आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाए सवाल,

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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ब्राह्मणों से संबंधित बयान को लेकर कहा है कि मोहन भागवत ने कौन-सा ऐसा अनुसंधान कर लिया है, जिससे पता चल गया कि वर्ण पंडितों ने बनाया है?
उन्होंने रायपुर में पत्रकारों से बातचीत में मोहन भागवत को लेकर कहा, "अब उन्होंने कोई अनुसंधान किया होगा. उनसे पूछना होगा कि ये किस अनुसंधान के फलस्वरूप आपको ये जानकारी मिली है?"
शंकराचार्य ने कहा, "हमलोग तो ये जानते हैं कि चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं. गीता में भगवान ने कहा है कि चातुर्वण्यम मया, मया मतलब मेरे द्वारा. मेरे द्वारा सृजित किए गए हैं."
उन्होंने कहा, "इस देश में राजनीति ध्रुवीकरण का प्रयास करती रहती है. कई तरह से ध्रुवीकरण के प्रयास होते हैं. वीपी सिंह के समय मंडल-कमंडल आप लोगों ने देखा था. तब भी जातियों को बांटने की कोशिश की गई थी."
शंकराचार्य ने कहा, "अभी धर्म के आधार पर गोलबंदी है, ध्रुवीकरण है. अब इसको खत्म करके कुछ लोग चाहते हैं कि जो बहुत बड़ा हिंदू समुदाय है, उस हिंदू समुदाय में दो भाग कर दिए जाएं-अगड़े पिछड़े का. फिर कोई अगड़े की राजनीति करे, कोई पिछड़े की राजनीति करे, इस तरह से सत्ता पर आसीन हो जाएं."
उन्होंने कहा, "धर्मग्रंथ पर बोलने का अधिकार धर्माचार्य को होना चाहिए, राजनीतिज्ञ को नहीं होना चाहिए."
रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, "सत्य ही ईश्वर है, सत्य कहता है मैं सर्वभूति हूं, रूप कुछ भी रहे योग्यता एक है, ऊंच-नीच नही है, शास्त्रों के आधार पर कुछ पंडित जो बताते हैं वो झूठ है. जाति की श्रेष्ठता की कल्पना में ऊंच-नीच में अटक कर हम गुमराह हो गए, भ्रम दूर करना है."

















