किसानों के प्रदर्शन का चौथा दिन: कैसा रहा शंभू बॉर्डर का हाल,

हरियाणा और पंजाब के शंभू बॉर्डर पर शुक्रवार को किसानों के प्रदर्शन के चौथे दिन हालात सामान्य रहे.
शुक्रवार की दोपहर आंसू गैस के कुछ गोले छोड़े गए. जैसे ही आंसू गैस के गोले गिरते थे किसान पीछे की तरफ भागते थे लेकिन कुछ ही देर में वापस बेरिकेडिंग के पास आ जाते थे.
15 फरवरी को केंद्र सरकार और किसानों के बीच तीसरे दौर की बातचीत देर रात तक चली लेकिन कोई सहमति नहीं बनी.
अब अगली यानी चौथे दौर की बैठक रविवार शाम को होगी, जिसके बाद तय होगा कि किसान दिल्ली की तरफ बढ़ेंगे या नहीं.

शुक्रवार दोपहर जिस वक्त आंसू गैस के गोले चले तो बीबीसी की टीम के साथ अमृतसर की रहने वाली दविंद्र कौर भी मौजूद थीं.
उन्होंने कहा कि 'ये आंसू गैस के गोले हमें डरा नहीं सकते. एमएसपी हमारा हक़ है और उसे लेकर ही हम लोग वापस घर जाएंगे.'
शंभू बॉर्डर धीरे धीरे एक मोर्चे में तब्दील हो रहा है, एक गाड़ी को अस्थाई मंच की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां से किसान नेता लोगों को संबोधित कर रहे हैं.

इसके अलावा किसानों की ट्रैक्टर ट्रॉलियां पंजाब की तरफ क़रीब 3.5 किलोमीटर तक शंभू बॉर्डर पर खड़ी हैं.
पहले तीन दिन की तुलना में आज आंदोलन में महिला चेहरों की मौजूदगी ज़्यादा दिखाई दी.
इसके अलावा जगह जगह लंगर चल रहा है, कहीं पर खीर, मीठे चावल, दाल रोटी, चाय और पानी जैसी चीजें दी जा रही है.

खालसा एड की तरफ से मेडिकल जांच के लिए भी टीमें लगाई गई हैं. मोर्चे पर कई एंबुलेंस भी खड़ी हैं.
शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे एक किसान की हार्ट अटैक से मौत भी हुई है.

शाम में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने युवाओं को धैर्य रखने के लिए कहा है. उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी 'पत्रकार से ग़लत व्यवहार' न करें.
उन्होंने कहा कि हमने सरकार के साथ मीटिंग में आंसू गैस के गोले ले जाकर दिखाए हैं, जिसका जवाब उनके पास नहीं था.
इसलिए मोर्चे पर बैठे लोग भी ऐसा कोई काम न करें जिसका हम बैठक में कोई जवाब न पाएं.


















