अमेरिका: आरोप तय होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बाइडन प्रशासन पर किया पलटवार

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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ 2020 के राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों को पलटने से जुड़े मामले में आपराधिक आरोप तय हो गए हैं.
फिर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पेश कर चुके 77 वर्षीय ट्रंप ने जो बाइडन सरकार पर पलटवार करते हुए कहा है कि ये 'विच हंट' है.
ट्रंप पर पहले से ही गोपनीय दस्तावेजों के कुप्रबंधन और अपने से जुड़ी जानकारी छिपाने के लिए, पॉर्न स्टार को भुगतान करने से जुड़े दो मामलों में आरोप तय किए जा चुके हैं.
चुनाव के केस में जुड़ी जाँच इस बात पर केंद्रित होगी कि हार और वॉशिंगटन दंगों के बीच दो महीनों के भीतर ट्रंप की गतिविधियां क्या रहीं?
जनवरी 2021 में ट्रंप के समर्थकों ने जो बाइडन की जीत के बाद कैपिटल हिल पर हमला कर दिया था.
इस जाँच की अगुवाई अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से नियुक्त स्पेशल काउंसल जैक स्मिथ कर रहे हैं.
उन्होंने मंगलवार को कहा, "छह जनवरी 2021 को हमारे देश की संसद पर हुआ हमला अमेरिकी लोकतंत्र पर हमला था."
ट्रंप पर धोखाधड़ी करने और आधिकारिक कार्यवाही को रोकने की साज़िश रचने, सरकारी कार्यवाही में रुकावट डालने और इसकी साज़िश रचने और अधिकारों के ख़िलाफ़ साज़िश रचने के आरोप लगाए गए हैं.
आरोप लगाए जाने की घोषणा के तुरंत बाद ट्रंप की टीम ने इसे भ्रष्ट और राजनीतिक मंशा से की गई कार्रवाई बताया है. साथ ही नाज़ी जर्मनी में हुए अत्याचार से इसकी तुलना की.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर लिखा कि उन्हें इतना समर्थन पहले कभी नहीं मिला था.
आगे क्या होगा?
गुरुवार को वॉशिंगटन की अदालत में उन्हें पेश होना है लेकिन ये साफ़ नहीं है कि वो व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे या टेली कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होगी.
चुनावों पर नज़र रखने वालें एक्सपर्ट के मुताबिक ट्रंप रिपब्लिकन नॉमिनेशन में सबसे आगे चल रहे हैं और आम चुनावों में राष्ट्रपति जो बाइडन से उनकी कांटे की टक्कर है.
अगर सभी आरोपों में उन्हें दोषी ठहराया जाता है तो ट्रंप को कई सालों की सज़ा मिल सकती है, लेकिन राष्ट्रपति बनने में ये बाधक नहीं होगा.
छह जनवरी की घटना पर क्या अमेरिकियों की राय?
अमेरिका में लोगों की राय अभी भी मिलीजुली है.
अप्रैल में एपी-एनओआरसी ने एक सर्वे कराया था जिसमें 49% लोगों ने कहा कि छह जनवरी की हिंसा में पूर्व राष्ट्रपति ने ग़ैरक़ानूनी काम किया.
19% का मानना था कि उन्होंने जो कुछ किया वो क़ानूनी था लेकिन अनैतिक था जबकि 20% का मानना था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया.
याहू और यूगोव की ओर से कराए गए सर्वे में 62% लोगों का मानना था कि अगर सज़ा मिलती है तो ट्रंप को राष्ट्रपति नहीं बनने देना चाहिए.
















