गजेंद्र सिंह शेखावत के ‘रावण’ बाले बयान पर बवाल, अशोक गहलोत क्या बोले?
उनके इस बयान पर सीएम अशोक गहलोत ने भी शेखावत पर पलटवार किया है.
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अभिनव गोयल and स्नेहा
गजेंद्र सिंह शेखावत के ‘रावण’ बाले बयान पर बवाल, अशोक गहलोत क्या बोले?
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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के राजस्थान के
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी सरकार की तुलना रावण से करने वाले एक बयान पर विवाद
हो गया है.
गजेंद्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘राजस्थान के इस राजनीतिक रावण के 10 सिर हैं.
इस राजनीतिक रावण को समाप्त करके राजस्थान में राम के राज्य की स्थापना करनी है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर इसके लिए अशोक गहलोत ने मुझे राम की संज्ञा दी है, तो मैं उनका धन्यवाद करता हूं.’’
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उनके इस बयान पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में शेखावत की कथित भूमिका का ज़िक्र किया.
पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं रावण हूं, तो आप राम बनिए और निवेशकों का पैसा लौटाइए.’’
शेखावत को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप मुझ पर पत्थर फेंकेंगे, तो मैं उसका इस्तेमाल गरीबों के लिए घर बनाने में करूंगा.’’
इससे पहले शेखावत ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की 10 समस्याएं गिनाई.
उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से त्रेता के रावण के 10 सिर थे वैसे राजस्थान की इस सरकार के राजनीतिक रावण के भी 10 सिर हैं."
"ये भ्रष्टाचार की पुरोधा सरकार है, राजस्थान की ये सरकार तुष्टिकरण करने वाली सरकार है, राजस्थान की सरकार का किसान विरोधी चेहरा है, इसका चेहरा महिला विरोधी अत्याचार करने का है, माफिया राज को पनपाने वालों का है, रंगदारी वूसल करने वालों का है, गुंडाराज पनपाने वालों का है, बेरोज़गारी फैलाने वालों का है, धोखा देने वालों का है.’’
यूक्रेन पर रूस के हमले में 19 लोगों की मौत, कई घायल
कीएव समेत यूक्रेन के कई हिस्सों में रूसी हवाई हमले में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई.
अधिकारियों ने बताया कि उमान में एक रिहाइशी इलाके में हमले में एक बच्चे समेत 17 लोगों की मौत हो गई.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि उमान में 10 आवासीय इमारतों को क्षति पहुंची है. वहीं ड्विनप्रो में एक महिला और उनकी तीन साल की बेटी की मौत हो गई.
इस पर रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन की सेना के रिजर्व यूनिट को निशाना बनाया था. रूसी समाचार एजेंसी आरआईए की ख़बर के अनुसार, रूस रिजर्व यूनिट को निशाना बना रहा था.
उमान ऐसा शहर है जो अब तक रूसी हमलों से व्यापक स्तर पर बचा हुआ था.
इस हमले में नौमंजिला एक इमारत गिर गई. यहां रहनेवाले एक निवासी ओलेक्जांडर ने कहा कि तेज विस्फोट की आवाज से उनकी नींद खुली. हमले के क़रीब 10 घंटे बाद भी बचावकर्मी राहत कार्य में जुटे हैं.
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ज़ेलेंस्की ने एक ट्वीट में कहा कि ये हमले दिखाते हैं कि रूस के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई होनी चाहिए.
उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ''बुराई को हथियारों से रोका जा सकता है, हमारे सैनिक ऐसा कर रहे हैं. और इसे प्रतिबंध लगा कर भी रोका जा सकता है, रूस के और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए.''
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बीबीसी न्यूज़ यूक्रेन के पूर्व पत्रकार ओलेक्ज़ांडर बोडारेनको की यूक्रेन में फ्रंटलाइन पर ड्यूटी के दौरान मौत हो गई.
रूसी हमले के बाद फ़रवरी 2022 में वह यूक्रेन की सेना में शामिल हुए थे. उनकी मौत कैसे हुई, अभी इसकी विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है.
उनके क़रीबी दोस्तों का कहना है कि 'युद्ध में उनकी मौत हो गई. वो पूर्वी यूक्रेन के लुहांस्क के रहनेवाले हैं. वो बीबीसी की यूक्रेन सेवा से 2007 से 2011 तक न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर जुड़े थे.
उपभोक्ता अदालत ने 'बायजू' और शाहरुख़ ख़ान पर लगाया जुर्माना, क्या है मामला?
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मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की ज़िला उपभोक्ता अदालत ने एडुटेक कंपनी 'बायजू' के एक कर्मचारी और फ़िल्म सुपरस्टार शाहरुख़ ख़ान दोनों पर जुर्माना लगाया है.
इस मामले में प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही एक महिला की शिकायत पर उपभोक्ता फ़ोरम ने बायजू स्टाफ़ और शाहरुख़ ख़ान के ख़िलाफ़ कथित 'धोखाधड़ी' और 'अनुचित कारोबारी व्यवहार' करने पर ये फ़ैसला दिया है.
बुधवार को उपभोक्ता अदालत ने अपना फ़ैसला सुनाया. इसमें महिला की ओर से जमा कराई गई 1.08 लाख रुपए की फीस 12 फ़ीसदी के सालाना ब्याज की दर से वापस करने का आदेश दिया गया है.
इसके साथ ही 5 हज़ार रुपये मुक़दमे के खर्च और 50 हज़ार रुपये मानसिक और वित्तीय परेशानी के बदले में मुआवजे़ के तौर पर देने का आदेश दिया है.
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उपभोक्ता फोरम ने ये भी कहा है कि ये रकम बायजू के लोकल मैनेजर और बॉलीवुड एक्टर शाहरुख़ ख़ान को 'संयुक्त रूप से या अलग-अलग' चुकानी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इसका क़ानूनी रूप से ये मतलब है कि दोनों ही पक्ष इस देनदारी के लिए बराबर-बराबर के ज़िम्मेदार होंगे.
आयोग ने अपने आदेश में कहा, ''प्रतिवादी (बायजू के मैनेजर और एक्टर शाहरुख़ ख़ान दोनों ही) कई नोटिस के बाद भी पेश नहीं हुए और न ही उनकी तरफ़ से कोई जवाब आया तो उनके ख़िलाफ़ एकतरफ़ा कार्रवाई की जाती है.''
महिला ने बायजू की कोचिंग में जनवरी 2021 में शाहरुख़ ख़ान के विज्ञापन से प्रभावित होकर बायजू की कोचिंग में दाख़िला लिया था. लेकिन इस कोचिंग ने दावे के अनुरूप सेवा नहीं दी.
इसलिए महिला ने बायजू के मैनेजर के साथ शाहरुख़ ख़ान को प्रतिवादी बनाते हुए एक मामला दर्ज कराया था.
'समलैंगिक शादी' पर 120 से ज़्यादा नामचीन लोगों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, क्या कहा?
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समलैंगिक शादियों को क़ानूनी वैधता प्रदान करने की कोशिशों का विरोध करते हुए 120 से ज़्यादा नामचीन नागरिकों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखा है.
इस पत्र में इन लोगों ने समलैंगिक शादियों को क़ानूनी वैधता प्रदान करने की कोशिशों पर कड़ी आपत्ति जताई है.
पत्र लिखने वालों में हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज, पूर्व नौकरशाह और अन्य लोग शामिल हैं.
इन लोगों ने कहा है कि वे देश की सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक विश्वासों 'लगातार हमले' से 'स्तब्ध' हैं.
उन्होंने दावा किया कि अदालतों को या तो न्यायिक व्याख्या के माध्यम से या विवाह के लिए मौजूदा विधायी ढांचे पर प्रहार करके समलैंगिक शादियों को वैधता प्रदान करने से 'बचना' चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ फ़िलहाल समलैंगिक शादी को क़ानूनी मान्यता दिलाने की मांग से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई कर रही है. इस मामले की सुनवाई 18 अप्रैल से शुरू हुई है.
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के अलावा इस पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस रवींद्र भट्ट, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस हिमा कोहली शामिल हैं.
गुरुवार (27 अप्रैल) को छठे दिन की सुनवाई में बेंच ने कहा था कि सेम सेक्स मैरिज नहीं होगी तो सरकार ये बताए कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को बेहतर बनाने के लिए वो क्या करने जा रही है.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने माना कि पर्सनल लॉ कानून में घुसे बगैर सेम सेक्स मैरिज को मान्यता देना मुश्किल है, क्योंकि इसमें विरासत कानून, मेंटनेंस, गोद लेने और विरासत से जुड़े क़ानूनों का मसला आ जाता है.
सुनवाई के पहले दिन ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया था कि वो पर्सनल लॉ के क्षेत्र में जाए बिना यह देखेगी कि क्या साल 1954 के विशेष विवाह क़ानून के ज़रिए समलैंगिकों को शादी के अधिकार दिए जा सकते हैं या नहीं.
पहलवानों के प्रदर्शन के बाद एफ़आईआर दर्ज करने के फ़ैसले पर क्या बोले बृजभूषण?
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इमेज कैप्शन, बृजभूषण शरण सिंह
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफ़आई) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि वो अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच करने में हर तरह से सहयोग करने को तैयार हैं.
महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर कई पहलवान छह दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हैं.
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''देखिए मैं न्यायपालिका के निर्णय से ख़ुश और बेहद प्रसन्न हूँ. दिल्ली पुलिस को जांच मिली है. जांच में जहां भी सहयोग की आवश्यकता होगी, मैं सहयोग करने के लिए तैयार हूं. न्यायपालिका से बड़ा कोई नहीं है इस देश में. मैं भी न्यायपालिका से बड़ा नहीं हूं."
उन्होंने कहा, "उच्चतम न्यायालय का फ़ैसला आया है, एफ़आईआर लिखने का आदेश हुआ है. हालांकि सरकार की तरफ़ से कहा गया था कि एफ़आईआर लिखने में कोई दिक्कत नहीं है. एफ़आईआर लिखी जा चुकी होगी या लिखी जा रही होगी.''
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उन्होंने कहा, ''मैं सुप्रीम कोर्ट से बड़ा नहीं हूँ. मैं उस फ़ैसले का स्वागत करता हूँ. जब ओवरसाइट कमेटी बनी थी, तब भी मैंने सवाल नहीं उठाया था. मैंने हर नियम क़ानून को माना था. इन लोगों को इंतज़ार करना चाहिए था. इंतज़ार नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट गए. सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया और ये फ़ैसला लिया. मुझे अपने ऊपर भरोसा है. अपने कर्म पर भरोसा है. मैंने किसी के साथ कोई ग़लत नहीं किया है. मुझे इंसाफ़ मिलेगा.''
आज ही दोपहर में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वो बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करेगी, लेकिन पहलवानों ने इसके बाद भी धरना ख़त्म करने से इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने जंतर-मंतर पर पत्रकारों से कहा, ''यह जीत की तरफ़ बढ़ा पहला क़दम है लेकिन हमारा धरना जारी रहेगा.''
महिला पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को एफ़आईआर दर्ज करने में छह दिन का समय लग गया, उन्हें जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है.
वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट विनेश ने कहा, ''पुलिस कमजोर एफ़आईआर दर्ज कर सकती है. हम देखेंगे और उसके बाद ही निर्णय लेंगे. उन्हें (बृजभूषण) जेल में होना चाहिए और सभी पदों से हटाया जाना चाहिए, नहीं तो वो जांच प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.''
पहलवान बजरंग पूनिया ने कहा, ''जब तक उन्हें जेल नहीं भेजा जाता, हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा.''
हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिया ये निर्देश
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वो हेट स्पीच देने वालों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज करें.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अपने निर्देश में कहा है कि अगर किसी ने ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ शिकायत नहीं दर्ज कराई है तब भी मामले दर्ज होने चाहिए.
जस्टिस के एम जोसेफ़ और जस्टिस नागरत्न की एक पीठ ने हेट स्पीच को '' गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि इससे देश की धर्मनिरपेक्षता प्रभावित हो सकती है.''
बेंच ने कहा कि 21 अक्टूबर, 2022 का आदेश बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लागू हो और मामले दर्ज करने में किसी भी अनियमितता को कोर्ट की मानहानि के तौर पर देखा जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर, 2022 के अपने आदेश में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों को हेट स्पीच देने वालों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज करने के निर्देश दिए थे.
बेंच ने कहा, '' हम धर्म के नाम पर कहां पहुंच गए हैं? हमने धर्म को कहां पहुंचा दिया है, यह देखना दुखद है. जज अराजनीतिक होते हैं और किसी भी पार्टी से उनका कोई लेना देना नहीं है. उनके दिमाग में एक ही चीज होती है और वो है भारत का संविधान.''
दिनभर: बृजभूषण पर होगी एफ़आईआर, पहलवान गिरफ़्तारी पर अड़े
ब्रेकिंग न्यूज़, आईपीएलः पंजाब किंग्स ने टॉस जीत कर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया
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आईपीएल के 38वें मैच में आज पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच मोहाली के आईएस बिंद्रा स्टेडियम में मुक़ाबला हो रहा है.
टॉस जीत कर पंजाब किंग्स ने पहले गेंदबाज़ी ली है.
दोनों टीमों के बीच इस सीज़न में लखनऊ में पहला मुक़ाबला खेला गया था जिसमें पंजाब को 2 विकेट से जीत हासिल हुई थी.
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हालांकि बीते वर्ष हुए पुणे में जब दोनों टीमें भिड़ी थीं तब लखनऊ सुपर जायंट्स 20 रन से जीता था.
इस सीज़न में इन टीमों ने अब तक सात मुक़ाबले खेले हैं और दोनों को चार मैच में जीत हासिल हुई है.
हालांकि पॉइंट टेबल में बेहतर नेट रन रेट के आधार पर लखनऊ सुपर जायंट्स चौथे स्थान पर जबकि पंजाब की टीम छठे पायदान पर है.
कर्नाटक में कुर्सी की दौड़ में बीजेपी या कांग्रेस, कौन निकलेगा आगे?
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इमेज कैप्शन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में अब दो सप्ताह से भी कम समय रह गया है. इस चुनाव के दो प्रमुख दावेदारों- भाजपा और कांग्रेस के सामने जो चुनौतियाँ हैं, वो एकदम अलग हैं. दोनों पार्टियों में से किसी की भी कोई ग़लती उनके लिए सांप और सीढ़ी का खेल बन सकती है.
चुनाव के तीसरे दावेदार जनता दल (सेक्युलर) भाजपा और कांग्रेस में से किसी के लड़खड़ाने का इंतज़ार कर रही है ताकि वह 'किंग न सही, किंगमेकर' तो बन सके. जेडीएस की इच्छा पूर्ति इस बात पर निर्भर करती है कि राज्य की राजनीति के प्रमुख दावेदारों यानी कांग्रेस और बीजेपी अपनी चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं.
यदि भाजपा या उसके विधायक एंटी-इन्कंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) का सामना कर रहे हैं, तो कांग्रेस ऐसी ज़मीन पर चल रही है, जो पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है. कुछ हफ़्ते पहले राज्य के सामने जितने विवादित मामले थे, अब उतने मुद्दे नहीं बचे हैं.
उदाहरण के तौर पर, संशोधित आरक्षण नीति को अब ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराज़गी जताई थी. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई जगहों पर मुसलमानों के लिए आरक्षण हटाने को सही ठहराया और विवाद में फँसाने के लिए कांग्रेस के सामने चारा फेंके हैं.
दिल्ली एक्साइज़ पॉलिसी केस: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज
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दिल्ली एक्साइज़ पॉलिसी केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी.
स्पेशल जज एमके नागपाल ने सिसोदिया को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि केस की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्हें जमानत देने का सही वक़्त नहीं है.
मनीष सिसोदिया के वकील ने जमानत याचिका में कहा था कि जांच के लिए उनके मुवक्किल को कस्टडी में रखने की अब ज़रूरत नहीं है.
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प्रवर्तन निदेशालय ने जमानत याचिका का विरोध किया और अदालत से कहा कि जांच अभी अहम मोड़ पर है और मनीष सिसोदिया ने ये साबित करने के लिए कि एक्साइज पॉलिसी को सरकारी मंजूरी मिली हुई है, फर्जी ईमेल पेश किए थे.
ईडी ने ये भी कहा कि इस मामले में उनकी संलिप्तता को शामिल करने के लिए जांच एजेंसी को नए सबूत मिले हैं.
31 मार्च को सीबीआई की जांच वाले करप्शन केस में कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
समलैंगिक शादी पर सुप्रीम कोर्ट में हुई तीखी बहस देखिए
वीडियो कैप्शन, समलैंगिक शादी पर सुप्रीम कोर्ट में हुई तीखी बहस देखिए
सुप्रीम कोर्ट में बीते कई दिनों से समलैंगिक विवाह पर बहस जारी है. इस दौरान अलग-अलग पक्ष के वकीलों की तरफ से कई तरह के तर्क दिए जा रहे हैं.
वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी बीच-बीच में अपनी टिप्पणियां कर रहे हैं. देखिए बीते दिनों की बहस के कुछ अहम अंश.
जब तक बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ़्तारी नहीं होगी, हमारा धरना जारी रहेगा: प्रदर्शन कर रहे पहलवान
भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफ़आई) अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ दिल्ली के जंतर मंतर पर पहलवानों का धरना जारी रहेगा.
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उनका कहना है कि भाजपा सांसद को सभी पदों से हटाया जाए.
समाचार एजेंसी पीटीआई की ख़बर के अनुसार ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक ने जंतर मंतर पर पत्रकारों से कहा, ''यह जीत की तरफ़ बढ़ा पहला कदम है लेकिन हमारा धरना जारी रहेगा.''
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सूडान: अस्पतालों में भी सुरक्षित नहीं आम लोग
वीडियो कैप्शन, सूडान: अस्पतालों में भी सुरक्षित नहीं आम लोग
सूडान में संघर्ष विराम आगे बढ़ाने के लिए दक्षिण सूडान और संयुक्त राष्ट्र कोशिशें कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि लड़ाई से बचने के लिए ढाई लाख लोग सूडान की सीमाओं की ओर जा सकते हैं.
देखिए बीबीसी की ख़ास रिपोर्ट. इसके कुछ हिस्से आपको परेशान कर सकते हैं.
पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान ख़ान को मिली जमानत, क्या है पूरा मामला
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पाकिस्तान की एक शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को तीन मई तक के लिए अग्रिम जमानत दे दी.
इस महीने की शुरुआत में मजिस्ट्रेट मंज़ूर अहमद ख़ान ने इस्लामाबाद के रमना पुलिस थाने में इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
उनका आरोप था, "पूर्व प्रधानमंत्री संस्थाओं और लोगों के बीच नफ़रत फैला रहे हैं. और संस्थाओं और उनके शीर्ष अधिकारियों को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं."
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एफ़आईआर में आरोप है कि 19 मार्च को ख़ान ने ज़मान पार्क स्थित आवास पर दिए भाषण में आईएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी के ख़िलाफ़ कई आरोप लगाए और कथित तौर पर उनका 'चरित्र हनन' किया.
ख़ान ने आज इस्लामाबाद हाई कोर्ट में बेल की अपील की थी.
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) प्रमुख कड़ी सुरक्षा के बीच इस मामले के लिए लाहौर से इस्लामाबाद आए.
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इस दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक भी जुटे थे. ख़ान ने एक ट्वीट में कहा कि पुलिस ने उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया.
उन्होंने ट्वीट किया, ' हमारे समर्थक शांतिपूर्वक अपनी गाड़ियों में बैठे थे, लेकिन आईसीटी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. वे चाहते हैं कि चुनाव में देरी हो ताकि वो जेल का डर दिखाकर और परेशान करके पीटीआई के लोगों को तोड़ सकें. लेकिन ऐसा होगा नहीं.''
समाचार पत्र डॉन की एक ख़बर के अनुसार, ख़ान ने कोर्ट में पत्रकारों से अनौपचारिक तौर पर बातचीत की.
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ख़ान ने बताया कि उन्होंने फ़वाद चौधरी और शाह महमूद क़ुरैशी से कहा है कि सरकार अगर चुनाव कराने को तैयार हो तभी उनसे कोई बातचीत करें.
ख़ान ने चौधरी और क़ुरैशी की मौज़ूदगी में कहा, ''अगर वे सितंबर और अक्टूबर में चुनाव कराने पर जोर देते हैं तो बातचीत में आगे बढ़ने का कोई मतलब नहीं है.''
क़ुरैशी और चौधरी पीटीआई के तीन सदस्यों वाली उस टीम का हिस्सा हैं जो विवाद को हल करने और चुनाव कराने के लिए सरकार से बातचीत कर रहे हैं.
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पीटीआई राज्यों में चुनाव कराने पर जोर दे रही है जबकि संघीय सरकार देश में एक ही साथ चुनाव कराना चाहती है.
इस साल अगस्त में नेशनल असेंबली के पांच साल पूरे हो जाएंगे.
संविधान के अनुसार, नेशनल असेंबली भंग होने के 90 दिन के भीतर चुनाव का आयोजन होना चाहिए.
इसका मतलब है कि चुनाव मध्य अक्टूबर में आयोजित होंगे. पिछला चुनाव जुलाई 2018 में आयोजित हुआ था.
एशिया में चीन और अमेरिका के बीच टकराव में बांग्लादेश अपनाएगा ये नीति
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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना
बांग्लादेश ने इंडो-पैसिफिक यानी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी विदेश नीति का एलान कर दिया है.
'इंडो-पैसिफिक आउटलुक' या 'हिंद-प्रशांत रूपरेखा' नाम की इस नीति में बताया गया है कि इस इलाके़ को लेकर जारी भू-राजनीतिक टकराव की दशा में विभिन्न देशों के साथ बांग्लादेश के संबंध क्या होंगे.
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के दौरे से पहले सोमवार को इस रूपरेखा का एलान किया.
अमेरिका के नेतृत्व में हिंद-प्रशांत इलाके़ में जो रणनीति बनाई जा रही है, उसमें ये तीनों देश शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों को रेल टिकट पर मिलने वाली छूट बहाल करने की याचिका ख़ारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वरिष्ठ नागरिकों को रेल टिकट पर मिलने वाली छूट बहाल करने की याचिका ख़ारिज कर दी.
कोर्ट का कहना है कि यह नीतिगत मामला है और इस बारे में सरकार को निर्देश देना उनके लिए उचित नहीं होगा.
याचिका में मांग की गई थी कि कोविड से पहले वरिष्ठ नागरिकों को टिकट की क़ीमत पर जो छूट दी जाती थी, उसे बहाल करने का निर्देश दिया जाए.
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जस्टिस एस के कौल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की एक बेंच एम के बालाकृष्णन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
केंद्र सरकार ने 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों की आवाजाही कम करने के लिए इस छूट पर रोक लगा दी थी.
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संसद की एक स्थायी समिति ने हाल ही में इस छूट को बहाल करने की सिफ़ारिश की थी.
कोविड से पहले रेल टिकट पर 60 साल या इससे ज़्यादा उम्र के पुरुषों को 40 फ़ीसदी और 58 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को 50 फ़ीसदी छूट की मिलती थी.
पहलवानों का प्रदर्शन पांचवे दिन भी जारी
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महिला पहलवानों विनेश फोगाट और साक्षी मलिक के साथ बजरंग पुनिया इस आंदोलन के केंद्र में है. दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे धरने का गुरुवार को पांचवां दिन है.
जंतर मंतर पर पहलवानों के प्रदर्शन में बुधवार की तुलना भीड़ और सुरक्षा बढ़ी हुई दिखी.
पुलिस ने चारों ओर से बैरिकेडिंग कर रखी थी और अलग-अलग किसान और छात्र संगठनो से जुड़े लोगों का आना लगातार जारी था.
पूर्व जेडीयू नेता अजय आलोक बीजेपी में शामिल
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बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड के पूर्व नेता अजय आलोक शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.
पार्टी में शामिल होने के बाद अजय आलोक ने पत्रकारों से कहा कि बीजेपी में शामिल होना परिवार के पास आने जैसा है. उन्होंने कहा कि वे 'मोदी मिशन' में अपना योगदान देंगे.
अजय आलोक को जनता दल यूनाइटेड ने पिछले साल पार्टी से बर्खास्त कर दिया था.
पेशे से डॉक्टर अजय आलोक न्यूज़ चैनलों पर होने वाली बहसों में अक्सर दिखते रहे हैं और उन्हें बीजेपी के करीब माना जाता रहा है.
उन्होंने ये भी दावा किया है कि आने वाले समय में बड़ी संख्या में लोग जेडीयू छोड़ेंगे.
बाइक एम्बुलेंस पर मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाने वाले शख़्स की कहानी
वीडियो कैप्शन, बाइक एम्बुलेंस पर मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाने वाले शख़्स की कहानी
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में रहने वाले करीमुल हक़ अपने इलाके से मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाते हैं.
वो पिछले 25 साल से बाइक पर ये काम कर रहे हैं.
स्थानीय लोग उन्हें ‘बाइक एम्बुलेंस दादा’ बुलाते हैं. लेकिन ये कहानी शुरू कैसे और कहां से हुई?
बीबीसी के चेयरमैन रिचर्ड शार्प ने दिया इस्तीफ़ा, जानिए वजह
बीबीसी के चेयरमैन रिचर्ड शार्प ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. एक रिपोर्ट में सार्वजनिक नियुक्तियों के नियमों में उल्लंघनों की पुष्टि के बाद उनका इस्तीफ़ा आया है.
उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि उल्लंघन अनजाने में हुआ था."
शार्प ने कहा, "मैंने नियुक्तियों की शासन संहिता का उल्लंघन किया लेकिन इस उल्लंघन के कारण ये ज़रूरी नहीं कि नियुक्ति ही अमान्य हो जाए."
शार्प ने कहा, "वह बीबीसी के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस्तीफ़ा दे रहे हैं."
इस पद पर दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने तक (जून के अंत तक) वह इस पद पर बने रहेंगे. इस पर कमिश्नर फॉर पब्लिक अपॉइन्मेंट्स की रिपोर्ट भी पब्लिश हो गई है.