ज्ञानवापी सर्वे मामला: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई
गुरुवार शाम अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट से सर्वे को बंद कराने की गुहार लगाई और याचिका की सुनवाई जल्द करने की अपील की.
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विकास त्रिवेदी and मानसी दाश
ज्ञानवापी सर्वे मामला: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को करेगा सुनवाई
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वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद समिति की याचिका पर कल यानी शुक्रवार को सुनवाई होगी.
इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को मस्जिद का सर्वे करने की अनुमति देने के बाद गुरुवार को मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतेज़ामिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.
गुरुवार सवेरे इलाहाबाद कोर्ट ने कहा था कि मस्जिद परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का सर्वे जारी रहेगा.
इसके बाद गुरुवार शाम समिति ने सुप्रीम कोर्ट से सर्वे को बंद कराने की गुहार लगाई और याचिका की सुनवाई जल्द करने की अपील की.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहंती ने बताया है कि अब इस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी.
सुनवाई चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच करेगी जिसमें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल होंगे.
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केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया दिल्ली को धोखा देने का आरोप, कहा- 'मोदी जी पर विश्वास मत करना'
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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर दिल्ली की जनता को धोखा देने का आरोप लगाया है.
गुरुवार को लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक पास हो गया, जिसके बाद केजरीवाल ने दिसंबर 2013 का बीजेपी का एक ट्वीट रीट्वीट कर लिखा है कि बीजेपी ने खुद दिल्ली की जनता से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के वादा किया था.
उन्होंने लिखा, "हर बार बीजेपी ने वादा किया कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे. 2014 में मोदी जी ने ख़ुद कहा कि प्रधानमंत्री बनने पर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे. लेकिन आज इन लोगों ने दिल्ली वालों की पीठ में छुरा घोंप दिया. आगे से मोदी जी की किसी बात पे विश्वास मत करना."
उन्होंने बीजेपी के जिस ट्वीट को री-ट्वीट किया है उसमें बीजेपी ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी ने अपने चुनावी मेनिफेस्टो में बीजेपी के कुछ वादों की नकल की है.
इसमें एक वादा दिल्ली को पूर्व राज्य का दर्जा देने का था जबकि एक और वादा दिल्ली पुलिस को राज्य सरकार के अधीन में लाने का था.
एक अन्य ट्वीट में केजरीवाल ने लिखा, "ये बिल दिल्ली के लोगों को ग़ुलाम बनाने वाला बिल है. उन्हें बेबस और लाचार बनाने वाला बिल है."
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आम आदमी पार्टी के एकमात्र लोकसभा सदस्य पूरे सत्र के लिए हुए निलंबित, पार्टी ने क्या कहा
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लोकसभा में आम आदमी पार्टी के एकमात्र सदस्य सुशील कुमार रिंकू को सदन में ख़राब बर्ताव के लिए मॉनसून सत्र के बाकी के समय के लिए लिए निलंबित कर दिया गया है.
गुरुवार को जिस वक्त राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक पारित हुआ उस वक्त सुशील कुमार सदन के केंद्र में आ गए. उन्होंने अपने हाथों में पकड़े कुछ काग़ज़ फाड़े और उन्हें स्पीकर ओम बिड़ला की तरफ उछाल दिया.
ओम बिड़ला ने सदन में सुशील कुमार के व्यवहार पर एतराज़ जताया और संसदीय मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी से कहा कि वो सुशील कुमार के निलंबन के लिए प्रस्ताव लाएं.
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ओम बिड़ला ने सुशील कुमार के व्यवहार पर औपचारिक तौर पर आपत्ति जताई जिसके बाद प्रल्हाद जोशी ने मॉनसून सत्र के बचे हुए समय के लिए उनके निलंबन का प्रस्ताव पेश किया.
मई में पंजाब के जालंधर (वेस्ट) से हुए उपचुनाव में सुशील कुमार रिंकू चुन कर लोकसभा आए थे.
उन्होंने मॉनसून सत्र शुरू होने के पहले दिन यानी जुलाई 20 को पद और गोपनीयता की शपथ ली थी.
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मॉनसून सत्र अगस्त 11 को ख़त्म होगा.
इस पर आम आदमी पार्टी ने प्रतिक्रिया दी है.
पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "ये देश एक लोकतंत्र है लेकिन इस देश का प्रधानमंत्री लोकतंत्र को नहीं मानता."
पार्टी ने लिखा कि पहले पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को निलंबित कर दिया गया था अब लोकसभा के लिए पार्टी के सांसद सुशील कुमार को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया है.
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भारत में लैपटॉप-कम्प्यूटर के आयात पर लगी रोक, ये है वजह
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भारत ने तत्काल प्रभाव से लैपटॉप, टैबलेट और पर्सनल कम्प्यूटर्स के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है.
गुरुवार को सरकार की ओर से जारी एक नोटिस के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है.
ख़बर के अनुसार, इस रोक का मकसद घरेलू उत्पादन (मेक इन इंडिया) को बढ़ावा देना है.
नोटिस के अनुसार वैध लाइसेंस के ज़रिए इन प्रतिबंधित उत्पादों के आयात की मंज़ूरी होगी.
अप्रैल-जून महीने में लैपटॉप, कम्प्यूटर और टैबलेट सहित भारत में कुल 19.7 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात किया गया है.
पिछले साल इन्हीं दो महीनों की तुलना में ये 6.25 फ़ीसदी बढ़ा है.
डेल, एसर, सैमसंग, एलजी, एप्पल, लेनेवो और एचपी कुछ मुख्य कंपनियां हैं जो भारत में लैपटॉप बेच रही हैं और इसके अधिकांश पुर्जे चीन जैसे देशों से आयात होते हैं.
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दिल्ली सर्विसेज़ बिल के पास होने पर क्या बोले ओवैसी?
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गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली सर्विसेस बिल के ध्वनि मत से पारित होने के बाद विपक्ष ने सदन से वॉक आउट किया.
इसके बाद ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ये बिल संविधान और उसकी मूल भावना के ख़िलाफ़ है.
उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा "मैं और मेरे साथियों ने संशोधन बिल के विरोध में वोट किया. हमने वॉयस वोट में इस बिल के ख़िलाफ़ वोट दिया."
"हमारी पार्टी ने कहा कि ये भारत के संविधान के ख़िलाफ़ है, संविधान के स्ट्रक्चर के ख़िलाफ़ है और संधीय ढांचे के ख़िलाफ़ है. एक सामान्य बिल से आप संविधान में संशोधन नहीं कर सकते, इसलिए हम इसके विरोध में हैं."
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'अगर नेहरू जी का सहारा वाकई लेते तो आज'...लोकसभा में अमित शाह के बयान पर बोले अधीर रंजन चौधरी
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दिल्ली को अलग राज्य का दर्जा देने के मामले में गुरुवार को देश के गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और आम आदमी पार्टी नेता राघव चड्ढा ने उन पर तंज कसा है.
अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में कहा, "जब आपको ज़रूरत होती है, तब आपको पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू का सहारा लेना पड़ता है. अगर आप वाकई में नेहरू जी का सहारा बराबर लेते रहते तो आज हिंदुस्तान में मणिपुर और हरियाणा नहीं देखना पड़ता."
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सदन में दिए अमित शाह के बयान के बाद आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने भी उन पर तंज कसा और कहा कि उन्हें अपनी ही पार्टी के नेताओं के पूर्व में दिए गए बयान पढ़ने की ज़रूरत है.
राघव चड्ढा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा "उन्होंने कोई बयान और पुरानी समिति की रिपोर्ट निकाल कर नेहरू और सरदार पटेल के बयान निकालकर कहा कि दिल्ली को अलग राज्य नहीं बनाना चाहिए."
"मैं उनसे कहना चाहता हूं कि 1930-40 के दशक में उनके बयान देखने की बजाय आप 1980-90 और 2000 के दशक के अपने नेताओं के बयान देख लें. लाल कृष्ण आडवाणी ने 2003 में दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग की थी और दिल्ली स्टेटहुड बिल लाए थे. साहेब सिंह वर्मा, मदनलाल खुराना जो इस पार्टी के बड़े नेता रहे, अमित शाह उनके बयान पढ़ लें, उन्हें पंडित नेहरू के बयानों तक जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी."
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इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में अमित शाह ने कहा था, "आज़ादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया समिति ने दिल्ली को राज्य स्तर का दर्जा देने की सिफारिश की थी, लेकिन जब ये सिफारिश सदन के सामने आई तक जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेन्द्र प्रसाद और भीमराव आंबेडकर ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये उचित नहीं होगा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए."
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ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली सर्विसेज़ बिल लोकसभा में हुआ पास
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गया है.
गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में इस विधेयक को लेकर प्रस्ताव दिया जिसके बाद ये विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिया है.
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इसके पक्ष में आज गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए.
उन्होंने इसके पक्ष में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने बयान का ज़िक्र किया और कहा कि जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेन्द्र प्रसाद और भीमराव आंबेडकर ने इसका विरोध किया था.
उन्होंने ये भी कहा कि ये बिल पूरी तरह से संविधान के दायरे में है और लोगों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन्होंने कहा कि इसे लेकर उनके कोई राजनीतिक हित नहीं हैं.
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बीबीसी 'दिनभर पूरा दिन पूरी ख़बर': ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को मंज़ूरी
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राजस्थान: कोटा में यूपी के छात्र ने की आत्महत्या, इस साल का 17वां मामला,
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राजस्थान की शिक्षा नगरी कहे जाने वाले कोटा में गुरुवार को एक 18 साल के छात्र ने खुदकुशी की है. ये छात्र अप्रैल महीने में कोचिंग करने उत्तर प्रदेश से कोटा आया था.
मृतक कोटा के विज्ञान नगर थाना इलाक़े के एक हॉस्टल में रह कर नीट की कोचिंग कर रहा था.
थाना अध्यक्ष देवेश भारद्वाज ने घटना की जानकारी देते हुए बीबीसी से कहा, "मनजोत छाबड़ा नाम का छात्र रात खाना खा कर अपने रूम में सोया था. सुबह परिजनों का फ़ोन नहीं उठाया, तो केयर टेकर को सूचना दी गई. जिसके बाद उन्होंने रूम का दरवाजा तोड़ा तो खुदकुशी की जानकारी मिली है."
उन्होंने बताया कि, "स्टूडेंट उत्तर प्रदेश के रामपुर का रहने वाला है, जो अप्रैल महीने में कोटा आया था. परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है, उनके आने के बाद ही पोस्टमॉर्टम करवाया जाएगा."
साल 2022 में कोटा में कोचिंग करने वाले 15 स्टूडेंट्स ने आत्महत्या की. बीते साल दिसंबर में एक साथ तीन छात्रों की खुदकुशी की घटना ने सबको हैरान कर दिया था.
साल 2023 में अब तक बीते साल से ज़्यादा कोचिंग स्टूडेंट्स खुदकुशी कर चुके हैं.
कोटा सिटी एसपी शरद चौधरी ने बीबीसी से इस साल अब तक 17 छात्रों की खुदकुशी की पुष्टि की है.
वैज्ञानिकों ने धरती पर अब तक के सबसे भारी जानवर मिलने का दावा किया, वज़न में डायनासॉर भी कई टन कम,
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इमेज कैप्शन, जीवाश्म से मिली जानकारी के आधार पर बनाई गई व्हेल की तस्वीर
वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें एक ऐसे जानवर का जीवाश्म मिला है जो धरती का अब तक का सबसे बड़ा भारी जानवर हो सकता है.
उन्हें एक प्राचीन व्हेल का जीवाश्म मिला है जो अब लुप्तप्राय हो चुका है.
वैज्ञानिकों को अनुमान है कि जब ये व्हेल जीवित रही होगी इसका वज़न क़रीब 200 टन यानी दो लाख किलोग्राम रहा होगा.
शोधकर्ताओं का कहना है कि सबसे बड़ी ब्लू व्हेल का जीवाश्म भी शायद ही इसकी बराबरी कर पाएगा.
व्हेल का ये जीवाश्म (हड्डियां) पेरू के दक्षिण मौजूद रेगिस्तान से खोद कर निकाला गया हैं. इसका नाम पेरुसीटस कोलोसस दिया गया है.
जीवाश्म की कार्बन डेटिंग से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि ये क़रीब 3 करोड़ 90 लाख साल पुराना है.
ब्रसेल्स में मौजूद रॉयल बेल्जियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ नैचुरल साइंसेस की डॉक्टर रेबेका बेनियॉन ने बताया, "रीढ़ की हड्डी का हर एक टुकड़ा क़रीब 100 किलो का है, जो होश उड़ाने वाला है."
वैज्ञानिकों के अनुसार पेरुसीटस की लंबाई 17 से 20 मीटर तक रही होगी जो कि आम व्हेल से कम है, लेकिन वज़न के मामले में इसकी हड्डियों का वज़न 5.3 से लेकर 7.6 टन कर होगा, इसमें शरीर की मांसपेशियां और दूसरे ऑर्गन जोड़े तो इसका कुल वज़न कम से कम 85 टन से लेकर अधिक से अधिक 320 टन तक होता होगा.
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इमेज कैप्शन, व्हेल की हड्डियों को आम लोगों के देखने के लिए पेरू के लीमा में रखा गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार धरती पर रहने वाले डायनोसॉर वज़न में क़रीब 100 टन तक के थे. ये इस व्हेल की तुलना में कम वज़न वाले थे.
जीवाश्म वैज्ञानिक डॉक्टर मारियो अर्बिना के नेतृत्व में जीवाश्म की खोज करने वाली टीम की एक सदस्य डॉक्टर एली एमसन ने कहा, "इस जीवाश्म को क़रीब 13 साल पहले खोजा गया था. इसका आकार, इसकी बनावट के कारण इसे पेरू की राजधानी लीमा तक लाने में ही तीन साल लग गए जहां इस पर शोध होना था."
ये धरती पर पाई जाने वाली प्राचीन तरह की व्हेल है जिन्हें बैसिलोसॉरिड कहा जाता है.
समुद्र में रहने वाली इस व्हेल के शरीर के क़रीब 18 हड्डियों को रेगिस्तान से निकाला गया. इनमें रीढ़ की हड्डी के 13 हिस्से, चार पसलियां और कूल्हे की हड्डी का एक हिस्सा शामिल है.
इन अलग-अलग टुकड़ों के साथ वैज्ञानिक इस जानवर की उम्र और उसके बारे में काफी कुछ पता करने में कामयाब रहे हैं.
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इमेज कैप्शन, वैज्ञानिकों का कहना है कि व्हेल के औसत आकार की तुलना में पेरुसीटस का आकार छोटा रहा होगा, लेकिन वज़न के मामले में वो सामान्य व्हेल से कहीं आगे थी.
वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी हड्डियों का घनत्व अधिक है जो ओस्टियोस्केलेरोसिस नाम की एक प्रक्रिया के कारण है जिसमें हड्डियों के बीच की खाली जगहों भर जाती हैं. आकार में भी ये हड्डियां अधिक बड़ी थीं, उनके बाहरी हिस्सों में ग्रोथ अधिक था, जिसे पैकियोस्टोसिस कहा जाता है.
टीम का कहना है कि ये किसी बीमारी के लक्षण नहीं थे बल्कि खुद को कम पानी में तैरने के काबिल बने रहने के लिए व्हेल के शरीर में आया गया एक किस्म का रूपांतरण है.
आज के वक्त में इस तरह का रूपांतरण मैनाटी (जिसे समुद्री गाय भी कहते हैं, ये एक तरह का समुद्री स्तनधारी जीव होता है) में पाया जाता है जो दुनिया के कुछ हिस्सों में समुद्र तटीय इलाक़ों में मिलते हैं.
हरियाणा सीएम पर किए ट्वीट को लेकर ओवैसी ने अशोक गहलोत को घेरा
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नूंह और गुरुग्राम में हुई हिंसा के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री के लिए एक ट्वीट पर असदुद्दीन ओवैसी ने राजस्थान सीएम अशोक गहलोत को घेरा है.
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि नासिर और जुनैद हत्याकांड में कार्रवाई को लेकर राजस्थान सरकार ने सुस्ती दिखाई है.
मोनू मानेसर नासिर-जुनैद हत्याकांड में अभियुक्त हैं और काफ़ी वक्त से फरार चल रहे हैं.
नूंह में जिस जलाभिषेक यात्रा के दौरान दो गुटों में टकराव हुआ था, उस यात्रा में भी मोनू मानेसर के शामिल होने की ख़बरें आ रही थीं.
यात्रा के बाद जब हिंसा भड़की और छह लोगों की मौत हो गई तो ये सवाल उठा कि आख़िर मोनू मानेसर को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया गया?
इस सवाल के जवाब में पहले हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बुधवार को कहा, ''मोनू मानेसर पर राजस्थान में केस दर्ज है. राजस्थान पुलिस को मोनू को पकड़ना चाहिए.''
फिर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने भी कहा था, ''जहां तक मोनू मानेसर का सवाल है, उसके खिलाफ़ पिछला केस राजस्थान सरकार ने दर्ज किया था. राजस्थान सरकार को हमने कहा है कि जिस तरह की मदद की ज़रूरत होगी, हम करेंगे."
उन्होंने कहा था, "राजस्थान पुलिस उन्हें ढूंढ रही है, वो कहां हैं, हमारे पास कोई इनपुट अभी नहीं है. उनके पास है या नहीं हम नहीं कह सकते हैं. राजस्थान पुलिस उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को स्वतंत्र है."
वहीं अशोक गहलोत ने ट्वीट किया, ''हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर मीडिया में बयान देते हैं कि राजस्थान पुलिस की हरसंभव मदद करेंगे परन्तु जब हमारी पुलिस नासिर-जुनैद हत्याकांड के आरोपियों को गिरफ्तार करने गई तो हरियाणा पुलिस ने कोई सहयोग नहीं किया बल्कि राजस्थान पुलिस पर एफ़आईआर तक दर्ज कर ली.''
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अशोक गहलोत बोले, ''जो आरोपी फ़रार हैं उन्हें तलाशने में हरियाणा पुलिस राजस्थान पुलिस का सहयोग नहीं कर रही. खट्टर हरियाणा में हो रही हिंसा को रोकने में नाकाम रहे और अब सिर्फ लोगों का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं जो उचित नहीं है.''
अब असदुद्दीन ओवैसी ने गहलोत के ट्वीट पर कहा है, "गहलोत साहब, हरियाणा की भाजपा सरकार से हम वैसे भी कोई उम्मीद नहीं रखते, लेकिन नासिर-जुनैद की हत्या से लेकर अब तक आपके प्रशासन ने सुस्ती और लाचारी दिखाई है."
"चाहे वो उनके परिवारों को मुआवज़ा देने की बात हो या उनके क़ातिलों को पकड़ने की. जुनैद-नासिर का कत्ल फरवरी में हुआ था. अगर खट्टर सरकार आपका सहयोग नहीं कर रही थी, तो तब से लेकर अब तक आपकी सरकार ने क्या कदम उठाए? आपकी सरकार आर्टिकल 131 के तहत हरियाणा सरकार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गई?"
ज्ञानवापी सर्वे मामला: हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
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इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे की अनुमति देने के बाद गुरुवार को मुस्लिम पक्ष यानी अंजुमन इंतेज़ामिया मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.
समिति ने कोर्ट से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सर्वे को बंद कराने की अपील की है.
कोर्ट में वकील निज़ाम पाशा ने ये मामला चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यों की संविधान बेंच के सामने रखा. ये बेंच जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जब ये बेंच दिन की सुनवाई पूरी कर जाने वाली थी उसी वक्त निज़ाम पाशा ने ज्ञानवापी मामले को कोर्ट में पेश किया और बेंच से मामले की जल्द सुनवाई की गुहार लगाई.
निज़ाम पाशा ने कहा, "इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज ही ऑर्डर जारी किया है. आदेश के ख़िलाफ़ हमने स्पेशल लीव पीटिशन दी है. मैंने एक ईमेल लिख कर भी जल्द इस मामले की सुनवाई की गुज़ारिश की है. उन्हें सर्वे पर आगे बढ़ने नहीं दिया जाना चाहिए..."
वीडियो कैप्शन, ज्ञानवापी मस्जिद काशी में कब और कैसे बनी?
वहीं, हाई कोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी के डीएम एस राजलिंगम ने कहा है कि शुक्रवार को मस्जिद का सर्वे शुरू हो जाएगा. इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है.
नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर अमेरिका की टिप्पणी को लेकर भारत ने दिया ये जवाब
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने हरियाणा के नूंह में हुई सांप्रदायिक हिंसा को लेकर आई अमेरिका की टिप्प्णी का जवाब दिया है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि भारत सरकार इस दिशा में काम कर रही है और भारत सरकार की बात अमेरिकी विदेश मंत्रालय की बात से मेल खाती है.
बागची ने कहा, "आपको पता होगा कि नूंह में हिंसा रोकने, वहां स्थिति पर नियंत्रण करने और वहां शांति बहाल करने को लेकर भारत सरकार क्या कुछ कर रही है."
"भारत की टिप्पणी, अमेरिकी विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के साथ मेल खाती है. हम भी चाहते हैं कि स्थिति वहां सामान्य हो जाए,
लेकिन ये विदेश मंत्रालय से जुड़ा मुद्दा नहीं है और मुझे उम्मीद है कि स्थानीय प्रशासन और एजेंसियां इस दिशा में काम कर रही हैं."
क्या इस हिंसा का असर भारत में इसी साल होने वाली जी20 की बैठक पर भी पड़ सकता है और क्या इसके लिए भारत कुछ कर रहा है?
इस सवाल के जवाब में बागची ने कहा कि जी20 की बैठक के बारे में "मुझे नहीं लगता कि इस मामले को लेकर हमने जी20 या फिर दूसरे मुल्कों से बात की है."
"मुझे नहीं लगता कि नूंह में शांति बहाल करने के लिए हमें उनसे बात करने की ज़रूरत है."
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को इस मामले पर टिप्पणी की थी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर से सवाल किया जिसके जवाब में उन्होंने कहा ''हम हमेशा ही दोनों पक्षों से शांत रहने और हिंसा से दूर रहने के लिए कहते हैं. जहां तक इस हिंसा में अमेरिकी नागरिकों के प्रभावित होने की बात है, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है. मैं दूतावास से इस बारे में पता करूंगा.''
हरियाणा में हाल में हुई जी-20 की बैठक और अब सरकार लोगों को सुरक्षा नहीं दे पा रही- नूंह हिंसा पर भूपेन्द्र हु़ड्डा
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हरियाण के नूंह में हुए सांप्रदायिक तनाव को लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नूंह वो जगह है जहां आज़ादी के वक्त भी तनाव नहीं हुआ था.
उन्होंने कहा कि आज़ादी के वक्त, यानी 1947 में भारत के एक बड़े हिस्से में सांप्रदायिक तनाव का माहौल था, लेकिन नूंह में ऐसा कुछ नहीं हुआ जो यहां बीते दिनों हुआ.
उन्होंने कहा, "जुलाई में हरियाणा के गुड़गांव में अपराध और सुरक्षा के मुद्दे पर जी-20 देशों की एक बैठक हुई, लेकिन आज यहां की सरकार कहती है कि वो लोगों को सुरक्षा नहीं दे सकती है."
उन्होंने कहा, "सरकार का काम लोगों को सुरक्षा देना होता है, लेकिन सरकार इसमें पूरी तरह से नाकाम रही है."
गुड़गांव में 13-14 जुलाई को जी20 देशों के नेताओं का सम्मेलन हुआ था, जिसमें 'एनएफ़टी, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और मेटावर्स के दौर में अपराध और सुरक्षा' के मुद्दे पर चर्चा हुई.
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भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा, "मैं ये कहूं उससे पहले गुड़गांव से बीजेपी के सांसद राव इंदरजीत सिंह कह चुके हैं कि ये प्रशासन की और प्रदेश सरकार की नाकामी के कारण हुआ. पुलिस का कहना था कि उन्होंने कई दिनों पहले इसकी ख़बर सरकार को दी थी लेकिन सरकार ने सही वक्त पर सही कदम नहीं उठाए."
हुड्डा ने मांग रखी कि हरियाणा में सरकार क्यों और कैसे नाकाम हुई इसे लेकर न्यायिक जांच की जानी चाहिए.
उन्होंने राज्य की बाजेपी-जेजेपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार की नाकामी के कारण हरियाणा में सांप्रदायिक तनाव का माहौल बना.
उन्होंने कहा, "सीएम मनोहर लाल खट्टर कहते हैं ये सोची समझी साजिश है, राव इंदरजीत सिंह ने सवाल उठाया है कि यात्रा में लोगों के पास हथियार और डंडे कहां से आए, सरकार ने क्यों चेक नहीं किया."
"एक तरफ मुख्यमंत्री कहते हैं कि मोनू मानेसर फरार हैं और उनके ख़िलाफ़ राजस्थान में शिकायत दर्ज है, राजस्थान पुलिस उन्हें पकड़ेगी, हम उनका सहयोग करेंगे. वहीं दूसरी तरफ गृह मंत्री कहते हैं कि हरियाणा में उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज है."
"ये विवादित बात हैं क्योंकि राज्य के गृह मंत्री को पता नहीं है कि उनके पास सीआईडी नहीं है."
"हरियाणा की बीजेपी-जेजेपी सरकार नाकाम सरकार है, यहां की पुलिस बेहद एफिशिएन्ट है लेकिन अगर सही तरीके से जानकारी दी जाती तो वहां ये हादसा नहीं होता."
उन्होंने कांग्रेस की तरफ से लोगों से अपील की कि वो शांति कायम करें और आपस में भाईचारा रखें.
उन्होंने कहा, "यहां कभी भाईचारा बिगड़ा नहीं है. यहां के लोगों को भड़काया गया है. जिन्होंने लोगों को भड़काया है उन्हें पकड़ा जाना चाहिए. किसी तरह की सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए."
ममता बनर्जी सरकार में खेल मंत्री मनोज तिवारी ने क्रिकेट से लिया संन्यास
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भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने क्रिकेट के सभी फॉरमेट से संन्यास का एलान किया है. उन्होंने कुल 12 एकदिवसीय और तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे.
तिवारी पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार में खेल मंत्री भी हैं.
साल 2008 से अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले तिवारी ने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए अपने संन्यास की घोषणा की.
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "क्रिकेट के खेल को अलविदा. इस खेल ने मुझे सबकुछ दिया. मेरा मतलब हर उस चीज़ से है जिसके बारे में मैंने सपने तक में नहीं सोचा था, वो तब जब मेरा जीवन तरह-तरह की चुनौतियों से घिरा था. हमेशा इस खेल और ईश्वर के प्रति आभारी रहूंगा, जो हर वक्त मेरे साथ हे. शुरुआत से लेकर अब तक मेरे सभी कोचों का शुक्रिया."
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अपने पोस्ट में मनोज तिवारी ने पत्नी सुष्मिता रॉय को भी धन्यवाद कहा. उन्होंने कहा कि अपनी पत्नी के समर्थन के बिना वो आज इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाते.
संसद में अमित शाह ने कहा- दिल्ली को राज्य का दर्जा नहीं देना चाहते थे नेहरू, सरदार पटेल और आंबेडकर
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जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी (राजगोपालाचारी), राजेन्द्र प्रसाद और आंबेडकर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के ख़िलाफ़ थे.
नेशनल कैपिटल टैरिटरी ऑफ़ दिल्ली (संशोधन) बिल पर लोकसभा में चर्चा कहते हुए देश के गृह मंत्री अमित शाह ये कहा.
उन्होंने अपनी बात के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि इसकी एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है.
शाह ने कहा, "दिल्ली की स्थापना 1911 में अंग्रेज़ों के शासन के वक्त दिल्ली और महरौली दो तहसीलों को पंजाब प्रांत से अलग तक के बनाई गई थी. 1919 और 1935 में ब्रितानी सरकार ने दिल्ली चीफ़ कमिशनर प्रोविन्स का नोटिफ़िकेशन किया और दिल्ली को चीफ़ कमिशनर प्रोविन्स के तौर पर रखा गया था."
"आज़ादी के बाद पट्टाभि सीतारमैया समिति ने दिल्ली को राज्य स्तर का दर्जा देने की सिफारिश की थी, लेकिन जब ये सिफारिश सदन के सामने आई तक जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, राजाजी, राजेन्द्र प्रसाद और भीमराव आंबेडकर ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये उचित नहीं होगा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए."
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अमित शाह ने सदन से कहा कि उस वक्त नेहरू ने जो चर्चा की थी, आज वो उसके एक हिस्से को पढ़ना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "दो साल पहले सदन ने सीतारमैया समिति की नियुक्ति की. अब जब रिपोर्ट आई तो दुनिया बदल चुकी है, भारत बदल गया है और दिल्ली काफी हद तक बदल चुकी है. इसलिए दिल्ली में हुए इन परिवर्तनों की परवाह किए बगैर उस समिति की सिफारिशों को स्वीकार नहीं कर सकते."