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भारत के सूर्य मिशन आदित्य-एल1 ने अंतरिक्ष से भेजी पहली सेल्फ़ी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने देश के सूर्य मिशन की तस्वीरें साझा की हैं.

लाइव कवरेज

चंदन शर्मा and अनंत प्रकाश

  1. भारत के सूर्य मिशन आदित्य-एल1 ने अंतरिक्ष से भेजी पहली सेल्फ़ी

    भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने देश के सूर्य मिशन की तस्वीरें साझा की हैं.

    गुरुवार को इसरो ने जो तस्वीरें साझा की हैं, आदित्य एल1 ने उन्हें चार सितम्बर को खींचा था.

    एक तस्वीर में पृथ्वी और चांद एक ही फ्रेम में दिख रहे हैं जबकि दूसरी तस्वीर सेल्फ़ी है जिसमें आदित्य-एल1 के सात उपकरणों में से दो दिखाई देते हैं.

    आदित्य-एल1 को बीते शनिवार अंतरिक्ष में भेजा गया था जो पृथ्वी से 15 किलोमीटर दूर लैगरेंज बिंदु पर एक कक्षा में स्थापित होगा.

    इसरो का कहना है कि इसे उस जगह तक पहुंचने में चार महीने लगेंगे.

    यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक लैगरैंज प्वाइंट वो जगह है जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बराबर हो जाता है.

    यहां आदित्य एल-1 सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की रफ़्तार से ही परिक्रमा करेगा.

  2. पुतिन और जिनपिंग के नहीं आने पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

    कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को जी 20 शिखर सम्मेलन पर चीन और रूस के सर्वोच्च नेताओं के दिल्ली नहीं आने पर सरकार की आलोचना की है.

    कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि जब प्रधानमंत्री की ओर से इतना ख़र्चीला कार्यक्रम किया जा रहा है तो ये विदेश मंत्री की ज़िम्मेदारी है कि सभी देशों के नेता शामिल हों.

    उन्होंने कहा, “बहुत अच्छी इवेंट्स आयोजित की जा रही हैं. लेकिन दो सबसे अहम देशों के प्रमुख नेताओं का नहीं आना कई सवालों को जन्म देता है. उम्मीद करता हूं कि विदेश मंत्री इन सवालों का जवाब देंगे.”

    एस जयशंकर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री कई मुद्दों पर अपने विचार रखना पसंद करते हैं, उम्मीद है कि वह अपने विभाग से जुड़े मुद्दों पर भी बात करेंगे.

    चीन ने इस शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले ही बताया है कि शी जिनपिंग इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली नहीं आ रहे हैं. उनकी जगह चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग दिल्ली आ रहे हैं.

    इससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बताया था कि वह यूक्रेन में जारी संघर्ष की वजह से दिल्ली नहीं आ पा रहे हैं.

  3. लालू यादव ने मनाई जन्माष्टमी, सनातन धर्म विवाद पर क्या बोले

    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता लालू यादव ने गुरुवार शाम जनमाष्टमी मनाते हुए सनातन धर्म विवाद पर अपने विचार मीडिया के साथ साझा किए हैं.

    उन्होंने कहा, "बीजेपी ढोंगी है. पगलाया हुआ है. कोई कुछ न कुछ बात पर बात बनाता है. जिसको जो लगे...सबका मालिक एक है. राम कहो या रहीम कहो."

    समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें लालू यादव जनमाष्टमी मनाते दिख रहे हैं.

    तमिलनाडु के नेताओं की ओर से पिछले दो - तीन दिनों से सनातन धर्म पर बयान दिए जा रहे हैं जो पूरे देश में विवाद का विषय बन रहे हैं.

    इसकी शुरुआत सीएम स्टालिन के बेटे उदयनिधि के बयान से हुई थी जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को ख़त्म करने की बात कही थी.

    डीएमके विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' का घटक दल है. लेकिन इसी गठबंधन के दूसरे साथियों ने इस बयान पर असहजता प्रकट की है.

    इस मसले पर खुलकर आपत्ति जताने वाले दलों में टीएमसी और शिवसेना हैं. वहीं, कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर गुरुवार शाम बयान आया है.

  4. कर्नाटक बीजेपी का डीएमके पर हमला, पार्टी की तुलना डेंगू, मलेरिया से की

    कर्नाटक के बीजेपी नेता के अन्नामलाई ने गुरुवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की ओर से दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए पलटवार किया है.

    इस बयान में उन्होंने कहा है कि तमिलनाडु से अगर किसी चीज़ को हटाया जाना चाहिए तो वो डीएमके है.

    इसके बाद उन्हें डीएमके को तीन बीमारियों डेंगू, मलेरिया और कोसू से जोड़कर दिखाया. तमिल भाषा में कोसू शब्द का मतलब मच्छर होता है.

    अन्नामलाई ने जस्टिस पार्टी और डीएमके के इतिहास से जुड़ी घटनाओं के बारे में बताते हुए दावा किया है कि डीएमके ने दलित नेताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं किया.

    अन्नामलाई ने कहा है, "जब आप कहते हैं कि आप सनातन धर्म की कुरीतियों का अंत करके समानता को बढ़ाना चाहते हैं तो ये शैतान के द्वारा वेदों के बारे में भगवान से बात करना है. ऐसे में मेरा आपसे निवेदन है कि ऐसा न करें."

    इसके साथ ही अन्नामलाई ने कहा कि 'आपने बताया कि डीएमके एक पार्टी के रूप में काफ़ी प्रगतिशील दल है. अगर कोई आपके मौजूदा मंत्रिमंडल पर नज़र डाले तो 35 मंत्रियों में से सिर्फ़ तीन मंत्री एससी समुदाय से हैं. सिर्फ दो महिला मंत्री हैं. क्या आप इसे प्रगतिशील कहेंगे जब दलित मंत्रियों की हिस्सेदारी दस फीसद से भी कम है.'

    इसके बाद उन्होंने पीएम मोदी की सरकार में दलित मंत्रियों और महिला मंत्रियों की मौजूदगी के बारे में बताया.

    उन्होंने कहा कि 'मोदी सरकार के 79 मंत्रियों में से 20 मंत्री एससी/एसटी समुदाय से हैं. 11 महिला मंत्री हैं. और पांच मंत्री अल्पसंख्यक समुदाय से हैं. मुझे पक्का यकीन है कि आप समझेंगे कि आपकी कथनी करनी में अंतर है.'

    उदयनिधि के बयान से हुई शुरुआत

    तमिलनाडु के नेताओं की ओर से पिछले दो - तीन दिनों से सनातन पर बयान दिए जा रहे हैं जो पूरे देश में विवाद का विषय बन रहे हैं.

    इसकी शुरुआत सीएम स्टालिन के बेटे उदयनिधि के बयान से हुई थी जिसमें उन्होंने सनातन को ख़त्म करने की बात कही थी.

    डीएमके विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया का घटक दल है. लेकिन इसी गठबंधन के दूसरे साथियों ने इस बयान पर असहजता प्रकट की है.

    इस मसले पर खुलकर आपत्ति जताने वाले दलों में टीएमसी और शिवसेना हैं. वहीं, कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर गुरुवार शाम बयान आया है.

  5. कर्नाटक के मंत्री ने कहा, केंद्र सरकार का राज्य को चावल न देना दुर्भाग्यपूर्ण

    कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडूराव ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर अन्न भाग्य स्कीम के लिए चावल नहीं देने का आरोप लगाया है.

    मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'जब ज़रूरत थी और उनके पास स्टॉक उपलब्ध था, वे हमें दे सकते थे. ऐसे में मुझे लगता है कि ये काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने ये कदम उठाया. सभी को पता है कि इसके लिए राजनीतिक कारण ज़िम्मेदार हैं. अब तक इसकी इजाज़त थी. लेकिन अब उन्होंने पूरे देश में इसे बंद कर दिया है. वे अब दूसरे प्रदेशों में भी चावल नहीं भेज रहे हैं जो कि काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है."

    इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्रीसीएम सिद्धारमैया ने भी केंद्र सरकार की तीख़ी आलोचना की थी.

    उन्होंने कहा था, “चुनाव से पहले मैंने कहा था कि मैं राज्य के लोगों को पांच किलोग्राम अतिरिक्त चावल दूंगा. क्योंकि पिछली सरकार ने चावल पांच किलोग्राम तक सीमित कर दिया था. हमने फूड कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया से चावल ख़रीदने के लिए पत्र भी लिखा था."

    सिद्धारमैया ने कहा, "उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि वे हमें चावल देने के लिए तैयार हैं. लेकिन केंद्र सरकार ने हमें चावल नहीं लेने दिया. क्या बीजेपी ग़रीबों का भला सोचने वाली सरकार है? नहीं...वे ऐसे नहीं हैं. हमने फ्री में चावल नहीं मांगा था. हम पैसे देने के लिए राज़ी थे. हम 36 रुपये प्रति किलोग्राम चावल ख़रीदने के लिए तैयार थे…”

  6. नेपाल के विदेश मंत्री ने क्यों कहा- भारत जैसा पड़ोसी मिलना सौभाग्य की बात

    विदेश मंत्री नारायण प्रकाश सउद ने कहा है कि नेपाल का ख़ुशक़िस्मती है कि उसे भारत जैसा पड़ोसी मिला है जिसने नेपाल और उसके लोगों के विकास में भारी योगदान किया है.

    उन्होंने ये बात बुधवार को पूर्वी नेपाल में हिमालयन किरन पब्लिक कैंपस का भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ उद्घाटन के दौरान कही.

    इसका निर्माण भारत सरकार की ओर से दी गई 3.7 करोड़ नेपाली रुपये की आर्थिक मदद से किया गया है.

    सउद ने कहा, “नेपाल के विकास में भारत के सपोर्ट के जारी रखने की उम्मीद करता हूं.”

    पूर्वी नेपाल के कोशी प्रांत में संकुवासबा ज़िले में स्थित हिमालयन मिडिल स्कूल का निर्माण 1949 में किया गया था जिसे 2005 में कॉलेज तक विस्तारित किया गया.

    इसमें 600 स्डूडेंट्स पढ़ते हैं जिनमें 60 प्रतिशत लड़कियां हैं.

  7. जी20 सम्मेलन के लिए दिल्ली तैयार, एजेंडे में क्या? 07 सितंबर का दिन भर सुनिए मानसी दाश और प्रेरणा से

  8. मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह चौहान सरकार ने चुनाव से पहले पत्रकारों को दिए ये आश्वासन

    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को पत्रकारों को ध्यान में रखकर बनाई गई अपनी कुछ योजनाओं को साझा किया है.

    इसमें पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक क़ानून बनाने से लेकर मीडिया सेंटर के निर्माण और मानदेय आदि शामिल हैं.

    मध्य प्रदेश सरकार पत्रकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक क़ानून बनाने पर विचार कर रही है.

    इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "वरिष्ठ पत्रकारों की एक समिति बनाई जाएगी जो राज्य में पत्रकार सुरक्षा क़ानून बनाने के लिए सुझाव देगी."

    सरकार की ओर से पत्रकारों को दी जाने वाली आर्थिक मदद का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा है कि साठ साल से ज़्यादा उम्र वाले पत्रकारों को मिलने वाले मानदेय को दस हज़ार से बढ़ाकर बीस हज़ार किया जाएगा.

    उन्होंने ये भी कहा है कि "मान्यता प्राप्त पत्रकार अपना घर बनाने के लिए 25 लाख की जगह 30 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं."

    वहीं, राज्य सरकार इस साल जर्नलिस्ट स्वास्थ्य बीमा योजना के लिए 27 फीसद अतिरिक्त प्रीमियम भरेगी. और 65 वर्ष से ज़्यादा उम्र वाले पत्रकारों और उनकी पत्नियों के बीमे के लिए पूरा प्रीमियम भरेगी.

    मान्यता प्राप्त पत्रकारों के बच्चों की ओर से लिए गए एजुकेशन लोन के लिए राज्य सरकार पांच साल तक ब्याज दर में पांच फीसद की छूट देगी.

    इसके साथ ही ज़िला स्तर पर पत्रकारों की सोसाइटी के लिए ज़मीन उपलब्ध कराई जाएगी.

    मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव आयोजित होने हैं जिसमें वह कांग्रेस की ओर से कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं. पिछले चुनाव में शिवराज सिंह चुनाव के ज़रिए सत्ता में लौटने में सफल नहीं हुए थे.

    हालांकि, कांग्रेस में दरार पड़ने के बाद उन्होंने एक बार फिर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. वह बीते दो दशकों से मध्य प्रदेश की सत्ता संभाल रहे हैं.

  9. संसद का विशेष सत्र: सोनिया गांधी और बीजेपी में ठनी, क्या मोदी देश को फिर चौंकाएँगे?

  10. इमरान ख़ान की पार्टी के नेताओं को हिरासत में लेने के मामले में चार अधिकारियों पर आरोप तय

    पाकिस्तान के एक हाई कोर्ट ने गुरुवार को तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के दो नेताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले में इस्लामाबाद के ज़िला कमिश्नर और पुलिस के तीन अधिकारियों पर आरोप तय कर दिए हैं.

    इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इन चार अधिकारियों पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया है.

    इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अदालत के आदेश का उल्लंघन करके पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी के दो नेताओं को हिरासत में लिया था.

    इस्लामाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस बाबर सत्तार ने गुरुवार को इस केस की सुनवाई की. सुनवाई के वक़्त चारों अधिकारी अदालत में मौजूद थे. चारों अधिकारियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया.

    चारों सरकारी अधिकारियों पर ये आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के नेता शहरयार अफरीदी और शांदना गुलज़ार को मेनटेनेन्स ऑफ़ पब्लिक ऑर्डर क़ानून के तहत हिरासत में रखा जबकि अदालत ने उन्हें छोड़ देने का हुक्म दिया था.

  11. एक शिक्षक जिसने ग़रीब बच्चों की ज़िंदगी बदल दी

    महाराष्ट्र के जालना में एक शिक्षक ने 19 साल तक एक स्कूल में पढ़ाया और आसपास के गांवों की तस्वीर बदल दी.

    पहले स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बाल मजदूरी करते थे और पलायन कर जाते थे. लेकिन एक शिक्षक की मुहिम रंग लाई और अब बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बन रहे हैं.

  12. भारत-आसियान देशों ने जारी किया साझा बयान, क्या-क्या कहा गया

    इंडोनेशिया के जकार्ता में सात सितंबर को हुए भारत और आसियान देशों के शिखर सम्मेलन के बाद सामुद्रिक क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक साझा बयान जारी किया गया है.

    इस बयान में क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने की दिशा में कदम उठाने पर सहमति बनने की बात कही गयी है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बयान को साझा किया है.

    इस बयान में ये स्वीकार किया गया है कि आसियान और भारत के बीच सामुद्रिक सहयोग बढ़ाना काफ़ी अहम है.

    इस बयान में सामुद्रिक संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था की अहमियत को भी स्वीकार किया गया है जो इस क्षेत्र में समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करने में भूमिका निभाती है.

    इसके साथ ही सामुद्रिक विषयों से जुड़ी जानकारियों को साझा करने में तेजी लाने और क्षमताओं के विकास पर सहमति बनी है.

    पीएम मोदी बीते बुधवार इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए जकार्ता पहुंचे थे जिसके बाद वह आज वापस लौट आए हैं.

  13. चुनाव आचार संहिता क्या है और इसमें किन-किन चीज़ों पर पाबंदी लगती है

    चुनाव आयोग जैसे ही देश में विधानसभा या लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा करता है, वैसे ही मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट यानी आचार संहिता लागू हो जाती है.

    इस दौरान क्या-क्या होता है, यही बता रही हैं बीबीसी की गेस्ट प्रेज़ेंटर शेनी सोनी. शेनी सोनी साल 2021 की मिस ट्रांसक्वीन इंडिया रह चुकी हैं.

  14. सनातन धर्म विवाद पर मोदी सरकार के किस मंत्री ने क्या कहा

    द्रमुक नेता और तमिलनाडु में एमके स्टालिन सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

    इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और इंडिया गठबंधन के कुछ घटक दलों ने अपना पक्ष रखा है. लेकिन गुरुवार को मोदी सरकार के कई मंत्रियों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी.

    केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने कहा, "द्रमुक और उनकी सहयोगी कांग्रेस शुरू से ही हिंदू विरोधी हैं. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को गाली देंगे लेकिन मुस्लिम लीग, जमात-ए-इस्लामी को गाली नहीं देंगे. वे वोट बैंक के लिए देशद्रोह कर सकते हैं. यह एक हिंदू बहुल देश है और अगर आप उनके धर्म का अपमान करेंगे तो लोग आपको कभी माफ नहीं करेंगे."

    केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, "मैं आज ईश्वर से कामना करता हूं कि इन घमंडिया गठबंधन के नेताओं का घमंड थोड़ा कम कर दे. इनकी सोच में थोड़ा सुधार कर दे और इन्हें सद्बुद्धि दे, क्योंकि इनका घमंड इन्हें निचले स्तर के बयान देने पर मजबूर करता है कि वे हिंदुओं और सनातन का अपमान करते हैं. राहुल गांधी की नफरत की दुकान में उनके नेता नफरती सामान बेच रहे हैं."

    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह ने कहा, "जिन लोगों ने 'सनातन धर्म' के बारे में, भारत की संस्कृति और सभ्यता के बारे में ऐसी टिप्पणियां की हैं, उन्हें शर्म आनी चाहिए. देश और सभी भारतीय इस तरह के बयानों से निराश हैं और मुझे लगता है कि उन्हें लोगों के सामने जवाब देना होगा."

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, "इंडिया गठबंधन जिस तरीके से सनातन धर्म पर टीका टिप्पणी कर रहा है, वो अनुचित है. इसकी जितनी निंदा की जाए वो कम है. देश को विनाश के पथ पर ले जाना, सनातन धर्म को नष्ट करना, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार व्यापक करना ही इस गुट (इंडिया गठबंधन) का असली चेहरा है."

  15. स्टालिन के सनातन वाले बयान के बारे में धर्म और इतिहास के जानकारों की क्या राय है?

  16. चीन की अर्थव्यवस्था के लिए एक और बुरी ख़बर

    दुनिया को चीन से होने वाले निर्यात में लगातार चौथे महीने गिरावट दर्ज की गई है और इसकी वजह है 'दुनिया की फ़ैक्ट्री' कहे जाने वाले इस देश में कमज़ोर घरेलू मांग का होना.

    साथ ही चीनी उत्पादों के लिए वैश्विक मांग में भी कमी हुई है और इसका असर चीन के निर्यात आंकड़ों पर पड़ा है.

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में चीन का निर्यात पिछले साल की तुलना में 8.8 फ़ीसदी गिरा है जबकि आयात में 7.3 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

    हालांकि गिरावट के इन आंकड़ों को उतना बुरा नहीं बताया जा रहा है जितना कि उम्मीद की जा रही थी. पिछले महीने के आंकड़ों में कुछ सुधार देखा गया था.

    कोरोना महामारी के बाद पैदा हुए हालात से जो चुनौतियां चीनी अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी हुई हैं, चीन उसका सामना अभी भी कर रहा है.

    उपभोक्ताओं के खर्च कम हुए हैं और प्रोपर्टी बाज़ार संकट के दौर से गुजर रहा है. अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार विवाद और कोराना महामारी के कारण दुनिया भर में चीन में बनी चीज़ों के लिए मांग कमज़ोर पड़ी है.

    देश की अर्थव्यवस्था को इससे बहुत ताक़त मिलती है लेकिन अब ये पहले जैसा नहीं रह गया है.

    बुधवार को जारी की गई यूएस सेंसस ब्यूरो की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी से चीन भेजी जाने वाली चीज़ों का निर्यात साल 2006 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है.

    अमेरिकी सेंसस ब्यूरो की ये रिपोर्ट जुलाई के आख़िर तक की स्थिति को बताती है.

    उसी अवधि में अमेरिका में आयात की गई चीज़ों में चीन की हिस्सेदारी 14.6 प्रतिशत थी जबकि मार्च, 2018 (चीन अमेरिका ट्रेड वॉर शुरू होने से पहले) के आख़िर में ये अपने उच्चतम स्तर 21.8 प्रतिशत पर था.

  17. पिछले 20 साल में जी-20 शिखर सम्मेलनों से दुनिया को अब तक क्या हासिल हुआ?

  18. सनातन धर्म पर उदयनिधि के बाद ए राजा का विवादित बयान, बीजेपी ने बताया- हेट स्पीच

    बीजेपी नेता अमित मालवीय ने गुरुवार दोपहर डीएमके मंत्री ए राजा पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया है.

    उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर ए राजा का एक बयान शेयर करते हुए लिखा है, "उदयनिधि स्टालिन के बाद अब डीएमके के ए राजा ने सनातन धर्म का अपमान किया है. ये स्पष्ट रूप से नफ़रती भाषण है जिसमें भारत की 80 फीसद जनता को निशाना बनाया गया है."

    "ये कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन का असली चरित्र है जिसे लगता है कि हिंदुओं का अपमान करके ही चुनाव जीते जा सकते हैं. क्या मुंबई की बैठक में यही तय किया गया था."

    लेकिन सवाल उठता है कि उदयनिधि के बाद ए राजा की ओर से ऐसा क्या बयान आया है जिसे अमित मालवीय ने स्पष्ट रूप से नफ़रती भाषण की संज्ञा दी है.

    बीबीसी की तमिल सेवा के मुताबिक़, ए राजा ने तमिल भाषा में बात करते हुए कहा है कि सनातन पर उदयनिधि का रुख काफ़ी नर्म था.

    उन्होंने कहा, "सनातन और विश्वकर्मा योजना अलग नहीं हैं. वे एक ही हैं. उदयनिधि ने इसकी तुलना करते हुए थोड़ा नर्म रुख अपनाते हुए कहा कि इसे मलेरिया और डेंगू की तरह ख़त्म कर देना चाहिए. लेकिन मलेरिया और डेंगू के साथ सामाजिक कलंक का भाव नहीं है."

    "समाज इसे सामाजिक अपमान के रूप में नहीं देखता है. लेकिन एक समय पर कुष्ठ रोग को सामाजिक अपमान के रूप में देखा गया और अब एचआईवी को उसी रूप में देखा जा रहा है. हमारे अनुसार हमें सनातन धर्म को एक ऐसी बीमारी के रूप में देखना होगा जिसे कुष्ठ रोग और एचआईवी की तरह सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता हो."

    डीएमके नेताओं की ओर से आते इन बयानों की वजह से विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' में असहजता की स्थिति पैदा हो रही है.

    उदयनिधि स्टालिन के बयान पर बीजेपी की ओर से विरोध दर्ज कराए जाने के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और शिवसेना नेता संजय राउत ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, ए राजा ने कहा है कि वह अपने बयान पर कायम हैं.

    उन्होंने कहा है, "अगर पीएम मोदी एक बैठक बुलाते हैं और मुझे इजाज़त देते हैं तो मैं सभी केंद्रीय मंत्रियों को जवाब देने को तैयार हूं."

    डीएमके सरकार की ओर से लगातार ये कहा जा रहा है कि उनके मंत्रियों की ओर से दिए गए बयान उस सनातन विचारधारा से जुड़े हुए हैं जिनसे वर्ण व्यवस्था का जन्म हुआ है और इन बयानों का हिंदू धर्म से कोई संबंध नहीं है.

    कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि "वह 'सर्वधर्म समभाव' में विश्वास करती है, जिसमें कोई भी किसी विशेष धर्म को किसी अन्य धर्म से कम नहीं मान सकता है. कांग्रेसइनमें से किसी भी टिप्पणी में विश्वास नहीं करती है."

    हालांकि, अब तक राहुल गांधी की ओर से इस तरह के बयानों पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है. वह इन दिनों यूरोप के दौरे पर हैं.

  19. अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा का प्रोटोकॉल क्या होता है, कितनी मज़बूत होती है व्यवस्था

  20. नोटबंदी के बाद आमने-सामने आ गए थे सरकार और रिज़र्व बैंक: पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य

    रिज़र्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बताया है कि पिछले आम चुनाव से पहले रिज़र्व बैंक और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गए थे. उन्होंने इसका ज़िक्र अपनी किताब में किया है.

    आचार्य ने लिखा है कि सरकार पिछले आम चुनाव से पहले लोक लुभावन नीतियों पर ख़र्च करने के लिए रिज़र्व बैंक से दो-तीन लाख करोड़ रुपये चाहती थी. लेकिन रिज़र्व बैंक ने इसका विरोध किया था.

    इसकी वजह से केंद्र सरकार और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के बीच गतिरोध पैदा हुआ था.

    ये गतिरोध यहां तक पहुंचा कि सरकार ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया क़ानून के सेक्शन सात के इस्तेमाल पर विचार किया जिससे केंद्रीय बैंक को निर्देश दिए जा सकें.

    भारत के इतिहास में अब तक इस सेक्शन के इस्तेमाल पर विचार नहीं किया गया था.

    विरल आचार्य ने इससे पहले साल 2018 में 26 अक्टूबर को एडी श्रॉफ़ मेमोरियल लेक्चर देते वक़्त ये मुद्दा उठाया था.

    अब उन्होंने अपनी किताब 'क्वेस्ट फॉर रीस्टोरिंग फाइनेंशियल स्टेबिलिटी ऑफ़ इंडिया' में भी इसका ज़िक्र किया है.

    उन्होंने लिखा है कि ब्यूरोक्रेसी और सरकार में मौजूद रचनात्मक ज़हन वाले लोगों ने एक योजना बनाई थी जिसके तहत आरबीआई के पास मौजूद पैसे को निकाला जाना था.

    आरबीआई हर साल अपने लाभ में से एक हिस्सा बचाकर शेष केंद्र सरकार को देती है.

    साल 2016 में नोटबंदी होने से पहले केंद्रीय बैंक ने हर साल सरकार को पहले के मुक़ाबले ज़्यादा पैसा दिया था.

    लेकिन नोटबंदी वाले साल में नए नोट छापने की वजह से सरकार को दिए जाने वाले पैसे में कमी आई जिसकी वजह से 2019 के आम चुनाव से पहले सरकार की मांग अचानक से बढ़ गई.