लखीमपुर हिंसा के बाद सोमवार को लखनऊ से तिकुनिया तक का हाल

योगी आदित्यनाथ सरकार ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज के नेतृत्व में घटना की जांच करवाने का वादा भी किया है.

लाइव कवरेज

मोहम्मद शाहिद, पवन सिंह अतुल and विभुराज

  1. लखीमपुर हिंसा के बाद सोमवार को लखनऊ से तिकुनिया तक का हाल

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    लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के बाद राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया है.

    इसके साथ ही राज्य सरकार ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज के नेतृत्व में घटना की जांच करवाने का वादा भी किया है.

    इस बीच विपक्षी नेताओं को घटनास्थल पर पहुंचने से रोका गया. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को लखीमपुर खीरी जाने के रास्ते में सितापुर में हिरासत में लिया गया.

    रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी. केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में रविवार को अब तक की सबसे ख़ूनी झड़प हुई थी.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ मारे गए लोगों में चार किसान थे, जिनकी मौत गाड़ियों से ठोके जाने की वजह से हुई और उन गाड़ियों को कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता चला रहे थे.

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    ये गाड़ियां राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत में जा रही थीं. मारे गए लोगों में बाक़ी भाजपा कार्यकर्ता और उनका ड्राइवर था.

    पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तेजित प्रदर्शनकारियों ने उन लोगों को गाड़ी से खींच लिया और उनके साथ मार-पीट की. दो गाड़ियों को घटना स्थल पर आग के हवाले कर दिया गया.

    इसके बाद विपक्षी पार्टियों के नेता लखीमपुर खीरी के तिकुनिया क़स्बे की तरफ़ बढ़ने लगे लेकिन इसी बीच प्रशासन ने लखीमपुर खीरी में सीआरपीसी की धारा 144 लागू कर दी. इसके तहत चार से अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने पर रोक लगा दी जाती है.

    उत्तर प्रदेश सरकार ने समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, बीएसपी के एससी मिश्र और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह को लखीमपुर खीरी जाने से रोका.

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    अखिलेश यादव को लखीमपुर खीरी जाने से रोकने जाने पर नाराज़ प्रदर्शनकारियों ने गौतम पल्ली पुलिस स्टेशन के बाहर एक पुलिस जीप को आग के हवाले कर दिया.

    कृषि क़ानूनों की संवैधानिकता पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने अटॉर्नी जनरल ने इस घटना का जिक्र किया.

    इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे इस का फ़ैसला करेंगे जो संगठन किसी क़ानून की वैधता को अदालत में चुनौती देते हैं, क्या वे कोर्ट में विचाराधीन किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं या नहीं?

    बेंच ने कहा कि जब इस तरह की घटनाएं होती हैं तो कोई इसकी जिम्मेदारी नहीं लेता है.

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    लखीमपुर खीरी में एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज के नेतृत्व में जांच कराने के अलावा मृतक किसानों के परिजनों को 45 लाख रुपये देने की घोषणा की है. मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी दी जाएगी.

    लखीमपुर की घटना में घायल हुए लोगों को 10 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने का एलान किया गया है.

    प्रशांत कुमार जब ये जानकारी दे रहे थे तो भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी वहीं पर मौजूद थे. लखीमपुर में विवाद सुलझता हुआ दिखा.

    मृतकों के परिजन शवों के पोस्ट मॉर्टम के लिए तैयार हो गए. पुलिस ने आशीष मिश्र और कई अन्य लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.

    हालांकि आशीष मिश्र के पिता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और इस क्षेत्र के सांसद अजय मिश्र ने इन आरोपों से इनकार किया है.

  2. लखीमपुर हिंसा पर ममता बनर्जी का बीजेपी से सवाल, क्या यही 'रामराज' है?

    ममता बनर्जी

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    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई हिंसा के लिए भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि वादा किया गया था 'रामराज' देने का, उसके बदले दिया जा रहा है 'किलिंग राज.'

    समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा, "ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इसकी निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है. बीजेपी सरकार लोकतंत्र पर भरोसा नहीं करती है. वे केवल तानाशाही चाहते हैं. क्या यही 'रामराज' है? नहीं ये 'किलिंग राज' है."

    रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई थी.

    किसान संगठनों के संयुक्त प्लेटफॉर्म संयुक्त किसान मोर्चा रविवार को एक बयान जारी कर ये दावा किया था कि इस घटना में चार किसानों की मौत हो गई है और मारे गए किसानों में एक की मौत केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र के गोली चलाने से हुई.

    हालांकि केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे दोनों ने ही इन आरोपों को खारिज किया है.

  3. लखीमपुर हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

    वीडियो कैप्शन, लखीमपुर हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल

    किसानों के विरोध प्रदर्शन के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) केके वेणुगोपाल ने लखीमपुर खीरी की घटना का ज़िक्र किया. उन्होंने कोर्ट में घटना पर दुख जताते हुए कहा कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं नहीं होनी चाहिए और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए.

    वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं तो कोई इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेता है.

    जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, "हम देखेंगे कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा क्या वास्तव में एक मूलभूत अधिकार है."

    दरअसल किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी हुई है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर न्यायालय चाहे तो इस मामले को ट्रांसफ़र करते हुए इसे समाप्त कर सकता है.

  4. सिर्फ कुचला नहीं गया, गोली भी मारी: टिकैत

    वीडियो कैप्शन, सिर्फ कुचला नहीं गया, गोली भी मारी: टिकैत

    लखीमपुर हिंसा में मारे गए लोगों में गुरविंदर सिंह भी एक थे. उनकी बड़ी बहन का रो-रो कर बुरा हाल था. किसी तरह बिलखते हुए उन्होंने बीबीसी से बात की.

    उन्होंने कहा, "वो सबसे छोटा था. मेरा लाडला था. मेरा भाई साधु था. स्कूल पास किया था. मेरे भाई को मार दिया." गुरविंदर सिंह की तरह दूसरे लोगों ने भी अपने परिजनों को खोया है. इस सवाल पर कि सरकार से उन्हें क्या उम्मीद है, गुरविंदर की बहन ने कहा, "हमें इंसाफ़ चाहिए, मेरे भाई के लिए... इंसाफ़ चाहिए... जिसने मारा है, उसको सज़ा मिलनी चाहिए. और कुछ नहीं कहना चाहिए."

    लखीमपुर खीरी में मुश्किल हालात हैं, यहां पर परिवारवाले इस घटना के बाद बदहवास हैं. राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी में बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे को एक शव दिखाते हुए कहा, "ये देखो, गोली लगी है... ये नहीं कि सिर्फ़ गाड़ी से कुचला है, गोलियां भी चलाई हैं."

    सरकार के साथ किसी समझौते के सवाल पर उन्होंने कहा, "इस पर क्या समझौता होगा. इसका पोस्टमॉर्टम होगा और मुक़दमा दर्ज होगा. जिसने गलती की है, उसे सज़ा होगी. मंत्री और उनके बेटे दोनों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज होगा."

  5. लखीमपुर हिंसा: मंत्री और उनके बेटे ने क्या कहा?

    वीडियो कैप्शन, लखीमपुर हिंसा: मंत्री और उनके बेटे ने क्या कहा?

    रविवार सुबह से ही सैकड़ों किसान तिकुनिया के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज पहुँच गए और स्कूल में बने हेलीपैड को घेर लिया. वे लोग "भारत माता की जय" के नारे लगाते रहे और काले झंडों के साथ विरोध शुरू कर दिया.

    बाद में जब ख़बर फैली कि मंत्री सड़क के रास्ते गाँव पहुँच रहे हैं तो किसान तिकुनिया से बनवीरपुर की सरहद पर गाड़ियों से रास्ता रोक कर बैठ गए. तक़रीबन डेढ़ से ढाई के बीच में तीन गाड़ियों का एक छोटा काफ़िला तिकुनिया पहुंचा.

    अजय मिश्र टेनी और उनके पुत्र आशीष मिश्र के मुताबिक़ ये काफ़िला उप मुख्यमंत्री के बड़े काफ़िले को बनवीरपुर गाँव तक लाने के लिए पास के एक रेलवे फाटक के लिए रवाना हुआ था.

    और फिर ये तीनों गाड़ियां तिकुनिया जा पहुँचीं जहाँ किसान उप-मुख्यमंत्री के सरकारी काफ़िले का इंतज़ार कर रहे थे. पूरी घटना पर गृह राज्य मंत्री और उनके बेटे का क्या कहना है?

  6. प्रियंका गांधी और यूपी पुलिस के बीच तीखी बहस

    वीडियो कैप्शन, प्रियंका गांधी और यूपी पुलिस के बीच तीखी बहस

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा रविवार रात लखीमपुर खीरी जाने की कोशिश कर रही थीं, जब पुलिस ने सीतापुर में उन्हें हिरासत में ले लिया.

    हिरासत में लेने से पहले प्रियंका और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस हुई. इस घटना के बाद उन्होंने अपने टिवटर हैंडल पर एक वीडियो भी पोस्ट किया.

  7. ग़म, ग़ुस्सा और आंसू, लखीमपुर का मंज़र बयान करती कुछ तस्वीरें,

    लखीमपुर खीरी हिंसा

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    लखीमपुर खीरी में मुश्किल हालात हैं, यहां पर परिवारवाले इस घटना के बाद बदहवास हैं.

    यहां से शवों को ले जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. लोग फूट-फूट कर रो रहे हैं.

    लखीमपुर खीरी

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    लखीमपुर हिंसा ने यहां के किसानों को एकजुट करने का भी काम किया है.

    हालांकि ये काम बेहद दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से हुआ है.

    अब ये उम्मीद की जा रही है कि यहां नाराज़ लोगों की जो भी मांगे हैं, सरकार उस पर कार्रवाई करे और लोगों को इंसाफ़ दिलाए.

    यहां एक बहन अपने भाई के लिए रो रही थी, एक बाप अपने बेटे के लिए रो रहा था. यहां ग़म का माहौल छाया हुआ है.

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  8. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 4 अक्टूबर 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ

    चार अक्टूबर, सोमवार, दिन भर में स्वागत है आपका, मैं हूं फ़ैसल मोहम्मद अली

    किसानों के कुचले जाने की घटना की जांच करेंगे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज हालांकि साफ नहीं कि मंत्री के बेटे के ख़िलाफ़ कौन सी धाराओं में मामला हुआ है दर्ज

    पक्ष जानेंगे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र और उनके बेटे आशीष मिश्र का भी

    पाकिस्तान से वुसुतुल्लाह ख़ान का ब्लॉग सुनेंगे

    साप्ताहिक कार्यक्रम खेल खिलाड़ी भी

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  9. FB Live: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में क्या हैं ताज़ा अपडेट?

    FB Live: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में क्या हैं ताज़ा अपडेट? लखीमपुर से ज़्यादा जानकारी के साथ अनंत झणाणे.

  10. लखीमपुर हिंसा: ग्राउंड ज़ीरो के हालात

    वीडियो कैप्शन, लखीमपुर हिंसा: ग्राउंड ज़ीरो के हालात

    लखीमपुर ज़िला मुख्यालय से क़रीब 75 किलोमीट दूर नेपाल की सीमा से सटे तिकुनिया गाँव में हुई हिंसा और आगज़नी में अब तक आठ लोगों की मौत हो गई है.

    इनमें चार किसान और चार अन्य लोग शामिल हैं. चार अन्य लोगों में दो बीजेपी कार्यकर्ता और दो ड्राइवर हैं. इनके अलावा 12 से 15 लोग घायल भी हैं.

    मरनेवाले किसानों में दलजीत सिंह (35), गुरवेंद्र सिंह (18), लवप्रीत सिंह (20) और नक्षत्र सिंह (55) शामिल हैं.

    तिकुनिया की इस घटना में साधना न्यूज़ चैनल के निघासन तहसील संवाददाता रतन कश्यप की भी कवरेज करने के दौरान मौत हो गई है. गाड़ी की ज़ोरदार टक्कर से वो सड़क किनारे पानी में जा गिरे थे.

    वीडियो: अनंत झणाणे और प्रशांत लखीमपुर से, बीबीसी के लिए

  11. लखीमपुर हिंसा: 'हमें इंसाफ़ चाहिए, जिसने जान ली, उसको सज़ा मिलनी चाहिए',

    गुरविंदर सिंह की बहन.

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    इमेज कैप्शन, गुरविंदर सिंह की बहन

    लखीमपुर हिंसा में मारे गए लोगों में गुरविंदर सिंह भी एक थे. उनकी बड़ी बहन का रो-रो कर बुरा हाल था.

    किसी तरह बिलखते हुए उन्होंने बीबीसी से बात की.

    उन्होंने कहा, "वो सबसे छोटा था. मेरा लाडला था. मेरा भाई साधु था. स्कूल पास किया था. मेरे भाई को मार दिया."

    गुरविंदर सिंह की तरह दूसरे लोगों ने भी अपने परिजनों को खोया है.

    इस सवाल पर कि सरकार से उन्हें क्या उम्मीद है, गुरविंदर की बहन ने कहा, "हमें इंसाफ़ चाहिए, मेरे भाई के लिए... इंसाफ़ चाहिए... जिसने मारा है, उसको सज़ा मिलनी चाहिए. और कुछ नहीं कहना चाहिए."

    लखीमपुर खीरी में मुश्किल हालात हैं, यहां पर परिवारवाले इस घटना के बाद बदहवास हैं.

  12. लखीमपुर हिंसा का किसान आंदोलन पर असर? इस सवाल पर क्या बोले राकेश टिकैत,

    लखीमपुर खीरी में राकेश टिकैत पीड़ित परिवारों के साथ

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    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में रविवार को हुई हिंसा के बाद जहां एक ओर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी को घटनास्थल पर पहुंचने से रोक दिया गया, तो दूसरी तरफ किसान नेता राकेश टिकैत वहां पहुंचने में कामयाब रहे हैं.

    राकेश टिकैत ने लखीमपुर खीरी में बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे को एक शव दिखाते हुए कहा, "ये देखो, गोली लगी है... ये नहीं कि सिर्फ़ गाड़ी से कुचला है, गोलियां भी चलाई हैं."

    सरकार के साथ किसी समझौते के सवाल पर उन्होंने कहा, "इस पर क्या समझौता होगा. इसका पोस्टमॉर्टम होगा और मुक़दमा दर्ज होगा. जिसने गलती की है, उसे सज़ा होगी. मंत्री और उनके बेटे दोनों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज होगा."

    लखीमपुर खीरी

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    इस सवाल पर कि क्या सरकार इसके लिए मान गई है, राकेश टिकैत ने कहा, "जब वे दोषी हैं तो सरकार क्यों नहीं मानेगी? मंत्री के ख़िलाफ़ 120बी और उनके बेटे के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज किया जाएगा. लेकिन जिसने गोली चलाई है, उसके ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज किया जाएगा."

    लखीमपुर की घटना का किसान आंदोलन पर क्या असर पड़ेगा, इस सवाल पर राकेश टिकैत बोले, "750 लोग शहीद हुए हैं, इनका नाम भी उन्हीं लोगों में लिया जाएगा. ये आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहेगा."

    राकेश टिकैत ने बताया कि प्रशासन से मुआवाजे की बात हो रही है. सरकार ने गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज करने का आश्वासन दिया है.

  13. लखीमपुर खीरी में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गृह मंत्रालय ने भेजी अर्धसैनिक बलों की चार कंपनियां

    लखनऊ में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के घर के बाहर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स के जवान

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    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में क़ानून व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ़) की चार कंपनियों को तैनात किया है.

    रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में आठ लोगों की जान चली गई थी. उत्तर प्रदेश सरकार के आग्रह के बाद रविवार को गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ़ की चार कंपनियों को भेजे जाने का फ़ैसला किया.

    इनमें रैपिड एक्शन फोर्स की दो और सशस्त्र सीमा बल की दो कंपनियां होंगी. ये तैनाती छह अक्टूबर तक के लिए की गई है.

    ये क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद से क़ानून व्यवस्था को नियंत्रित करेंगी.

    समाचार एजेंसी एएनईआई के मुताबिक़ आरएएफ़ की एक और एसएसबी की दो कंपिनियां रविवार शाम को ही लखीमपुर खीरी पहुंच गई थीं जबकि आरएएफ़ की दूसरी कंपनी सोमवार शाम तक वहां पहुंचेंगी.

  14. लखीमपुर हिंसा: गृह राज्य मंत्री के इस्तीफ़े पर अड़ी कांग्रेस, कहा - ये जनरल डायर की सरकार है...

    कांग्रेस नेता भूपेश बघेल

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    कांग्रेस ने सोमवार को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र को फौरन बर्खास्त करने और उनके बेटे को गिरफ़्तार किए जाने की मांग की है.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ लखीमपुर खीरी की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हुई है और उत्तर प्रदेश पुलिस ने गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्र के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किया है.

    पार्टी ने प्रियंका गांधी को जल्द से जल्द रिहा किए जाने की भी मांग की है. कांग्रेस का आरोप है कि प्रियंका गांधी को यूपी पुलिस ने अपनी हिरासत में रखा है.

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    सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, "कल लखीमपुर में जो घटना हुई है, उससे पूरा देश आंदोलित है. जो घटना घटी, उसे सभी लोगों ने मीडिया के माध्यम से देखा कि किस प्रकार से किसानों के साथ बर्बरता की गई. गोलियां चलाई गईं. गाड़ियां जलाई गईं और गाड़ियां चढ़ा दी गईं. असल में भारतीय जनता पार्टी अंग्रेज़ों की प्रेरणा लेकर ही ये राजनीति कर रहे हैं."

    "वे पूरे देश के किसानों को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, इसका उदाहरण लखीमपुर की घटना है. हमारी मांग है कि सबसे पहले गृह राज्य मंत्री को बर्खास्त किया जाए और उनके साथ जो गए थे, उस मंत्री को भी बर्खास्त किया जाना चाहिए. आंदोलन कर रहे लोगों को कुचलने की कोशिश करने वाले लोगों की गिरफ़्तारी होनी चाहिए. क्योंकि ये कोई साधारण घटना नहीं है. बल्कि ये साफ़ तौर पर हत्या का मामला है और उस धारा में अपराध पंजीबद्ध करके कार्रवाई की जानी चाहिए."

    कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ

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    कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने कहा, "कल हमने ये मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की अध्यक्षता में इस घटना की जांच कराई जाए. ये घटना कोई एकमात्र घटना नहीं है. आप इसकी क्रोनोलॉजी समझिए. कुछ दिन पूर्व यूपी बीजेपी के हैंडल पर एक कार्टून आता है."

    "कार्टून में राकेश टिकैत के बारे में ये लिखा जाता है कि यूपी आए तो खाल उधेड़ दी जाएगी. सप्ताह भर पहले गृह राज्य मंत्री कहते हैं कि सुधर जाओ, वरना सुधार देंगे. उसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री कहते हैं कि आंदोलनकारी किसानों का सर फोड़ो, जेल जाओ और नेता बनो. क्या बीजेपी इस तरह से अपने नेता तैयार करती है. ये जो जनरल डायर की सरकार है, उसे जनता भगाकर मानेगी."

  15. यूपी के मंत्री ने कहा- प्रियंका गांधी पहले भी राजनीतिक पर्यटन करती रही हैं

    सिद्धार्थनाथ सिंह

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    लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना पर उत्तर प्रदेश के मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि विपक्ष इस घटना का इस्तेमाल चुनावों के मद्देनज़र राजनीतिक पर्यटन और प्रतियोगिता के लिए कर रहा है.

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस घटना को बेहद गंभीरता से ले रही है और मुख्यमंत्री ने कहा है कि साज़िशकर्ताओं को सज़ा दी जाएगी.

    प्रियंका गांधी को हिरासत में लिए जाने पर सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा है कि वो पहले भी राजनीतिक पर्यटन करती रही हैं.

    उन्होंने कहा कि ये जांच में बाधा डालने और जनता की राय को बदलने की कोशिश है, यह नहीं होना चाहिए था, उन्हें कम से कम 24 घंटे या फिर जांच के परिणाम आने तक इंतज़ार करना चाहिए था.

    गहलोत ने की निंदा

    अशोक गहलोत

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    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बयान जारी कर कहा है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की वो कड़े शब्दों में निंदा करते हैं क्योंकि वो प्रमुख विपक्षी नेता हैं और लखीमपुर खीरी ज़िले में कल जो किसान मारे गये उनके परिवारों से मिलने जा रही थीं.

    “विपक्षी नेताओं को गैर-कानूनी तरीके से रोका जाना लोकतांत्रिक मानदंडों के खिलाफ है.पहले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर भाजपा नेताओं के काफिले की गाड़ियां चढ़ाकर उनको बर्बरता से मार दिया गया, फिर विपक्षी नेताओं को वहां जाने से रोका जा रहा है, जो बिल्कुल गलत है.”

  16. लखीमपुर की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने आज क्या कहा...

    सुप्रीम कोर्ट

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    किसानों के विरोध प्रदर्शन के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल (एजी) केके वेणुगोपाल ने लखीमपुर खीरी की घटना का ज़िक्र किया.

    उन्होंने कोर्ट में घटना पर दुख जताते हुए कहा कि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं नहीं होनी चाहिए और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब भी इस तरह की घटनाएं होती हैं तो कोई इसकी ज़िम्मेदारी नहीं लेता है.

    जस्टिस एएम खनविलकर की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, "हम देखेंगे कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा क्या वास्तव में एक मूलभूत अधिकार है."

    दरअसल किसान महापंचायत ने सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी हुई है.

    एजी ने कहा कि अगर न्यायालय चाहे तो इस मामले को ट्रांसफ़र करते हुए इसे समाप्त कर सकता है.

    सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल किया कि अगर कोई मामला न्यायालय में लंबित है तो उस पर कैसे प्रदर्शन हो सकता है.

    लखीमपुर खीरी हिंसा

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    एजी ने कहा कि इस मामले में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, इस पर प्रदर्शन नहीं होने चाहिए. एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना कल लखीमपुर में हुई है.

    उन्होंने कहा कि अब और कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए ताकि लखीमपुर खीरी जैसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोका जा सके.

    किसान महापंचायत की तरफ़ से पैरवी कर रहे एडवोकेट अजय चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि प्रदर्शन स्थल के आस-पास रास्तों में खड़े किए गए अवरोधकों में किसानों की कोई भूमिका नहीं है.

    सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि हम ने तीन कृषि क़ानूनों पर स्थगन आदेश दे रखा है तो किसान क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं. जब आपने अदालत के समक्ष क़ानून को चुनौती दे रखी है तो आप विरोध प्रदर्शन कैसे कर सकते हैं? इन विरोध प्रदर्शनों की वैधता क्या है?

    अदालत ने ये भी पूछा कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने का क्या तुक है? आप दोनों चीज़ें एक साथ नहीं कर सकते हैं. आप एक क़ानून को चुनौती भी देंगे और फिर विरोध प्रदर्शन करेंगे. या तो आप अदालत जाएं या संसद में या फिर सड़कों पर?

  17. लखीमपुर हिंसा पर केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे ने बीबीसी को क्या बताया?

    लखीमपुर हिंसा मामले में बीबीसी ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी और उनके पुत्र आशीष मिश्र से बात और उनका पक्ष जानने की कोशिश की.

    देखिए बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे से बातचीत में उन्होंने आरोंपों पर क्या कहा?

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    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्रा ने बीबीसी से कहा, "मैं सरकार से और आप मीडिया के बंधुओं से केवल इतना ही आग्रह करता हूं कि सत्यतापूर्वक जांच हो और जो भी दोषी हो उसको दंड मिले."

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का स्पष्टीकरण

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्र ने बीबीसी से कहा कि "जो लोग आए थे, आंदोलन करने के लिए भी, वो भी बाहर से बुलाकर लाए गए लोग थे. हमारे ज़िले के लोग कभी भी इस तरह के आंदोलनों में शामिल नहीं होते हैं. क्योंकि जिन लोगों की मृत्यु की ख़बर भी आ रही है, वो भी हमारे ज़िले के रहने वाले नहीं हैं. वो नालपाड़ा, बहराइच के रहने वाले लोग हैं. और जिस तरह से हमारे कार्यकर्ताओं पर आक्रमण किया गया है, इससे लगता है कि कुछ उपद्रवी तत्व ज़रूर किसानों के सम्मेलन में दूसरे ज़िलों में आकर इसमें शामिल हुए थे और उन्होंने इस तरह की घटना को अंज़ाम दिया."

    इससे पहले उन्होंने कहा था कि उनके बेटे पर लगाया जा रहा ये आरोप कि वो गाड़ी चला रहे थे, ये सरासर झूठ है.

    उन्होंने कहा, "वो, मैं या मेरे परिवार का कोई भी सदस्य उस वक़्त वहां मौजूद ही नहीं था."

    अजय मिश्र ने बताया, "जैसी कि आप सबको जानकारी है कि हमारे पैतृक गांव में प्रतिवर्ष कुश्ती प्रतियोगिता का कार्यक्रम होता है. इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बतौर मुख्य अतिथि आज माननीय उपमुख्यमंत्री जी को आना था और लखीमपुर में पीडब्ल्यूडी का कार्यक्रम था वो करके हम दोनों लोग साथ आ रहे थे."

    "जब हम कार्यक्रम स्थल से थोड़ी दूर थे तो हमारा रूट यह बता कर डायवर्जन कर दिया गया कि कुछ किसान वहां पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और काला झंडा दिखाने की कोशिश करेंगे. हमलोगों का रूट परिवर्तित हो गया उसके बाद हमारे कार्यकर्ता चार पांच गाड़ियों से हमें लेने आ रहे थे. उन कार्यकर्ताओं पर किसानों के बीच शामिल अराजक तत्वों ने पथराव किया. इसकी वजह से वो गाड़ियां रुकीं."

    "गाड़ियों से खींच कर हमारे कार्यकर्ताओं को लाठी, डंडे और तलवारों से पीटा गया. इसका वीडियो हमारे पास है. फिर गाड़ियों को धक्का देकर गड्ढे में गिराया गया. उन गाड़ियों को जलाया गया. उसके साथ साथ दूसरी गाड़ियों में भी भारी तोड़फोड़ की गई."

    "इस दुखद घटना में हमारे तीन भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की मृत्यु हुई है. ड्राइवर की भी मृत्यु हुई है. साथ ही 10 से 12 लोग घायल हुए हैं. यह बेहद दुखद घटना है जो इस आंदोलन में घुसे उपद्रवियों ने की है. जब से ये किसान आंदोलन शुरू हुआ है, बब्बर खालसा से लेकर अनेक उपद्रवी संगठन हमारे देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश में लगे हैं. किसान आंदोलन को चलाने वाले लोगों को भी इन बातों को समझना चाहिए."

  18. FB Live: लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद ग़ाज़ीपुर बॉर्डर में कैसा है माहौल

  19. ब्रेकिंग न्यूज़, अजय मिश्रा टेनी ने दोहराया, घटनास्थल पर नहीं था उनका बेटा, कहा - ये हत्या की साज़िश हो सकती है

    अजय मिश्रा टेनी

    इमेज स्रोत, Lok Sabha

    लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके मांग की है कि इस घटना में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए.

    टेनी ने एक बार फिर कहा है कि उनका बेटा इस घटना के दौरान घटनास्थल पर नहीं था बल्कि उनकी गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जो कि एक हत्या की साज़िश भी हो सकती है.

    “कार्यक्रम स्थल घटनास्थल से 3-4 किलोमीटर दूर था. अगर मेरा बेटा या मैं घटनास्थल पर होता तो हम ज़िंदा नहीं बचते.”

    किसान

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    उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकर्ता जो मारे गए हैं उनके परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए, उनके द्वारा कराई गई एफ़आईआर की सभी तरह की जांच कराई जाए. वहां लोग किन परिस्थितियों में मारे गए इसकी जांच वहां पर मौजूद लोग ही बता सकते हैं और मेरा बेटा वहां नहीं था.”

    केंद्रीय मंत्री टेनी ने किसान नेता राकेश टिकैत पर कहा कि वो लगातार इस देश में अस्थिरता फैलाने का काम कर रहे हैं, सबसे पहले एफ़आईआर उन पर दर्ज होनी चाहिए.

    इसके अलावा टेनी ने कहा कि रविवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता इस प्रदर्शन को भड़का रहे थे वो इसमें शामिल थे. उन्होंने कहा कि साज़िश करके जो लोग किसान प्रदर्शनों में आ रहे हैं उसके बारे में राकेश टिकैत को देखना होगा कि कैसे वहां पर अराजक तत्व इकट्ठा हो रहे हैं.

    केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि उन्होंने भी एफ़आईआर दर्ज कराने की तहरीर दी है.

    “मुझ पर और मेरे बेटे के ख़िलाफ़ किसी एफ़आईआर की जानकारी मुझे नहीं मिली है और क़ानून पर मुझे पूरा भरोसा है.”

    टेनी ने कहा किधारदार हथियारों से बीजेपी कार्यकर्ताओं को मारने का वीडियो मौजूद है, बेहद दर्दनाक ढंग से उन लोगों की हत्या की गई है, इस घटना में जो भी शामिल लोग थे उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

  20. ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों और प्रशासन के बीच समझौता, परिजनों को 45 लाख, सरकारी नौकरी और न्यायिक जांच

    प्रदर्शन

    इमेज स्रोत, Anant Zanane/BBC

    लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद किसानों और प्रशासन के बीच हुई बातचीत में कई मुद्दों पर सहमति हुई है.

    प्रशासन ने घटना में मारे गए किसानों को 45-45 लाख और घायलों को 10-10 लाख रुपये सहायता राशि देने की बात कही है.

    इससे पहले लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके मांग की है कि इस घटना में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए.

    टेनी ने एक बार फिर कहा है कि उनका बेटा इस घटना के दौरान घटनास्थल पर नहीं था बल्कि उनकी गाड़ी को निशाना बनाकर हमला किया गया जो कि एक हत्या की साज़िश भी हो सकती है.

    “कार्यक्रम स्थल घटनास्थल से 3-4 किलोमीटर दूर था. अगर मेरा बेटा या मैं घटनास्थल पर होता तो हम ज़िंदा नहीं बचते.”

    उधर प्रशासन ने इस घटना के ज़िम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार करने और इसकी न्यायिक जांच कराने पर सहमति दे दी है.

    यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके इसकी जानकारी दी है.

    ये भी घोषणा की गई है कि मृतकों के आश्रितों को नौकरी, 8 दिन में आरोपियों की अरेस्ट, 45 लाख का मुआवजा मृतक के परिजनों को,घटना की न्यायिक जॉच की जाएगी,

    साथ ही घायलों को 10 लाख का मुआवजा दिया जाएगा.

    घटनास्थल पर मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे ने अनुसार इस समझौते के बाद जाम हटाया जा रहा है. और शवों को पोस्ट मॉर्टम के लिए ले जाने की तैयार चल रही है.

    एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार

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    किसानों और प्रशासन के बीच समझौता होने के बाद धरने पर रखे गए शवों को उठा लिया जाएगा और अब उन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा जाएगा.

    इस घटना में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी जिनमें 4 किसान और 4 आम लोग शामिल थे.