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ट्रंप ने कहा- वो राष्ट्रपति होते तो अमेरिका की वापसी अलग होती

अफ़ग़ानिस्तान को लेकर चौतरफ़ा आलोचनाओं से घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफ़े की मांग की है.

लाइव कवरेज

  1. ट्रंप ने बाइडन पर साधा निशाना, कहा- इस अपमान के लिए इस्तीफ़ा दें

    अफ़ग़ानिस्तान को लेकर चौतरफ़ा आलोचनाओं से घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्तीफ़े की मांग की है.

    उन्होंने कहा है कि ‘अफ़ग़ानिस्तान में जिसकी उन्होंने अनुमति दी उस अपमान के लिए उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.’

    इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगर वो राष्ट्रपति होते तो अमेरिका का वहां से निकलना ‘बेहद अलग और बहुत सफलतापूर्वक होता.’

    वहीं, बाइडन प्रशासन ने उन पर जवाबी हमला करते हुए कहा है कि अमेरिका-तालिबान सौदा ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में ही हुआ था.

    हालांकि, वहां से निकलने को लेकर समझौते की सटीक जानकारी बाइडन प्रशासन पर छोड़ दी गई थी. बीबीसी के उत्तरी अमेरिका संपादक जॉन सोपेल ने पहले लिखा था कि ‘नीति को डोनाल्ड ट्रंप ने ज़रूर गढ़ा था लेकिन इस अराजकता की ज़िम्मेदारी जो बाइडन की है.’

    तालिबान ने जिस तेज़ी से देश पर क़ब्ज़ा किया है उसके लिए बाइडन की आलोचना हो रही है. उनके प्रशासन के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने अफ़ग़ान सुरक्षाबलों की क्षमता को कुछ अधिक आंक लिया था.

    विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन ने सीएनएन न्यूज़ से कहा कि ‘हमने जो अनुमान लगाया था देश उससे पहले ही ढह गया.’

  2. काबुल एयरपोर्ट पर देर रात भी जारी रही अफ़रा-तफ़री

    काबुल में तालिबान के दाख़िल होने के बाद राजधानी से आम और ख़ास लोगों के भागने और अफ़रा-तफ़री का माहौल रविवार देर रात तक जारी रहा है.

    हमने पहले रिपोर्ट किया था कि काबुल के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर गोलीबारी की आवाज़ सुनाई दी थी और अराजकता का माहौल था.

    ऐसी रिपोर्ट हैं कि एयरपोर्ट के रनवे पर लोग घायल हुए हैं. एक चश्मदीद ने बीबीसी से कहा कि भागने की बेचैनी में एक भगदड़ की स्थिति बन गई.

    वहीं, पीबीएस की जेन फ़र्ग्यूसन ने रिपोर्ट किया है कि अब अगर किसी अफ़ग़ानी नागरिक को घर लौटना होगा तो उन्हें तालिबान चेकपॉइंट से होकर गुज़रना होगा.

    पत्रकार बिलाल सर्वरी ने एयरपोर्ट का एक वीडियो शेयर किया है जो कि 16 अगस्त के शुरुआती घंटों का है.

  3. अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान में 1,000 और सैनिक भेज रहा

    एक अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया से कहा है कि पेंटागन काबुल से लोगों को निकालने के लिए 1,000 अतिरिक्त सुरक्षाबल भेज रहा है.

    इससे पहले बीते सप्ताह उन्होंने 3,000 सैनिकों को भेजा था.

    इस तरह से अस्थाई तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के 6,000 सैनिक हो जाएंगे.

    2011 में अमेरिका के सबसे अधिक सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में तैनात थे. उस समय देश में 1.10 लाख अमेरिकी जवान थे.

  4. ब्रिटेन दूतावास के स्टाफ़ को निकाला गया, सऊदी अरब भी निकाल रहा अपने लोग

    ब्रिटेन के रक्षा सूत्रों ने बीबीसी को बताया है कि 600 ब्रिटिश सैनिक काबुल पहुंचे हैं.

    उनका कहना है कि रॉयल एयर फ़ोर्स के सैन्य विमानों ने ब्रिटेन के दूतावास स्टाफ़ को बाहर निकाला है.

    हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ब्रिटेन के राजदूत और एक छोटा स्टाफ़ ब्रिटिश नागरिकों को निकालने के लिए शहर में मौजूद है.

    वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर कहा है कि यह महत्वपूर्ण है कि पश्चिमी देशों ने मिलकर काम किया और यह साफ़ किया कि कोई भी अफ़ग़ानिस्तान को आतंक पनपने की जगह नहीं बनने देना चाहता है.

    उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान मे परिस्थितियां बेहद कठिन हैं, आगे और कठिन होंगी.

    वहीं, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने भी ट्वीट करके बताया है कि वो काबुल में अपने दूतावास से लोगों को निकाल रहा है.

  5. ब्रेकिंग न्यूज़, देश छोड़कर भागने पर अशरफ़ ग़नी की सफ़ाई, तालिबान पर भी साधा निशाना

    अफ़ग़ानिस्तान से भागने के बाद राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी करते हुए इसको लेकर सफ़ाई दी है.

    उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट लिखी है कि उन्होंने देश में रक्तपात रोकने के लिए यह क़दम उठाया है.

    वो लिखते हैं कि उनके रहते हुए तालिबान के काबुल में आने के बाद झड़प होती जिससे लाखों लोगों की ज़िंदगियां ख़तरे में पड़ जातीं.

    उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “आज मुझे एक मुश्किल फ़ैसला करना था कि या तो मैं सशस्त्र तालिबान जो महल (राष्ट्रपति भवन) में दाख़िल होना चाहते थे उनके सामने खड़ा हो जाऊं या फिर अपने प्यारे मुल्क जिसकी बीते 20 सालों में सुरक्षा के लिए मैंने अपनी ज़िंदगी खपा दी उसे छोड़ दूं.”

    “अगर इस दौरान अनगिनत लोग मारे जाते और हमें काबुल शहर की तबाही देखनी पड़ती तो उस 60 लाख आबादी के शहर में बड़ी मानवीय त्रासदी हो जाती.”

    उन्होंने आगे लिखा कि तालिबान ने तलवारों और बंदूक़ों के ज़ोर पर जीत हासिल कर ली है, और अब मुल्क की अवाम के जानो माल और इज़्ज़त की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी तालिबान पर है.

    उन्होंने कहा, “मगर वो दिलों को जीत नहीं सकते हैं. इतिहास में कभी भी किसी को सिर्फ़ ताक़त से ये हक़ नहीं मिला है और न ही मिलेगा. अब उन्हें एक ऐतिहासिक परीक्षा का सामना करना है, या तो वो अफ़ग़ानिस्तान का नाम और इज़्ज़त बचाएंगे या दूसरे इलाक़े और नेटवर्क्स.”

    “बहुत से लोग अनिश्चित भविष्य के बारे में डरे हुए और चिंतित हैं. तालिबान के लिए ये ज़रूरी है कि वो तमाम जनता को, पूरे राष्ट्र को, समाज के सभी वर्गों और अफ़ग़ानिस्तान की औरतों को यक़ीन दिलाएं और उनके दिलों को जीतें.”

    उन्होंने कहा कि, “वो अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर योजना बनाएं और उसे जनता को बताएं. मैं हमेशा अपने मुल्क और क़ौम की बेहतरी और तरक़्क़ी के लिए काम करता रहूंगा.”

    देश छोड़ने के बाद यह उनकी पहली प्रतिक्रिया है. वो इस समय कहां पर मौजूद हैं इसको लेकर उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है.

  6. पवनदीप राजन ने इंडियन आइडल-12 का ख़िताब अपने नाम किया

    उत्तराखंड के पवनदीप राजन ने इंडियन आइडल के 12वें सीज़न का ख़िताब जीत लिया है. उनको ईनाम में ट्रॉफ़ी और 25 लाख की पुरस्कार राशि दी गई है.

    इंडियन आइडल के 12वें सीज़न में अरुणिता कंजिलाल और सायली कांबले रनर-अप रहे.

    रविवार को हुए कार्यक्रम के ग्रैंड फ़िनाले एपिसोड में उन्हें विजेता घोषित किया गया. यह कार्यक्रम तक़रीबन 12 घंटे तक चला और देर रात विजेता की घोषणा की गई.

  7. पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा- वो काबुल में ही रहेंगे

    अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने एक वीडियो फ़ेसबुक पर जारी करते हुए अपने प्रशंसकों से कहा है कि वो काबुल में ही रहेंगे.

    अपनी तीन बेटियों के साथ खड़े करज़ई ने कहा कि वो और उनका परिवार अपने ‘प्यारे काबुल वासियों’ के साथ है.

    उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमारे देश और हमारी राजधानी के मुद्दे अच्छी तरह से और शांतिपूर्ण तरीक़े से सुलझा लिए जाएंगे.”

    “तालिबान इस्लामी आंदोलन के सुरक्षाबलों से मैं कहता हूं कि वे जहां भी हैं लोगों की संपत्ति और ज़िंदगी की सुरक्षा सुनिश्चित करें और लोगों की संपत्ति और ज़िंदगी पर ध्यान दें. इस पर हमारे सुरक्षाबल और तालिबान के सुरक्षाबल दोनों ध्यान दें.”

    अमेरिका के देश में सैन्य अभियान के बाद 2001 में करज़ई देश के नेता बने थे. 2014 तक वो इस भूमिका में रहे और एशिया में सबसे अधिक समय तक शीर्ष पद पर रहने वाले नेता बने.

    उस समय करज़ई को लेकर विदेशी सरकारों की ख़राब राय थी. उनका मानना था कि वो भ्रष्टाचार को रोकने में और महिला अधिकारों को बढ़ावा देने वाले परंपरावादियों से टकराने में नाकाम रहे.

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, तालिबान काबुल के 11 ज़िलों में दाख़िल, एयरपोर्ट पर सभी कमर्शियल उड़ानें निलंबित

    एक नेटो अधिकारी के मुताबिक़, काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सभी कमर्शियल उड़ानों को निलंबित कर दिया गया है.

    अब वहां से केवल सैन्य विमानों को संचालन करने की अनुमति दी गई है.

    इससे पहले ब्रिटिश एयरवेज़ ने पुष्टि की थी कि वो अफ़ग़ानिस्तान के हवाई मार्ग का फ़िलहाल इस्तेमाल नहीं करेगा.

    काबुल के 11 ज़िलों में पहुंचा तालिबान

    वहीं, तालिबान ने दावा किया है कि उसने काबुल के कई ज़िला केंद्रों में अपनी पहुंच बना ली है और उनमें से 11 को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

    एक प्रवक्ता ने कहा कि वे ज़िलों में इसलिए दाख़िल हुए हैं ताकि ‘सुरक्षा सुनिश्चित’ की जा सके.

    इससे पहले तालिबान ने दावा किया था कि उसने राष्ट्रपति भवन पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

  9. तालिबान ने राष्ट्रपति भवन पर क़ब्ज़ा किया- रिपोर्ट्स

    तालिबान का दावा है कि उसने काबुल में राष्ट्रपति भवन को अपने नियंत्रण में ले लिया है.

    रविवार को राष्ट्रपति ग़नी ने देश छोड़ दिया था लेकिन भवन की स्थिति अभी भी साफ़ नहीं है.

    स्थानीय पत्रकार बिलाल सरवरी ने उन दो अफ़ग़ान लोगों से बात की है जो तालिबान से सीधी बातचीत में शामिल थे. उनका कहना था कि समझौते के तहत राष्ट्रपति भवन में सत्ता हस्तांतरण का समारोह होना था जिसमें ग़नी मौजूद रहते लेकिन वो और उनके सहयोगी इसकी जगह देश छोड़कर चले गए.

    सहयोगियों का कहना है, “राष्ट्रपति भवन के कर्मचारियों को कथित तौर पर भवन छोड़ने के लिए कहा गया था और वो ख़ाली हो चुका था.”

    तालिबान ने बाद में समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि उन्होंने उस पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

    हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

  10. वीडियो: अफ़गान राष्ट्रपति ने देश छोड़ा, तालिबान की गिरफ़्त में काबुल

    अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और उपराष्ट्रपति अमीरुल्लाह सालेह ने देश छोड़ दिया है. इस बीच तालिबान के लड़ाके काबुल शहर के भीतर दाख़िल हो रहे हैं.

  11. ब्रेकिंग न्यूज़, तालिबान के क़ब्ज़े के बीच चौतरफ़ा आलोचना पर बोला अमेरिका- अफ़गान मिशन सफल रहा

    अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि अमेरिका ने अफ़गानिस्तान स्थित अपना दूतावास काबुल एयरपोर्ट पर शिफ़्ट कर दिया है.

    उन्होंने अफग़ानिस्तान के मौजूदा हालात की वियतनाम युद्ध से तुलना किए जाने पर भी आपत्ति जताई है.

    ब्लिंकन ने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका का अफ़गान मिशन ‘सफल’ रहा है.

    उन्होंने कहा, “यह साइगॉन नहीं है.”

    आज से करीब 46 साल पहले वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका साइगॉन से कुछ ऐसे ही निकलना पड़ा था.

    राष्ट्रपति जो बाइडन के आलोचक और रिपब्लिकन सांसद अफ़गानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की तुलना साइगॉन से कर रहे हैं.

    इस बीच ताज़ा मिली जानकारी के मुताबिक़ अफ़गानिस्तान में अमेरिका के वरिष्ठ राजनायिक रॉस विल्सन ने दूतावास छोड़ दिया है.

    एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि विल्सन को काबुल एयरपोर्ट पहुँचाया गया.

    दूतावास की इमारत पर लगा झंडा भी उतारकर एयरपोर्ट ले जाया गया है और बाद में इसे भी अफ़गानिस्तान से हटा लिया जाएगा.

  12. काबुल के कई हिस्सों में सुनी गई गोलियों की आवाज़: रिपोर्ट्स

    तालिबान के क़ब्ज़े में आने और अफ़गान राष्ट्रपति के देश छोड़ने के बाद वहाँ गोलियों की आवाज़ सुनी गई है.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ चश्मदीदों और गृह मंत्रालय के हवाले से बताया है कि काबुल के कई हिस्सों में गोलियों की आवाज़ सुनी गई.

    इससे पहले तालिबान ने एक अधिकारिक बयान जारी करके कहा था कि उनके लड़ाके शांति और सुरक्षा के मक़सद से काबुल में दाख़िल हो रहे हैं.

  13. ब्रेकिंग न्यूज़, अफ़गान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और उपराष्ट्रपति ने छोड़ा देश: रिपोर्ट्स

    अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और उपराष्ट्रपति अमीरुल्लाह सालेह ने देश छोड़ दिया है.

    इस बीच तालिबान के लड़ाके काबुल शहर के भीतर दाख़िल हो रहे हैं.

    तालिबान ने बीते दस दिनों में अफ़ग़ानिस्तान के अधिकतर बड़े शहरों पर नियंत्रण कर लिया था जिसके बाद राष्ट्रपति गनी पर इस्तीफ़ा देने का दबाव था.

    तालिबान का बयान- अब हमारे लड़ाके काबुल में घुस रहे हैं

    इसी बीच तालिबान ने एक बयान जारी कर कहा है कि उसके लड़ाके अधिकारिक तौर पर काबुल के इलाक़ों में दाख़िल हो रहे हैं और दफ्तरों के कब्ज़े ले रहे हैं.

    राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा था कि वो काबुल की सुरक्षा के लिए सैन्यबलों को संगठित कर रहे हैं और जो प्रगति बीते बीस साल में की गई है उसे गंवाएंगे नहीं.

    मगर इसके बाद बीती रात तालिबान ने बेहद तेज़ी से आगे बढ़ते हुए पहले तो उत्तर के गढ़ मज़ार-ए-शरीफ़ पर कब्ज़ा किया और फिर बिना किसी ख़ास प्रतिरोध के जलालाबाद और दूसरे शहरों को पर भी कब्ज़ा कर लिया.

    तालिबान ने अपनी ताक़त को इतना बढ़ा लिया कि राष्ट्रपति गनी के पास कोई विकल्प ही नहीं रहा.

    अमेरिका भी उनसे पद छोड़ने और अंतरिम प्रशासन नियुक्त करने के लिए कहा रहा था.

    शांति के लिए काबुल में घुस रहे हैं: तालिबान

    अधिकारिक तौर पर शहर में दाख़िल हो रहा तालिबान ने एक बयान जारी करके कहा है कि वह काबुल की शांति व्यवस्था बनए रखने के लिए अधिकारिक तौर पर काबुल में दाख़िल हो रहे हैं.

    काबुल के कई इलाक़ों में चोरी और लूटपाट की खबरों के बाद तालिबान ने कहा है कि उसके लड़ाके अराजक तत्वों को रोकने के लिए शहर में दाख़िल हो रहे हैं.

    तालिबान ने अपने लड़ाकों को निर्देश दिया है कि आम लोगों को परेशान न किया जाए और किसी के घर में दाख़िल न हुआ जाए.

    इससे पहले तालिबान ने कहा था कि वो काबुल के सभी लोगों के जान और माल की सुरक्षा की गारंटी लेते हैं.

    तालिबान ने ये भी कहा है कि जो लोग शहर छोड़कर जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दिया जाए.

  14. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए यूट्यूब पर

  15. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए फ़ेसबुक पर

  16. तालिबान प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा- हम अफ़गानिस्तान के लोगों के सेवक हैं

    तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने बीबीसी अफ़गानिस्तान में तालिबान किसी से बदला नहीं लेगा.

    बीबीसी संवाददाता यालदा हकीम से बातचीत में उन्होंने कहा, '’हम अफ़ग़ानिस्तान के लोगों, ख़ासकर काबुल के लोगों को ये भरोसा देना चाहते हैं कि उनकी जान और संपत्ति सुरक्षित है. किसी से भी बदला नहीं लिया जाएगा.'’

    शाहीन ने कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के सेवक हैं.

    उन्होंने कहा, “हमारे नेतृत्व ने हमारे लड़ाकों से कहा है कि वो काबुल के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता परिवर्तन का इंतज़ार करें. हम शांति से सत्ता चाहते हैं.”

    सुहैल शाहीन ने कहा कि तालिबान शासन की सरकार में अफ़ग़ानिस्तान के आम लोगों को भी हिस्सेदारी मिलेगी, यानी जो लोग तालिबान में शामिल नहीं हैं वो भी सरकार में शामिल होंगे.

  17. तालिबान के क़ब्ज़े के बीच अफ़गान छात्रों ने जताई जेएनयू कैंपस में लौटने की इच्छा

    अफ़गानिस्तान में तालिबान के क़ब्ज़े के बीच जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने बताया है कि कुछ अफ़गान छात्रों ने कैंपस में लौटने की इच्छा ज़ाहिर की है.

    बयान में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के ताज़ा सर्कुलर के तहत यूनिवर्सिटी अभी बंद है लेकिन इस मामले को देखा जा रहा है.

    दिल्ली स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं.

    ब्रिटेन सरकार ने रोकी अफ़गान छात्रों की स्कॉलरशिप

    इसी बीच ब्रिटेन सकार ने अफ़ग़ानिस्तान के छात्रों की स्कॉलरशिप रोक दी है.

    अगले महीने से ब्रिटेन में स्कॉलरशिप पर पढ़ने जा रहे छात्रों से कहा गया है कि अब उनका दाख़िला नहीं हो पाएगा.

    ब्रितानी सरकार की चेवनिंग स्कॉलरशिप के तहत दुनियाभर के प्रतिभाशाली छात्रों को ब्रिटेन आकर पढ़ने का मौका दिया जाता है.

    विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा हालात की वजह से वहाँ दूतावास समय पर एप्लीकेशन प्रोसेस नहीं कर पाएगा.

    ब्रिटेन सरकार के इस फ़ैसले से स्कॉलरशिप पाने वाले छात्रों को सदमा लगा है.

    एक छात्र ने बीबीसी से कहा, “मैं सो नहीं पा रहा हूं. जब हमें इस स्कॉलरशिप की सबसे ज़्यादा जरूरत थी, आप तब ही इसे छीन रहे हैं.”

  18. अफ़गानिस्तान में जारी संकट पर बोला पाकिस्तान

    पाकिस्तान का कहना है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के बदल रहे हालात पर नज़र रखे हुए है.

    यह बात अफ़ग़ानिस्तान के मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज़ चौधरी ने कही.

    उन्होंने कहा, “पाकिस्तान राजनीतिक समाधान के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा और हमें उम्मीद है कि अफ़ग़ानिस्तान में सभी पक्ष मिलकर इस आंतरिक मुद्दे को सुलझा लेंगे.”

    चौधरी के मुताबिक़ काबुल में पाकिस्तानी दूतावास सभी पाकिस्तानियों और मदद मांग रहे अफ़ग़ान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लोगों की मदद कर रहा है.

    उन्होंने कहा कि राजनयिक कर्मचारियों, यूएन एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के कर्मचारियों और पत्रकारों को वीज़ा देने के लिए पाकिस्तानी गृह मंत्रालय में एक विशेष सेल बनाया गया है.

  19. ब्रेकिंग न्यूज़, तालिबान ने कहा- हमने काबुल को चारों तरफ़ से घेर लिया है

    तालिबान का कहना है कि उन्होंने काबुल को चारों तरफ से घेर लिया है.

    अफ़ग़ानिस्तान के सभी प्रमुख शहरों का नियंत्रण लेने के बाद आज सुबह तालिबान ने काबुल की घेराबंदी करनी शुरू कर दी थी.

    तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा है कि लड़ाकों को जश्न में गोलीबारी नहीं करने दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अफ़ग़ान सैन्यबलों को उनके घरों को लौटने दिया जाएगा.

    तालिबान ने कहा है कि एयरपोर्ट और अस्पताल संचालित रहेंगे और इमरजेंसी आपूर्ति जारी रहेगी.

    विदेशी नागरिकों से कहा गया है कि अगर वो अपने देश लौटना चाहते हैं तो लौट सकते हैं और यदि अफ़ग़ानिस्तान में रहना है तो अपनी मौजूदगी तालिबान के समक्ष दर्ज करानी होगी.

    वहीं, अमेरिका ने अपने नागरिकों और कर्मचारियों को निकालने के लिए 5000 हज़ार सैनिक काबुल भेजे हैं.

  20. तालिबान का दावा- बगराम एयरबेस और जेल पर क़ब्ज़ा किया

    तालिबान का कहना है कि उन्होंने बगराम एयरफ़ील्ड और जेल को क़ब्ज़े में ले लिया है. ये काबुल के बाहरी इलाक़े में हैं.

    बगराम हवाई अड्डा बीते महीने तक अल-क़ायदा और तालिबान के ख़िलाफ़ लड़ाई का केंद्र था. अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने बीस साल चले युद्ध को यहीं से संचालित किया.

    बीते महीने अमेरिकी सैनिक रातों रात इस अड्डे को छोड़ गए थे.

    दिसंबर 2001 में अमेरिका के नेतृत्व में नेटो सैनिक काबुल पहुंचे थे. बगराम को एक विशाल हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया था जिसमें एक समय में दस हज़ार तक सैनिक रह सकते थे.

    जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप ने अपने-अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति रहते हुए बगराम अड्डे का दौरा किया था.

    बगराम अड्डे में बनी अमेरिकी जेल क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार के लिए कुख्यात हो गई थी. इसकी तुलना क्यूबा में अमेरिकी सेना की जेल ग्वांटेनामो से की जाती थी.

    इस जेल को अमेरिका ने बनाया था लेकिन साल 2013 में इसे अफ़ग़ानिस्तान को सौंप दिया गया था.