बीजेपी नेता अमित मालवीय ने गुरुवार दोपहर डीएमके मंत्री ए राजा
पर सनातन धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया है.
उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर ए राजा का एक बयान शेयर करते हुए लिखा है, "उदयनिधि स्टालिन के
बाद अब डीएमके के ए राजा ने सनातन धर्म का अपमान किया है. ये स्पष्ट रूप से नफ़रती
भाषण है जिसमें भारत की 80 फीसद जनता
को निशाना बनाया गया है."
"ये कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन का असली चरित्र
है जिसे लगता है कि हिंदुओं का अपमान करके ही चुनाव जीते जा सकते हैं. क्या मुंबई की
बैठक में यही तय किया गया था."
लेकिन सवाल उठता है कि उदयनिधि के बाद ए राजा की ओर से ऐसा क्या बयान आया है जिसे अमित मालवीय ने स्पष्ट रूप से नफ़रती भाषण की संज्ञा दी है.
बीबीसी की तमिल सेवा के मुताबिक़, ए राजा ने तमिल भाषा में बात करते हुए कहा है कि सनातन पर उदयनिधि का रुख काफ़ी नर्म था.
उन्होंने कहा, "सनातन और विश्वकर्मा योजना अलग नहीं हैं. वे एक ही हैं. उदयनिधि ने इसकी तुलना करते हुए थोड़ा नर्म रुख अपनाते हुए कहा कि इसे मलेरिया और डेंगू की तरह ख़त्म कर देना चाहिए. लेकिन मलेरिया और डेंगू के साथ सामाजिक कलंक का भाव नहीं है."
"समाज इसे सामाजिक अपमान के रूप में नहीं देखता है. लेकिन एक समय पर कुष्ठ रोग को सामाजिक अपमान के रूप में देखा गया और अब एचआईवी को उसी रूप में देखा जा रहा है. हमारे अनुसार हमें सनातन धर्म को एक ऐसी बीमारी के रूप में देखना होगा जिसे कुष्ठ रोग और एचआईवी की तरह सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता हो."
डीएमके नेताओं की ओर से आते इन बयानों की वजह से विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' में असहजता की स्थिति पैदा हो रही है.
उदयनिधि स्टालिन के बयान पर बीजेपी की ओर से विरोध दर्ज कराए जाने के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और शिवसेना नेता संजय राउत ने भी आपत्ति दर्ज कराई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, ए राजा ने कहा है कि वह अपने बयान पर कायम हैं.
उन्होंने कहा है, "अगर पीएम मोदी एक बैठक बुलाते हैं और मुझे इजाज़त देते हैं तो मैं सभी केंद्रीय मंत्रियों को जवाब देने को तैयार हूं."
डीएमके सरकार की ओर से लगातार ये कहा जा रहा है कि उनके मंत्रियों की ओर से दिए गए बयान उस सनातन विचारधारा से जुड़े हुए हैं जिनसे वर्ण व्यवस्था का जन्म हुआ है और इन बयानों का हिंदू धर्म से कोई संबंध नहीं है.
कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि "वह 'सर्वधर्म समभाव' में विश्वास करती है, जिसमें कोई भी किसी विशेष धर्म को किसी अन्य धर्म से कम नहीं मान सकता है. कांग्रेसइनमें से किसी भी टिप्पणी में विश्वास नहीं करती है."
हालांकि, अब तक राहुल गांधी की ओर से इस तरह के बयानों पर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है. वह इन दिनों यूरोप के दौरे पर हैं.