वागनर ग्रुप के प्रमुख ने कहा- 'खून खराबा रोकने' के लिए लड़ाके वापस लौट रहे हैं
प्रिगोज़िन ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक ऑडियो संदेश में कहा है कि रूसी राजधानी की ओर बढ़ रहे लड़ाकों को रास्ते में ही ‘रोकने’ पर वो सहमत हो गए हैं.
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अभिनव गोयल and कमलेश मठेनी
वागनर ग्रुप के प्रमुख ने कहा- 'खून खराबा रोकने' के लिए लड़ाके वापस लौट रहे हैं

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ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, वागनर ग्रुप ने मास्को की ओर अपनी कूच को रोक दिया है.
वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन ने कहा है कि खूनखराबा रोकने के लिए उन्होंने अपने लड़ाकों को मास्को जाने से रोक दिया है और वे अब अपने बेस की ओर लौट रहे हैं.
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि वो मास्को के 200 किलोमीटर की परिधि में पहुंच गए थे.
इससे पहले येवगेनी ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक ऑडियो संदेश में कहा था कि रूसी राजधानी की ओर बढ़ रहे लड़ाकों को रास्ते में ही ‘रोकने’ पर वो सहमत हो गए हैं.
रोसिया 24 न्यूज़ चैनल के अनुसार, बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्सेंडर लुकाशेंको ने येवगेनी प्रिगोज़िनके साथ बात की है और प्रिगोज़िन अपने लड़ाकों के कूच को रोकने और हालात को और बिगड़ने से रोकने पर सहमत हो गए हैं.
लुकाशेंको के प्रेस बयान के हवाले से रोसिया 24 न्यूज़ चैनल ने कहा कि प्रिगोज़िन ने मास्को तक मार्च को बीच में ही रोकने के लिए लुकाशेंको के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है.
बयान में ये भी कहा गया है कि वागनर पीएमसी लड़ाकों के लिए सिक्युरिटी गारंटी के साथ हालात के और बिगड़ने से रोकना का रास्ता ढूंढना संभव हो गया है.
समाचार चैनल के मुताबिक इस समझौता वार्ता पर पुतिन भी सहमत हो गए हैं.
एक दिन पहले मोर्चे से मास्को की ओर कूच करने से पहले प्रिगोज़िन का कहना था कि उनका उद्देश्य "सैन्य विद्रोह नहीं है बल्कि जो वो कर रहे हैं वो न्याय के लिए किया जा रहा मार्च है."
यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना के साथ प्राइवेट आर्मी वागनर ग्रुप का अहम योगदान रहा है ख़ासकर महीनों तक चली बखमूत की लड़ाई में.
रूस के विदेश मंत्रालय का बयान- देश राष्ट्रपति पुतिन के साथ

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रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश का समाज सशस्त्र विद्रोह की कोशिश को पूरी तरह खारिज करता है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ है.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि साजिशकर्ता देश को अस्थिर करना चाहते हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की रूस की कोशिशों को कमज़ोर कर रहे हैं. इस विद्रोह के तार रूस के दुश्मनों के हाथों में हैं.
बयान के अनुसार, "हम पश्चिमी मुल्कों को चेतावनी देते हैं कि वो रूस के ख़िलाफ़ अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए रूस की घरेलू स्थिति का फायदा उठाने की ज़रा भी कोशिश न करें. इस तरह की कोशिशें नाकाम रहेंगी. इन्हें न तो रूस के भीतर कोई समर्थन मिलेगा और न ही रूस के बाहर राजनीतिक ताकतें इसका समर्थन करेंगी."
रूस-यूक्रेन युद्ध की तरफ इशारा करते हुए बयान में कहा गया है कि "विशेष सैन्य अभियान के तहत सभी उद्देश्यों को हम हासिल करेंगे."

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मॉस्को में सप्ताह भर के लिए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द
रूस के करीबी माने जाने वाले येवगेनी प्रिगोज़िन के रूसी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन के सैन्य मुख्यालय पर कब्ज़े के दावे के बाद मॉस्को में सप्ताह भर के लिए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.
अधिकारियों ने घोषणा की है कि मॉस्को में एक जुलाई तक के लिए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.
इससे पहले मॉस्को के मेयर ने लोगों से कहा था कि वो घरों से बाहर निकलने और शहर में घूमने से बचें.

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रूस को लेकर ब्रितानी प्रधानमंत्री ने जताई चिंता
ब्रितानी प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने रूस की स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि सभी पक्षों को ज़िम्मेदारी से काम करना चाहिए और आम नागरिकों की सुरक्षा सभी पक्षों की प्राथमिकता होनी चाहिए.
शनिवार दोपहर इस मामले को लेकर विदेश मंत्री जेम्स क्लेवर्ली के नेतृत्व में यूके की इमर्जेंसी कमिटी कोबरा की एक बैठक हुई.
बताया जा रहा है कि सुनक इस मुद्दे को लेकर दूसरे सहयोगी देशों से चर्चा करने वाले हैं.
बीबीसी संवाददाता लॉरा कॉसनबर्ग से बातचीत में सुनक ने कहा कि वो स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं.
सैफ चैंपियनशिप: भारत ने नेपाल को हराया, सेमीफ़ाइनल में बनाई जगह

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इमेज कैप्शन, भारतीय फ़ुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री भारत ने सैफ़ फ़ुटबॉल चैंपियनशिप में नेपाल को हराकर सेमीफ़ाइनल में जगह बना ली है. भारत ने नेपाल को 2-0 से मात देकर मैच अपने नाम किया.
इस मैच में कप्तान सुनील छेत्री और महेश नोरेम ने गोल किया.
इससे पहले भारत ने पाकिस्तान को 4-0 से हराया था. इस मैच में भारतीय कप्तान सुनील छेत्री ने हैट्रिक लगाई थी.
बेंगलुरु के कांतावीर स्टेडियम में टूर्नामेंट का आगाज़ ही भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले से हुआ.
नेपाल और पाकिस्तान इस चैंपियनशिप से बाहर हो गए हैं.
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रूस में वागनर ग्रुप की बगावत के बाद पड़ोसी देशों ने उठाए क्या कदम

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रूस में हुई बगावत के बाद पड़ोसी देश भी सर्तक हो गए हैं. लातविया ने रूस से लगी अपनी सीमाएं बंद कर ली हैं.
पिछले साल यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद रूस के लोग लातविया में प्रवेश करने लगे थे.
पड़ोसी देश एस्टोनिया ने भी कहा है कि वो सीमा पर सुरक्षा बढ़ा रहा है. एस्टोनिया की प्रधानमंत्री ने कहा कि वो लातविया, लिथुआनिया और फिनलैंड के अपने समकक्षों के संपर्क में हैं.
इनके अलावा पोलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका ने कहा है कि वो स्थिति पर करीब से नज़र बनाए हुए हैं.
वागनर ग्रुप ने दावा किया है कि उन्होंने रोस्तोव और वोरोनिश शहर पर कब्ज़ा कर लिया है. वागनर ग्रुप भाड़े के लड़ाकों का इस्तेमाल करता है. यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस को वागनर ग्रुप से मदद मिल रही थी.
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विद्रोहियों की गतिविधियों को 'पीठ में छुरा भोंकने' वाला कदम बताया है.
उन्होंने कहा कि कुछ रूसी लोगों को आपराधिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बरगलाया गया है.
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मणिपुर को लेकर सर्वदलीय बैठक, गृह मंत्री अमित शाह ने दी ये जानकारी

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मणिपुर की स्थिति को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए सभी कोशिशें की जा रही हैं.
मणिपुर में पिछले 50 दिनों से हिंसा का दौरा जारी है जिसे लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि मणिपुर में हिंसा शुरू होने के बाद से एक भी दिन ऐसा नहीं हुआ जब उन्होंने इसे लेकर पीएम मोदी से बात ना की हो और पीएम मोदी ने निर्देश ना दिए हों.
बीजेपी प्रवक्ता और मणिपुर के प्रभारी संबित पात्रा ने बताया, ''इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने अपने प्रतिनिधि भेजे थे. सभी ने अपने विषय को बड़े ही सकारात्मक रूप से, एक सकारात्मक माहौल में रखा. बैठक से पहले गृह मंत्रालय की ओर से मणिपुर की परिस्थिति और सरकार के उठाए कदमों को लेकर विस्तार से प्रजेंटेशन दिया गया.''
पात्रा ने बताया, ''सभी प्रतिनिधियों को सुनने के पश्चात गृह मंत्री ने कहा कि जो भी आपने कहा है इन सभी विषयों पर हम विस्तार से चर्चा करेंगे. गृह मंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि आपसी सहयोग के साथ हम जल्द ही शांति की ओर बढ़ेंगे.
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विपक्ष ने क्या कहा
वहीं, विपक्ष ने इसे 'खुले मन से हुई बैठक' तो बताया है लेकिन अपनी कुछ मांगे भी रखी हैं.
बैठक के बाद राजद के सासंद मनोज झा ने कहा, ''बैठक में बड़े खुले मन से बात हुई. 50 दिन हो गए, मौतें हो रही है, विस्थापन हो रहा है. वहां के राजनीतिक नेतृत्व पर पूरी तरह भरोसा नहीं है. ये लगभग सभी विपक्षी दलों ने कहा. उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो शख़्स वहां पर प्रशासन चल रहा है वो भरोसमंद नहीं है. अगर वो शख़्स प्रभारी रहता है तो आप शांति नहीं ला सकते.''
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डीएमके सांसद तिरुची शिवा ने कहा, ''हमने मणिपुर में 50 दिनों से चल रही घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की है. गृह मंत्री ने सभी को सुना और कहा कि वो इस पर ध्यान दे रहे हैं और हम उन पर भरोसा करें. हमने अनुरोध किया कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को मणिपुर भेजा जाए.''
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कांग्रेस ने रखीं आठ मांगे
इसी तरह कांग्रेस ने भी मणिपुर के मुख्यमंत्री को तुरंत बदले जाने और प्रधानमंत्री को राज्य की स्थिति पर बयान देने सहित कुल आठ मांगें रखी हैं.
इनमें राज्य के मुख्यमंत्री को तुरंत बदले जाने और बिना देरी किए प्रभावित लोगों के लिए राहत, पुनर्वास और आजीविका का पैकेज तैयार किए जाने की मांग शामिल है.
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मिस्र पहुंचे पीएम मोदी, भारतीय समुदाय के लोगों ने इस अंदाज़ में किया स्वागत

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इमेज कैप्शन, पीएम मुस्तफ़ा मैडबौली ने हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का स्वागत किया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका से मिस्र पहुंचे हैं. दो दिन के दौरे पर मिस्र पहुंचे मोदी का वहां के पीएम मुस्तफ़ा मैडबौली ने राजधानी काहिरा के हवाई अड्डे पर स्वागत किया.
इस दौरान पीएम मोदी को गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया.
मोदी की बतौर प्रधानमंत्री ये मिस्र की पहली यात्रा है. 1997 के बाद ये किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली मिस्र यात्रा है.
पीएम मोदी के राजधानी काहिरा पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके स्वागत में एक युवती ने शोले फ़िल्म का गाना भी गाया.
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पीएम मोदी अपने दौरे के दौरान रविवार को मिस्र के राष्ट्रपति अल-सीसी से मुलाक़ात करेंगे. वो काहिरा में एतिहासिक अल-हाकिम मस्जिद में भी जाएंगे.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी, ''राष्ट्रपति अल-सीसी के साथ अलावा पीएम मोदी मिस्र की सरकार के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, कुछ प्रमुख हस्तियों और भारतीय समुदाय के लोगों के साथ मुलाक़ात करेंगे. ''
पीएम मोदी ने काहिरा पहुंचकर ये ट्वीट किया, ''मैं हवाई अड्डे पर इस स्वागत के लिए प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा मैडबौली का धन्यवाद करता हूं. भारत-मिस्र के संबंध फले-फूलें और हमारे देशों के लोगों को लाभ पहुंचे.''
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साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया का योगेश्वर दत्त पर ग़लतबयानी का आरोप- Live

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ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने योगेश्वर दत्त पर ग़लत बयानी का आरोप लगाया है.
दोनों पहलवानों ने कहा है कि योगेश्वर दत्त ने ग़लत जानकारी दे रहे हैं.
साक्षी मलिक ने कहा, "हमने किसी का कभी हक़ नहीं मारा है. हमने ईमानदारी से कुश्ती लड़ी है."
योगेश्वर दत्त ने इंडियन ओलंपिक असोसिएशन (आईओए) की एड-हॉक कमिटी के उस फ़ैसले से नाराज़ होकर सवाल उठाए हैं, जिसमें रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे पहलवानों को ओलंपिक क्वालिफिकेशन ट्रायल में छूट दी गई है.
विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया इसी पर अपनी बात रख रहे हैं.
पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने शनिवार को क़रीब 40 मिनट का एक फेसबुक लाइव किया और कहा कि पहलवान योगेश्वर दत्त पर पलटवार किया है और कहा कि वो उनके ख़िलाफ़ ग़लत बयान दे रहे हैं.
उन्होंने योगेश्वर दत्त को महिला विरोधी करार दिया और कहा कि उन्होंने कभी भी महिलाओं के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आए है.
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई बेटियों के न्याय के लिए है लेकिन साथ ही ये आज के लिए नहीं बल्कि भविष्य के लिए है.
उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि स्पॉन्सशिप सीधे पहलवान को मिलनी चाहिए, न कि उसका पैसा फेडेरेशन के पास जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बृजभूषण इसे रोक रहे थे.
साक्षी मलिक ने कहा कि महिला पहलवानों ने ट्रायल न देने से जुड़ी कोई चिट्ठी कमिटी में नहीं दी है, बल्कि उन्होंने कमिटी से केवल थोड़ा वक्त मांगा था. इससे पहले योगेश्वर ने कहा था कि महिला पहलवानों ने इंडियन ओलंपिक असोसिएशन की एड-हॉक कमिटी को चिट्ठी लिखकर ट्रायल में छूट मांगी थी.
बजरंग पूनिया ने कहा कि योगेश्वर दत्त "समाज में हमारे ख़िलाफ़ ज़हर घोलने की कोशिश कर रहे हैं. उम्मीद नहीं थी कि वो ऐसा करेंगे."
वागनर ग्रुप ने जिन शहरों पर नियंत्रण का दावा किया है, उनकी क्या अहमियत है

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इमेज कैप्शन, रूसी शहर रोस्तोव-ऑन-डॉन अमेरिकी थिंकटैंक इंस्टीट्यूट ऑफ़ वॉर का मानना है कि येवगेनी प्रिगोज़िन रूस के रक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं.
लेकिन, प्रिगोज़िन के सफ़ल होने की संभावना कम है क्योंकि रूस उनके इस कदम के ख़िलाफ़ दिख रहा है.
हालांकि, वागनर के रोस्तोव-ऑन-डॉन पर हमले की किसी भी कोशिश का यूक्रेन में युद्ध पर असर पड़ सकता है क्योंकि रोस्तोव में रूस की दक्षिणी सैन्य ज़िले की कमांड है जो यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस के लिए काफ़ी अहम है.
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अमेरिकी थिंकटैंक के मुताबिक दक्षिणी सैन्य ज़िले की 58वीं कंबाइंड आर्म्स आर्मी दक्षिणी यूक्रेन में सेना का सामना कर रही है.
साथ ही ये यूक्रेन में लड़ रही रूसी सेना के लिए कमांड सेंटर भी है.
यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की लड़ाई में रोस्तोव शहर की अहम भूमिका रही है.
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रोस्तोव यूक्रेन की सीमा के पास का शहर है जहां लगभग दस लाख की आबादी रहती है.
यूक्रेन भेजे जाने से पहले रूसी सैनिकों को अक्सर ही रोस्तोव में ठहराया जाता है.
रूसी सेना के ऑपरेशन में लॉजिस्टिकल सपोर्ट में इस शहर की अहम भूमिका रही है.
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वोरोनिश की अहमियत
वोरोनिश भी रूस के एक प्रांत की राजधानी है. ये शहर भी यूक्रेन की सीमा से ज़्यादा दूर नहीं है.
क्षेत्रफल के लिहाज से वोरोनिश भी रोस्तोव जितना ही बड़ा है.
रोस्तोव से मॉस्को के रास्ते में वोरोनिश लगभग बीच में पड़ता है.
रेलवे नेटवर्क में वोरोनिश को एक अहम केंद्र के तौर पर देखा जाता है.
वागनर ग्रुप के येवगेनी प्रिगोज़िन क्या रूस में तख़्तापलट की कोशिश में है?
रूस में चल रही है दो इन ताकतवर लोगों के बीच जंग, जो इनवुड, यूक्रेन में रह चुके बीबीसी संवाददाता

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इमेज कैप्शन, प्राइवेट मिलिट्री कंपनी वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन और रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच रूस के अंदर ही दो लोगों के बीच एक और जंग छिड़ी हुई है.
कहा जा रहा है कि प्राइवेट मिलिट्री कंपनी वागनर ग्रुप के प्रमुख येवगेनी प्रिगोज़िन और रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है.
शुरुआत में ये झगड़ा यूक्रेन के पूर्वी डोनबास क्षेत्र के बीच में स्थित शहर बखमूत में केंद्रित था. जहां रूसी सेना दूसरी जगह संघर्ष कर रही थी, वहां वागनर समूह के लड़ाके बढ़त बना रहे थे.
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प्रिगोज़िन ने अपनी सेना की सफ़लता को अपना प्रोफ़ाइल मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया और शोइगु के तहत लड़ रही सेना की आलोचना की.
उन्होंने रक्षा मंत्रालय से हथियार ना मिलने का भी आरोप लगाया और यूक्रेन से लड़ाके वापस बुलाने की भी चेतावनी दी थी.
कोई भी जीत होने पर दोनों पक्ष उसका श्रेय लेने की कोशिश करते थे.
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प्रिगोज़िन हमेशा से राष्ट्रपति पुतिन की आलोचना करने से बचते रहे हैं लेकिन उनके आसपास मौजूद लोग प्रिगोज़िन के निशाने पर रहे हैं.
उस समय मैंने जिन लोगों से बात की थी उनका कहना था कि प्रिगोज़िन आग से खेल रहे हैं. वो अपनी सीमा से आगे बढ़ रहे हैं.
अभी आ रहीं रिपोर्ट्स की मानें तो लगता है कि प्रिगोज़िन ने आगे बढ़ने का फ़ैसला ले लिया है.
सिक्किम की ये रानी क्या सीआईए एजेंट थीं? - विवेचना
बिहार में फिर एक बार पुल का हिस्सा गिरा, एनएचएआई बनवा रहा है पुल,

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बिहार के किशनगंज-अररिया ज़िले को जोड़ने वाले एक पुल का पिलर गिर गया है.
मेची नदी पर बन रहे इस पुल का पिलर किशनगंज में गोरीचक के पास गोरी गांव में गिरा है.
यह घटना भागलपुर में इसी महीने गंगा नदी पर बन रहे पुल के गिरने के महज़ बीस दिनों के अंदर हुई है.
हालांकि अब जो पुल गिरा है वह केंद्र सरकार के अधीन बन रहा है.
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समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ यह पुल नेशलन हाइवे 327 ई के चौड़ीकरण के तहत बनवाया जा रहा है.
इस पुल को बिहार के किशनगंज और अररिया ज़िलों के बीच संपर्क को बेहतर करने के लिए बनाया जा रहा है.
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बिहार के उपमुख्यमंत्री और सड़क निर्माण विभाग का ज़िम्मा संभाल रहे तेजस्वी यादव ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा है, "यह केंद्र सरकार अधीन 'भारत माला परियोजना' अंतर्गत एनएचएआई द्वारा निर्मित निर्माणाधीन पुल है. इसका बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग से कोई संबंध नहीं है. इस परियोजना के निर्माण से संबंधित एजेंसी और अधिकारियों को श्रेय एवं दंड देने का सर्वाधिकार एनएचएआई का है."
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ख़बरों के मुताबिक़ किशनगंज में शुक्रवार हुई भारी बारिश की वजह से मेची नदी में पानी का बहाव बढ़ गया है.
तस्वीरों के साफ़ पता चलता है कि पिलर के गिरने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया है.
अभी इस पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ था और बनने के पहले ही बिहार में एक और पुल को हुए नुक़सान हो गया है.
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सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के ब्रिज इंजीनियरिंग एंड स्ट्रक्चर डिविज़न के चीफ़ साइंटिस्ट डॉक्टर राजीव कुमार गर्ग ने अपनी टीम के साथ इस विषय पर एकविस्तृत अध्ययनकिया है.
2010 पुलों के एक अध्ययन में उन्होंने पाया है कि भारत में 80 फ़ीसदी से ज़्यादा पुल प्राकृतिक हादसों की वजह से गिरते हैं.
इसमें बाढ़, भूकंप और आंधी जैसी प्राकृतिक आपदा शामिल हैं.
इसमें ख़राब निर्माण और नदियों से बालू का सीमा ज़्यादा खनन भी पुल के कमज़ोर होने के पीछे एक वजह बताई गई है.
ईरान-तुर्की सीमा पर अपहरण और फ़िरौती की मजबूरी
वीडियो कैप्शन, ईरान-तुर्की सीमा पर अपहरण और फ़िरौती की मजबूरी बीबीसी की एक पड़ताल में ये सामने आया है कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाने वाले लोगों को ईरान और तुर्की की सीमा पर अग़वा किया जा रहा है और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है.
अग़वा किए गए लोगों के घरवालों को वीडियो भेजकर उन्हें छोड़ने के लिए फ़िरौती की रक़म मांगी जा रही है.
बीबीसी संवाददाता सोरन क़ुर्बानी ने भी 12 साल पहले ईरान से यूके आने के लिए कुछ ऐसी ही राह चुनी थी.
उन्होंने महीनों मेहनत कर इन गिरोहों के शिकार लोगों को खोजा और उनकी कहानियां दुनिया के सामने लेकर आए.
प्राइवेट मिलिट्री कंपनी वागनर ग्रुप राष्ट्रपति पुतिन के लिए कितनी बड़ी चुनौती, बर्न्ड डेब्यूज़मैन जूनियर, बीबीसी न्यूज़, वाशिंगटन डीसी

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इमेज कैप्शन, वागनर समूह के बॉस येवगेनी प्रिगोज़िन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फाइल फोटो रूस के अंदरूनी कलह से जुड़े घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नज़र है. इनमें अमेरिका के पूर्व डेप्युटी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ़ डिफेंस माइक मुलरॉय भी एक हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि वागनर समूह के बॉस येवगेनी प्रिगोज़िन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं.
माइक मुलरॉय सीआईए का भी हिस्सा रहे हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा, "ये रूस के बारे में काफी कुछ कहता है कि किस तरह से उसे यूक्रेन पर अपने रणनीतिक रूप से विध्वंसकारी आक्रमण के लिए भाड़े के सैनिकों का सहारा लेना पड़ा. ये येवगेनी प्रिगोज़िन के बारे में भी काफी कुछ कहता है. जो बात येवगेनी प्रिगोज़िन अब कहने लगे हैं, उसके बारे में रूसी लोगों को शुरू से ही झूठ कहा जा रहा था."
छोड़िए X पोस्टX सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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माइक मुलरॉय का कहना है कि अगर वागनर ग्रुप के लड़ाके रूस पर पुतिन के नियंत्रण को वास्तव में चुनौती देने लगे तो रूस को यूक्रेन पर हमले से ध्यान हटाकर अपनी सैनिक क्षमता पर आत्मरक्षा के लिहाज से ध्यान देना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, "अगर वागनर समूह की कोशिश नाकाम भी हो जाती है तो युद्ध से जुड़े सबसे करीबी लोग भी कहेंगे कि यूक्रेन पर हमला एक भयानक गलती थी."
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रूस में हुई 'बगावत' पर क्या बोले यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की

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इमेज कैप्शन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की रूस में बदलते घटनाक्रमों को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने अपने टेलीग्राम अकाउंट पर लिखा है कि जो ''गलत रास्ता अपनाता है वो अपना विनाश कर लेता है'' और ''रूस का कमज़ोर होना स्वाभाविक है.''
हालांकि, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का ज़िक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने रूस के यूक्रेन पर हमला करने को लेकर तंज कसा है.

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ज़ेलेंस्की ने लिखा कि रूस अपनी सेना और भाड़े के सैनिकों को ''जितने ज़्यादा दिन यूक्रेन में रखेगा उतना ही वो अपने लिए उथल-पुथल और परेशानी पैदा करेगा.''
ज़ेलेंस्की ने लिखा, ''रूस अपनी कमज़ोरी और अपनी सरकार की बेवकूफ़ी छुपाने के लिए प्रोपैगेंडा का इस्तेमाल करता है. अब वहां इतनी उथल-पुथल मच गई है कि उसके पीछे कोई झूठ नहीं छुप सकता. ये सब एक ही व्यक्ति के कारण हो रहा है... हालांकि, वो इसे आगे कहीं ले जाने के लायक नहीं है. रूस का कमज़ोर होना स्वाभाविक है.''
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यूक्रेन के सैनिकों ने जताई खुशी
पूर्वी यूक्रेन में बाखमुत से घायल सैनिकों को ला रहे यूक्रेनी सेना के डॉक्टरों ने रूस में सैन्य विरोध की ख़बर का स्वागत किया है.
चेसिव यार शहर में एक सैनिक ने मुस्कुराते हुए कहा, ''अगर रूस में क्रांति हो जाती है तो मैं आराम से ड्रिंक करूंगा.''
लेकिन, दूसरों को अभी ये साफ नहीं है कि युद्ध पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है.
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एक अनुभवी सैन्य डॉक्टर ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि इससे हमें मदद मिलेगी. लेकिन, पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि रूस में जो हो रहा है वो असली क्रांति से ज़्यादा एक दिखावा है.''
हालांकि, यूक्रेन इस समय युद्ध में फंसा हुआ है तो संभावना है कि वो रूस में मची अफरा-तफरी और रूसी सैनिकों के मनोबल में आई कमी का फायदा उठाएगा.
वागनर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने रोस्तोव और वोरोनिश शहर को अपने नियंत्रण में ले लिया है.
वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि कुछ रूसी लोगों को आपराधिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बरगलाया गया है.
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पटना में मिले 15 विपक्षी दल लेकिन दिल मिलने में कितनी दूरियां
रूस के सैनिक नेतृत्व को चुनौती देने वाला वागनर समूह क्या है?

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इमेज कैप्शन, वागनर ग्रुप के बॉस येवगेनी प्रिगोज़िन भाड़े के सैनिकों या मर्सिनरीज़ के उस दस्ते को जिसे वागनर ग्रुप कहा जाता है, के बारे में कई तरह की बातें कही-सुनी जा रही है.
इसके बॉस येवगेनी प्रिगोज़िन ने रूसी सेना के ख़िलाफ़ विद्रोही रुख अपना रखा है. हम उनके बारे में क्या जानते हैं?
वागनर ग्रुप का आधिकारिक नाम पीएमसी वागनर है. वे खुद को प्राइवेट मिलिट्री कंपनी कहते हैं.

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साल 2014 में इस समूह का जिक्र सबसे पहले सामने आया था. तब वागनर समूह के लड़ाके पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक अलगाववादी बलों के साथ लड़ रहे थे.
उसके बाद से इस प्राइवेट मिलिट्री कंपनी की प्रोफाइल काफी बड़ी हो गई है.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वागनर समूह ने साल 2022 में बड़े पैमाने पर भर्ती शुरू की थी क्योंकि रूस को अपनी नियमित सेना में रीक्रूटमेंट के लिए लोग नहीं मिल रहे थे और इसमें दिक्कत आ रही थी.
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यूएस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि यूक्रेन में वागनर समूह के लिए लड़ रहे लड़ाकों में 80 फीसदी जेलों से भर्ती किए गए हैं.
यूक्रेनी सैनिकों से बखमूत शहर का नियंत्रण छीनने में वागनर समूह के लड़ाकों की बड़ी भूमिका रही थी. ये लड़ाई लंबी चली थी.

