अमेरिका और ब्रिटेन के पास हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सीमित हैं सैन्य विकल्प,

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अमेरिका और ब्रिटेन की सेना ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए हैं. इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वो आगे भी सैन्य कार्रवाई करने में नहीं हिचकेंगे.
हालांकि, अमेरिका ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि वो मध्य पूर्व में संघर्ष को बढ़ते हुए भी नहीं देखना चाहता है. ये इस तरफ़ इशारा करता है कि अगर आगे अमेरिकी नेतृत्व कोई कार्रवाई करता है तो वो सीमित ही होगा.
हवाई हमले और लंबी दूरी तक मारक क्षमता वाले मिसाइल सीधे सैन्य अभियान की तुलना में कम ख़तरनाक तो हैं लेकिन महंगें हैं, वो भी ऐसे समय में जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.
अमेरिका इराक और सीरिया में हाल के महीनों में ईरान समर्थित समूहों को निशाना बनाने के लिए सीमित संख्या में ही हवाई हमले कर रहा है.
कल रात हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर जो हमले हुए हैं, हो सकता है कि उससे हूती विद्रोहियों की लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता पर असर पड़ेगा. लेकिन हूती विद्रोही पहले इसकी तुलना में कहीं ज़्यादा बड़े हमले- सऊदी एयर फ़ोर्स के हमलों- का सामना कर चुके हैं.
हूती विद्रोहियों के पास अब भी आगे हमले करने की क्षमता है. अमेरिका और ब्रिटेन के सामने जो वास्तविक विकल्प हैं-वो है दूर से हूती विद्रोहियों को निशाना बनाना.
ब्रिटेन के पूर्व राजनयिक लॉर्ड पीटर रिकेट्स ने बीबीसी को बताया कि हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर अमेरिका और ब्रिटेन के हमले जरूरी थे ताकि इस समूह को 'कड़े संदेश' दिये जा सकें.
हूती-समर्थित अल-मसिराह टीवी की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ इन हमलों में यमन की राजधानी सना, तटीय प्रांत अल-हुदैदा, उत्तरी प्रांत सादा, हज्जाह, धमार और ताएज़ पर बम गिराए गए हैं.
टीवी के अनुसार हवाई हमलों में डिल्मी एयर बेस के अलावा ताएज़, हुदैदा और हज्जाह के एयरपोर्ट्स को भी निशाना बनाया गया है.




















