हिंदू विरोधी होने के आरोप पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने क्या कहा,

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी सरकार को हिंदू विरोधी बताए जाने पर बीजेपी पर निशाना साधा है.
कर्नाटक विधानसभा में हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती विधेयक 2024 में संशोधन लाने पर बीजेपी ने सिद्धारमैया सरकार पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया था.
बुधवार को विधानसभा में पास किए गए इस संशोधन में अमीर मंदिरों की ओर से कॉमन पूल (संयुक्त कोष) में जमा की जाने वाली राशि को बढ़ाने का प्रावधान है.
इस कोष के फ़ंड का इस्तेमाल ‘हिंदू समुदाय के कल्याण और उत्थान’ के लिए किया जाता है.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक बयान जारी कर कहा, “ऐसा लगता है कि इन आरोपों को राजनीतिक लाभ के लिए ग़लत तरीके से पेश किया गया.”
उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजेंद्र पर ‘झूठ’ बोलने का आरोप लगाया.
संशोधन पास होने के बाद विजेंद्र की ओर से किए गए ट्वीट का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा, “ये साफ़ है कि बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्ष का पद उनके लिए आरक्षित कर रखा है जो झूठ बोलते हों. लगता है बीवाई विजेंद्र इस पद के लिए फ़िट हैं या शायद वो इस पद पर बने रहने के लिए अन्य बीजेपी नेताओं से प्रतिस्पर्द्धा कर कर रहे हैं.”
उन्होंने लिखा, “विजेंद्र को शर्म आनी चाहिए. एक नेता के तौर पर उनकी साख नरेंद्र मोदी के शासन में भारतीय रुपये की तरह गिर रही है.”
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गौरतलब है कि इससे पहले संयुक्त कोष में मंदिरों के लिए योगदान का नियम इस प्रकार तय था- (ए) सालाना 10 लाख रुपय से अधिक आमदनी वाली संस्थाओं के लिए 10 प्रतिशत (बी) सालाना पांच से दस लाख रुपये तक की आमदनी वाली संस्थाओं पर पांच प्रतिशत. इसके अलावा इस कोष में राज्य सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान भी शामिल था.
संशोधन के बाद अब सालाना एक करोड़ से अधिक आमदनी वाली संस्थाओं को 10 प्रतिशत और 10 लाख से एक करोड़ रुपये की सालाना आमदनी वाली संस्थाओं को पांच प्रतिशत योगदान देना होगा.
सिद्दारमैया ने कहा कि ‘संयुक्त कोष को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है.’
मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने बीबीसी से कहा, “हमने सालाना 10 लाख रुपये से कम आमदनी वाले मंदिरों को छूट दी है. इस संसोधन को इसलिए लाया गया क्योंकि संयुक्त कोष में सालाना केवल 8 करोड़ रुपये ही इकट्ठा हो पा रहे हैं. जोकि अपर्याप्त है.”



















