ट्रंप कोर्ट रूम से बाहर निकले, घर की ओर होंगे रवाना

उम्मीद है कि वो जल्द ही अपने घर फ्लोरिडा पहुंच जाएंगे. वो वहां अपने समर्थकों और प्रेस को संबोधित करेंगे .

लाइव कवरेज

  1. ट्रंप कोर्ट रूम से बाहर निकले, घर की ओर होंगे रवाना

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    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मैनहटन के कोर्ट रूम से निकल चुके हैं.

    उम्मीद है कि वो जल्द ही अपने घर फ्लोरिडा पहुंच जाएंगे. उम्मीद है कि वो वहां अपने समर्थकों और प्रेस को संबोधित करेंगे .

  2. ब्रेकिंग न्यूज़, ट्रंप पर फेलनी के 34 आरोप लेकिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- कोई अपराध नहीं किया

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    ट्रंप ने फेलनी के 34 मामलों में आरोपी बनाए जाने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है.

    ट्रंप ने ये भी कहा कि उन्होंने अपने बिजनेस रिकार्ड में कोई गड़बड़ी नहीं की है.

    मैनहटन कोर्ट में जज जुआन मर्चन के सामने उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है.

  3. ब्रेकिंग न्यूज़, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की औपचारिक गिरफ्तारी

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    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया है. उनके अरेन्मेंट से पहले उन्हें पुलिस हिरासत में रखा गया है. उन्हें कोर्ट में पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया.

    आपराधिक आरोप का सामना करने वाले वो अमेरिका के पहले राष्ट्रपति हैं.

  4. ट्रंप की पेशी से पहले माहौल तनावपूर्ण, ट्रंप समर्थकों और विरोधियों ने किया प्रदर्शन

    ट्रंप

    न्यूयॉर्क के मैनहैटन कोर्ट के सामने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ट्रंप समर्थकों ने एक रैली निकालने की कोशिश की और वहां अफरा तफरी का माहौल पैदा हो गया.

    ट्रंप की मुख़ालफ़त करने और उनके समर्थन में रैली निकालने वाले आस पास ही थे और दोनों ओर से जमकर नारेबाज़ी हो रही थी. पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बैरिकेड लगाकर उन्हें अलग किया.

    पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया है.

    ट्रंप विरोधियों ने 'लॉक हिम अप' के नारे लगाए और ड्रम और सीटियों से शोर मचाना शुरू कर दिया.

    अमेरिकी कांग्रेस सदस्य मारोजरी टेलर ग्रीन ने मेगाफ़ोन से जैसे ही ट्रंप समर्थकों को संबोधित करना शुरू किया, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने सिटी बजा कर चेतावनी देनी शुरू कर दी.

    टेलर ग्रीन ने कहा, “अमेरिका में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ और हर अमेरिकी को इसे गंभीरता से लेना चाहिए.”

    अमेरिका में ट्रंप पहले राष्ट्रपति हैं जिनपर आपराधिक कार्रवाई चल रही है.

    टेलर ग्रीन पहले नागरिक अधिकार कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई और कांग्रेस का चुनाव जीतने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के बचाव में प्रमुख आवाज़ हैं.

    टेलर ग्रीन

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    इमेज कैप्शन, टेलर ग्रीन

    सुनवाई से ठीक पहले प्रदर्शनकारियों के साथ कोर्ट के सामने उनकी मौजूदगी उनकी इसी छवि और मजबूत करती है.

    जब पहली बार ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव के लिए 2016 में खड़े हुए तो ग्रीन ने नौकरी छोड़कर उनके कैंपेन में हिस्सा लिया था. उसके बाद वो लगातार अपने विवादास्पद बयानों से सुर्खियां बटोरती रही हैं.

    उन्होंने डोमोक्रेट्स पर पीडोफ़ाइल रैकेट चलाने का आरोप लगाया. कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में आग लगने के पीछे यहूदियों को दोषी ठहराया.

    अभी दो सप्ताह पहले ट्रंप ने टेक्सस की एक रैली में कहा था कि ग्रीन को जियोर्जिया से अमेरिकी सीनेट का चुनाव लड़ना चाहिए.

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  5. आईपीएल मैच देखने पहुंचे ऋषभ पंत, दर्शकों ने ऐसे किया स्वागत

    ऋषभ पंत

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    आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस के बीच मंगलवार को अरुण जेटली स्टेडियम में खेला जा रहा है.

    इस मैच के दौरान दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान रहे ऋषभ पंत भी मैदान में नज़र आए.

    उत्तराखंड में सड़क दुर्घटना में घायल होने के चलते ऋषभ पंत आईपीएल के इस सीज़न में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं.

    हालांकि इसके बावजूद वे दिल्ली की टीम का सबसे बड़ा चेहरा हैं.

    यही वजह कि फिरोजशाह कोटला मैदान में बिग स्क्रीन पर उनका चेहरा दिखा तो स्टेडियम में उनको चीयर्स करते खिलाड़ियों का शोर गूंज उठा.

    उल्लेखनीय है कि सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद ऋषभ पंत को सर्जरी करानी पड़ी थी और वे इन दिनों तेजी से रिकवर कर रहे हैं.

    हालांकि वे इस सीज़न में टीम की ओर से शायद ही कोई मैच खेल पाएंगे.

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  6. एनसीईआरटी के डायरेक्टर ने कहा, मुग़लों का चैप्टर हटाने की ख़बर ग़लत

    एनसीईआरटी के डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सक्लानी

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    एनसीईआरटी के डायरेक्टर दिनेश प्रसाद सकलानी ने एनसीईआरटी की किताबों से मुग़लों के अध्याय को हटाए जाने की ख़बरों को ग़लत बताया है.

    पिछले दो दिनों से मीडिया में ख़बर चल रही थी कि उत्तर प्रदेश के पाठ्यक्रम से मुग़लों से जुड़े अध्याय हटा लिए गए हैं.

    अलग अलग पार्टियों के कई नेताओं ने इसपर टिप्पणी की है.

    सकलानी ने कहा, "ये झूठ है. मुग़ल इतिहास को नहीं हटाया गया है. पिछले कोविड के कारण बच्चों पर बहुत ज़्यादा दबाव था, रैशनेलाइज़ेशन किया गया, और एक्सपर्ट कमेटी ने कक्षा छह से 12 की किताबों का फिर से अध्ययन किया और सुझाव दिया कि अगर एक चैप्टर हटा दिया जाए तो बच्चों के ज्ञान पर असर नहीं पड़ेगा और गैरज़रूरी दबाव हट जाएगा. यह बिना मतलब की बहस है. जिन्हें नहीं पता, वो किताबें देख सकते हैं."

    उन्होंने कहा, "कक्षा 12 में मुग़ल काल का एक बढ़िया चैप्टर मुग़ल काल का पढ़ा रहे, जिससे उनकी नीतियों और कार्यों के बारे में पता चलेगा."

  7. ट्रंप की गिरफ़्तारी से पहले न्यूयॉर्क के मैनहैटन कोर्ट का कैसा है नज़ारा?

    ट्रंप

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    पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनिएल्स को पेमेंट करने के मामले में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गिरफ़्तारी से पहले न्यूयॉर्क के मैनहैटन कोर्ट के आस पास सुरक्षा व्यवस्था सख़्त कर दी गई है.

    अपनी गिरफ़्तारी से पहले ट्रंप ने कहा कि ‘यह हमारे गणतंत्र के लिए दुखद दिन है.’

    उन्होंने एक मेल भेजा है जिसका विषय है- ‘गिरफ़्तार होने से पहले मेरा आखिरी मेल है.’ इसमें उन्होंने अपने समर्थकों से अमेरिका को बचाने का आह्वान किया है. इसके साथ ही एक फंडरेज़िंग लिंक भी लगाया गया है.

    मेल में उन्होंने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा है कि अमेरिका तीसरी दुनिया का मार्क्सवादी देश बनता जा रहा है.

    ट्रंप ने उनके मामले की सुनवाई करने वाले जज पर अत्याधिक पक्षधर होने का आरोप लगाया है और कहा है कि 'उनका परिवार जाना माना ट्रंप हेटर है.’

    इस समय अमेरिका में सुबह का समय है. सुनवाई शुरू होने में अभी कुछ घंटों का वक़्त है लेकिन मीडियाकर्मियों, पुलिस, वकीलों की भारी तादाद मौजूद है.

    बीबीसी संवाददाताओं की टीम कोर्ट के आस पास मौजूद है और वहां की पल पल की ख़बर पर नज़र बनाए हुए है.

    न्यूयॉर्क की कोर्ट जहां ट्रंप की पेशी होने वाली है.

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    इमेज कैप्शन, न्यूयॉर्क की कोर्ट जहां ट्रंप की पेशी होने वाली है.

    इस समय डोनाल्ड ट्रंप ट्रंप टॉवर में मौजूद हैं, जहां उन्होंने पिछली रात गुजारी है. वो अमेरिकी समय के अनुसार, क़रीब दोपहर (भारतीय समयानुसार क़रीब आधी रात) को पहुंचेंगे.

    अभियोजक एल्विन ब्रैग मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटार्नी के कार्यालय में पहुंच गए हैं, जोकि न्यूयॉर्क काउंटी क्रिमिनल कोर्ट के पास ही है, जहां ट्रंप पेश होने वाले हैं.

    अमेरिकी कांग्रेस सदस्य जॉर्ज सैंटोस भी मैनहैटन कोर्ट के बाहर मौजूद हैं. अन्य सदस्यों के साथ उनके पहुंचते ही मीडिया कर्मियों ने उन्हें घेर लिया. सैंटोस ने कहा, “मैं यहां फोटो खिंचवाने के लिए नहीं आया हूं बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति का समर्थन करने आया हूं जो जिन्हें ग़लत तरीक़े से निशाना बनाया जा रहा है.”

    पुलिस के अनुसार, आसपास के मुख्य रास्तों को जनता के लिए बंद कर दिया गया है.

    बीबीसी संवाददाता ब्रैंडन ड्रेनन वॉशिंगटन डीसी में मौजूद हैं और उन्होंने बताया है कि सुरक्षा के कई घेरे बनाए गए हैं, जिसमें सीक्रेट सर्विस, न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमें, कोर्ट के सुरक्षा कर्मी और अमेरिकी मार्शल शामिल हैं.

    किस रास्ते से ट्रंप कोर्ट में प्रवेश करेंगे उसका खाका तैयार कर लिया गया है. कोर्ट के अंदर फिंगरप्रिंट लेने की तैयारी हो चुकी है.

    ये वही कोर्ट है जहां बर्नार्ड मैडॉउ, जेफ़्री एपस्टीन और हार्वे वीनस्टीन जैसे कुछ हाईप्रोफ़ाइल सैलेब्रीटीज़ हैं जिनपर आपराधिक मुकदमा चलाया गया.

    कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ट्रंप की उसी कोर्ट में पेशी होगी जहां वीनस्टीन पर मुकदमा चलाया गया था, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.

    कोर्ट के बाहर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. अमेरिका के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि कोई पूर्व राष्ट्रपति आपराधिक आरोपों का सामना कर रहा है.

  8. ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पीएम मोदी की तारीफ़ में ये कहा

    ग़ुलाम नबी आज़ाद

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    कांग्रेस के पूर्व नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की है और कहा है कि जो कुछ उन्होंने कांग्रेस में रहते किया, उसके लिए मोदी ने कोई बदला नहीं लिया.

    एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पीएम ने एक कुशल राजनेता जैसा व्यवहार किया.

    साथ ही उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बारे में कहा, “वरिष्ठ नेताओं की कतार में बैठे रहने की समस्या से मैं उबर गया हूं, जिनसे उम्मीद की जाती है कि वे ईडी हेडक्वार्टर के सामने धरना दें या सूरत (राहुल गांधी के प्रति समर्थन दिखाने के लिए कई वरिष्ठ नेता सूरत गए थे) जाएं.”

    आज़ाद ने कहा, “मोदी को मैं श्रेय दूंगा. जो कुछ मैंने किया, उसे लेकर वो दरियादिल रहे.”

    उन्होंने कांग्रेस की ओर से संसद में विपक्षी नेता के तौर पर अपने कार्यकाल का जिक्र किया जिस दौरान कुछ विधेयक पास नहीं हो पाए थे.

    उन्होंने मोदी की तारीफ़ की कि उन्होंने इसका कोई बदला नहीं लिया. उन्होंने कहा कि मोदी ने अनुच्छेद 370, सीएए, हिजाब जैसे मुद्दों पर एक स्टेट्समैन की तरह विपक्ष के साथ व्यवहार किया.

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    ऐसा पहली बार नहीं है कि ग़ुलाम नबी आज़ाद ने मोदी की तारीफ़ की है. साल 2021 में उन्होंने मोदी की इसलिए तारीफ़ की क्योंकि उन्होंने छिपाया नहीं कि वो गांव से आते हैं और चाय बेचते थे.

    हालांकि पीएम मोदी ने भी आज़ाद की तारीफ़ करते हुए अपना सच्चा दोस्त बताया था. उन्होंने कहा था, “सत्ता आती है और चली जाती है, लेकिन चंद लोग ही जानते हैं कि कैसे संतुलित रहें. जो कुछ भी उन्होंने पिछले सालों में किया, मैं एक दोस्त के रूप में उसकी इज्ज़त करता हूं.”

    उन्होंने कहा कि उनकी नई निर्मित पार्टी से कोई भी वापस नहीं गया है. उन्होंने कहा कि ‘तीन नेताओं को पार्टी से निकाला गया था. लेकिन कहा गया कि 37 नेता कांग्रेस में चले गए. ये 37 लोग कोई भी हो सकते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी नेता नहीं था.’

    साल 2022 में आज़ाद ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर जम्मू कश्मीर में डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद (डीपीएपी) नाम से पार्टी बनाई.

    आज़ाद का बयान ऐसे में आया है जब कुछ राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और अगले साल होने वाले आम चुनावों के लिए अभी से पार्टियों ने तैयारी करना शुरू कर दिया है.

  9. दिनभर पूरा दिन पूरी ख़बर, प्रेरणा और सुमिरन प्रीत कौर के साथ

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  10. ब्रेकिंग न्यूज़, फ़िनलैंड बना नेटो का 31वां सदस्य, अब क्या करेंगे पुतिन

    नेटो

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    फिनलैंड मंगलवार को नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन यानी नेटो का 31वां सदस्य बन गया. एक समय में यह अकल्पनीय लगता था लेकिन अब यूरोप में सुरक्षा का समीकरण तेज़ी से बदल रहा है.

    फ़िनलैंड का नेटो में शामिल होना केवल इसलिए मायने नहीं रखता है कि उसकी सीमा रूस से लगती है बल्कि इसलिए भी अहम है कि फिनलैंड किसी भी गुट में शामिल नहीं होने की वकालत करता था.

    फ़िनलैंड के नेटो में शामिल होने को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए झटके के तौर पर भी देखा जा रहा है. पुतिन ने यूक्रेन पर पिछले साल फ़रवरी में हमला किया था तो एक कारण यह भी बताया था कि वह नेटो का विस्तार पूरब की ओर नहीं होने देंगे.

    फ़िनलैंड के साथ स्वीडन ने भी नेटो की सदस्यता के लिए आवेदन किया था. दोनों देशों ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ही यह आवेदन किया था.

    ऐसा माना जा रहा था कि फिनलैंड और स्वीडन दोनों एक साथ नेटो में शामिल हो जाएंगे लेकिन हंगरी और तुर्की ने स्वीडन को रोक रखा है. अभी तक स्पष्ट नहीं है कि स्वीडन के नेटो में शामिल होने की राह कब तक साफ़ होगी. नेटो के सभी सदस्यों को नए सदस्य के शामिल होने पर सहमति देनी होती है.

    रूस ने फ़िनलैंड और स्वीडन को नेटो में शामिल होने को लेकर चेतावनी दी थी और कहा था कि यह दोनों देशों के लिए ग़लत क़दम होगा. मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने फिनलैंड के नेटो में शामिल होने पर कहा था कि यह रूसी सुरक्षा में अतिक्रमण है.

    पुतिन ने इससे पहले कहा था, ''रूस का फ़िनलैंड और स्वीडन के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है, ऐसे में यह उन पर निर्भर करता है कि नेटो में शामिल होना है या नहीं. लेकिन इन देशों में नेटो सैन्य यूनिट या उसके किसी इन्फ़्रास्ट्रक्चर की तैनानी होगी तो रूस चुप नहीं बैठेगा.''

    वहीं पिछले हफ़्ते स्वीडन में रूसी दूतावास ने कहा था कि दुश्मन के गुट में नए सदस्य एक तार्किक निशाना होंगे. नेटो दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1949 में बना था. इसे बनाने वाले अमेरिका, कनाडा और अन्य पश्चिमी देश थे. इसे इन्होंने सोवियत यूनियन से सुरक्षा के लिए बनाया था. तब दुनिया दो ध्रुवीय थी. एक महाशक्ति अमेरिका था और दूसरी सोवियत यूनियन.

    शुरुआत में नेटो के 12 सदस्य देश थे. नेटो ने बनने के बाद घोषणा की थी कि उत्तरी अमेरिका या यूरोप के इन देशों में से किसी एक पर हमला होता है तो उसे संगठन में शामिल सभी देश अपने ऊपर हमला मानेंगे. नेटो में शामिल हर देश एक दूसरे की मदद करेगा.

    नेटो के विस्तार को लेकर पुतिन नाराज़ रहे हैं. मध्य और पूर्वी यूरोप में रोमानिया, बुल्गारिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, लातविया, इस्टोनिया और लिथुआनिया भी 2004 में नेटो में शामिल हो गए थे. क्रोएशिया और अल्बानिया भी 2009 में शामिल हो गए. जॉर्जिया और यूक्रेन को भी 2008 में सदस्यता मिलने वाली थी लेकिन दोनों अब भी बाहर हैं.

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  11. इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने रामनवमी में भारत में हिंसा पर उठाए सवाल

    ओआईसी

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    इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा है कि भारत में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान मुसलमानों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है.

    ओआईसी ने अपने बयान में कहा है कि भारत के कई राज्यों में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई है और अतिवादी हिन्दुओं की भीड़ ने मदरसों के अलावा लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया. ओआईसी ने बिहार के बिहारशरीफ़ में हुई हिंसा का हवाला दिया है.

    ओआईसी ने कहा, ''ओआईसी महासचिव इन उकसाने वाली हिंसक घटनाओं की निंदा करते हैं. ये हिंसक घटानाएं बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया के ज्वलंत उदाहरण हैं. भारत में मुसलमानों को व्यवस्थित रूप से निशाने पर लिया जा रहा है. ओआईसी भारत से इस हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग करता है. भारत मुसलमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनके अधिकार के साथ मर्यादा की रक्षा करे.''

    यह कोई पहली बार नहीं है जब ओआईसी ने भारत में मुसलमानों को लेकर आवाज़ उठाई है. ओआईसी कश्मीर के मामले में भी भारत पर सवाल उठाता रहता है.

    ओआईसी ने इससे पहले हरिद्वार में धर्म संसद, कर्नाटक में हिजाब विवाद और मुसलमानों के ख़िलाफ़ कथित नफ़रत को लेकर चिंता जताते हुए भी बयान जारी किया था. नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर भी ओआईसी ने भारत पर सवाल उठाया था.

    भारत हर बार ओआईसी के बयानों को ख़ारिज करता रहा है. ओआईसी के पहले के बयानों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है और ओआईसी को इसका कोई अधिकार नहीं है.

    ओआईसी इस्लामिक या मुस्लिम बहुल देशों का संगठन है. इसके कुल 57 देश सदस्य हैं. ओआईसी में सऊदी अरब का दबदबा है, लेकिन सऊदी अरब दुनिया के उन टॉप 10 देशों में भी शामिल नहीं है, जहाँ मुस्लिम आबादी सबसे ज़्यादा है. हालांकि इस्लाम के लिहाज से मक्का और मदीना के कारण सऊदी अरब काफ़ी अहम है.

    भारत मुस्लिम आबादी के लिहाज से शीर्ष तीन देशों में होने के बावजूद ओआईसी का सदस्य नहीं है.

    ओआईसी ने जब कर्नाटक में हिजाब विवाद पर बयान जारी कर चिंता जताई थी तो भारत ने जवाब में कहा था, ''हमने भारत से संबंधित मामलों पर ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के महासचिव की ओर से एक और प्रेरित और भ्रामक बयान देखा है. भारत में अलग-अलग मुद्दों को संवैधानिक ढांचे और नियम के आधार पर देखा जाता है. ओआईसी पर निहित स्वार्थ समूहों का क़ब्ज़ा बना हुआ है जो भारत के ख़िलाफ़ अपने नापाक दुष्प्रचार को जारी रखे हुए हैं और इस वजह से ओआईसी ने सिर्फ़ अपनी ही प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई है.''

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  12. सिक्किम में हिमस्खलन से कम से कम सात लोगों की मौत, कई ज़ख़्मी

    सिक्किम में एक हिम्सखलन

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    सिक्किम में एक हिमस्खलन से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है और कई लोगों के अब भी फंसे होने की आशंका है.

    गृह मंत्री अमित शाह ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा है, ''पूरे हालात पर हमारी नज़र है. प्रभावित इलाक़े में एनडीआरएफ़ की टीम जल्द ही पहुँचेगी. इस हादसे में जो ज़ख़्मी हुए हैं, उनके जल्दी ठीक होने की कामना करता हूँ.''

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ सेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक़ पाँच से छह गाड़ियों में 30 सैलानी नाथू ला जा रहे थे और क़रीब 11.30 बजे हिमस्खलन की चपेट में आ गए.

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तेंज़िंग लोडेन लेपचा के मुताबिक, "कितेन लोग दबे हुए हैं, इसकी पुख्ता जानकारी अपने पास नहीं है. 17 लोगों को बचाया जा चुका है. इनमें से आठ लोगों की हालत गंभीर है."

    उन्होंने बताया कि लोग एक नदी के पास तस्वीरें खींच रहे थे जब ये हादसा हुआ.

    समाचार एजेंसी एएनआई के वीडियो में देखा जा सकता है कि राहत बचाव का काम जारी है.

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  13. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान के किंग जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मिले, क्या हुई बातचीत

    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान के किंग जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक

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    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान के किंग जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में वार्ता हुई. भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने इस मुलाक़ात की जानकारी देते हुए प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

    विनय क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और किंग वांगचुक के बीच व्यापक रूप से कई मुद्दों पर बात हुई.

    विनय क्वात्रा ने कहा, ''आर्थिक मुद्दों पर विस्तार से बात हुई. भूटान में आर्थिक सुधार और कई परियोजनाओं पर बात हुई. इसके अलावा ट्रेड और कनेक्टिविटी पर भी बात हुई. इसमें रेल, एयर और डिज़िटल संपर्क पर भी बात हुई. इसके अलावा ऊर्जा सहयोग पर भी बात हुई."

    डोकलाम ट्राई-जंक्शन पर भूटान के प्रधानमंत्री लोटे छृंग की कुछ टिप्पणियों को कई लोगों ने भूटान और चीन साथ मित्रता के रूप में देखा लेकिन भूटान ने कहा कि सीमा विवाद पर उसके रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है.

    हाल के बयानों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत और भूटान एक दूसरे से साथ कई मोर्चों पर मिलकर काम कर रहे हैं, इनमें सुरक्षा भी शामिल है. उन्होंने का कि डोकलाम ट्राई-जंक्शन पर भारत ने फिर से अपना पक्ष सामने रखा है.

    दिल्ली हवाईअड्डे पर किंग वांगचुक का स्वागत विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा किया गया, जो नई दिल्ली की यात्रा के महत्व को दर्शाता है.

    जयशंकर ने सोमवार शाम को उनसे मुलाक़ात के बाद दोनों देशों के बीच साझेदारी को मज़बूत करने के लिए किंग के दृष्टिकोण की प्रशंसा की थी.

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    2017 में डोकलाम ट्राई-जंक्शन पर गतिरोध शुरू हुआ जब चीन ने उस क्षेत्र में एक सड़क का विस्तार करने की कोशिश की जिसे भूटान ने अपना होने का दावा किया था.

    भारत ने निर्माण का कड़ा विरोध किया था क्योंकि इससे उसके समग्र सुरक्षा हितों पर असर पड़ता. कई दौर की बातचीत के बाद भारत-चीन के आमने-सामने का हल निकाला गया.

    अक्टूबर 2021 में, भूटान और चीन ने अपने बढ़ते सीमा विवाद को हल करने के लिए बातचीत में तेजी लाने के लिए "तीन-चरणीय रोडमैप" पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

    भूटान चीन के साथ 400 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा साझा करता है और दोनों देशों ने विवाद को हल करने के लिए सीमा वार्ता के 24 से अधिक दौर आयोजित किए हैं.

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  14. शशि थरूर ने एस जयशंकर को 'कूल' रहने की दी सलाह

  15. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला क्या इमरान ख़ान की जीत है?

    इमरान खान

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    पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पाकिस्तान के चुनाव आयोग के उस फ़ैसले को असंवैधानिक क़रार दिया, जिसमें उन्होंने पंजाब और ख़ैबर पख़्तुनख़्वा में चुनाव को आठ अक्तूबर तक स्थगित करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने 14 मई को चुनाव की तारीख तय की है.

    सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले में कहा है, " पाकिस्तान के चुनाव आयोग द्वारा 22.03.2023 के विवादित आदेश को असंवैधानिक घोषित किया गया है."

    कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के पास चुनाव को 90 दिन से ज़्यादा स्थगित करने का अधिकार नहीं है.

    पहले चुनाव 8 अप्रैल को होने थे. लेकिन चुनाव आयोग ने इसे आठ अक्तूबर को कराने का फ़ैसला किया था.

    इस फ़ैसले को इमरान ख़ान के लिए जीत की तरह देखा जा रहा है. इमरान ख़ान के वकील ने पाकिस्तान के अख़बार डॉन से कहा, "इमरान ख़ान की बढ़ती लोकप्रियता के कारण उन्हें हार का डर लग रहा है और वो पूरी कोशिश करेंगे कि इस आदेश को लागू करने में देरी हो, वो इसे लेकर बहाने बनाते रहेंगे."

    इमरान ख़ान की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है.

  16. पश्चिम बंगाल में रामनवमी के दौरान हिंसा फैलाने के आरोप में बिहार से युवक गिरफ़्तार

    बंगाल

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    बंगाल के हावड़ा में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान कथित रूप से बंदूक के साथ देखे गए 19 साल के एक लड़के को बिहार में गिरफ़्तार किया गया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा है कि सुमित साव नाम के इस व्यक्ति को बिहार के मुंगेर से पकड़ा गया है.

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    टीएमसी ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि सुमित बीजेपी से जुड़ा हुआ है.

    टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें कथित तौर पर सुमित बंदूक से साथ दिख रहे थे. उन्होंने लिखा था कि वीडियो में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का 'दंगाबाज़ी फ़ॉर्मूला' नज़र आ रहा है.

    हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों से इनकार किया था.

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    रामनवमी के मौक़े पर बंगाल के हावड़ा में हुई हिंसा में कई लोग घायल हो गए थे और कई गाड़ियों में आग लग गई थी.

  17. जापान को रूस के मामले में अमेरिका ने ये छूट क्यों दी

    जापान

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    अमेरिका ने यूरोप के अपने सहयोगी देशों के साथ रूसी तेल की ख़रीदारी पर प्रति बैरल 60 डॉलर का प्राइस कैप लगा रखा है. लेकिन अमेरिका के सबसे क़रीबी सहयोगियों में से एक जापान रूस से तेल प्राइस कैप से ज़्यादा क़ीमत देकर ख़रीद रहा है.

    अमेरिकी अख़बार वाल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने जापान को अपवाद स्वरूप यह छूट दे दी है. जापान के बारे में कहा जा रहा है कि उसे रूसी ऊर्जा की ज़रूरत है.

    डब्ल्यूएसजे ने लिखा है, ''जापान को मिली छूट बताती है कि उसकी निर्भरता रूसी जीवाश्म ईंधन पर किस हद तक है. हालांकि दूसरी तरफ़ यूरोप के देश रूसी तेल पर अपनी निर्भरता लगातार कम कर रहे हैं. जापान जी-7 का एकमात्र देश है जो यूक्रेन को घातक हथियार नहीं दे रहा है. जापान के प्रधानमंत्री फ़ुमियो किशिदा ने पिछले महीने ही यूक्रेन का दौरा किया था. इसी दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस के दौरे पर गए थे.''

    इस साल जी-7 की अध्यक्षता जापान के पास है और मई महीने में हिरोशिमा में जी-7 समिट होने जा रहा है.

    प्रधानमंत्री किशिदा ने कहा है कि वह यूक्रेन की स्वतंत्रता और संप्रभुता को लेकर अडिग हैं. जापान का कहना है कि यूक्रेन का समर्थन और वहां हथियार नहीं भेजना उनकी कैबिनेट के नियम के हिसाब से है.

    जी-7 का रूसी तेल पर लगाया प्राइस कैप काम कर रहा है. जो अमेरिका के सहयोगी नहीं भी हैं, उन्हें रूस से तेल ख़रीदने के लिए इंश्योरेंस और अन्य सेवाओं की ज़रूरत पड़ती है और ये सारी कंपनियां अमेरिकी हैं या उसके सहयोगी देशों की हैं.

    जी-7, ईयू और ऑस्ट्रेलिया इस बात पर सहमत हैं कि 60 डॉलर प्रति बैरल से ज़्यादा क़ीमत देने वाले देशों को जो कंपनियां इंश्योरेंस करेंगी, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

    जी-7 दुनिया के सबसे धनी देशों का समूह है. इसमें अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ़्रांस, इटली और कनाडा हैं. जी-7 की इस योजना के साथ ईयू भी खड़ा है. जी-7 देश चाहते हैं कि चीन और भारत को रूस से सस्ता तेल ना मिले.

    भारत दुनिया का दूसरा बड़ा तेल आयातक देश है. भारत पहले प्राइस कैप की बात करता रहा है. लेकिन बेहिसाब बढ़ती क़ीमतों के मामले में भारत इसकी बात करता था न कि सस्ते तेल को रोकने के लिए. यूक्रेन पर रूसी हमले से पहले भारत अपनी ज़रूरत का महज़ एक फ़ीसदी तेल रूस से लेता था. रूस ने यूक्रेन पर हमला फ़रवरी महीने में किया था. अप्रैल महीने में भारत के कुल तेल आयात में रूस का हिस्सा बढ़कर आठ फ़ीसदी हो गया और मई में 18 फ़ीसदी हो गया. जुलाई से रूस से भारत के तेल आयात में गिरावट आई, लेकिन यह गिरावट भारत के पूरे तेल आयात में थी.

    अमेरिका

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  18. पश्चिम बंगाल: राज्यपाल सीवी आनंद बोस पहुँचे हिंसा प्रभावित हुगली

    पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस

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    पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस हुगली के हिंसा प्रभावित इलाके रिसड़ा पहुंचे हैं. यहां उन्होंने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की और हालात का जायज़ा लिया.

    बोस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "ठोस कार्रवाई होगी. हम कभी भी उपद्रवियों को क़ानून हाथ में नहीं लेने देंगे. पुलिस उन पर भारी पड़ेगी. बंगाल लंबे समय से हिंसा से पीड़ित है, हम इसे अंतिम रूप देंगे."

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    बोस दार्जिलिंग जी20 की बैठक के लिए गए थे, जहां से सीधे वो मंगलवार को हुगली पहुंचे.

    रविवार को रामनवमी के जुलूस पर कथित पथराव के बाद हिंसा और आगज़नी हुई थी.

    सोमवार देर रात भी उपद्रव हुआ और बम फेंके गए. असामाजिक तत्वों के उपद्रव के कारण सोमवार रात तीन घंटे से भी ज़्यादा समय तक रेल सेवाएं ठप रहीं.

    पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, “सोमवार रात को रिसड़ा स्टेशन के बाद एक बार फिर उपद्रव शुरू हो गया. वहां असामाजिक तत्व बम फेंकने लगे. इससे आम लोगों में भारी आतंक फैल गया. बाद में मौक़े पर पहुंची पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इस बवाल के कारण हावड़ा से अप और डाउन लाइनों में ट्रेनों की आवाजाही ठप हो गई.”

    रिसड़ा स्टेशन पर ट्रेन में फंसे यात्रियों ने बीबीसी को बताया कि उन लोगों ने डर के मारे कोच के दरवाजे और खिड़कियां भीतर से बंद कर लिये थे.

    सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने हावड़ा, हुगली और उत्तर दिनाजपुर ज़िले में हाल में हुई हिंसा पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

    हुगली

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    हाई कोर्ट ने मांगी राज्य सरकार से रिपोर्ट

    विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवज्ञानम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने सरकार को यह रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज बुधवार तक अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है.

    अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया और पुलिस और अदालत को इस बात का ध्यान रखने को कहा है कि ऐसी घटना दोबारा ना हो और आम लोगों को कोई नुकसान ना पहुंचे.

    हावड़ा की हिंसा के बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की थी.

    दूसरी ओर, भाजपा ने इस हमले के विरोध में राज्य के विभिन्न इलाक़ों में विरोध प्रदर्शन किया है.

    बीजेपी की शोभायात्रा पर कथित पथराव के बाद रविवार शाम हिंसा और आगज़नी हुई थी.

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  19. नासा ने मून मिशन की टीम में एक महिला और एक काले पुरुष को शामिल किया

    नासा

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    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने उन चार अंतरिक्ष यात्रियों का नाम जारी किया है, जो 50 साल बाद चांद पर जाएंगे.

    क्रिस्टीना कोच चांद पर जाने के लिए तय की गई टीम में शामिल होने वाली पहली महिला हैं. वहीं इस टीम में विक्टर ग्लोवर को शामिल किया गया है, जो चांद मिशन में शामिल होने वाले पहले काले अंतरिक्ष यात्री होंगे.

    वे अगले साल के अंत में या 2025 की शुरुआत में रीड वाइज़मैन और जेरेमी हैनसेन के साथ चांद के चारों ओर एक कैप्सूल उड़ाने के मिशन में शामिल होंगे.

    ये अंतरिक्ष यात्री चांद पर नहीं उतरेंगे, लेकिन उनका मिशन चांद पर लैंडिंग करने वालों के लिए आगे का रास्ता तैयार करेगा.

    ह्यूस्टन, टेक्सस में हुए एक समारोह में तीन अमेरिकी नागरिकों और एक कनाडा के नागरिक को सार्वजनिक किया गया.

    महिला और काले शख़्स को टीम में शामिल कर नासा ने विविधता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दिखाया है. इससे पहले इस मिशन में सभी सदस्य गोरे आदमी थे.

  20. अरुणाचल पर चीन के तेवर को कैसे देख रहे हैं विशेषज्ञ

    चीन

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    चीन ने एक बार फिर से अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों का नाम बदलकर मंदारिन में रख दिया है.

    इससे पहले 2021 में चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 15 जगहों का नाम बदल दिया था. चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत कहता है.

    अरुणाचल को उसने चीनी नाम जांगनान दिया है. भारत सरकार ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा है कि चीन ऐसा पहले भी कर चुका है, मगर इससे तथ्य नहीं बदल जाते.

    अरुणाचल प्रदेश पर चीन के इस रुख़ को लेकर भारत के ही कई विशेषज्ञ मोदी सरकार से कुछ ठोस फ़ैसले लेने की मांग कर रहे हैं.

    ब्रह्मा चेलानी जाने-माने सामरिक विशेषज्ञ माने जाते हैं. उन्होंने ट्वीट कर कहा है, ''एक तरफ़ चीन अरुणाचल प्रदेश में लगातार नाम बदल रहा है और इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है. दूसरी तरफ़ भारत अब भी तिब्बत को चीन का अभिन्न हिस्सा मानता है. ख़ुद को नुक़सान पहुँचाना इससे ज़्यादा और क्या हो सकता है?''

    2017 में आरसएस की पत्रिका ऑर्गेनाइजर के पूर्व संपादक शेषाद्री चारी ने बीबीसी से कहा था कि पहली बार 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने तिब्बत को चीन का हिस्सा माना और चीन ने सिक्किम को भारत का हिस्सा.

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    प्रधानमंत्री बनने से पहले वाजपेयी तिब्बत को स्वतंत्र देश के रूप में रेखांकित करते थे. चारी ने कहा था, "वाजेपयी सरकार को रणनीतिक तौर पर इसे टालना चाहिए था. उस वक़्त हमने तिब्बत के बदले सिक्किम को सेट किया था. चीन ने सिक्किम को मान्यता नहीं दी थी लेकिन जब हमने तिब्बत को उसका हिस्सा माना तो उसने भी सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया."

    अब जब अरुणाचल को लेकर चीन आक्रामक हो रहा है तो भारत के भीतर कई लोग कह रहे हैं कि तिब्बत पर भारत को अपना रुख़ बदल लेना चाहिए.

    जेएनयू में सेंटर फोर चाइनिज़ एंड साउथ ईस्ट एशिया स्टडीज के प्रोफ़ेसर बीआर दीपक का मानना है कि "तिब्बत के मामले में भारत की बड़ी लचर नीति रही है. साल 1914 में शिमला समझौते के तहत मैकमोहन रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा माना गया लेकिन 1954 में नेहरू तिब्बत को एक समझौते के तहत चीन का हिस्सा मान लिए."

    प्रोफ़ेसर बीआर दीपक का कहना है, "वाजपेयी और नेहरू में फ़र्क था. नेहरू ने आठ साल के लिए तिब्बत को चीन का हिस्सा माना था लेकिन वाजपेयी ने कोई समय सीमा तय नहीं की थी. मार्च 1962 में नेहरू का चीन के साथ तिब्बत पर क़रार ख़त्म हो गया था और यह 2003 तक यथास्थिति रही. 2003 में जब वाजपेयी चीन के दौरे पर गए तो उन्होंने तिब्बत पर समझौता कर कर लिया."

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    मोदी सरकार की चीन नीति पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी सवाल उठा रही है. कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट कर कहा है, ''चीन ने तीसरी बार अरुणाचल में हमारे इलाक़ों के “नाम बदलने” का दुःस्साहस किया है.

    21 अप्रैल 2017 — 6 जगह

    30 दिसंबर 2021 — 15 जगह

    3 अप्रैल 2023 — 11 जगह

    अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा. गलवान के बाद, मोदी जी द्वारा चीन को क्लीन चिट देने का नतीजा, देश भुगत रहा है.

    चीन अरुणाचल प्रदेश में 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर अपना दावा करता है जबकि भारत कहता है कि चीन ने पश्चिम में अक्साई चिन के 38 हज़ार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अवैध रूप से क़ब्ज़ा कर रखा है.

    भारतीय नेताओं के दौरे पर चीन की आपत्ति को लेकर भारत के जाने-माने सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कुछ महीने पहले ट्वीट कर कहा था, ''चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तिब्बत गए तो भारत ने कुछ नहीं कहा था. यहाँ तक कि भारतीय सीमा से महज़ 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बेस पर शी जिनपिंग एक रात रुके भी थे. इसे चीन की युद्ध तैयारी के रूप में देखा गया. भारतीय नेताओं के दौरे पर चीन की आपत्ति कोई हैरान करने वाली नहीं है.''

    तिब्बत

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