मंगलसूत्र के विज्ञापन पर नरोत्तम मिश्र की चेतावनी के बाद पीछे हटे सब्यसाची
मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र के फैशन ब्रांड सब्यसाची को मंगलसूत्र के अपने विवादित विज्ञापन को चौबीस घंटों के अंदर हटाने की चेतावनी दी है. मिश्र की चेतावनी के बाद सब्यसाची ने विज्ञापन वापस ले लिया है.
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मंगलसूत्र के विज्ञापन पर नरोत्तम मिश्र की चेतावनी के बाद पीछे हटे सब्यसाची
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मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्र के फैशन ब्रांड सब्यसाची को मंगलसूत्र के अपने विवादित विज्ञापन को चौबीस घंटों के अंदर हटाने की चेतावनी दी है. मिश्रा की चेतावनी के बाद सब्यसाची ने विज्ञापन वापस ले लिया है.
सब्यसाची के मंगलसूत्र के विज्ञापन को हिंदू समूहों ने अपनी आस्था पर हमला बताया है. मध्य प्रदेश गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र ने रविवार को सब्यसाची मुखर्जी को चौबीस घंटे के भीतर विज्ञापन वापस लेने की चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि ये विज्ञापन वापस नहीं लिया गया तो सरकार क़ानूनी कार्रवाई करेगी.
एक बयान में नरोत्तम मिश्र ने कहा, "मैंने डिज़ाइनर सब्यसाची मुखर्जी का मंगलसूत्र का विज्ञापन देखा, बेहद आपत्तीजनक है. मन आहत भी हुआ है. आभूषणों में सर्वाधिक महत्व का मंगलसूत्र होता है. हम मानते हैं कि मगंलसूत्र का पीला हिस्सा मां पार्वती और काला हिस्सा भगवान शिवजी की कृपा से, महिला और उसके पति की रक्षा होती है. हम मानते हैं कि मां पावर्ती की कृपा से दांपत्य जीवन सुखमय होता है."
उन्होंने कहा, "मैं पहले भी चेतावनी दे चुका हूं और डिज़ाइनर सब्यसाची मुखर्जी को मैं व्यक्तिगत रूप से चेतावनी दे रहा हूं और चौबीस घंटों का अल्टीमेटम दे रहा हूं कि यदि उन्होंने चौबीस घंटों में ये विज्ञापन नहीं हटाया तो केस दर्ज होगा, वैधानिक कार्रवाई होगी और अलग से फ़ोर्स भेजी जाएगी."

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नरोत्तम मिश्र की धमकी और हिंदू समूहों के विरोध के बाद सब्यासाची ने अपना विज्ञापन वापस ले लिया है. इंस्टाग्राम पर स्टोरी में पोस्ट एक बयान में फैशन ब्रांड ने कहा है कि "मंगलसूत्र कैंपेन के ज़रिए हमने समावेश और सशक्तिकरण पर बात करने की कोशिश की थी. विज्ञापन का मक़सद इसका जश्न मनाना था लेकिन हम इस बात से बेहद दुखी हैं कि इससे हमारे समाज के एक वर्ग को ठेस पहुंची हैं. इसलिए हम इस विज्ञापन को वापस ले रहे हैं."
अपने विज्ञापन में सब्यसाची ने समलैंगिक जोड़ों को मंगलसूत्र पहने दिखाया था. मंगलसूत्र हिंदुओं का एक पवित्र आभूषण है जिसे शादी के बाद सत्रियां धारण करती हैं. इसे शादीशुदा होने के प्रतीक के तौर पर भी देखा जाता है.
सब्यसाची के विज्ञापन में मॉडल अकेले और साथी के साथ अंतरंग होते हुए मंगलसूत्र पहने दिख रहे थे.
नरोत्तम मिश्र इससे पहले भी विज्ञापनों पर आपत्ति ज़ाहिर कर चुके हैं. हाल के दिनों में उन्होंने डाबर के एक विज्ञापन का भी विरोध किया था. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने डाबर को क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी.
इस विज्ञापन में एक महिला समलैंगिक जोड़े को करवा चौथ का त्योहार मनाते हुए दिखाया गया है. मिश्र ने पुलिस प्रमुख से कहा है कि अगर विज्ञापन वापस नहीं लिया जाता है तो कंपनी पर कानूनी कदम उठाएं.
#INDvNZ : भारत ने न्यूज़ीलैंड को दिया 111 रनों का लक्ष्य

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भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेले जा रहे मैच में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए न्यूज़ीलैंड की टीम को 111 रनों का लक्ष्य दिया है.
इससे पहले टॉस जीतकर न्यूज़ीलैंड ने पहले गेंदबाज़ी का फ़ैसला किया. रवींद्र जडेजा ने पारी में सबसे अधिक 26 रन बनाए.
भारत की ओर से वरुण चक्रवर्ती ने पहला ओवर फेंका.
आमदनी बढ़ी है, इसलिए महंगाई को भी स्वीकार करना चाहिए: बीजेपी मंत्री
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मध्य प्रदेश के मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बढ़ती महंगाई पर कहा कि लोगों की आमदनी बढ़ी है, इसलिए उन्हें थी महंगाई को भी स्वीकार करना चाहिए.
महंगाई बढ़ने के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "क्या आम आदमी की आमदनी हाल के सालों में नहीं बढ़ी है? अगर आमदनी बढ़ी है और वो हमको स्वीकार है तो थोड़ी-बहुत महंगाई भी स्वीकार करनी चाहिए."
"हर चीज़ तो सरकार फ्री में दे नहीं सकती क्योंकि सरकार का रेवेन्यू कलेक्शन भी इसी से होता है. विकास से जुड़ी हमारी जितनी भी योजनाएं चल रही हैं, वो सभी इसी से चलती हैं. इसलिए पब्लिक को समझना चाहिए कि अगर हमारी आमदनी बढ़ी है तो थोड़ी महंगाई भी स्वीकार करनी पड़ेगी और यह प्रैक्टिकल बात है."
"आप यह नहीं कह सकते कि दस साल पहले हमें छह हज़ार रुपये मिलते थे और आज पचास हज़ार मिल रहे हैं मगर पेट्रोल-डील का दाम वही होना चाहिए जो दस साल पहले था."
महेंद्र सिंह ने एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए कहा कि महंगाई कभी भी वर्तमान भरोसे नहीं मापी जाती है कि एक साल में कोविड हो गया, कारखाने बंद हो गए. महंगाई पिछले पांच सालों के आधार पर मापी जाती है.
महेंद्र सिंह ने कहा कि बीते सालों लगभग हर वर्ग की आमदनी बढ़ी है.
ओडिशा में इलेक्ट्रिक वाहन ख़रीदने पर नहीं देना होगा मोटर वाहन कर और रजिस्ट्रेशन फी
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ओडिशा सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों पर मोटर वाहन कर और पंजीकरण शुल्क में पूरी छूट देने की घोषणा की है.
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्य सरकार ने यह फ़ैसला इलेक्ट्रिक वाहन के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए लिया है.
शुक्रवार को जारी अधिसूचना में राज्य सरकार ने बैटरी से चलने वाले वाहनों के लिए मोटर वाहन कर और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट की घोषणा की.
ओडिशा मोटर वेहिकल टैक्सेशन एक्ट के तहत दी गई यह छूट 2025 तक लागू रहेगी.
अमेरिका का एक शहर जहां पानी जहरीला हो गया है

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अमेरिका के मिशिगन के अधिकारियों ने कुछ ही सप्ताह पहले एक अपातकालीन घोषणा में बंटन हार्बर के शहरियों से कहा है कि वो घरों तक नलों से पहुंचने वाले जल का इस्तेमाल खाना बनाने, सब्जियां धोने और ब्रश करने के लिए न करें.
अमेरिकी शहर शिकागो से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित बेंटन हार्बर में कम से कम पिछले तीन सालों से हालात ऐसे रहे हैं कि सप्लाई के पानी के इस्तेमाल का मतलब रहा है बीमारी को दावत देना.
आख़िर नल से आने वाला जल इतना ज़हरीला कैसे है, दरअसल इस पानी में सीसे की मात्रा काफ़ी ज़्यादा हो गई है.
बेंटन हार्बर कम्यूनिटी वाटर काउंसिल के चेयरमैन रेवेरेंड एडवर्ड पिंकने ने बीबीसी वर्ल्ड को बताया, "2018 से ही पाया गया कि इलाक़े की जल आपूर्ति में सीसे की मात्रा बहुत अधिक है- ख़तरनाक के स्तर से बहुत ज़्यादा. लेकिन इसके उपयोग पर अबतक रोक नहीं लगाई गई थी."
साल 2018 में प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक़ इलाक़े के पानी में सीसे की मात्रा 22 पार्टस प्रति अरब मौजूद थी, जो जनवरी से जून, 2021 के दौरान बढ़कर 24 पार्टस प्रति अरब हो चुकी है.
गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ पर बरसीं प्रियंका, किए बड़े चुनावी वादे

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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने गोरखपुर में एक चुनावी रैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जमकर निशाना साधा. प्रियंका गांधी ने कई चुनावी वादे भी किए जिनमें किसानों के लिए क़र्ज़ माफ़ी और धान 2500 रुपए क्विंटल ख़रीदना शामिल थे.
प्रियंका गांधी ने कहा, "गुरु गोरखनाथ की वाणी के ख़िलाफ़ काम किए गए. बुलडोज़र चलाए गए, लोगों को धमकियां दी गईं, जेल में डाल दिया गया."
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के प्रभावशाली मठ के प्रमुख भी हैं. गुरु गोरखनाथ ने इस मठ की स्थापना की थी.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने किसानों और मछली पालने वालों से वादे भी किए. उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आएगी तो मछलीपालन को कृषि का दर्जा दिया जाएगा और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को कृषि क्षेत्र को मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जाएंगी.
निषाद समुदायों को संबोधित करते हुए प्रियंका ने कहा कि गुरु मछेंद्रनाथ के नाम पर यूनिवर्सिटी खोली जाएगी और मछली पालन और रेत खनन के अधिकार निषाद समुदाय को दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि किसानों के सभी लोन माफ़ कर दिए जाएंगे और धान और गेहूं की ख़रीद 2500 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होगी.
प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस गन्ने का दाम चार सौ रुपये प्रति क्विंटल कर देगी. उन्होंने कहा कि प्रांत में आवारा पशुओं की समस्या का समाधान छत्तीसगढ़ मॉडल के आधार पर किया जाएगा. महिलाओं से वादे करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर साल में तीन गैस सिलेंडर मुफ्त दिए जाएंगे और आंगनवाड़ियों कार्यकर्ताओं की सम्मान राशि को बढ़ाकर दस हज़ार रुपये महीना कर दिया जाएगा.
प्रियंका गांधी ने ठेके पर सरकारी विभागों में काम कर रहे लोगों को पक्की नौकरी देने और बेरोज़गारों को बीस लाख नए रोज़गार देने का वादा भी किया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा यदि उनकी पार्टी की सरकार बनेगी तो राज्य के लोगों को किसी भी बीमारी के लिए दस लाख रुपये तक का मुफ़्त बीमा दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि कोविड-19 की वजह से रोज़गार गंवाने वाले परिवारों को 25 हज़ार रुपए की आर्थिक सहायता भी दी जाएगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि ज़िले के अस्पताल की हालत बेहद ख़राब है और स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं. योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद भी रह चुके हैं.
प्रिंयका ने कहा, "चुनाव आ रहे हैं तो हम सुन रहे हैं कि एम्स चालू कर दिया जाएगा. लेकिन पिछले पांच सालों में कुछ नहीं हुआ तो आप कैसे उम्मीद करेंगे कि अब कुछ होगा."
उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने हैं. कांग्रेस को पिछले चुनावों में 403 में से सिर्फ़ सात सीटें मिलीं थीं. ऐसे में कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती होगी. प्रियंका गांधी यूपी चुनावों में कांग्रेस का चेहरा होंगी. वो पार्टी की स्थिति सुधारने के लिए ज़मीनी स्तर पर प्रयास कर रहीं हैं. इसी महीने प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणासी में चुनावी रैली की थी.
भारत-न्यूज़ीलैंड टी-20 वर्ल्ड कप: न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीकर किया पहले गेंदबाज़ी का फ़ैसला
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भारत और न्यूज़ीलैंड की टीम के बीच आज हो रहे टी-20 विश्व कप मुक़ाबले में न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाज़ी का न्योता दिया है.
सुपर 12 में हो रहे इस अहम मुक़ाबले में भारतीय टीम ने दो बदलाव किये हैं. भारतीय टीम के प्लेइंग इलेवन में सूर्यकुमार यादव की जगह ईशान किशन को शामिल किया गया है. साथ ही शार्दुल ठाकुर भी इस मैच का हिस्सा हैं.
भारत: प्लेइंग इलेवन: ईशान किशन, रोहित शर्मा, केएल राहुल, विराट कोहली (कप्तान), ऋषभ पंत (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, रवींद्र जडेजा, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह
न्यूजीलैंड: प्लेइंग इलेवन: मार्टिन गप्टिल, डेरिल मिशेल, केन विलियमसन (कप्तान),जेम्स नीशम, डेवोन कॉनवे, ग्लेन फिलिप्स (विकेटकीपर), मिशेल सेंटनर, ईश सोढ़ी, टिम साउथी, एडम मिल्ने, ट्रेंट बोल्ट

बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 31 अक्टूबर 2021, सुनिए मानसी दाश से
स्कॉटलैंड में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन शुरू,
अध्यक्ष ने कहा इस लड़ाई में सभी देशों को होना होगा एकजुट
जी20 देशों की बैठक और जलवायु परिवर्तन
सम्मेलन में क्यों नहीं दिखे चीन के राष्ट्रपति
मौसम की मार से बेहाल बिहार के मक्का किसानों पर ख़ास रिपोर्ट
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विराट कोहली के नेतृत्व में न्यूज़ीलैंड का मुक़ाबला करने उतरेंगे टीम इंडिया के ये खिलाड़ी

पाकिस्तान के हाथों मिली हार के बाद अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान असगर अफ़ग़ान ने लिया संन्यास का फ़ैसला

जिस समय असगर अफ़ग़ान अपनी आख़िरी पारी खेलकर लौटे उनकी आंखें नम थीं. नम आंखों से असर अफ़ग़ान ने कहा कि विश्व कप के बीच में संन्यास लेने का फ़ैसला उन्होंने पाकिस्तान से हार के बाद लिया.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से हार के बाद जो दर्द उन्हें और उनके साथियों को हुआ, उसी को ज़हन में रखते हुए उन्होंने संन्यास का फ़ैसला लिया.
अफ़ग़ानिस्तान की टीम पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सुपर 12 मैच में पांच विकेट से हार गयी थी. इस मैच में आसिफ़ अली ने अंतिम ओवर में चार छक्के लगाए थे. टीम को अंतिम दो ओवरों में 24 रन चाहिए थे.
मैच ख़त्म हुए 24 घंटे भी नहीं हुए थे कि पूर्व कप्तान अफ़गान ने नामीबिया के ख़िलाफ़ मैच के बाद संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी.
115 मैचों में अफ़ग़ानिस्तान की अगुवाई करने वाले असगर ने पहली पारी की समाप्ति के बाद अपने आंसू पोंछते हुए कहा, "पिछले मैच में हमें बहुत दुख हुआ और इसलिए मैंने संन्यास लेने का फैसला किया."
उन्होंने कहा "बहुत सारी यादें हैं और यह फ़ैसला काफी मुश्किल है लेकिन मुझे संन्यास लेना है."
33 वर्षीय अफग़ान ने अपने करियर में 114 एकदिवसीय और 7520-20 मैच खेले हैं, जिसमें नामीबिया के ख़िलाफ़ खेला गया मैच भी शामिल है. उन्होंने अपने करियर में कुल 4246 रन बनाए.
रविवार को 23 गेंदों में 31 रनों की पारी खेलने वाले अफ़ग़ान ने कहा, "मैं युवाओं को मौका देना चाहता हूं. लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि अब क्यों, लेकिन यह कुछ ऐसा है जिसे मैं समझा नहीं सकता."
अफ़ग़ानिस्तान का अगला मुक़ाबला 3 नवंबर को भारत और 7 नवंबर को न्यूजीलैंड से होगा.
अफ़ग़ानिस्तान की टीम ऐसे समय में वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रही है जब उनके देश में तालिबान का कब्ज़ा है और देश राजनीतिक, आर्थिक तौर नाज़ुक हालात से जूझ रहा है.
India vs New Zealand: न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीता, पहले गेंदबाज़ी का फ़ैसला

अमेरिका-इसराइल ने मध्य पूर्व के रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों के ऊपर लगाई गश्त
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अमेरिकी वायुसेना के एक बमवर्षक विमान ने मध्य पूर्व में प्रमुख जलमार्गों के ऊपर से आज उड़ान भरी. इस बमवर्षक विमान को इसराइल समेत सहयोगी देशों के फ़ाइटर जेट एस्कॉर्ट कर रहे थे.
अमेरिकी बमवर्षक विमान की यह गतिविधि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले ही इस क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के नौसैनिक जहाज़ आमने-सामने आ गए थे.
शनिवार को एक बयान जारी करके कहा गया है कि बमवर्षक विमान बी-1बी ने खाड़ी, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य, स्वेज नहर और ओमान की खाड़ी के ऊपर से उड़ान भरी.
इसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर से भी उड़ान भरी जिसे ईरान एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र मानता है.
सेंटकॉम के मुताबिक़, "बॉम्बर टास्क फोर्स मिशन का उद्देश्य स्पष्ट संदेश देना था."
इसराइल, सऊदी अरब और बहरीन के लड़ाकू जेट ने अपने-अपने हवाई क्षेत्राधिकार में अमेरिकी बमवर्षक विमान को एस्कॉर्ट किया. अमेरिका के ये सभी सहयोगी देश ईरान के इस्लामी गणराज्य का विरोध करते हैं.
मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के प्रमुखजनरल फ्रैंक मैकेंजी ने कहा, "किसी भी मिशन के लिए सैन्य तत्परता विश्वसनीय साझेदारी पर निर्भर करती है."
मिस्र के लड़ाकू जेट ने भी बी-1बी को एस्कॉर्ट किया. यह एक सुपरसोनिक बमवर्षक है.
इससे पहले जनवरी महीने मेंअमेरिकी B-52 बमवर्षक ने मध्य पूर्व के ऊपर उड़ान भरी थी. यह विमान परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है.
छत्तीसगढ़ः दंतेवाड़ा में 14 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में रविवार को 14 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया. इनमें से एक नक्सली कथित तौर पर 2017 में सुरक्षाबलों पर हमले में शामिल था. इस हमले में 25 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक नक्सलियों ने रायपुर से चार सौ किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा कस्बे में आत्मसमर्पण किया. हथियार डालने वाले नक्सलियों का कहना था कि वो पुलिस के पुनर्वास कार्यक्रम 'लोन वर्रातु' से प्रभावित हैं.
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली माओवाद की खोखली विचारधारा से निराश हैं.
साल 2017 में सुकमा ज़िले में सुरक्षाबलों पर हुए हमले में 25 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. आत्मसमर्पण करने वालों में सीआरपीएफ़ पर हुए इस हमले में शामिल रहे 21 वर्षीय सन्ना मरकम भी शामिल हैं. मरकम लोकल आर्गेनाइज़ेशन स्क्वैड में सक्रिय थे और उन पर एक लाख रुपये का ईनाम था.
आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सली बारूद बिछाने, सड़कों को नुकसान पहुंचाने और माओवादियों के बैनर-पोस्टर लगाने जैसे कामों में सक्रिय थे. एसएसपी के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को राज्य सरकारी की नीति के तहत पुनर्वासित किया जाएगा.
अब तक छत्तीसगढ़ में 454 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं जिनमें से 117 ऐसे हैं जिन पर इनाम था.
मुज़फ़्फ़रनगर से ग्राउंड रिपोर्टः क्या दंगों से आगे बढ़ गया है पश्चिम उत्तर प्रदेश का ये इलाक़ा?

इमेज कैप्शन, मुनेश अपने बेटे सचिन की मौत के ग़म से बाहर नहीं निकल पाई हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मु़ज़फ़्फ़रनगर में गन्ने से गुड़ बनाने का सत्र शुरू हो गया है. दशहरे के पर्व के साथ ही यहां के कोल्हुओं की चिमनियों से धुआं उठना शुरू हो जाता है और माहौल में गन्ने के रस और ताज़ा गुड़ की गंध घुल जाती है.
मोहम्मद मौसम तेज़ हाथों से गुड़ बनाने में जुटे हैं. शाम होते-होते वो आठ-नौ सौ रुपए कमा लेंगे. वो पिछले कई सालों से कवाल गांव के मलिकपुरा में देवेंद्र सिंह के इस कोल्हू पर काम करने आ रहे हैं.
साल 2013 में हुए मुज़फ़्फ़रनगर दंगों की शुरुआत कवाल गांव से ही हुई थी. 27 अगस्त 2013 को यहां पहले शाहनवाज़ और फिर सचिन और गौरव नाम के युवकों की हत्या कर दी गई थी.
इस हत्याकांड के बाद पैदा हुए सांप्रदायिक तनाव ने पूरे ज़िले को जकड़ लिया था और 7-8 सितंबर को मुज़फ़्फ़रनगर के अलग-अलग इलाक़ों में भीषण हिंसा हुई थी जिसमें 60 से अधिक लोग मारे गए थे और हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था.
मुज़फ़्फरनगर दंगों के बाद हिंदुओ और मुसलमानों के बीच पैदा हुआ सांप्रदायिक तनाव राजनीतिक ध्रुवीकरण में बदल गया था जिसका असर आगे चलकर कई चुनावों पर हुआ.
पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक और इमरान सरकार के बीच समझौते का एलान

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तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) का लाहौर से इस्लामाबाद लॉन्ग मार्च को लेकर पाकिस्तान सरकार के साथ समझौता हो गया है. हालांकि समझौते की शर्तों को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.
पाकिस्तान के धर्मगुरु मुफ्ती मुनीबउर्रहमान ने समझौते की घोषणा करते हुए बताया कि शर्ते तय समय में निर्धारित की जाएंगी. रविवार को आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने समझौते के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी.
इस प्रेसवार्ता के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी, संसदीय कार्यमंत्री अली मोहम्मद ख़ान और नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर भी मौजूद थे.
टीएलपी अपने नेता साद हुसैन रिज़वी की रिहाई और फ़्रांस के राजदूतो को पाकिस्तान से बाहर निकालने की मांग को लेकर लाहौर से इस्लामबाद तक मार्च कर रही थी.
इस मार्च ने शुक्रवार को गुजरांवाला को पार कर लिया था और यहां से आगे वज़ीराबाद में पाकिस्तान रेंजरों और टीएलपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की आशंका पैदा हो गई थी. धरना समाप्त करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस समझौते के प्रभाव जल्द ही सबको पता चल जाएंगे.
तुर्की को रूस-यूक्रेन विवाद में ड्रोन के इस्तेमाल पर क्यों देनी पड़ी सफ़ाई

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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोगलु ने रविवार को कहा है कि रूस समर्थक विद्रोहियों के ख़िलाफ़ यूक्रेन की ओर से ड्रोन इस्तेमाल करने के लिए अंकारा जिम्मेदार नहीं है.
यूक्रेन की सेना ने इसी हफ़्ते एक वीडियो फुटेज जारी किया था, जिसके बारे में उसने कहा था कि देश के पूर्वी इलाके में अलगाववादियों के ख़िलाफ़ तुर्की में बने 'टीबी2 बयराक्तर ड्रोन' का पहली बार इस्तेमाल किया गया है.
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन के पूर्वी क्षेत्र में साल 2014 से ही संघर्ष जारी है. यूक्रेन को मानवरहित ड्रोन की बिक्री की वजह से तुर्की और रूस के बीच पहले से ही तनावपूर्ण माहौल है.
रूस ने यूक्रेन के इन विद्रोहियों के पीछे अपनी पूरी राजनीतिक ताक़त झोंक रखी है. बुधवार को इसी मुद्दे पर रूस ने चेतावनी देते हुए कहा था कि तुर्की में बने ड्रोन्स का इस्तेमाल करने से संघर्ष और तेज़ हो सकता है.

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इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोगलु लेकिन रविवार को रोम में जी20 सम्मेलन के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात के बाद तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोगलु ने कहा, "अगर कोई देश हमसे हथियार खरीदता है तो वो तुर्की का प्रोडक्ट नहीं रह जाता है. भले ही वो तुर्की में बना हो लेकिन वो यूक्रेन का है. तुर्की को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है."
यूक्रेन के इस संघर्ष में फ्रांस और जर्मनी दोनों देश मध्यस्थता कर रहे हैं. इन दोनों ही देशों ने विद्रोहियों के ख़िलाफ़ तुर्की में बने ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर यूक्रेन की आलोचना की है.
हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने शुक्रवार को इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश अपने क्षेत्र की सुरक्षा कर रहा है. यूक्रेन के क्रीमिया प्रायद्वीप पर रूस के अधिपत्य स्थापित होने के बाद पूर्वी यूक्रेन में ये संघर्ष शुरू हुआ था.
इस लड़ाई में अब तक 13 हज़ार से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है. यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगी रूस पर अलगाववादियों को मदद पहुंचाने का आरोप लगाते रहे हैं जिससे मॉस्को इनकार करता है.
पीएम मोदी बोले, बाहरी और आतंरिक चुनौतियों से निबटने में सक्षम है भारत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा है कि भारत सरदार पटेल से प्रेरणा लेते हुए सभी तरह की आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निबटने के लिए आत्मनिर्भर हो रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल के जन्मदिवस के मौके पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय एकता दिवस के लिए जारी वीडियो संदेश में ये बात कही.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोविड 19 के दौरान भारत ने जो सामूहिक प्रयास किया उससे देश नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा. प्रधानमंत्री पटेल ने कहा कि पटेल सिर्फ़ इतिहास में ही नहीं बल्कि भारतीयों के दिलों में भी रहते हैं.
उन्होंने कहा, "धरती के जिस भू-भाग पर हम 130 करोड़ से अधिक भारतीय रहते हैं, वह हमारी आत्मा का, हमारे सपनों का, हमारी आकांक्षाओं का अखंड हिस्सा है. सैकड़ों वर्षों से भारतीय समाज में लोकतंत्र की जो मजबूत बुनियाद विकसित हुई है, उसने एक भारत की भावना को समृद्ध किया है."
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले सात वर्षों में देश ने दशकों पुराने अवांछित कानूनों से मुक्ति पाई है और राष्ट्रीय एकता को संजोने वाले आदर्शों को नयी ऊंचाई दी है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जम्मू और कश्मीर हो या पूर्वोत्तर या फिर हिमालय का कोई गांव, आज सभी प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं. देश में हो रहा आधुनिक अवसंरचना का निर्माण देश में भौगोलिक और सांस्कृतिक दूरियों को मिटाने का काम कर रहा है. देश के लोगों को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने से पहले ही सौ बार सोचना पड़े तो फिर काम कैसे चलेगा? जब देश के कोने-कोने में पहुंचने की आसानी होगी तभी लोगों के बीच दिलों की दूरियां भी कम होंगी और देश की एकता बढ़ेगी."
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सामूहिक एकता की भावना पर ज़ोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आजाद भारत के निर्माण में ‘‘सबका प्रयास’’ जितना प्रासंगिक था उससे कहीं अधिक आजादी के इस अमृत काल में होने वाला है. उन्होंने कहा, "आजादी का अमृत काल भारत के विकास की अभूतपूर्व गति के कठिन लक्ष्य को हासिल करने और सपनों के भारत के नवनिर्माण का काल है."
ज्ञात हो कि भारती अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर गया है और अमृत महोत्सव मना रहा है। यहां से आजादी के 100 साल तक के सफर को केंद्र सरकार ने अमृत काल का नाम दिया है.प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने भारत के जिस स्वरूप की कल्पना की थी उसमें महिलाओं के लिए अवसर, दलित, वंचित, आदिवासी व वनवासी सहित देश के प्रत्येक नागरिक को एक समान अनुभूति, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं में भेदभाव ना हो व एक समान अधिकार हों, शामिल था.उन्होंने कहा, "यही तो आज देश कर रहा है। इसी दिशा में नित नए लक्ष्य तय कर रहा है। यह सब हो रहा है क्योंकि आज देश के हर संकट में सब का प्रयास जुड़ा हुआ है."
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सबका प्रयास होता है तो उससे क्या परिणाम आते हैं यह देश ने कोरोना महामारी के संकट के दौरान महसूस किया. उन्होंने कहा कि यह सामूहिक प्रयास का ही परिणाम है कि आज भारत निवेश का एक आकर्षक केंद्र बन गया है.उन्होंने कहा, "सरकार के साथ-साथ जब समाज की शक्ति जुड़ जाए तो बड़े से बड़े संकल्पों की सिद्धि कठिन नहीं है. सब कुछ मुमकिन है."
कश्मीर में चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में तीन हफ़्तों में 25 गिरफ़्तार

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू और कश्मीर में चरमपंथ की साजिश रचने के मामले में दो और लोगों को गिरफ़्तार किया है.
अधिकारियों के हवाले से न्यूज़ एजेंसी पीटीआई ने लिखा है कि ये गिरफ़्तारियां बीते कुछ दिनों से चल रही जांच का ही हिस्सा हैं.
घाटी में चरमपंथी घटनाओं की साज़िश रचने की आशंका के तहत बीते तीन सप्ताह में कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से 25 लोगों को अभी तक गिरफ़्तार किया जा चुका है.
एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि श्रीनगर से इशफ़ाक़ अहमद वानी और बारामुला के सोपोर से उमर भट को एनआई की जांच में शनिवार को गिरफ़्तार किया गया.
एनआईए प्रवक्ता के मुताबिक़, "शुरुआती जांच से पता चला है कि जिन दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है वे अलग-अल प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के सहयोगी हैं और आतंकवादियों के ज़रूरी चीज़ें और सामान मुहैया कराते हैं."
एनआईए ने 10 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर और दूसरे अन्य प्रमुख शहरों में चरमपंथी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्ब के सहयोगियों के हिंसक चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के तहत मामला दर्ज किया था.
10 अक्टूबर को मामला दर्ज होने के तीन दिन बाद एनआईए ने कश्मीर घाटी में 18 जगहों पर छापेमारी की थी और नौ लोगों को चरमपंथियों का साथ देने के आरोप में गिरफ़्तार किया.
इसके बाद 20 अक्टूबर को चार और लोगों को गिरफ़्तार किया गया. 22 अक्टूबर को भी तलाश जारी रही और 10 जगहों पर छापेमारी के दौरान आठ लोगों को गिरफ़्तार किया गया. वहीं 29 अक्टूबर को दो गिरफ़्तारियां हुईं.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग जी-20 सम्मेलन में क्यों नहीं गए?

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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोविड की दूसरी लहर धीमी पड़ने के बाद इस साल सितंबर महीने में लंबे अतंराल के बाद संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करने न्यूयॉर्क गए थे. लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं गए.
अभी इटली के रोम में जी-20 सम्मेलन चल रहा है और चीनी राष्ट्रपति इसमें भी नहीं गए. ब्रिक्स की बैठक इस बार भारत में होनी थी लेकिन वो भी वर्चुअल ही हुई. एसएसीओ की बैठक में भी चीनी राष्ट्रपति दुशांबे नहीं गए थे. ऐसा करने वाले केवल शी जिनपिंग ही नहीं हैं बल्कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इन बैठकों में ख़ुद नहीं गए.
इटली की राजधानी रोम में हो रहे जी20 सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेता जलवायु परिवर्तन, वैश्विक कर की दरें, आपूर्ति में रुकावट और वैश्विक टीकाकरण जैसे मसलों पर चर्चा कर रहे हैं.
लेकिन, इस बीच चर्चा उन नेताओं की भी है जो ना तो जी20 सम्मेलन में मौजूद हैं और ना ही ग्लासगो में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कोप26) में हिस्सा लेने वाले हैं.
