सीएए नियम लागू होने की अधिसूचना पर ओवैसी ने कैसी 'क्रोनोलॉजी' समझाई

ओवैसी ने कहा, धर्म के नाम पर जिसका भी उत्पीड़न हो रहा है उसे राजनीतिक शरण दीजिये लेकिन नागिरकता का आधार धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होनी चाहिए.

लाइव कवरेज

चंदन शर्मा and दीपक मंडल

  1. सीएए नियम लागू होने की अधिसूचना पर ओवैसी ने कैसी 'क्रोनोलॉजी' समझाई

    असदुद्दीन औवैसी

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, असदुद्दीन औवैसी (फाइल फोटो)

    सीएए कानून से जुड़े नियमों की अधिसूचना जारी होने के बाद एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन औवैसी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा है, ''आप क्रोनोलॉजी समझिए. पहले इलेक्शन सीज़न आएगा फिर सीएए रूल्स आएंगे. सीएए के ख़िलाफ़ हमारा विरोध बरक़रार है. ये विभाजनकारी क़ानून है और गोडसे के विचारों पर बना है. वो विचार जो भारत के मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना देना चाहते हैं.''

    उन्होंने लिखा है, ''धर्म के नाम पर जिसका भी उत्पीड़न हो रहा है उसे राजनीतिक शरण दीजिये लेकिन नागिरकता का आधार धर्म या राष्ट्रीयता नहीं होनी चाहिए."

    "सरकार बताए कि उसने इस नियम को पांच साल तक टाले क्यों रखा और अब इसे क्यों लागू कर रही है. एनपीआर-एनआरसी के साथ ही सीएए का मक़सद मुस्लिमों का टारगेट करना है. इसका और कोई दूसरा मक़सद नहीं है.''

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    ओवैसी ने लिखा है कि जो लोग सीएए, एनपीआर और एनआरसी के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे थे उनके लिए अब एक और बार इसके ख़िलाफ़ उतरने के अलावा और कोई चारा नहीं है.

  2. अल-क़ायदा के नेता बतारफ़ी की मौत की ख़बर, अमेरिका ने रखा था 50 लाख डॉलर का ईनाम

    ख़ालिद बतारफ़ी

    इमेज स्रोत, AQAP

    इमेज कैप्शन, ख़ालिद बतारफ़ी (फाइल फोटो)

    अल-क़ायदा की यमन शाखा ने अपने नेता ख़ालिद बतारफ़ी की मौत की ख़बर दी है. हालांकि उनकी मौत किन हालात में हुई इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है.

    अरब प्रायद्वीप में अल-क़ायदा (एक्यूएपी) के एक वीडियो में दिख रहा है कि बतारफ़ी का शव कफ़न में लिपटा है. उनके शरीर पर संगठन का बैनर लिपटा है. संगठन से जुड़े एक सीनियर सदस्य ने हालांकि ये नहीं बताया कि उनकी मौत कैसे हुई है.

    लेकिन उन्होंने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे पता चलता है कि वो अपने पूर्ववर्ती की तरह नहीं मारे गए.

    बतारफ़ी उम्र के चौथे दशक में थे और सऊदी अरब के नागरिक थे. वो 2020 में एक्यूएपी के नेता बने. अमेरिका ने उन्हें 2018 में 'ग्लोबल टेररिस्ट' की सूची में डाल दिया था. उन पर पचास लाख डॉलर का ईनाम रखा गया था.

    एक्यूएपी के मीडिया आउटलेट की सोशल मीडिया पोस्ट में संगठन के अधिकारी अबु खुबैब अल-सुडानी एक बयान पढ़ते दिख रहे हैं, जिसमें बतारफ़ी की मौत की सूचना दी जा रही है. इसमें ये नहीं कहा गया कि किसी ने उन पर हमला कर उन्हें मार डाला है.

  3. ग़ज़ा में सीज़फायर के पक्ष में ऑस्कर समारोह में पहुंचे कलाकारों ने पहना 'रेड पिन', क्या है इसकी अहमियत

    फिनीस बेयर्ड ओ कोनेल और बिली इलिश

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, फिनीस बेयर्ड ओ कोनेल और बिली इलिश

    अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रविवार रात आयोजित 96वें ऑस्कर अवॉर्ड्स समारोह में ओपेनहाइमर की धूम रही.

    सात ऑस्कर जीतने के कारण इस फ़िल्म की ख़ूब चर्चा हो रही है.

    हालांकि इस समारोह में एक और ऐसी घटना घटी, जिसकी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है.

    ऑस्कर अवॉर्ड्स समारोह में कई कलाकार अपने कपड़ों पर 'आर्टिस्ट फॉर सीज़फायर' नामक संस्था का लोगो वाला 'रेड पिन' लगाए हुए थे.

    रेड पिन

    इमेज स्रोत, Getty Images

    लाल रंग के इस पिन पर एक हाथ की तस्वीर है और उसके बीच में काले रंग का दिल बना हुआ है.

    यह पिन ग़ज़ा में हमास और इसराइल के बीच जारी लड़ाई को रोकने का प्रतीक है.

    'सर्वश्रेष्ठ मौलिक गीत' के लिए इस बार का ऑस्कर जीतने वाली भाई-बहन की जोड़ी फिनीस बेयर्ड ओ कोनेल और बिली इलिश ने इस पिन को अपने कपड़ों पर लगाया था.

    मार्क रफ्लो

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, मार्क रफ्लो

    उनके अलावा, अमेरिकी अभिनेता मार्क रफ्लो, अभिनेता और निर्देशक रेमी यूसुफ़, एवा डुवर्ने ने भी अपने कपड़ों पर इस रेड पिन को पहना था.

    एवा डुवर्ने

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, एवा डुवर्ने

    लॉस एंजिल्स में समारोह स्थल के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारी ग़ज़ा में इसराइल के हमले का विरोध करते हुए प्रदर्शन के लिए जुटे थे.

    प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए खड़ी पुलिस के होते हुए भी ये 'सीज़फायर नाउ' कहते हुए चिल्ला रहे थे.

    रेमी यूसुफ़

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, रेमी यूसुफ़

    आर्टिस्ट फॉर सीज़फायर की पहल

    ऑक्सफैम अमेरिका और एक्शन एड यूएसए की समर्थन प्राप्त आर्टिस्ट फॉर सीज़फायर के लिए पिछले साल अक्टूबर में दुनिया के सैकड़ों कलाकारों ने अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडन को भेजे एक पत्र पर दस्तख़त किए थे.

    इस पत्र में बाइडन से अपील की गई थी कि वे ग़ज़ा पर इसराइल के हमले को रोकें.

    आज अपने कपड़ों पर रेड पिन लगाने वाले सभी कलाकारों ने उस पत्र पर अपने दस्तख़त किए थे.

  4. सीएए के नियमों की अधिसूचना जारी होते ही कहीं समर्थन, कहीं विरोध,

    राजस्थान

    इमेज स्रोत, MOHAR SINGH MEENA

    इमेज कैप्शन, राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा का एयरपोर्ट पर स्वागत करते लोग

    नागरिकता संशोधन क़ानून के तहत नियमों की अधिसूचना जारी होते ही इसके समर्थन और विरोध में बयान आने लगे हैं.

    राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने एक्स पर लिखा,'' मोदी जी की गारंटी यानी गारंटी पूरी होने की गारंटी. माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली भारत सरकार के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू करने का निर्णय अभिनंदनीय है."

    ''सीएए एक मानवीय कानून है जिसके माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के पीड़ित हिंदू एवं अल्पसंख्यक समुदाय को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करते हुए भारत की नागरिकता के उनके वर्षों के सपने को साकार करने की दिशा प्रशस्त होगी.''

    अयोध्या से वापस जयपुर पहुंचे सीएम ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, "आजादी के बाद हमारे जो हमारे भाई पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए थे.उन लोगों को सहायता प्रदान करने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देना चाहता हूं."

    राजस्थान में पाकिस्तान से विस्थापित करीब 25 हज़ार लोगों को सीएए के तहत नागरिकता मिलेगी. इनकी सर्वाधिक संख्या जोधपुर में है, इसके बाद जैसलमेर, जयपुर और बाड़मेर में.

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    दूसरी ओर, सीएए के नियमों को अधिसूचित किए जाने के बाद असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया गया है.

    गुवाहाटी में बीबीसी के सहयोगी संवाददाता दिलीप कुमार शर्मा ने बताया है कि सोमवार की शाम को जैसे ही सीएए की अधिसूचना जारी हुई ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक ज़िले में सीएए क़ानून की प्रतिलिपि को जलाकर अपना विरोध जताया.

    छात्र संगठन ने कल से राज्यभर में आंदोलन शुरू करने की हुंकार भरी है. इस बीच क्षेत्रीय दल असम जातीय परिषद ने मंगलवार को लोगों से इस कानून के खिलाफ हड़ताल करने का आह्वान किया है.

  5. इंडोनेशिया : उड़ते विमान में ही सो गए दोनों पायलट लेकिन सुरक्षित उतरा विमान

    बाटिक एयर

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, बाटिक एयर का विमान (फाइल फोटो0

    इंडोनेशिया की एक एयरलाइंस बाटिक एयर के दोनों पायलट बीच उड़ान में ही सो गए. इंडोनेशियाई सरकार अब इस चौंकाने वाली घटना की जांच में लगी है.

    बाटिक एयर का ये विमान 25 जनवरी को राजधानी जकार्ता से सुलावेसी की उड़ान पर था. 28 मिनट तक ये विमान इसी तरह उड़ता रहा. बताया जा रहा है दोनों पायलटों में से एक अपने नवजात जुड़वां बच्चों की देखरेख के काम से थक गया था.

    इस वजह से ड्यूटी के दौरान उसे नींद आ गई थी. दोनों पायलटों के सो जाने की वजह से विमान थोड़ी देर तक रास्ता भटक गया लेकिन आखिरकार इसे सुरक्षित उतारने में कामयाबी मिल गई.

    इसमें सवार सभी 153 पैसेंजर सुरक्षित थे. इस लापरवाही के आरोप में दोनों पायलटों को अस्थायी तौर पर निलंबित कर दिया गया है.

    परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि 32 वर्षीय पायलट ने विमान उड़ने के बाद अपने सह-पायलट से आधे घंटे तक इसका नियंत्रण रखने को कहा. मुख्य पायलट ने कहा कि उसे थोड़ी देर आराम चाहिए. लेकिन थोड़ी देर बाद को-पायलट भी सो गया.

  6. ब्रेकिंग न्यूज़, नागरिकता संशोधन क़ानून की अधिसूचना जारी, ये है नागरिकता लेने का तरीक़ा

    नागरिकता संशोधन अधिनियम

    इमेज स्रोत, AFP

    इमेज कैप्शन, नागरिकता संशोधन अधिनियम के ख़िलाफ़ दिल्ली के शाहीनबाग में भारी प्रदर्शन हुआ था (फाइल फोटो)

    केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है.

    गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी देते हुए बताया है कि नागरिकता लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इसके लिए जल्द ही एक वेब पोर्टल लांच किया जाएगा.

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी जानकारी देते हुए एक्स पर लिखा, ''मोदी सरकार ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 की अधिसूचना जारी कर दी है इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए अल्पसंख्यकों को यहां की नागरिकता मिल जाएगी."

    "इस अधिसूचना के ज़रिये प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक और प्रतिबद्धता पूरी की है इन देशों में रहने वाले सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को संविधान निर्माताओं की ओर से किए गए वादे को पूरा किया है.''

    इससे पहले गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक्स पर लिखा था, "गृह मंत्रालय आज नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 के प्रावधानों को लेकर अधिसूचना जारी करेगा. इससे सीएए-2019 के तहत योग्य कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है.''

    अधिसूचना जारी किए जाने के बाद कानून मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर लिखा, ''जो कहा सो किया... मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) की अधिसूचना जारी कर पूरी की अपनी गारंटी.''

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    क्या है नागरिकता संशोधन क़ानून?

    नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, 11 दिसंबर 2019 में संसद में पारित किया गया था.

    इसका मक़सद पाकिस्तान,अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है. इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया है.

    यही इस विवाद की वजह है. विपक्ष का कहना है कि ये संविधान के अनुच्छेद के 14 का उल्लंघन जो सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है. एक तरफ़ ये कहा जा रहा है कि ये धार्मिक उत्पीड़न के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की कोशिश है वहीं दूसरी ओर मुस्लिमों का आरोप है कि इसके ज़रिये उन्हें बेघर करने के क़दम उठाए जा रहे हैं.

    इस क़ानून पर धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं. भारतीय संविधान के अनुसार देश में किसी के साथ भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. लेकिन इस क़ानून में मुसलमानों को नागरिकात देने का प्रावधान नहीं है. इसी वजह से धर्मनिरपेक्षता के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं.

  7. दिन भर - CAA : चुनाव से पहले CAA लागू करने के मायने ? । 11 मार्च । सुमिरन प्रीत, मोहन लाल शर्मा

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त

  8. सीएए पर ममता बनर्जी ने कहा- 'लागू हुआ तो चुप नहीं रहूंगी'

    ममता बनर्जी

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि अगर देश में सीएए लागू होगा तो वो इसका विरोध करेंगी.

    उन्होंने कहा कि देश में समूहों के बीच भेदभाव हुआ तो वो चुप नहीं रहेंगी. ममता ने कहा कि सीएए और एनआरसी पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्व के लिए संवेदनशील मसला है और वो नहीं चाहतीं कि लोकसभा चुनाव से पहले देश में अशांति फैल जाए.

    कोलकाता में राज्य सचिवालय में औचक बुलाई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, ''ऐसी अटकलें हैं कि सीएए लागू करने के लिए अधिसूचना जारी होगी. लेकिन मैं ये साफ कर दूं कि लोगों के बीच भेदभाव करने वाले किसी भी फ़ैसले का विरोध किया जाएगा.''

    बीबीसी के सहयोगी संवाददाता प्रभाकर मणि तिवारी के मुताबिक़ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा- "हिम्मत होती तो और पहले लागू करते सीएए, चुनाव के मौके पर क्यों? मैं किसी की नागरिकता नहीं जाने दूंगी.''

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, "गृह मंत्रालय आज नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 के प्रावधानों को लेकर अधिसूचना जारी करेगा. इससे सीएए-2019 के तहत योग्य कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है."

  9. ब्रेकिंग न्यूज़, सीएए पर आज जारी होगी अधिसूचना, गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

    अमित शाह

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

    नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए पर आज अधिसूचना जारी होगी जिसकी जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी है.

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के आधिकारिक एक्स हैंडल से इस बारे में दी गई जानकारी के अनुसार, "गृह मंत्रालय आज नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 के प्रावधानों को लेकर अधिसूचना जारी करेगा. इससे सीएए-2019 के तहत योग्य कोई भी व्यक्ति भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है."

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, 11 दिसंबर 2019 में संसद में पारित किया गया था.

    इसका मक़सद पाकिस्तान,अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न की वजह से भारत आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देना है. इसमें मुसलमानों को शामिल नहीं किया है. यही इस विवाद की वजह है.

    विपक्ष का कहना है कि ये संविधान के अनुच्छेद के 14 का उल्लंघन जो सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है. एक तरफ़ ये कहा जा रहा है कि ये धार्मिक उत्पीड़न के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की कोशिश है वहीं दूसरी ओर मुस्लिमों का आरोप है कि इसके ज़रिये उन्हें बेघर करने के क़दम उठाए जा रहे हैं.

    इस क़ानून पर धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए हैं. भारतीय संविधान के अनुसार देश में किसी के साथ भी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. लेकिन इस क़ानून में मुसलमानों को नागरिकात देने का प्रावधान नहीं है. इसी वजह से धर्मनिरपेक्षता के उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं.

  10. मध्य प्रदेश : धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला, एएसआई सर्वे के आदेश,

    मध्य प्रदेश

    इमेज स्रोत, AMITABH

    इमेज कैप्शन, धार स्थित भोजशाला

    मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया है.

    मां सरस्वती मंदिर भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' ने हाईकोर्ट में आवेदन दिया था. जिस पर पर उच्च न्यायालय ने एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश सोमवार को दिया.

    बता दें कि मां सरस्वती मंदिर भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फरवरी में फैसला सुरक्षि‍त रख लिया था.

    'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिसट की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई थी कि मुसलमानों को भोजशाला में नमाज पढ़ने से रोका जाए और हिंदुओं को नियमित पूजा का अधिकार दिया जाए.

    इस याचिका में एक अंतरिम आवेदन प्रस्तुत करते हुए मांग की गई थी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आदेश दिया जाए कि वह ज्ञानवापी की तर्ज पर धार की भोजशाला में सर्वे करे.

    वकील विष्णु शंकर जैन ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि इंदौर हाई कोर्ट ने उनकी अपील पर सर्वे की इजाजत दे दी है. भोजशाला में मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज पढ़ने का अधिकार है.

  11. उत्तर प्रदेश: गाज़ीपुर में हाईटेंशन तार गिरने से बस में लगी आग, पांच लोगों की झुलसकर मौत,

    हाईटेंशन तार

    इमेज स्रोत, Getty Images

    इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर

    उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर में हाईटेंशन तार गिरने से बस में लगी आग से पांच लोगों की मौत हो गई है और 10 अन्य घायल हुए हैं.

    घायलों में से पांच की हालात नाज़ुक बतायी जा रही है और उनका इलाज ज़िला अस्पताल में हो रहा है. बस में सवार कुछ यात्रियों ने आग लगने के बाद भागकर जान बचाई.

    गाज़ीपुर की डीएम आर्यका अखौरी ने मीडिया को बताया कि उत्तर प्रदेश के मऊ ज़िले के खिरिया गाँव से गाज़ीपुर के मरदह इलाके में स्थित महाहर धाम की तरफ़ बारातियों को लेकर आ रही एक मिनी बस पर हाईटेंशन का तार गिर जाने के बाद आग लग गई.

    आग इतनी तेज़ी से फैली कि आस-पास के ग्रामीणों के वहां पहुँचने से पहले बस को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया. माना जा रहा है कि घटना के वक्त बस में कुल 30 से 35 से लोग सवार थे.

    सरकार के मुताबिक सभी शव मॉर्चरी भेज दिए गए हैं और मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रुपए मुआवज़ा देने का एलान किया गया है.

  12. इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा- कोर्ट को फ़ैसला करने दें

    वीके सिंह

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, वीके सिंह

    सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की ओर से इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने के लिए और समय मांगने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है.

    इस पर केंद्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने कहा, "अदालत को फ़ैसला करने दें. ये मामला अदालत में है."

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई से कहा कि वह कल यानी 12 मार्च तक इलेक्टोरल बॉन्ड पर जानकारी दे और चुनाव आयोग इसे 15 मार्च की शाम पाँच बजे तक वेबसाइट पर अपलोड करे.

    इससे पहले 15 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को असंवैधानिक करार दिया था.

    सुप्रीम कोर्ट से एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने के लिए 30 जून तक का समय मांगा था.

    इस अर्ज़ी को लेकर आलोचना इसलिए हो रही थी क्योंकि तब तक लोकसभा चुनाव बीत जाते.

  13. संदेशखाली में ईडी अधिकारियों पर हमले की सीबीआई जांच होगी, सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इनकार

    शाहजहां शेख़

    इमेज स्रोत, SANJAY DAS

    इमेज कैप्शन, शाहजहां शेख़ (फाइल फोटो)

    सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस निर्देश में दखल देने से इनकार कर दिया है, जिसमें संदेशखाली में ईडी अधिकारियों पर हमले की सीबीआई जांच के लिए कहा गया था.

    पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट दायर याचिका में कहा था कि संदेशखाली में ईडी अधिकारियों पर हमले की जांच सीबीआई को न सौंपी जाए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी ये अपील ख़ारिज कर दी.

    इस साल जनवरी महीने में राशन घोटाले के एक मामले में पश्चिम बंगाल के अकुंजीपारा में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व नेता शाहजहां शेख़ के घर पर छापा मारने गए ईडी अधिकारियों पर हमला किया गया था. शाहजहां शेख़ के समर्थकों के हमले में तीन ईडी अधिकारी घायल हो गए थे. उस दौरान शाहजहां शेख अपने घर पर थे.

    लेकिन इस घटना के तुरंत बाद वह घर से फ़रार हो गए थे. इस मामले में राज्य के एक पूर्व मंत्री को भी गिरफ्तार किया गया है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद शाहजहां शेख को 29 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था.

  14. प्रिंसेज़ ऑफ़ वेल्स: केट मिडलटन ने मदर्स डे वाली तस्वीर पर 'भ्रम' के लिए माफ़ी मांगी

    प्रिंसेज़ ऑफ़ वेल्स

    इमेज स्रोत, PRINCE OF WALES

    प्रिंसेज़ ऑफ़ वेल्स केट मिडलटन ने अपने बच्चों के साथ मदर्स डे पर खींची गई तस्वीर से हुए 'किसी भी तरह के भ्रम' के लिए माफ़ी मांगी है.

    पांच समाचार एजेंसियों ने इस तस्वीर के साथ छेड़छाड़ का संदेह होने के बाद इसे वापस ले लिया था.

    कैथरीन ने अपने ट्वीट किया, "बहुत से शौकिया फ़ोटोग्राफ़र की तरह ही मैं भी कभी-कभी एडिटिंग को लेकर एक्सपेरिमेंट करती हूं".

    ये तस्वीर प्रिंस ऑफ़ वेल्स ने खींची थी. कैथरीन की जनवरी में हुई सर्जरी के बाद जारी की गई ये उनकी पहली तस्वीर थी.

    प्रिंसेस ऑफ वेल्स

    इमेज स्रोत, PRINCE OF WALES

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    समाचार एजेंसी पीए, गेटी इमेजेस, एएफ़पी, रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस ने इस तस्वीर को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था.

    इस तस्वीर में प्रिंसेज़ अपने तीनों बच्चे प्रिंसेज़ शारलेट, प्रिंस लुई और प्रिंस जॉर्ज को लेकर बैठी हैं.

  15. जीएन साईबाबा की रिहाई को चुनौती देने वाली महाराष्ट्र सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज

    जीएन साईबाबा
    इमेज कैप्शन, जीएन साईबाबा (फाइल फोटो)

    सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा की रिहाई को चुनौती देने वाली महाराष्ट्र सरकार की याचिका ख़ारिज कर दी है.

    बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने जीएन साईबाबा को रिहा करने के आदेश दिए थे. लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस पर स्टे लगाने की अपील की थी. साईबाबा माओवादी से संबंध होने के आरोप में पिछले दस साल से जेल में बंद थे. उन्हें यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया था.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट ने साईबाबा की रिहाई के आदेश पर स्टे लगाने की महाराष्ट्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि पहली नजर में उन्हें छोड़े जाने की पर्याप्त वजह नजर आती है. पिछले सप्ताह बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने साईबाबा के साथ पांच अन्य लोगों को छोड़ दिया था.

    अदालत ने कहा था कि वे चाहें तो खुद को दोषी ठहराए जाने के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं. इन लोगों के ख़िलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई की गई थी. जीएन साईबाबा को साल 2014 में गै़रक़ानूनी गतिविधियां रोकथाम क़ानून (यूएपीए) के तहत गिरफ़्तार किया गया था. उन पर माओवादी संगठनों के साथ संबंध रखने के आरोप थे.

    इस मामले में साल 2017 में उन्हें दोषी क़रार देते हुए अदालत ने उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी लेकिन 14 अक्तूबर 2022 को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने जीएन साई बाबा को रिहा कर दिया. 24 घंटे के अंदर ही 15 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बेला त्रिवेदी की विशेष बेंच ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को पलट दिया था.

  16. राजस्थान: चूरू से भाजपा सांसद राहुल कस्वां कांग्रेस में शामिल, पार्टी ने नहीं दिया था लोकसभा टिकट,

    राहुल कस्वां

    इमेज स्रोत, SOCIAL MEDIA

    इमेज कैप्शन, राहुल कस्वां

    राजस्थान के चूरू ज़िले से लगातार दूसरी बार भाजपा के सांसद चुने गए राहुल कस्वां सोमवार को अपनी पार्टी से इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए.

    राहुल कस्वां ने एक्सप इस्तीफे का एलान किया और कुछ देर बाद ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में उन्होंने कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन कर ली.

    छोड़िए X पोस्ट, 1
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 1

    एक दिन पहले ही हरियाणा में बीजेपी के सांसद बृजेंद्र चौधरी ने पार्टी से इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस ज्वॉइन की थी.

    लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान की 25 में से 15 सीटों के लिए बीते दिनों भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा की थी.

    चूरू से सांसद राहुल कस्वां का टिकट काट कर पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता देवेंद्र झाझडिया को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है.

    कांग्रेस में शामिल होने के बाद राहुल कास्वां ने कहा, "मेरे लोकसभा क्षेत्र में किसान कौम परेशान थी, उनकी आवाज़ को दबाया जा रहा था. सामंतवादी लोगों की सोच आगे बढ़ती जा रही थी. किसान की आवाज़ को अनसुना किया जा रहा था. ऐसे अनेकों मुद्दे रहे जिन मुद्दों के ऊपर मैंने आज कांग्रेस परिवार का हिस्सा बनने की मेरे लोगों की आवाज़ सुनते हुए मैं आज इस परिवार में शामिल हुआ हूं."

    इससे पहले उन्होंने चूरू की जनता को संबोधित करते हुए एक्स पर लिखा था, "मेरे परिवारजनों! आप सब की भावनाओं के अनुरूप, मैं सार्वजनिक जीवन का एक बड़ा फैसला लेने जा रहा हूँ. राजनीतिक कारणों के चलते आज इसी समय, मैं भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता एवं संसद सदस्य पद से इस्तीफा दे रहा हूँ."

    "समस्त भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा जी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं अमित शाह जी का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने मुझे 10 वर्षों तक चूरू लोकसभा परिवार की सेवा करने का अवसर दिया."

    छोड़िए X पोस्ट, 2
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त, 2

    राहुल कस्वां के पिता राम सिंह चूरू सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद और विधायक रह चुके हैं. उनकी माता कमला कस्वां चूरू की सादुलपुर सीट से बीजेपी विधायक रही हैं.

    टिकट कटने के बाद एक्स पर राहुल कस्वां ने लिखा था, "आखिर मेरा अपराध क्या था? क्या मैं ईमानदार नहीं था? क्या मैं मेहनती नहीं था? क्या मैं वफादार नहीं था? क्या मैं दागदार था? क्या मैंने काम पूरा करने में कोई कसर छोड़ी थी. प्रधानमंत्री की सभी योजनाओं के कार्यान्वयन में मैं सबसे आगे था. और क्या चाहिए था? जब भी मैंने यह सवाल पूछा, हर कोई अवाक रह गया. इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है."

  17. राहुल गांधी ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एसबीआई की अर्ज़ी ठुकराए जाने पर ये कहा

    राहुल गांधी

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, राहुल गांधी

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर एसबीआई को सुप्रीम कोर्ट से मिले झटके के बाद कहा है कि 'नरेंद्र मोदी के चंदे के धंधे की पोल खुलने वाली है.'

    राहुल ने एक्स पर लिखा, "100 दिन में स्विस बैंक से काला धन लाने का वायदा कर सत्ता में आई सरकार अपने ही बैंक का डेटा छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सिर के बल खड़ी हो गई."

    राहुल गांधी ने कहा, "इलेक्टोरल बॉन्ड भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित होने जा रहा है, जो भ्रष्ट उद्योगपतियों और सरकार के नेक्सस की पोल खोल कर नरेंद्र मोदी का असली चेहरा देश के सामने लेकर आएगा."

    "क्रोनोलॉजी स्पष्ट है- चंदा दो-धंधा लो, चंदा दो-प्रोटेक्शन लो. चंदा देने वालों पर कृपा की बौछार और आम जनता पर टैक्स की मार, यही है भाजपा की मोदी सरकार."

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई की ओर से इलेक्टोरल बॉन्ड की जानकारी देने के लिए 30 जून तक का समय मांगने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया.

    सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को कहा है कि वह 12 मार्च यानी कल तक इसकी जानकारी दे.

  18. इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट से एसबीआई को और समय न मिलने पर कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने दी ये प्रतिक्रिया

    मल्लिकार्जुन खड़गे

    इमेज स्रोत, ANI

    इमेज कैप्शन, मल्लिकार्जुन खड़गे

    इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट से एसबीआई को और समय न दिए जाने के फ़ैसले का कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया है.

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र में बराबरी के मौके़ की जीत है.

    एसबीआई ने एक अर्ज़ी देकर सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी दिए जाने की समय-सीमा बढ़ाकर 30 जून कर दी जाए.

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने ये अर्ज़ी ख़ारिज करते हुए एसबीआई को कल यानी मंगलवार तक जानकारी देने का आदेश दिया है.

    साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये जानकारी 15 मार्च शाम पाँच बजे तक चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड हो जानी चाहिए.

    खड़गे ने इस फ़ैसले पर कहा, "इलेक्टोरल बॉन्ड प्रकाशित करने के लिए एसबीआई द्वारा साढ़े चार महीने मांगने के बाद साफ़ हो गया था कि मोदी सरकार अपने काले कारनामों पर पर्दा डालने की हरसंभव कोशिश कर रही है. आज के माननीय सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से देश को जल्द इलेक्टोरल बॉन्ड से भाजपा को चंदा देने वालों की लिस्ट पता चलेगी."

    छोड़िए X पोस्ट
    X सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

    पोस्ट X समाप्त

    उन्होंने कहा, "मोदी सरकार के भ्रष्टाचार, घपलों और लेन-देन की कलई खुलने की ये पहली सीढ़ी है. अब भी देश को ये नहीं पता चलेगा कि भाजपा के चुनिंदा पूंजीपति चंदाधारक किस-किस ठेके के लिए मोदी सरकार को चंदा देते थे, उसके लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट को उचित निर्देश देने चाहिए. मीडिया रिपोर्ट्स से ये तो उजागर हुआ ही है कि भाजपा किस तरह ईडी-सीबीआई-आईटी रेड डलवाकर जबरन चंदा वसूलती थी. सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्री में बराबरी के मौके की जीत है."

  19. सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको का मुनाफ़ा 25 फ़ीसदी घटा, क्या रही वजह?

    सऊदी अरब

    इमेज स्रोत, Getty Images

    सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के मुनाफ़े में भारी गिरावट देखी गई है. उत्पादन में कटौती और साल 2023 में तेल के दामों में गिरावट को इसकी सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है.

    साल 2022 में कई रिकॉर्ड बनाने के बाद 2023 में अरामको का मुनाफ़ा 25 फ़ीसदी घटकर 121 अरब डॉलर रह गया है.

    हालांकि, सऊदी अरब की इस सरकारी कंपनी का मुनाफ़ा अब भी रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है.

    साल 2023 में कच्चे तेल के दाम 85 डॉलर प्रति बैरल तक गिरे.

    इसके अलावा सऊदी की अरामको ने तेल के दाम संभालने के इरादे से उत्पादन भी घटाया, जिससे मुनाफ़े बढ़ाने में और चुनौतियां पैदा हुईं.

    अरामको के चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव आमीन नासिर ने एक बयान में कहा, "साल 2023 में हमने शुद्ध आय के लिहाज से दूसरा सबसे बढ़िया प्रदर्शन किया है."

    नासिर ने कहा कि अब ये तेल कंपनी चीन में निवेश के मौकों की तलाश करेगी, क्योंकि वहां तेल की मांग बढ़ रही है.

    अरामको पहले से ही चीन की रिफ़ाइनरियों में निवेश कर चुकी है.

  20. LIVE: सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर क्या कहा

    सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी साझा करने की समय सीमा 30 जून तक बढ़ाने की एसबीआई की मांग ख़ारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में और क्या कहा, इस बारे में बता रहे हैं बीबीसी संवाददाता उमंग पोद्दार और राघवेंद्र राव.

    छोड़िए YouTube पोस्ट
    Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

    इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

    चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. YouTube सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

    पोस्ट YouTube समाप्त