आरएसएस के सह-सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य बोले- देश के दो नाम ठीक नहीं, भारत ही कहा जाना चाहिए

इमेज स्रोत, RSS
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य ने शनिवार को कहा कि सनातन धर्म को खत्म करने की बात करने वालों को ऐसे बयान देने से पहले इस शब्द की परिभाषा को समझना चाहिए.
महाराष्ट्र के पुणे में आरएसएस की तीन दिवसीय समन्वय समिति की बैठक के समापन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कई विषयों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत एक आध्यात्मिक लोकतंत्र है.
हाल ही में डीएमके के नेता उदयनिधि स्टालिन और ए राजा ने बयान दिया था कि सनातन धर्म ने समाज को बांटने का का किया है और उसकी तुलना डेंगू और मलेरिया से की थी और कहा था कि इसे खत्म हो जाना चाहिए.
इन बयानों के बारे में जब उनसे उनकी राय पूछी गई तो उन्होंने कहा, “कुछ लोग सनातन धर्म को खत्म करने की बात कर रहे हैं, लेकिन क्या ये लोग इन सभी शब्दों का वास्तविक अर्थ जानते हैं? उन्हें इन शब्दों का उपयोग करने से पहले सनातन धर्म की परिभाषा को समझना चाहिए."
उन्होंने कहा, “सनातन का अर्थ शाश्वत है, जो भारत की आध्यात्मिक जीवन शैली का आधार है और जो आंतरिक रूप से समग्र है. इसी से भारत के व्यक्तित्व को आकार मिला है."
मनमोहन वैद्य ने कहा कि इतिहास के दौरान कई लोगों ने सनातन धर्म को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए.
उन्होंने कहा, "भगवान कृष्ण ने कहा था कि जब भी धर्म पर संकट आएगा, वे इसे मजबूत करने के लिए आएंगे. आरएसएस उसी रास्ते पर चल रहा है."
वैद्य ने कहा, “ऐसा कोई देश नहीं है जिसके दो नाम हों और इसलिए भारत को भारत कहा जाना चाहिए.”




















