरपोर्ट

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    ख़ुफिया एजेंसियों ने दी थी चेतावनी

    बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता फ्रैंक गार्डनर ने बताया है कि इस हमले में धमाके और गोलीबारी का इस्तेमाल किया गया है जो कि चरमपंथियों की एक पारंपरिक रणनीति है.

    उन्होंने बताया हैकि पिछले कई सालों और हालिया महीनों में अफ़ग़ानिस्तानी शहरों में होने वाले कई हमलों में इस रणनीति का इस्तेमाल किया गया है, इसके तहत पहले एक आत्मघाती हमलावर धमाका करता है.

    ख़ुफिया एजेंसियां बिल्कुल इसी तरह के हमले की चेतावनी दे रही थीं.

    काबुल एयरपोर्ट

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    अफ़ग़ान लोगों ने नहीं सुनी चेतावनी

    इस हमले से कुछ समय पहले ब्रिटेन, अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया ने इस तरह के हमले की चेतावनी जारी की थी.

    हालांकि, बस किसी तरह काबुल छोड़ने की कोशिशों में लगे अफ़ग़ान लोगों ने इन चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया और वे गेट पर डटे रहे.

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    ब्रितानी सैनिक सुरक्षित

    ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट में कहा है कि इस हमले में अब तक ब्रितानी सेना और सरकारी कर्मचारियों के घायल होने की सूचना नहीं मिली है.

    काबुल एयरपोर्ट

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    कई अमेरिकी घायल

    हालांकि, इस धमाके में अमेरिकी लोगों के घायल होने की पुष्टि की जा रही है.

    पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया है कि काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर गुरुवार शाम हुए धमाके में अमेरिकी लोगों की मौत हुई है.

    उन्होंने ट्वीट करके जानकारी दी है कि, "हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि एबी गेट पर हुआ धमाका एक जटिल हमले का नतीजा था जिसमें कई अमेरिकी और आम लोगों की मौत हुई है. हम इस बात की भी पुष्टि कर सकते हैं कि एबी गेट से थोड़ी दूरी पर स्थित बैरन होटल पर या उसके पास एक अन्य धमाके को अंजाम दिया गया है. हम आगे जानकारी देते रहेंगे."

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  2. काबुल एयरपोर्ट पर दो धमाकों के बाद हुई गोलीबारी, अमेरिकी नागरिकों की मौत

    एयरपोर्ट गेट पर हुए धमाके के बाद उड़ता धुआं

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    पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने बताया है कि काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर गुरुवार शाम हुए धमाके में अमेरिकी लोगों की मौत हुई है.

    उन्होंने ट्वीट करके जानकारी दी है कि, "हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि एबी गेट पर हुआ धमाका एक जटिल हमले का नतीजा था जिसमें कई अमेरिकी और आम लोगों की मौत हुई है. हम इस बात की भी पुष्टि कर सकते हैं कि एबी गेट से थोड़ी दूरी पर स्थित बैरन होटल पर या उसके पास एक अन्य धमाके को अंजाम दिया गया है. हम आगे जानकारी देते रहेंगे."

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    बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील ने बताया है कि एयरपोर्ट के बाहर दो धमाके हुए हैं और दूसरे धमाके के बाद गोलियां चलाई गयीं.

    ये दोनों ही धमाके एयरपोर्ट के एबी गेट इलाके में जहां पर पिछले कई दिनों से भारी मात्रा में अफ़ग़ान शरणार्थी मौजूद हैं.

    फ्रांसीसी राजदूत ने गेट से दूर हटने के लिए कहा

    फ्रांसीसी राजदूत डेविड मारटिनन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे एयरपोर्ट गेट से दूर हट जाएं क्योंकि एक अन्य धमाके का ख़तरा बना हुआ है.

    उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है, “हमारे अफ़ग़ान दोस्तों के लिए – अगर आप एयरपोर्ट गेट के नज़दीक हैं तो तत्काल दूर हटें और किसी चीज के पीछे छिपें, एक दूसरे धमाका संभव है.”

    फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने सचेत रहने को कहा

    इसके साथ ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति बहुत ही ज़्यादा ख़राब हो गयी है.

    उन्होंने कहा है कि इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि स्थिति ऐसी न हो जाए जिस पर हम नियंत्रण ही न रख सकें.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल धमाके में कम से कम 11 लोगों की मौत: तालिबान

    काबुल एयरपोर्ट पर बचाव अभियान की एक तस्वीर

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    इमेज कैप्शन, काबुल एयरपोर्ट पर धमाके से पहले की एक तस्वीर

    तालिबान से जुड़े एक अधिकारी ने बताया है कि गुरुवार शाम हुए धमाके में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है.

    इस अधिकारी ने बताया है कि मरने वालों में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इसके साथ ही कई लोग घायल हुए हैं जिनमेें तालिबानी लड़ाके भी शामिल हैं.

    हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकी है.

  4. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए वात्सल्य राय से

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  5. काबुल एयरपोर्ट के बाहर धमाके के बाद गोलियां चलने की ख़बर

    काबुल एयरपोर्ट

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    काबुल एयरपोर्ट के बाहर हुए धमाके को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसके साथ ही ज़मीन पर गोलियां चलने की ख़बरें आ रही है.

    अब तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ये धमाका एबी गेट पर हुआ है जहां पर ब्रितानी सैनिक जमा थे.

    एक अमेरिकी अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है कि ये एक आत्मघाती धमाका था.

    काबुल हवाई अड्डा

    ये दरवाजा एयरपोर्ट के उन तीन दरवाजों में शामिल है जिन्हें आतंकी हमले की चेतावनी आने के बाद बंद कर दिया गया था.

    व्हाइट हाउस ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को इस बारे में सूचना दी जा चुकी है.

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, काबुल एयरपोर्ट के बाहर धमाका, पेंटागन ने की पुष्टि

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    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बाहर गुरुवार शाम एक धमाका होने की ख़बर आ रही है.

    पेंटागन प्रवक्ता जॉन किर्बी ने इस धमाके की पुष्टि करते हुए बताया है कि “हम काबुल हवाई अड्डे के बाहर धमाके की पुष्टि कर सकते हैं. इस समय हताहतों की संख्या स्पष्ट नहीं है. हमें जैसे ही अतिरिक्त जानकारी देने की स्थिति में होंगे, वैसे ही हम जानकारी उपलब्ध कराएंगे.

  7. अफ़ग़ानिस्तान: संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने क्यों की पाकिस्तान की तारीफ़

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    संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के डेविड बिसली ने अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय सहायता पहुंचाने के काम में पाकिस्तानी मदद की सराहना की है.

    उन्होंने कहा कि काबुल से लौटने वाले क्षतिग्रस्त विमानों की मरम्मत में मदद देकर पाकिस्तान ने इंसानियत को इंसानियत से जोड़ा है.

    इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर गुरुवार को उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड ट्विटर पर पोस्ट किया, "काबुल से लौटने वाले हमारे क्षतिग्रस्त विमानों की मरम्मत की गई है. विश्व खाद्य कार्यक्रम अब इस्लामाबाद से काबुल और अफ़ग़ानिस्तान की अन्य जगहों पर मानवीय सहायता पहुंचा सकेगा. इससे हम अफ़ग़ान लोगों की ज़रूरत पूरा करने की दिशा में अपनी मदद बढ़ा पाएंगे."

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने विमान की मरम्मत में वाकई मदद की जिससे वे फिर से उड़ान भरने लायक हो सके.

    एक यात्री विमान की तरफ़ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "हम इस्लामाबाद से काबुल के लिए एक टेस्ट फ़्लाइट करने जा रहे थे. ये एक एयर ब्रिज की तरह काम करता. ये उम्मीद के मुताबिक़ अच्छा रहा."

    उन्होंने कहा कि विश्व खाद्य कार्यक्रम अफ़ग़ानिस्तान से संयुक्त राष्ट्र और मानवीय सहायता में लगे अन्य लोगों को निकलाने में मदद कर रहा है.

    "अफ़ग़ानिस्तान के भीतर जो भी बर्बादी हुई है, हम वहां ज़िंदगी को फिर से पटरी पर लाना चाहते हैं. हम परेशानी में जी रहे लोगों को उम्मीद देना चाहते हैं."

  8. काबुल पर तालिबान का कब्ज़े के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार: अमरुल्ला सालेह

    अमरुल्ला सालेह

    अफ़ग़ानिस्तान के पहले उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जलमई खलीलजाद और पाकिस्तान तालिबान के काबुल पर कब्ज़े के लिए जिम्मेदार हैं.

    बीबीसी न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने तालिबान के जरिए अमेरिका को ब्लैकमेल किया और अमेरिका ने अफ़ग़ान सरकार को वापसी से पहले तैयारी करने का समय नहीं दिया.

    अमरुल्ला सालेह ने कहा कि अमेरिका ने रातों-रात हवाई हमलों के जरिए अफ़ग़ान सेना की मदद करना बंद कर दिया.

    "हम अपने सैनिकों तक नहीं पहुंच पाए हैं, यही वजह है कि उन्होंने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. अमेरिका कभी भी खुद को इस बोझ से अलग नहीं कर पाएगा."

    अमरुल्ला सालेह अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी की सरकार में पहले उपराष्ट्रपति थे. अशरफ़ ग़नी के देश छोड़ने के बाद उन्होंने दावा किया था कि वह संवैधानिक रूप से अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हैं.

  9. तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां ने दिया बेटे को जन्म

    तृणमूल कांग्रेस की सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां

    इमेज स्रोत, ANI

    तृणमूल कांग्रेस की सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां ने कोलकाता के एक निजी अस्पताल में गुरुवार दोपहर बेटे को जन्म दिया.

    समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ नुसरत जहां को बुधवार शाम पार्क स्ट्री के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

    नुसरत और नवजात शिशु दोनों ही स्वस्थ बताए जा रहे हैं.

    नुसरत जहां के पति निखिल जैन ने कहा, "भले ही हमारे बीच मतभेद हों लेकिन मैं नवजात शिशु और उसकी मां को अपनी शुभकामनाएं देता हैं. मेरी कामना है कि बच्चे का भविष्य उज्ज्वल हो."

  10. तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान में संगीत हराम होगा: ज़बीहुल्लाह मुजाहिद

    अफ़ग़ानिस्तान, संगीत

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    तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि नए निज़ाम में एक बार संगीत की इजाजत नहीं दी जाएगी. ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा कि "इस्लाम में संगीत हराम है... लेकिन हम उम्मीद कर रहे हैं कि हम लोगों पर दबाव डालने के बजाय उन्हें हम ये समझा सकेंगे कि ऐसी चीज़ें वे न करें."

    नब्बे के दशक में तालिबान की हुकूमत के दौरान अफ़ग़ानिस्तान में टेलीविज़न, सिनेमा और संगीत पर कड़ाई से प्रतिबंध था और इन नियमों का उल्लंघन करने पर गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते थे.

    लेकिन तालिबान के सत्ता से बेदखल होने के बाद देश में संगीत की फिज़ा गुलज़ार हो गई. कंसर्ट्स और म्यूज़िक फ़ेस्टिवल का आयोजन किया जाने लगा और अफ़ग़ानिस्तान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ म्यूज़िक की स्थापना की गई.

    अफ़ग़ानिस्तान, संगीत

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    इस संस्था के पास एक महिला कलाकारों का ऑर्केस्ट्रा है जिसने देश-विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन किया है. ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने न्यूयॉर्क टाइम्स को ये भी बताया कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जताई जा रही चिंताएं बेबुनियाद हैं.

    उन्होंने कहा, "महिलाओं को हमेशा अपने घरों में नहीं रहना होगा या उन्हें अपना चेहरा नहीं ढंके रखना होगा और पुरुष अभिभावक के साथ बाहर जाने की इजाजत केवल तीन दिनों या उससे अधिक की यात्रा पर ही लागू होगी."

    उन्होंने कहा कि महिलाएं आख़िरकार रोज़मर्रा की अपनी आम ज़िंदगी में लौट सकेंगी. मंगलवार को ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने महिलाओं को आगाह करते हुए कहा था कि जब तक कि उनकी सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम नहीं हो जाए, उन्हें अपने घरों की चारदीवारी के भीतर ही रहना चाहिए क्योंकि कुछ तालिबान लड़ाकों को इस बात की ट्रेनिंग नहीं है कि वे महिलाओं को नुक़सान न पहुंचाएं या उन्हें परेशान न करें.

    उन्होंने कहा था, "हम इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि हमारे लड़ाके नए हैं और उन्हें महिलाओं के साथ किस तरह से पेश आना चाहिए, इसकी तालीम नहीं है, वे महिलाओं के साथ बदतमीजी कर सकते हैं."

  11. कीनिया में जानवरों की अनोखी गिनती हो रही

    वीडियो कैप्शन, कीनिया में जानवरों की अनोखी गिनती हो रही

    कीनिया में एक ऐतिहासिक गणना की मुहिम के तहत पूरे देश के ज़मीन और पानी में रहने वाले जानवरों की गिनती की जा रही है.

    ऐसा वाइल्डलाइफ़ टूरिज़्म और संरक्षण के की नई योजनाओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.

    कीनिया में कई विलुप्त होने वाले वन्य जीव पाए जाते हैं तो किस तरह हो रही है इनकी गणना. देखिए, बीबीसी की इस रिपोर्ट में...

  12. भारत में हिंदू क्यों फंसे थे और इतने दिन बाद पाकिस्तान क्यों लौट रहे हैं?

    वीडियो कैप्शन, भारत में हिंदू क्यों फंसे थे और इतने दिन बाद पाकिस्तान क्यों लौट रहे हैं?

    ये 46 पाकिस्तानी हिंदू क़रीब डेढ़ साल बाद अपने वतन लौट रहे हैं. ये लोग कोरोना के चलते लगी पाबंदी की वजह से बीते डेढ़ साल से भारत में फंसे थे.

    पाकिस्तान से ये लोग धार्मिक यात्रा पर भारत आए थे. 25 अगस्त को अटारी-वाघा बॉर्डर से वो पाकिस्तान वापस लौटे.

    इसके पहले 24 अगस्त को पाकिस्तानी इमिग्रेशन ने उनके प्रवेश पर रोक लगा दी थी. क्योंकि उनके पास कोरोना की आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट नहीं थी.

  13. तालिबान के कब्ज़े पर अल क़ायदा ने दी बधाई, मुसलमानों से क्या कहा?

    वीडियो कैप्शन, तालिबान के कब्ज़े पर अल क़ायदा ने दी बधाई, मुसलमानों से क्या कहा?

    अल-क़ायदा ने तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान पर दोबारा क़ब्ज़ा करने को लेकर बधाई दी है. अल-क़ायदा की दक्षिण एशिया इकाई ने एक बयान जारी किया है और अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण का स्वागत किया है.

    अल-क़ायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (एक्यूआईएस) नाम वाले इस समूह ने अपने बधाई संदेश में दुआ की है कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में कामयाबी के साथ शरिया क़ानून लागू कर पाएं.

    उर्दू भाषा में लिखे इस बयान को अल-क़ायदा का समर्थन करने वाले एक चैनल ने मैसेजिंग ऐप टेलिग्राम पर 23 अगस्त को शेयर किया.

  14. पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा पर डर, आतंक और सदमे का माहौल

    स्पिन बोल्डाक इलाके में सीमा पार करते लोग

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    शुमाइला जाफरी

    बीबीसी न्यूज़

    मैं इस समय पाक - अफ़ग़ान सीमा पर स्थित स्पिन बोल्डाक क्रॉसिंग पर हूं. सामान्य रूप से, ये सीमा पर स्थित सबसे ज़्यादा व्यस्त मार्गों में गिना जाता है. लेकिन आज यहां हज़ारों लोग सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं.

    कुछ शरणार्थियों ने बताया है कि वे व्यापार प्रभावित होने की वजह से अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जा रहे हैं, कुछ लोगों ने बताया है कि वे छात्र थे और तालिबान के शासन में अपनी पढ़ाई को लेकर चिंतित थे.

    लेकिन उत्तरी ज़िलों से आने वाले कई लोगों ने बताया है कि वे भाग रहे हैं कि क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान में उनकी जान को ख़तरा है.

    कई लोगों के पाकिस्तान में दोस्त, परिवार और रिश्तेदार हैं. कुछ लोगों के यहां पर भी मकान हैं. ऐसे में एक बार सीमा पार करने के बाद वे अलग – अलग शहरों में चले जाएंगे.

    यहां पर हमारी मुलाक़ात अफ़ग़ानिस्तान के एक पूर्व सैनिक के बेटे से भी हुई जिन्होंने बताया कि तालिबान ने आम माफ़ी देने वाला वादा किया है लेकिन वह ये जोख़िम उठाने को तैयार नहीं हैं.

    अल्पसंख्यक समुदाय हज़ारा के कुछ शरणार्थियों ने बताया है कि यात्रा के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ न होने के बावजूद उन्हें इंसानियत के नाम पर आने दिया गया है.

    इस समुदाय से जुड़ी एक महिला ने बताया, “तालिबान हमारे प्रति काफ़ी सख़्त हैं. हम हम ठीक हालत में हैं. इसीलिए हम अपने घर छोड़कर यहां आए. जब हमने अपने घर छोड़े थे तो हम काफ़ी आतंकित और सदमे में थे.”

    “यहां सीमा पर बैठने या रहने के लिए कोई जगह नहीं है. उन्हें हमारे लिए कुछ कैंप लगाने चाहिए. पिछली सरकार के समय स्थिति अच्छी थी. अब हमारे पास छोड़कर जाने के सिवा कोई विकल्प नहीं है.”

  15. तालिबान ने पाकिस्तान को अपना दूसरा घर बताया, भारत-पाक संबंधों पर भी बोले जबीबुल्लाह मुजाहिद

    तालिबानी प्रवक्ता जबीबुल्लाह मुजाहिद

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    तालिबान के प्रवक्ता जबीबुल्लाह मुजाहिद ने बुधवार को ‘पाकिस्तान को तालिबान का दूसरा घर’ बताया है.

    पाकिस्तानी न्यूज़ वेबसाइट एआरवाई न्यूज़ टीवी के मुताबिक़, मुजाहिद ने कहा है कि पाकिस्तान दूसरा घर है और अपने घर के ख़िलाफ़ कुछ नहीं होने देंगे.

    एआरवाई न्यूज़ टीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में मुजाहिद ने अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी संगठनों की उपस्थिति, भारत प्रशासित कश्मीर और इस्लामिक स्टेट से लेकर भारत-पाक संबंधों पर बयान दिए हैं.

    मुजाहिद ने अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट और तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तान) के मुद्दे पर कहा, “हम अपनी ज़मीन किसी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं होने देंगे.”

    उन्होंने कहा कि "इस संबंध में हमारी नीति स्पष्ट है. दाएश (ISIS) की अफगानिस्तान में कोई मौजूदगी नहीं है."

    तालिबान इससे पहले कई मौकों पर ये कह चुका है कि वह अपनी ज़मीन पर चरमपंथी तत्वों को सक्रिय नहीं होने देगा.

    लेकिन चीन समेत दुनिया के कई मुल्क इस दावे को संदेह की नज़र से देखते हैं.

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    'भारत - पाक मिल-बैठकर सुलझाएं मुद्दे'

    मुजाहिद ने भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी विवाद पर कहा है कि दोनों देशों को एक साथ बैठकर ये मसला सुलझा लेना चाहिए.

    मुजाहिद बोले, “पाकिस्तान और भारत को बैठकर अपने पुराने सभी मामलों को हल कर लेना चाहिए. क्योंकि दोनों देश एक दूसरे के पड़ोसी हैं और दोनों के हित एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.”

    भारत प्रशासित कश्मीर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार को “विवादित इलाके” को लेकर सकारात्मक रुख रखने की ज़रूरत है.

    इसके अलावा आने वाले समय में भारत के साथ संबंधों पर मुजाहिद ने कहा है कि “तालिबान चाहता है कि भारत सरकार अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीति बनाए.”

    इसी बीच रेडियो पाकिस्तान ने बताया है कि तालिबानी नेता शहाबुद्दीन दिलवर ने तीस लाख अफ़ग़ान शरणार्थियों को शरण देने के लिए शुक्रिया अदा किया है.

    उन्होंने कहा है कि तालिबान सभी देशों के साथ आपसी सम्मान के आधार पर शांतिपूर्ण संबंध चाहता है.

  16. अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को वापस निकालने की कोशिशें 31 अगस्त को ख़त्म नहीं होंगी: अमेरिका

    अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन

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    अमेरिका ने कहा है कि वो 31 अगस्त की डेडलाइन के बाद अफ़ग़ानिस्तान में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को बनाए रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है.

    अमेरिका और तालिबान दोनों ने ही कहा है कि अमेरिकी सेना 31 अगस्त अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकल जाएगी.

    बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा, "अगले कुछ दिनों तक अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रहे अमेरिकी नागरिकों, अन्य अफ़ग़ान सहयोगियों और साझीदार देशों के लोगों को वहां से बाहर निकालने और उनकी सुरक्षा पर फोकस रहेगा."

    "भले ही हम ये पसंद करें या न करें लेकिन तालिबान के साथ काम करना महत्वपूर्ण है क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान के बड़े हिस्से पर उनका नियंत्रण है ताकि अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के लिए इच्छुक लोगों को वहां से निकालना सुनिश्चित किया जा सके. हम इस अभियान की शुरुआत से ही इस पर तवज्जो दे रहे हैं."

    एंटनी ब्लिंकेन के अनुसार, अमेरिका पिछले कुछ सालों से तालिबान के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है ताकि अफ़ग़ानिस्तान के संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ा जा सके.

    तालिबान, अफ़ग़ानिस्तान

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    उन्होंने कहा, "अभी भी बातचीत जारी है. तालिबान और अफ़ग़ान हुकूमत के पूर्व सदस्यों के बीच इस सिलसिले में संपर्क बना हुआ है. उदाहरण के लिए सत्ता के हस्तांतरण और सबकी भागीदारी वाली सरकार के गठन पर बात हो रही है. मुझे लगता है कि इन कोशिशों को समर्थन देना हमारे हित में ही है."

    "अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान हुकूमत के साथ अमेरिकी संपर्क को आने वाले समय में केवल एक ही कसौटी पर परखा जाएगा और वो है अमेरिकी हितों का मुद्दा... और क्या हमें इससे मदद मिली या नहीं."

    अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को लाने के अभियान पर उन्होंने कहा, "31 अगस्त के बाद भी जोखिम वाले लोगों को देश छोड़ने की अनुमति दी जाएगी."

    उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग अफ़ग़ानिस्तान से निकलना चाहते हैं, उनकी मदद करने के अमेरिकी प्रयास इस तारीख को खत्म नहीं होंगे.

    विदेश मंत्री ने कहा कि एक हजार अमेरिकी नागरिक या शायद अधिक अभी भी अफ़ग़ानिस्तान में हो सकते हैं और प्रशासन उनका पता लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है.

  17. नारायण राने के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर क्या बोले शिवसेना नेता संजय राउत

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    'महाराष्ट्र की राज्य सरकार नारायण राने के ख़िलाफ़ कार्रवाई करके बदले की राजनीति साध रही है', बीजेपी के इस आरोप पर शिवसेना नेता संजय राउत ने गुरुवार को कहा कि अनिल देशमुख और प्रताप सरनाइक पर सतर्कता निदेशालय के छापे बदले की राजनीति हैं.

    केंद्रीय मंत्री नारायण राने के इस बयान पर कि 'महाराष्ट्र को पश्चिम बंगाल नहीं बनने देंगे', संजय राउत ने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य के अपमान को लोग माफ नहीं करेंगे.

    बीजेपी की आलोचना करते हुए संजय राउत ने कहा, "भाजपा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हार के बाद राज्य से भागना पड़ा."

    उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "इस बात का क्या मतलब हुआ कि महाराष्ट्र को पश्चिम बंगाल नहीं बनने दिया जाएगा? आप (बीजेपी) बंगाल चुनाव हार गए हैं, ये बात आपको ध्यान में रखनी चाहिए. आपको वहां मैदान छोड़ना पड़ा."

    उन्होंने आगे कहा, "पश्चिम बंगाल इस देश का शेर है. ये क्रांतिकारियों की जन्मभूमि है. लाल बाल पाल की त्रयी में एक शख़्सियत पश्चिम बंगाल से थी. आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह से एक देश का अपमान करेंगे तो देश आपको कभी भी माफ नहीं करेगा."

  18. तालिबान लड़ाकों ने वीडियो बनाने पर अफ़ग़ान पत्रकारों को बंदूकों से पीटा

    बंदूक के साथ तालिबान लड़ाका

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    अफ़ग़ान समाचार चैनल 'टोलो न्यूज़' ने बताया है कि तालिबान ने उनके कैमरामैन और रिपोर्टर के साथ मारपीट की है. बताया गया है कि ये दोनों पत्रकार काबुल में बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर एक ख़बर बना रहे थे.

    टोलो न्यूज़ ने बताया है कि ये दोनों पत्रकार ज़ैर याद और बीस मजीदी अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के शहर-ए-नीव इलाके में बेरोजगार लोगों और मजदूरों का वीडियो बना रहे थे जब तालिबान ने अस्पष्ट कारणों की वजह से उनके साथ मारपीट की.

    जैर याद बताते हैं, "हमने अपने रिपोर्टर्स बैज (आईडी कार्ड) दिखाए लेकिन उन्होंने आकर हमें थप्पड़ मारे और अपनी बंदूकों से हमें पीटा, उन्होंने हमारे मोबाइल और काम करने के औजार छीन लिए."

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    टोलो न्यूज़ के मुताबिक़, "अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से कई पत्रकारों के साथ मारपीट हो चुकी है."

    हालांकि, तालिबानी संस्कृति आयोग के उपाध्यक्ष अहमदुल्लाह वासिक़ ने इस और ऐसे सभी मामलों की जाँच कराने का आश्वासन दिया है.

    उन्होंने टोलो न्यूज़ से कहा है कि उन्होंने याद और मजीदी के साथ हुई घटना को गंभीरता से लिया है और इसकी जाँच कराई जाएगी.

    इसके साथ ही उन्होंने कहा है, "सिर्फ ये मसला नहीं, हम पत्रकारों के काम में बाधा डालने वाली हर घटना की जाँच करके उसका समाधान करेंगे."

  19. तालिबान के सत्ता क़ब्ज़ाने पर सऊदी अरब की चुप्पी का राज़ क्या?

    वीडियो कैप्शन, तालिबान के सत्ता कब्ज़ाने पर सऊदी अरब की चुप्पी का राज़ क्या?

    साल 1996 में जब तालिबान अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर क़ाबिज़ हुआ, तब सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान- वो तीन देश थे, जिन्होंने सबसे पहले तालिबान को मान्यता दी थी.

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस वाकये का ज़िक्र किया और कहा कि उसने ग़ुलामी की ज़ंजीरों को तोड़ दिया है.

    दूसरी ओर यूएई ने अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी को शरण दी है. संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि उन्होंने ''मानवीय आधार पर राष्ट्रपति ग़नी और उनके परिवार का अपने देश में स्वागत किया है.''

    इसके अलावा तालिबान से जुड़ा उनका कोई बड़ा बयान नहीं आया है. सऊदी अरब की सरकार ने इतना ज़रूर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से उसके सभी राजनयिक सुरक्षित रियाद लौट आए हैं.

    सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने ये फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान की अस्थिर स्थिति को देखते हुए किया. लेकिन इसके अलावा पूरे मामले पर सऊदी अरब ने चुप्पी साध रखी है.

  20. पंजशीर घाटी को जीतना इतना मुश्किल क्यों है?

    वीडियो कैप्शन, पंजशीर घाटी को जीतना इतना मुश्किल क्यों है?

    अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने अपना क़ब्ज़ा कर लिया है.

    लेकिन एक इलाका ऐसा है जहां से तालिबान के ख़िलाफ़ नेता एकजुट हो रहे हैं.

    यह इलाका है पंजशीर की घाटी.

    यहां अहमद मसूद के नेतृत्व में तालिबान विरोधी नेता एकजुट होकर तालिबान का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं.

    ज़्यादा जानकारी दे रहे हैं बीबीसी संवाददाता ख़ुदा-ए-नूर नासिर.