कश्मीर में चरमपंथियों ने एक कश्मीरी पंडित समेत तीन लोगों की हत्या की
कश्मीर में संदिग्ध चरमपंथियों ने मंगलवार की शाम तीन लोगों की हत्या कर दी. चरमपंथियों ने जिन लोगों की हत्या की है, उनमें एक स्थानीय कश्मीरी पंडित भी शामिल हैं.
लाइव कवरेज
मोहम्मद शाहिद, पवन सिंह अतुल and विभुराज
कश्मीर में चरमपंथियों ने एक कश्मीरी पंडित समेत तीन लोगों की हत्या की,
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कश्मीर में संदिग्ध चरमपंथियों ने मंगलवार की शाम तीन लोगों की हत्या कर दी.
पुलिस के अनुसार, चरमपंथियों ने जिन लोगों की हत्या की है, उनमें एक स्थानीय कश्मीरी पंडित भी शामिल हैं.
माखन लाल बिंद्रू ने कभी भी कश्मीर छोड़कर नहीं गए.
उन्हें उनकी दवा दुकान के बाहर गोली मार दी गई.
एमएल बिंद्रू के बेटे डॉक्टर सिद्धार्थ बिंद्रू वहीं पर अपनी क्लिनिक भी चलाते थे.
डॉक्टर सिद्धार्थ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट हैं और उनके पिता भी एक जाने-माने केमिस्ट थे.
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अमेरिकी विदेश मंत्री की फ्रांस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात, क्या हुई बात?
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इमेज कैप्शन, अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन
ऑकस समझौते के कारण ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के फ्रांस के साथ संबंधों में आई तल्खी के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किसी अमेरिकी अधिकारी से मंगलवार को पहली मुलाकात की है.
अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन दो दिनों की पेरिस यात्रा पर पहुंचे हैं. राष्ट्रपति मैक्रों के साथ उनकी मुलाकात बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के हुई है. ब्लिंकन ने पैरिस में अपने समकक्ष जोईंव ल द्रिरियां से भी बातचीत की.
पेरिस में चालीस मिनट तक चली आमने-सामने की इस मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों से कहा, "अमेरिका और फ्रांस के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी है कि दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने का अवसर हमारे पास है, भले ही इसके लिए चाहे कितनी ही कड़ी मेहनत क्यों न करनी पड़े."
ब्लिकंन उस रिश्ते को सुधराने की कोशिश में फ्रांस के दौरे पर हैं जो अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हाल में हुए ऑकस समझौते के कारण तनावपूर्ण हो गया है.
इस समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस के साथ हुए अरबों के हथियार के सौदे को रद्द कर दिया था और अमरीका से परमाणु से चलने वाली पनडुब्बी खरीदने का फ़ैसला किया.
फ्रांस ने इसे पीठ में छूरा घोंपने जैसा करार दिया था. फ्रांस ने इस समझौते के बाद अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अपने राजदूतों को वापिस बुला लिया था. हालांकि अमरीका में उसके राजदूत अब वापिस लौट गए हैं.
तालिबान ने 13 हज़ारा अफ़ग़ानों का क़त्ल किया है: एमनेस्टी इंटरनेशनल
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इमेज कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान के दायाकुंदी सूबे का ख़ादिर ज़िला
मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि अफ़ग़ानिस्तान में जबसे तालिबान ने सत्ता संभाली है, उन्होंने शिया जातीय समुदाय के हज़ारा अल्पसंख्यकों का कत्ल किया है.
तालिबान शिया संप्रदाय की सोच को नहीं मानते हैं. एमनेस्टी ने कहा है कि इस्लामी चरमपंथियों ने दायाकुंदी सूबे में अगस्त में हज़ारा समुदाय से तालुक रखने वाले 13 लोगों की हत्या कर दी है.
बीबीसी फारसी सेवा की रिपोर्ट के अनुसार तालिबान ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के आरोपों से इनकार किया है.
संस्था का कहना है कि मारे गए लोगों में से नौ पूर्व सैनिक थे और उन्होंने हाल ही में आत्मसमर्पण किया था. उनकी हत्या को युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा.
मारे गए दो लोग आम नागरिक थे, और उसमें एक लड़की भी शामिल थी जिसकी मौत तब हो गई जब लड़ाकों ने पूर्व सैनिकों के परिवारों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं.
पूर्व में तालिबान के एक अधिकारी ने बदला लेने की नियत से की गई हत्या की आलोचना की थी, लेकिन उसके बाद भी इस तरह की कई घटनाएं सामने आई हैं.
एयर इंडिया का विमान पुल के नीचे कैसे फंस गया?
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आपने हवाई जहाज़ को आसमान में उड़ने, रन-वे पर दौड़ते देखा होगा लेकिन शायद ही कभी किसी विमान को किसी पुल के नीचे फंसा हुआ देखा हो.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एयर इंडिया का एक विमान एक ओवरब्रिज के नीचे फंसा हुआ दिख रहा है. यह एक स्क्रैप्ड (कबाड़ हो चुका) प्लेन था.
जानकारी के अनुसार, इस प्लेन को बेच दिया गया था. ख़बरों के मुताबिक़, जब इस प्लेन को ले जाया जा रहा था उसी वक़्त यह प्लेन ओवरब्रिज के नीचे फंस गया.
जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें साफ़ दिख रहा है कि विमान के पास से ही ट्रैफ़िक गुज़र रहा है. प्लेन के पंख नज़र नहीं आ रहे हैं और उसी ओर से ट्रैफ़िक चलता दिख रहा है.
वीडियो को ट्वीट करने वाले एक पत्रकार ने एयर इंडिया का एक बयान साझा करते हुए कहा है कि एयर इंडिया एयरलाइन का अब इस विमान से कोई संबंध नहीं है.
बयान में कहा गया है, "यह एयर इंडिया का एक स्क्रैप्ड विमान है जिसे बेच दिया गया था. इसे ख़रीदने वाले इसे बीती रात लेकर गए थे. एयर इंडिया का इस विमान और इससे जुड़ी किसी भी परिस्थिति से कोई संबंध नहीं है."
चीन क़ाबू से बाहर होता जा रहा है: ताइवान
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चीन के लड़ाकू विमानों का पड़ोसी ताइवान की सीमा में प्रवेश जारी है. पिछले शुक्रवार यानी इस महीने की पहली तारीख़ से 148 चीनी लड़ाकू विमान ताइवान की सीमा का उल्लंघन कर चुके हैं.
सोमवार को चीन के 56 लड़ाकू विमान ताइवान की सीमा में प्रवेश कर गए जिसके बाद ताइवान के राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर ताइवान चीन के हाथों चला जाता है तो एशिया में शांति और लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा ख़तरा होगा.
पिछले तीन दिनों से चल रहे सीमा उलंघन को जारी रखते हुए, सोमवार को चीन के 56 लड़ाकू विमान ताइवान के दक्षिणी पश्चिमी वायु सीमा में प्रवेश कर गए. चीन की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए इन लड़ाकू विमानों के समूह में परमाणु क्षमता वाले 12 H-6 बॉम्बर्स भी शामिल थे.
ताइवान की सरकार के अनुसार इन विमानों ने ताइवान के कब्ज़े वाले प्रातास द्वीप के आसपास उड़ान भरी. सोमवार को किया गया वायु सीमा उल्लंघन इस माह में चौथा था, जिस दौरान चीन के 150 लड़ाकू विमानों ने ताइवान की सीमा का उलंघन किया है.
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इमेज कैप्शन, ताइवान के प्रधानमंत्री सू जेन चांग
ताइवान ने इसे गैरज़िम्मेदाराना और भड़काने वाली कार्रवाई करार दिया है. ताइवान के प्रधानमंत्री सू जेन चांग ने कहा, "चीन क़ाबू से बाहर होता जा रहा है, इसलिए ज़रूरत है कि ताइवान सावधान रहे. दुनिया ने देखा है कि चीन किस तरह से क्षेत्र में शांति का उल्लंघन कर रहा है और ताइवान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है."
"इसलिए प्रजातांत्रिक देशों ने चेतावनी दी है कि हमारे मुल्क को खुद अपने पैरों पर खड़े होने की ज़रूरत है. हमने देखा है कि राष्ट्रपति साई ने फौज को लेकर समर्थन किया है. हमें साथ आकर मज़बूत होने की ज़रूरत है. उसके बाद ही वो देश जो ताइवान को ख़ुद में मिलाना चाहते हैं, ताकत का इस्तेमाल करना बंद करेंगे."
उधर, चीन ने अमरीकी युद्धपोतों की क्षेत्र में मौजूदगी को बढ़ते तनाव की वजह बताया है. ताइवान ने कहा है कि वायु सीमा उल्लंघन का पता चलते ही ताइवान की वायु सेना हरकत में आ गई और चीनी लड़ाकू विमानों की गतिविधियों को एयर डिफेंस सिस्टम पर मॉनीटर किया जाने लगा.
ताइवान के विदेश मंत्री जोसफ़ वू ने ऑस्ट्रेलियन ब्राडकांस्टिंग कॉरपोरेशन को दिए गए इंटरव्यू में कहा है कि हमें डर है कि चीन कभी भी ताइवान के विरुद्ध जंग छेड़ सकता है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि 1940 के दशक में हुए गृह युद्ध के बाद चीन और ताइवान का बंटवारा हो गया था.
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चीन किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा ताइवान को शामिल करने के भी खिलाफ़ रहा है. ताइवान ने पिछले महीने कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फ़ॉर ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप की सदस्यता हासिल करने के लिए आवेदन दिया है. चीन ने भी सप्ताह भर पहले संस्था में शामिल होने की अर्ज़ी दी थी.
सितंबर 2020 से, जबसे ताइवान ने चीन द्वारा वायु सीमा के उल्लंघन का डेटा जारी करना शुरू किया है, अब तक चीन की वायु सेना ने 814 बार ताइवान की सीमा में प्रवेश किया है.
बिगड़ते हालात के मद्देनज़र ताइवान के राष्ट्रपति साइ इंग वेन ने अपने एक लेख में कहा है कि ताइवान किसी तरह का सैनिक मुकाबला नहीं चाहता है लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो वो पूरी ताकत से अपनी रक्षा करेगा.
अमेरिका ने कहा है कि चीन को अपनी उकसाने वाली सैन्य कार्रवाइयों को बंद करना चाहिए जिसके जवाब में चीन का कहना है कि अमेरिका ताइवान को हथियार बेचता है और उसके युद्धपोत क्षेत्रीय मुल्कों को उकसाने का काम कर रहे हैं. अमरीका का ताइवान से राजनयिक संबंध नहीं है लेकिन उसके एक कानून के अनुसार वो ताइवान की सुरक्षा के लिए मदद मुहैया करवाएगा.
योगी आदित्यनाथ लखीमपुर हिंसा पर डैमेज कंट्रोल करने में कामयाब रहे या फिर...?
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पिछले सोमवार से लेकर इस सोमवार के बीच की जिन दो घटनाओं ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो हलचल मचाई है, उससे अंदाज़ा हो रहा है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक गहमागहमी कितनी तेज़ी से बढ़ेगी.
इस गहमागहमी के केंद्र में हैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. पहला वाक़या पिछले सोमवार की रात उनके गृह जनपद गोरखपुर के एक होटल में कानपुर के एक कारोबारी की पुलिस की कथित पिटाई से हुई मौत से जुड़ा था. रामगढ़ताल थाने के प्रभारी, गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक और ज़िलाधिकारी की भूमिका पर सवालिया निशान लगे.
ऐसी पृष्ठभूमि के बीच योगी आदित्यनाथ दो दिन की यात्रा पर गोरखपुर पहुंचे थे. कानपुर के व्यापारी की मौत के बाद की स्थितियों को उन्होंने बड़ी तेज़ी से संभाला था. उन्होंने व्यापारी की पत्नी को सरकारी नौकरी और 40 लाख रुपये की मदद की घोषणा करके विपक्ष को इसे मुद्दा नहीं बनाने दिया.
हालांकि ज़िले के पुलिस अधीक्षक और ज़िलाधिकारी का समझौता कराने की कोशिशों वाला वीडियो वायरल होने की वजह से उम्मीद की जा रही थी कि इन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी, लेकिन वह नहीं हुआ.
लखीमपुर हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता कौन हैं?
वीडियो कैप्शन, लखीमपुर हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ता कौन हैं?
लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में रविवार को हुई हिंसा के दौरान 25 वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता शुभम मिश्रा की भी मौत हुई है.
बीबीसी से बात करते हुए शुभम के पिता विजय कुमार मिश्रा ने कहा की वो ज़्यादा बात करने की हालत में नहीं हैं, जिस बेरहमी से शुभम की हत्या हुई वो उस पल को याद नहीं करना चाहते हैं.
शुभम के पिता विजय के मुताबिक़ शुभम बीजेपी का बूथ इन्चार्ज था और स्थानीय लोगों में काफ़ी लोकप्रिय था. उसके अंतिम संस्कार में भारी संख्या में शिवपुरी के लोग शामिल हुए.
लखीमपुर हिंसा: मृतक किसान का परिवार मुश्किल में
वीडियो कैप्शन, लखीमपुर हिंसा: मृतक किसान का परिवार मुश्किल में
ये लखीमपुर हिंसा में मारे गए किसान दलजीत सिंह का परिवार है.
दलजीत के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी और एक बेटा है.
इस घटना के बाद परिवार मुश्किल में है और आगे की राह नहीं सूझ रही.
फ्रांस के कैथोलिक चर्च में दो लाख से ज़्यादा बच्चों का यौन शोषण
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इमेज कैप्शन, जांच प्रमुख जीन-मार्क सोवे ने कहा कि पीड़ितों की संख्या बहुत ज़्यादा है.
एक स्वतंत्र जांच में पाया
गया है कि 1950 से अब तक फ़्रांस के कैथोलिक चर्च के पादरियों ने करीब 216,000 बच्चों का यौन शोषण किया है.
चर्च के आम सदस्यों के दुर्व्यवहार
को शामिल करने पर ये संख्या बढ़कर 330,000 तक हो सकती है. जांच प्रमुख जीन-मार्क
सोवे ने कहा कि ये संख्या बहुत बड़ी है.
चर्च ने जांच में सामने
आईं बातों को लेकर शर्मिंदगी जताई है और माफ़ी मांगी है.
एक पीड़ित ने इस रिपोर्ट
को फ्रांस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है. उन्होंने कहा कि कैथोलिक
चर्च के लिए अपने कामों का पुनर्मूल्यांकन करने का समय आ गया है.
फ्रांस के कैथोलिक चर्च को
लेकर 2018 में जांच के आदेश दिए गए थे. चर्च के रिकॉर्ड की जांच, अदालत, पुलिस से
लेकर पीड़ितों और चश्मदीदों से बातचीत तक इस रिपोर्ट को पूरा होने में ढाई साल
लगे.
जीन-मार्क सोवे ने कहा कि साल
2000 की शुरुआत तक कैथोलिक चर्च ने पीड़ितों के प्रति क्रूरता के साथ उदासीनता दिखाई
थी.
जांच करने वाले आयोग को
सबूत मिले हैं कि एक लाख 15 हज़ार पादरियों में से कम से कम 2900 से 3200 लोग
बच्चों के शोषण में शामिल थे.
ये रिपोर्ट 2500 पन्नों की
है जो बताती है कि पीड़ितों में अधिकतर अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले वो
बच्चे शामिल थे जो किशोरावस्था में भी नहीं पहुंचे थे.
असम की घटना अतिक्रमण हटाना नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों पर निशाना है: रिपोर्ट
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इमेज कैप्शन, मोइनुल की मां मोइमोना बेगम
असम में 23 सितंबर को 'अवैध अतिक्रमण' हटाने गए प्रशासन की अतिक्रमणकारियों के साथ हुई झड़प में दो लोग मारे गए थे और क़रीब आठ पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. यह घटना दरंग ज़िले के तीन नंबर धौलपुर गांव में हुई थी.
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. असम सरकार के गृह विभाग ने कहा गया है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में जांच कराई जाएगी. जांच में घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा.
घटना वाले दिन ज़िला प्रशासन के अधिकारी पुलिस के साथ सरकारी ज़मीन से अतिक्रमणक हटाने के लिए गए थे जिसे लेकर वहां झड़प हो गई.
इस दौरान पुलिस ने कथित तौर पर फ़ायरिंग की जिसमें मोइनुल हक़ और शेख़ फ़रीद नाम के दो लोगों की मौत हो गई. इसे लेकर पुलिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
वॉट्सऐप और फ़ेसबुक के कई घंटे ना चलने की वजह
वीडियो कैप्शन, वॉट्सऐप - फ़ेसबुक के रात भर नहीं चलने की वजह
फ़ेसबुक ने बताया है कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप में आई तकनीकी ख़ामी को दूर कर लिया गया है.
ये तीनों सेवाएं सोमवार रात से तक़रीबन छह घंटों तक बाधित रही हैं. ये तीनों प्लेटफॉर्म फ़ेसबुक के ही हैं जिन्हें वेबसाइट या स्मार्टफ़ोन पर इस्तेमाल करने में दिक्क़त हो रही थी.
इस ख़ामी का पता लगाने वाली डाउनडिटेक्टर वेबसाइट ने बताया है कि यह अभी तक की सबसे बड़ी ख़राबी है जिसकी 1.06 करोड़ यूज़र्स ने रिपोर्ट की है.
फ़ेसबुक को इतनी बड़ी तकनीकी दिक्क़त का सामना 2019 में करना पड़ा था. फ़ेसबुक ने सुबह 4 बजे ट्वीट करके जानकारी दी कि उसकी सेवाएं वापस आ चुकी हैं लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इस ख़ामी के लिए माफ़ी भी मांगी है.
अज़रबैजान और ईरान के बीच तनाव गहराया, बाकू में ख़ामनेई से जुड़ी मस्जिद बंद कराई गई
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अज़रबैजान ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़ामनेई से जुड़ी एक मस्जिद और एक दफ़्तर को बंद कर दिया है.
ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के क़रीबी माने जाने वाली न्यूज़ एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, बाकू में अयातुल्लाह अली ख़ामनेई के प्रतिनिधि होज्जत अल-इस्लाम अली अकबर ओजाकनेजाद इस दफ़्तर के इंचार्ज थे.
बाकू अज़रबैजान की राजधानी और उसका सबसे बड़ा शहर है.
दोनों मुल्कों के बीच तनाव बढ़ने की शुरुआत अज़रबैजान के उस फ़ैसले से हुई जिसके तहत आर्मीनिया से ईरान आने-जाने वाले ईरानी ट्रकों पर चुंगी लगा लगा दी गई.
इस साल हुई नागार्नो काराबाख की दूसरी जंग में अज़रबैजान ने आर्मीनिया के नियंत्रण वाले इलाकों को अपनी दखल में ले लिया था.
ईरान ने अज़रबैजान पर इसराइल को अपने यहां जगह देने का आरोप लगाया है.
इसके बाद उसने अज़रबैजान की सीमा पर एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया जिसके बाद दोनों मुल्कों के बीच तनाव चरम पर चला गया था.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 5 अक्टूबर 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 5 अक्टूबर 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से.
फ्रांस के कैथलिक चर्च में लाखों बच्चों का यौन शोषण.
चीन के 56 लड़ाकू विमानों ने ताइवान में घुसे, अमरीका भड़का.
पेट्रोल और डीज़ल के दाम में फिर से वृद्धि, इनकी कीमत इतनी अधिक क्यों.
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ममता के शपथ ग्रहण पर गतिरोध टूटा, विधानसभा में राज्यपाल ही दिलाएंगे शपथ
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत हाल के उपचुनाव में जीतने वाले तीनों विधायकों के शपथ ग्रहण पर सोमवार से ही राजभवन और सरकार के बीच जारी गतिरोध आखिर मंगलवार शाम को टूट गया.
राज्य सरकार के पत्र के मुताबिक, राज्यपाल जगदीप धनखड़ तय तारीख यानी सात अक्तूबर को ही सुबह 11.45 बजे विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने पर सहमति दे दी है. राज्यपाल ने मंगलवार शाम को अपने ट्वीट में इसकी जानकारी दी.
पश्चिम बंगाल में बीते कई दशकों में यह पहला मौका होगा जब उपचुनाव में जीतने वाले विधायकों को राज्यपाल शपथ दिलाएंगे. अब तक यह जिम्मेदारी विधानसभा अध्यक्ष ही निभाते रहे हैं.
लखीमपुर खीरी में घायल किसानों ने बताया, क्या हुआ था वहाँ
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''मुझे जैसे ही पापा के बारे में पता चला, घबराहट होने लगी. डर लगने लगा कि पापा ठीक हैं या नहीं. पापा को कुछ ज़्यादा तो नहीं हो गया.''
सहज विर्क के पिता तेजिंदर सिंह विर्क गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं.
पेशे से किसान तेजिंदर विर्क उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार को हुए किसानों के प्रदर्शन में शामिल थे.
रविवार को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी.
सहज बीबीसी को फ़ोन पर बताते हैं कि वे हादसे के वक़्त वहाँ मौजूद नहीं थे, लेकिन वॉट्सऐप के ज़रिए उन्हें हादसे के बारे में पता चला. लेकिन फिर उनके पिता की ख़ैरियत पूछने के लिए फ़ोन आने लगे तब जाकर उन्हें पता चला कि कुछ घटना हुई है. लेकिन वास्तविकता में हुआ क्या था, वो इससे बेख़बर थे.
आर्यन ख़ान मामला: रेव पार्टी क्या है, वहाँ क्या होता है?
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इमेज कैप्शन, प्रतीकात्मक तस्वीर
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान को एक रेव पार्टी से गिरफ़्तार किया है. आर्यन पर आरोप हैं कि उन्होंने ड्रग्स ख़रीदे और उनका सेवन किया था.
आर्यन ख़ान की ज़मानत पर सोमवार को सुनवाई हुई थी, लेकिन उन्हें गुरुवार तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया गया.
कोर्डेलिया क्रूज़ पर हुई कथित रेव पार्टी में आर्यन ख़ान के अलावा आठ और लोगों को हिरासत में लिया गया था.
इसके बाद से रेव पार्टियों और उनमें ड्रग्स के इस्तेमाल पर चर्चा शुरू हो गई है.
क्या होती है रेव पार्टी और इनमें क्या होता है? हमने इसे लेकर नारकोटिक्स विभाग और उनके मुख़बिरों से बात की है.
आज का कार्टून: इसे आपदा घोषित करो
फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम के घंटों बंद रहने पर आज का कार्टून.
फेसबुक-व्हाट्सएप बंद होने पर ज़करबर्ग ने मांगी माफ़ी, हुआ अरबों का घाटा
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फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने सोशल मीडिया सेवाओं में आई बाधा के लिए माफ़ी मांगी है.
फेसबुक, मैसेंजर, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम की सेवाएं सोमवार को करीब छह घंटों के लिए बाधित हो गई थीं जिससे दुनिया भर के 3.5 अरब से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए.
मार्क ज़करबर्ग ने आंतरिक तकनीकी समस्या के कारण चारों प्लेटफॉर्म के बंद हो जाने को लेकर खेद व्यक्त किया है.
सोमवार रात करीब 9:30 बजे ये सेवाएं प्रभावित हुई थीं और इन्हें ठीक होने में रात के 3:30 बजे गए.
लेकिन, इस बीच लोगों को हुई परेशानी से ये देखा जा सकता है कि इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की पहुंच कितनी ज़्यादा है.
लखीमपुर हिंसा की जांच 'काग़ज़ी कार्रवाई', मंत्री के बेटे की गिरफ़्तारी क्यों नहीं हुई है: कांग्रेस
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कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को लखीमपुर खीरी हिंसा की जांच को 'कागज़ी कार्रवाई' करार देते हुए पूछा कि केंद्रीय मंत्री के बेटे को किसानों को कुचलने के अपराध में अभी तक गिरफ़्तार और मंत्री को बर्खास्त क्यों नहीं किया गया है?
कांग्रेस नेता और पूर्व क़ानून मंत्री अश्वनी कुमार ने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखीमपुर की घटना में मारे गए आठ लोगों के परिजनों से मुलाक़ात क्यों नहीं की जबकि वे 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' कार्यक्रम के सिलसिले में मंगलवार को लखनऊ में थे.
"प्रधानमंत्री जी एक महोत्वस में आज लखनऊ गए हैं. क्या ये सही नहीं होता कि वो आज जिन लोगों के साथ यह घटना घटी है, उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए उनके परिजनों तक पहुँचते और उनके साथ अपनी संवेदना का इज़हार करते?"
अश्वनी कुमार ने प्रियंका गांधी को हिरासत में रखने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, "क्या कसूर था प्रियंका गांधी का, जिन्होंने सबसे पहले लखीमपुर खीरी में जाकर वहां दुखी परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करने का फैसला किया? क्या कोई ये कह सकता है की श्रीमती प्रियंका गांधी की मौजूदगी से वहाँ के लॉ एंड आर्डर कि स्थिति ख़राब हो जाएगी?"
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उन्होंने कहा, "ये कहा जा रहा है कि योगी सरकार ने 45 लाख रुपये का हर्जाना दिया है. क्या एक इंसान के जीवन की कीमत 45 लाख रुपये हैं? पैसे के तराजू में किसी जान को नहीं तोला जा सकता है. यह ईश्वर की देन है. देश की भावना आज जिस तरह से आहत है, उसका जिक्र हर देशवासी तक पहुंचे."
"ये दलगत राजनीति का नहीं बल्कि देश के बुनियादी मूल्यों का सवाल है और इन मूल्यों पर जो राजनेता या पार्टियां खरी नहीं उतरती, उन्हें जनता की अदालत में जवाब देना पड़ता है. जब किसी के जख्मों पर मरहम लगाना होता है, तो कुछ करके दिखाना होता है, बातों से पेट नहीं भरता है; अन्याय बातों से नहीं ठोस कदम उठाने से किया जाता है."
"जब यह घटना घटी तो वहां से भागने के यतन में (एक अखबार ने इसका जिक्र भी किया है) एक किसान को गोली भी दागी गई है. इसके बावजूद किस जाँच की ज़रूरत है? क्यों नहीं उनको हिरासत में लिया गया? क्या उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए ये ज़रूरी नहीं था कि कागजी कार्रवाई के अलावा जिन्होंने ये घटना रची है उनके खिलाफ कोई ठोस एक्शन लिया जाता?"
लखीमपुर हिंसा में मारे गए पत्रकार का परिवार क्या कह रहा है?,
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चार अक्टूबर की सुबह पत्रकार रमन के शव के आसपास सैकड़ों की संख्या में लोग निघासन चौराहे पर खड़े थे. लोगों में आक्रोश, ग़ुस्सा और दुःख था. लोग आसानी से शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार नहीं थे.
इस मामले के अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के बाद लोग दाह संस्कार करना चाहते थे. पर सूरज ढलने के साथ ही रमन का अंतिम संस्कार कर दिया गया.
पैंतीस वर्षीय रमन अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे, इनकी एक बहन भी हैं.
दाह संस्कार करके लौट रहे रमन के पिता ने कहा, "दोषियों की गिरफ़्तारी होकर उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए. मेरा बेटा तो अब वापस नहीं लौट सकता लेकिन अगर दोषियों को सज़ा मिल गयी तो मुझे तसल्ली ज़रूर मिलेगी."
वहीं रमन के भाई पवन कश्यप प्रशासन के फ़ैसले से ख़ुश नहीं दिखे.
उन्होंने कहा, "हमारे भाई को किसान से जोड़कर न देखा जाए, वो पत्रकार थे उन्हें किसानों से अलग रखा जाए. कुछ ऐसा होना चाहिए जिससे हम लोगों को ये लगे कि हमारा भाई एक पत्रकार था और ख़बर करते हुए उनकी हत्या हुई है."
लोग बहुत खुलकर तो नहीं बोल रहे थे लेकिन वहां आपस में बातें कर रहे लोगों को सुनकर ऐसा लग रहा था कि सरकार ने किसी की हत्या को बहुत आसानी से निपटा दिया है.
लोगों का मानना था कि सरकार ने लखीमपुर खीरी में हुई हर किसी की मौत की एक क़ीमत लगा दी है.
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रमन के घर के आंगन में सैकड़ों महिलाएं बैठी हुई थीं. रमन की मां और पत्नी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. रमन का ढाई साल का बेटा अभिनव कश्यप अपनी दादी से घटना के दिन से अबतक कई बार पूछ चुका है, "पापा घर कब तक आएंगे".
रमन की पत्नी अराधना रोते हुए कह रही थीं, "घर से सुबह 11 बजे निकल गए थे. कहकर गए थे जल्दी आऊंगा. रात तक जब वापस नहीं लौटे तो सब लोग उन्हें ढूढ़ने लगे. जब नहीं मिले तो पिता जी (ससुर) थाने में सूचना देने गए. सुबह पता चला कि वो नहीं रहे."
इससे ज़्यादा बोलने या बात करने की स्थिति में वो नहीं थीं. रमन की 12 साल की बेटी वैष्णवी छठी कक्षा में पढ़ती है. वो बड़ी मासूमियत से कहती है, "मेरे पापा टीचर थे वो बच्चों को कंप्यूटर पढ़ाते थे. साथ में ये काम (पत्रकारिता) भी करते थे. अगर मुझे पता होता कि इस काम को करने में इतना ख़तरा है कि लोग मर भी सकते हैं तो हम अपने पापा को ये काम करने के लिए मना कर देते."
बच्ची की बात सुनकर पास में खड़ी पड़ोस की एक लड़की ने कहा, "उनका स्वभाव बहुत अच्छा था. पहले पढ़ाते ही थे पर दो तीन साल से वो पत्रकार बन गए थे. घरवालों ने घटना वाले दिन रात तक खोजा जब वो नहीं मिले तब थाने में अप्लीकेशन लिखवाई. सुबह पता चला कि मर गए."
पड़ोस की लड़की ने अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर आगे कहा, "बहुत पत्रकार गए थे पर सब सुरक्षित वापस लौटे क्यों इन्हीं को निशाना बनाया गया?"