संसद भवन के समारोह के बहिष्कार को एनडीए ने बताया अनादर

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सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलांयस (एनडीए) ने कहा है कि वो 19 विपक्षी पार्टियों की ओर से नई संसद के उद्घाटन समारोह के बहिष्कार के फ़ैसले की निंदा करते हैं.
बीजेपी समेत गठबंधन की सभी पार्टियों की ओर से एक बयान जारी कर ये कहा गया है.
बयान में कहा गया है कि यह कृत्य हमारे महान राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मूल्यों का घोर अनादर है.
इस संस्था के प्रति इस तरह का खुला अनादर न केवल बौद्धिक दिवालिएपन को दर्शाता है बल्कि लोकतंत्र के लिए एक परेशान करने वाली अवमानना है. अफ़सोस की बात है कि इस तरह के तिरस्कार का यह पहला उदाहरण नहीं है.
पिछले नौ वर्षों में, इन विपक्षी दलों ने बार-बार संसदीय प्रक्रियाओं के लिए बहुत कम सम्मान दिखाया है, सत्रों को बाधित किया है, महत्वपूर्ण समय पर वॉक आउट किया है, और अपने संसदीय कर्तव्यों की अनदेखी की है. यह हालिया बहिष्कार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना की एक और कड़ी है.
संसदीय शालीनता और संवैधानिक मूल्यों के बारे में इन विपक्षी दलों का बात करना हास्यास्पद है.उनके पाखंड की कोई सीमा नहीं है. उन्होंने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में विशेष जीएसटी सत्र का बहिष्कार किया.
जब उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया तो उन्होंने समारोह में भाग नहीं लिया और यहां तक कि रामनाथ कोविंद जी के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर देर से शिष्टाचार मुलाकात की. इसके अलावा, हमारी वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अनादर करना राजनीतिक विमर्श में एक नया निम्न स्तर है.
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विपक्ष ने की राष्ट्रपति के उद्घाटन कराने की मांगी
कांग्रेस समेत सभी मुख्य विपक्षी दलों ने मांग की है उद्घाटन राष्ट्रपति से कराया जाए. उन्होंने कहा है कि ऐसा नहीं किए जाने पर वो समारोह का बहिष्कार करेंगे.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रपति से संसद का उद्घाटन न करवाना और न ही उन्हें समारोह में बुलाना, यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का अपमान है.
वहीं एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उद्घाटन लोकसभा स्पीकर से कराने की मांग की है. उनकी पार्टी भी इस समारोह से दूर रहेगी.
हालांकि बीजेडी ने कहा है कि वो समारोह में हिस्सा लेगी.
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हिमंता बिस्व सरमा का दावा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने दावा किया है कि पिछले नौ सालों मे पांच गैर बीजेपी या विपक्ष की राज्य सरकारों ने विधानसभाओं की नींव रखी या उनका उद्घाटन किया है और इन सभी का उद्घाटन या तो मुख्यमंत्री ने किया है या फिर पार्टी अध्यक्ष ने किया.
उनका दावा है कि कहीं भी राज्यपाल या राष्ट्रपति को नहीं बुलाया गया. बीबीसी इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है.
विपक्ष ने नए संसद भवन के उद्घाटन का बॉयकॉट करने का फ़ैसला किया है. उनकी मांग है कि संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए.
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